दलहन-आधारित फसल-चक्रों की उपज, आय एवं जलोपभोग पर विभिन्न सिंचाई जल-स्तरों का प्रभाव

Submitted by Hindi on Thu, 02/16/2012 - 12:48
Source
राष्ट्रीय जलविज्ञान संस्थान
दलहन-आधारित फसल-चक्रों की उपज, आय तथा जलोपभोग-क्षमता एवं दक्षता पर विभिन्न सिंचाई जल-स्तरों के प्रभाव का आंकलन करने हेतु, राजस्थान के उत्तर-पश्चिमी नहर-सिंचित क्षेत्र के कृषि अनुसंधान केंद्र (राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय) श्रीगंगानगर पर वर्ष 1986-87 से 1989-90 (चार वर्षों तक) एक प्रक्षेत्र के एक ही निश्चित स्थान पर परीक्षण किए गए। “स्पलीट प्लाट डिजाईन” पर बोये गए इस परीक्षण में 3 दलहन-आधारित फसल-चक्र मुख्य भाग में व 3 ग्रीष्मकालीन सिंचाईयों (खरीफ) उप-भाग एवं 3 शीतकालीन (रबी) सिंचाईयां उप भाग में तीन पुनरावृतियां ली गई। तीन दलहन-आधारित फसल-चक्रकों में मूंग-गेंहू, ग-सरसों तथा अरहर-गेहूं लिए गए। 3 ग्रीष्मकालीन सिंचाईयों के अंतर्गत मूंग (पूसा बैसाखी) में असिंचित, एक सिंचाई (वनस्पति बढ़वार पर) एवं दो सिंचाईयां (वनस्पतिक बढ़वार + फलियां बनते समय), अरहर (यू.पी.ए.एस.-120) के लिए सिंचाई में जल गहराई : कुल वाष्पीकरण का अनुपात (0.2,0.35 व 0.50) रखा गया तथा 3 शीतकालीन सिंचाईयों के अंतर्गत सरसों (वरुण) में एक (वनस्पतिक बढ़वार पर), दो (वनस्पतिक बढ़वार + फूल आते समय) व तीन (वनस्पतिक बढ़वार + फूल आते समय + फलियां बनते समय) एवं गेहूं के लिए तीन (शीर्ष जड़ बनते समय + गांठे पड़ना + दूधिया अवस्था), चार (शीर्ष जड़ बनते समय + कल्ले फूटने पर + बालें आने + दूधिया अवस्था पर) एवं छः सिंचाईयां (शीर्ष जड़ बनना + कल्ले फूटना + गांठे बनने + बालें आने + दूधिया अवस्था + पिष्ठी अवस्था) दी गई थी।

परीक्षण में ज्ञात हुआ कि खरीफ दलहन में प्रत्येक सिंचाई-जल-स्तर पर अरहर की उपज में वृद्धि हुई, पांच सिंचाईयों पर अधिकतम 1.55 टन उपज प्राप्त हुई। इसी प्रकार रबी में प्रत्येक सिंचाई-जल-स्तर पर मूंग-गेहूं फसल-चक्र में दूसरे फसल-चक्रों की अपेक्षा गेहूं की उपज अधिक प्राप्त हुई। जब प्रत्येक सिंचाई जल-स्रत पर सभी फसल-चक्रों की उपज को मूंग-तुल्यांक उपज में बदलकर आंकलन करने पर विदित हुआ कि मूंग-सरसों फसल चक्र से अधिकतम उपज प्राप्त हुई। मूंग-सरसों फसल-चक्र से 5 सिंचाईयों पर 2.51 टन/है. /वर्ष मूंग-तुल्यांक उपज प्राप्त हुई जो अरहर-गेहूं-गेहूं की 11 सिंचाईयों (2.32 टन/है. /वर्ष) तथा मूंग-गेहूं की 8 सिंचाईयों से प्राप्त उपज (1.73 टन/है./वर्ष) से अधिक थी।

आर्थिक विश्लेषण से ज्ञात हुआ कि अधिकतम 5 सिंचाईयां देने पर मूंग-सरसों फसल-चक्र से अधिक शुद्ध आय, रुपए 14547/है./वर्ष प्राप्त हुई जो कि अन्य दोनों फसल-चक्रों से प्राप्त वार्षिक शुद्ध आय से प्रभावी रूप पर अधिक है तथा इससे 3 से 6 सिंचाईयों के जल की बचत भी हुई। इसके अतिरिक्त मूंग-सरसों फसल-चक्र अपनाने से न्यूनतम जलोपभोग (513 मी.मी.), अधिकतम जलोपभोग-दक्षता उपज के रूप में (4.15 किग्रा./है./मी.मी.), आय के रूप में (रुपए 22.51/है./मी.मी.) तथा अधिकतम लाभ उत्पादन लागत मूल्य अनुपात (2.10 रुपए) प्राप्त हुए जो अन्य दोनों फसल चक्रों से अधिक थे। अधिकतम जलोपभोग 738 मी.मी. अरहर-गेहूं में तथा न्यूनतम जलोपभोग-दक्षता मूंग-गेहूं (2.33 किग्रा./है./मी.मी.) से प्राप्त हुई।

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