धार में धरती की रगों तक पहुँच रहा बारिश का पानी

Submitted by UrbanWater on Mon, 08/17/2020 - 14:07
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पुष्पेंद्र वैद्य

हज़ारों-हज़ार जल सरंचनाओं और दो नदियों के पुनर्जीवन से खरबों लीटर पानी ज़मीन में उतरने की कवायद की गई है। मध्यप्रदेश के धार जिले में मनरेगा में  रोज़गार के ज़रिए जल संवर्धन और रुरल टूरिज़्म की नयी इबारत रची जा रही है। जिला प्रशासन ने फैसला किया कि इस बार बारिश की रजत बूंदों को सहेज कर जमीन की नीली नसों में उतारेंगे, नदियों को फिर से ज़िंदा किया जाए, मिट्टी के कटाव को रोक कर बारिश के पानी का बेहतर प्रबंधन किया जाए, पौधरोपण से नए  जंगल खड़े कर जंगलों को सुंदर और सुविधा से लैस कर ग्रामीण पर्यटन को विकसित किया जाए। 

इसके लिए गर्मियों के दिनों में 1336 हेक्टेयर की 167 बंजर पहाडियों को छह लाख मज़दूरों ने अपनी हाड़-तोड़ मेहनत से हरा-भरा बनाने का अभियान शुरु किया। एक लाख 57 हजार पौधे लगाए गए हैं। इसी साल पाँच लाख पौधे लगाने का लक्ष्य है। चार हजार 270 काम अभी चल रहे हैं। मिट्टी का कटाव रोकने हेतु बोल्डर वाल,कंटूर ट्रेंचेस और बोल्डर चेक डेम बनाए गए। गंगा महादेव, टवलाई, कुंडा और तारा पहाड़ियों पर हजारों जल सरंचनाओं आरएमएस, नाला ट्रेंचिंग, बोल्डर वाल, पिचिंग वर्क, कन्टिन्यूअस कंटूर ट्रेंच, केटल प्रोटेक्शन ट्रेंच, भू-संकन पोंड और पौधारोपण से बारिश के पानी को सहेजने की कोशिश हुई है। इससे जल-स्तर सुधरने के साथ ही पर्यावरण भी समृद्ध होगा। 

दो नदियों खुज और उरी को सदानीरा बनाने के लिए केचमेंट एरिया में कई काम हुए हैं। नदी में मिलने वाले नालों पर ट्रेंचिंग और बोल्डर चेक्स बनाए हैं। खुज नदी को 42 किलोमीटर और उरी नदी को 52 किलोमीटर की लंबाई के केचमेंट एरिया को ट्रीट कर फिर से ज़िन्दा किया गया है। इससे 7 विकासखंडों की 97 पंचायतों के 162 गाँवों को फायदा मिलेगा और नदी कल-कल, छल-छल बहती रहेगी।  

यहाँ जल, जंगल और जमीन की मनोहारी छटा के बीच अब रुरल टूरिज्म की कल्पना साकार हो रही है। माही नदी के डेम के बीच बने आईलैंड्स पर जापान की मियांबाकी तकनीक के ज़रिये अब जंगल खड़े किए जा रहे हैं। आईलैंड पर कॉटेजेस भी होंगे। एक से दूसरे आईलैंड पर जाने के लिए सर्किट बनेगा। यहां ज़िप लाईन, हॉट एयर बलून और वाटर स्पोर्ट्स जैसी एक्टिविटी भी होंगी। यह जगह कुछ दिनों में किसी विदेशी पर्यटन स्थल की तरह प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर होगी। 

इससे एक तरफ़ लॉकडाउन के दौरान हजारों मजदूरों की रोजी-रोटी का इंतजाम भी हो गया और दूसरी तरफ़ यह अद्भुत नज़ारा भी निखर आया। यह नजारा अब किसी लैंडस्केप की तरह दिखाई देने लगा है। कुछ महीनों पहले तक यहां पत्थरों के सिवा कुछ नहीं था। आज हर तरफ पेड़-पौधों की टहनियाँ हवा के झोंकों पर मंद-मंद झूलते हुए कैसे ख़ुशी के गीत गुनगुना रही हैं देखिये इस वीडियो में-

धार जिले के इस काम पर यह फिल्म मध्यप्रदेश के प्रतिष्ठित प्रोडक्शन हाउस ‘द टेलीप्रिंटर’ ने तैयार की है। ‘द टेलीप्रिंटर’ सरकारी एंव ग़ैर सरकारी संगठनों के लिए किफ़ायती दाम पर बेहतर गुणवत्ता वाली शॉर्ट फ़िल्म और डॉक्यूमेंट्री तैयार करता है। आप इस नंबर पर संपर्क कर सकते हैं- 9425049501 

 

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