चक्रवात (Cyclone)

Submitted by Hindi on Mon, 02/01/2010 - 13:42
एक निम्न वायु दाब क्षेत्र जहाँ बाहर से हवाएं भीतर (केंद्र) की ओर चक्कर काटती हुई चलती हैं। ये हवाएं उत्तरी गोलार्द्ध में वामावर्त दिशा में (anticlock wise) और दक्षिणी गोलार्द्ध में दक्षिणावर्त दिशा में (clock wise) घूमती हुई चलती हैं। स्थिति के अनुसार चक्रवात दो प्रकार के होते हैं- उष्ण कटिबंधीय चक्रवात और शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवात। अयनवृत्तों (कर्क एवं मकर वृत्तों) के मध्य उष्ण कटिबंधीय चक्रवात उत्पन्न होते हैं जिनकी गति, आकार तथा मौसम संबंधी तत्वों में पर्याप्त अंतर मिलता है। सामान्यतः इनकी आकृति वृत्ताकार होती है जिसका व्यास 50 किमी. से 300 किमी. तक पाया जाता है। इनकी गति साधारण (30 से 40 किमी. प्रति घंटा) से लेकर प्रचंड (100 से 120 किमी. प्रति घंटा) तक होती है। उष्ण कटिबंधीय चक्रवात सागरों के ऊपर तीव्रगति से चलते हैं किन्तु स्थलीय भागों पर इनकी गति मंद हो जाती है। ये चक्रवात प्रायः ग्रीष्म काल में उत्पन्न होते हैं और अपनी प्रचंड गति एवं तूफानी प्रकृति के कारण अधिक विनाशकारी होते हैं। इन चक्रवातों से प्रायः तेज वर्षा होती है। शीतोष्ण कटिबंध (मध्य अक्षांशों) में उत्पन्न होने वाले चक्रवातों की आकृति गोलाकार, अंडाकार अथवा वेज के समान होती है जिन्हें सामान्यतः निम्नदाब (low), अवदाब (depression) अथवा द्रोणी (trough) कहा जाता है। इनकी उत्पत्ति दो विपरीत तापमान वाली वायुराशियों के मिलने से होती है। ये चक्रवात मध्य अक्षांशों (35 से 650अक्षांश) में दोनों गोलार्द्धों में पश्चिमी पवनों के प्रभाव में पश्चिम से पूर्व की ओर चलते हैं। ऐसे सामान्य चक्रवात का दीर्घव्यास लगभग 2000 किमी. और लघु व्यास 1000 किमी. होता है। इनकी औसत गति शीतकाल में 50 किमी. प्रतिघंटा और ग्रीष्मकाल में 30 किमी. प्रति घंटा पायी जाती है।

अन्य स्रोतों से

Cyclone in Hindi (चक्रवात)


एक लघु उष्णकटिबंधीय निम्नदाब-तंत्र, जिसका व्यास 80 से 400 किलोमीटर होता है, और जो विशेषतः अरब सागर तथा बंगाल की खाड़ी में 6 और 20 उत्तरी अक्षांशों के मध्य उत्पन्न होता है।

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