दुनिया भर की नदियाँ

Submitted by UrbanWater on Tue, 06/30/2020 - 07:47
Source
जल चेतना, खण्ड 7, अंक 1, जनवरी 2018, जलविज्ञान संस्थान, रुड़की

अमेजन नदी, फोटो: needpix.comअमेजन नदी, फोटो: needpix.com

संसार का सबसे बड़ा नदी पात्र भी अमेजन नदी का है। इसका जल क्षेत्र 7045000 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। इसकी लगभग 15000 सहायक और उपसहायक नदियां हैं। उनमें 4 नदियां 1609 किलोमीटर से भी अधिक लंबी हैं। उन्हीं में से मेडिरा नामक सहायक नदी विश्व की सबसे लंबी सहायक नदी है जिसकी लंबाई 3380 किलोमीटर है।

नदियां तो हर देश में होती हैं, लेकिन इनके बारे में कितना कुछ जानते हैं आप? नदी को अंग्रेजी में रीवर कहते हैं। इस शब्द की उत्पति लैटिन भाषा के रिया शब्द से हुई  है, जिसका अर्थ है किनारा। पुराने जमाने में पानी की उस धारा को जिनके किनारे होते थे, रीवर कहा जाता था। लेकिन आधुनिक परिभाषा के अनुसार, पानी की बहती विशाल धाराओं को, जिनके किनारे बदलते रहे हैं, नदी कहा जाता है।

क्या आप जानते हैं कि धरती पर नदियों का जन्म कैसे हुआ? दरअसल, सृष्टि के आरम्भिक काल में जब धरती पर पहाडों और समुदेरों का निर्माण हो चुका था, तब लगातार वर्षा होती रहती थी। वर्षा का यह पानी पहाड़ों पर से टेड़े-मेड़े रास्तों से गुजरता हुआ समुद्र में जा मिलता था। लगातार बहते पानी के कारण ये रास्ते गहरे और चौड़े होते चले गए। पानी की धारा के कारण इनका रूप परिवर्तित होता गया। इन्हीं धाराओं को नदी का नाम दिया गया। समय के साथ नदियों का स्वरूप भी बदलता गया। वैसे अधिकांश नदियां पहाड़ों से ही निकलती हैं, कुछ का जन्म पहाड़ों पर जमी बर्फ से पिघलने के कारण भी होता है। पहाड़ों पर जमी बर्फ से बने ग्लेशियर के खिसकने के कारण भी नदी बन जाती है। इसके अलावा, झरने और झीलों से भी नदियों का जन्म होता है। 

क्या आप विश्व की सबसे लंबी नदी के बारे में जानते हैं? कुछ ‘अमेज़न’ को और कुछ ‘नील’ को सबसे लंबी नदी मानते हैं। वास्तव में इनमें कौन सी अधिक लंबी है, का फैसला केवल नापने से नहीं हो सकता है, बल्कि परिभाषा से हो सकता है।

यदि नदी का मुख भी जोड़ा जाए तो अमेज़न को ही सबसे लंबी नदी के रूप में मान्यता मिली है। अमेज़न नदी को सबसे पहले 1499 में बिसेंट यानेज पिंजोन ने खोजा। यह व्यक्ति कोलंबस की महान यात्रा में उसके जहाज का एक नाविक था। पिंजोन समुद्री किनारे से दूर तैरता हुआ आंखों से ओझल हो गया। उसने महसूस किया कि वह ताजे पानी में तैर रहा है। पता करने के लिए वह किनारे की तरफ बढ़ा और तब उसे पता चला कि वह एक विशाल नदी के मुहाने पर खड़ा है।

इसका मूल  स्रोत ‘हुआरको’ नामक धारा है। यह धारा पेरू के 5400 मीटर ऊँचे मिसयूई ग्लेशियर से निकलती है। जैसे-जैसे यह धारा आगे बढ़ती है वैसे-वैसे इसके नाम बदलते जाते हैं। अंत में यह अमेज़न की सहायक नदी आकायाली से मिल जाती है। अमेज़न दक्षिणी अटलांटिक में गिरती है। दक्षिण अटलांटिक; इसकी लंबाई 6447 किलोमीटर नापी गई है।

संसार का सबसे बड़ा नदी पात्र भी अमेज़न नदी का है। इसका जल क्षेत्र 7045000 वर्ग  किलोमीटर में फैला हुआ है। इसकी लगभग 15000 सहायक और उपसहायक नदियां है। उनमें 4 नदियां 1609 किलोमीटर से भी अधिक लंबी हैं। उन्हीं में से मेडिरा नामक सहायक नदी विश्व की सबसे लंबी सहायक नदी है जिसकी लंबाई 3380 किलोमीटर है। 

अमेज़न, दुनिया की सबसे बड़ी नदी

1971 में लारेन मैकलिनटायर ने दक्षिण पेरू के हिमाच्छादित एंडीज में अमेज़न के सही स्रोत का पता लगाया। यह हिमाच्छादित झीलों तथा नालों से आरम्भ होती है। सही स्रोत का नाम लागुना मैकलिन टायर रखा गया है जो अभिमुुख होकर गहरे कैनियान में प्रचंड धारा अपुरिमाक बनाती हैं। यह अन्य धाराओं के साथ मिलकर इने, टाम्बो और तब उकेचती बन जाती है। पेरू में इक्वीटोस से ऊपर, उकेयली और मैरेनोन के संगम से इसका नाम अमेज़न पड़ गया। वहां से 3700 किलोमीटर पूर्व की ओर ब्राजील होकर बहते हुए यह अटलांटिक महासागर में चली जाती है।

अमेज़न के कई मुख हैं जो सागर तक जाते-जाते चौड़े हो जाते हैं जिससे नदी के खत्म होने का स्थान अनिश्चित हो जाता है। अगर बाहरी मुख (सबसे दूर का) को गिना जाए तो इसकी लंबाई करीब 6750 किलोमीटर है। विश्व की सभी नदियों की तुलना में अमेज़न नदी का प्रवाह सबसे तेज है। इससे औसतन 120000 घनमीटर जल प्रति सेकंड अटलांटिक महासागर में पहुँचता है। बाढ़ के दौरान यह प्रवाह 200000 घन मीटर तक पहुंच जाता है।

1450 किलोमीटर की निचली अमेजन की औसत गहराई 17 मीटर है जबकि कुछ स्थानों पर यह नदी 90 मीटर गहरी है। अमेजन का बहाव नील नदी से 60 गुना ज्यादा है। अमेजन नदी की सबसे बड़ी ख़ासियत यह है कि इसकी जितनी भी सहायक नदियां हैं, उन सभी के पानी का रंग अलग-अलग है। मूल स्रोत से जब पानी चलता है तो उसका रंग सफेद या गंदा पीला होता है। एंडीज में से बहने वाली सभी सहायक नदियों के पानी का रंग यही होता है जबकि इसकी सहायक नदियों के पानी का रंग जो उत्तरी पश्चिमी ब्राजील या वेनेजुएला से प्रारंभ होती है, काला होता है। आमतौर पर अमेज़न नदी में वर्ष में एक बार बाढ़ आती ही है। ऐसे में नदी के मध्यम और निचले हिस्से में पानी का स्तर 30 से 60 फुट तक बढ़ जाता है।

अमेज़न की गहराई इतनी है कि उसमें समुद्र से चलने वाले जहाज चल सकते हैं। ये ऊपर की तरफ मैनाॅस तक और नीचे इक्विटोज तक आ-जा सकते हैं। नदी में चलने वाले स्टीमर तो इनकी सहायक नदियों के तट में चल सकते हैं। जहां तक ‘नील’ नदी का प्रश्न है, इसके जल-मार्ग की कुल लंबाई 6670 किलोमीटर नापी गई है। यह भूमध्य सागर में गिरती है।

ज़मीन के नीचे बहने वाली नदियां

धरती के ऊपर बहने वाली नदियां तो हमें दिखाई देती हैं लेकिन कुछ नदियां ज़मीन के नीचे भी बहती हैं। कुछ नदियां ज़मीन के अंदर बहुत लंबी दूरी तक बहती हैं। कुछ ऐसी भी हैं जो कुछ दूरी तक ज़मीन के नीचे बहकर ज़मीन के ऊपर आ जाती है।

फ्रांस की रोन नदी ऐसी ही है। इंग्लैंड के सोमरसेंट नामक स्थान पर ज़मीन के नीचे बहने वाली नदी विश्वविख्यात है। आपने गुप्त नदी के बारे में तो सुना होगा, लेकिन जानते हैं यह कहां है और इसका पता कैसे चला?

अगस्त 1958 में रेडियो आईसोटोपो की सहायता से नील नदी के नीचे बहने वाली एक गुप्त नदी की खोज की गई। इसमें बहते पानी के वार्षिक प्रवाह की मात्रा नील नदी से 6 गुना अधिक है।

क्या आप अंतः सागर नदी के बारे में जानते हैं? 1952 में प्रशांत महासागर में 90 मीटर की गहराई से क्रोमवेल नामक धारा की खोज की गई। यह धारा 5625 किलोमीटर लंबी तथा 400 किलोमीटर चौड़ी थी। यह भूमध्य रेखा के साथ पूर्व की दिशा में बहती है। इसके पानी का आयतन मिसीसिपी नदी से लगभग 1000 गुना है।

गंगा, भारत की जीवनरेखा

गंगा, भारत की सबसे प्रसिद्ध और पवित्र नदी है। यह हिमालय पर्वत से निकलती है तथा बंगाल की खाड़ी में जाकर गिरती है। इसकी लंबाई 2500 किलोमीटर से भी अधिक है। हिमालय से निकलकर यह ऋषीकेश में आती है और वहां से हरिद्वार के मैदान में आ जाती है। लंबाई की दृष्टि से विश्व में गंगा का स्थान 39वां तथा एशिया में 15वां हैं। बनारस सबसे पवित्र तीर्थ माना जाता है, जहां अनेक घाट हैं। इस नदी से बहुत सी नहरें निकाली गई हैं जिनका पानी खेतों की सिंचाई के काम आता है। यह पवित्र नदी आज प्रदूषण का शिकार है।

विश्व की प्रमुख नदियों में सेपिक नदी का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। यह पापुआ न्यू गिनी के केंद्रीय हाइलैंड्स में विक्टर एमानुएल रेंज में निकलती है। सेपिक न्यू गिनी के द्वीप पर सबसे लंबी नदी है। नदी की कुल लंबाई 1126 किलोमीटर है।

मिसिसिपी नदी 3730 किलोमीटर लंबी है। संयुक्त राज्य अमेरिका और उत्तरी अमेरिका में यह सबसे बड़ी नदी प्रणाली है। यह झील इटसाका पर निकलती है और मैक्सिको की खाड़ी में न्यू ऑरिलियंस के नीचे समाहित हो जाती है।

रूस की सबसे महत्वपूर्ण नदियों में प्रमुख है वोल्गा नदी। यह उत्तर पश्चिम मास्को के वल्दाय हिल्स में मात्र 225 मीटर की ऊंचाई पर निकलती है और केस्पिनयन सागर में आगे 3645 किलोमीटर तक जाती है।

अफ्रीका की प्रमुख नदी है जम्बेजी

अफ्रीका की प्रमुख नदी है जम्बेजी। नदी के उत्तर पश्चिम जाम्बिया में एक काले रंग की आर्द्र-भूमि और फिर नामीबिया, वाेत्सवाना, जाम्बिया की सीमाओं के साथ अंगोला के मध्य से बहती है तथा ज़िम्बाब्वे हिन्द महासागर में गिरती है।

चीन के चुन्नान प्रांत से निकली मेकांग नदी की कुल लंबाई  4350 किलोमीटर है। डेन्यूब यूरोप में महत्वपूर्ण और महाद्वीप की दूसरी बड़ी नदी है। यह 10 यूरोपीय देशों की सीमा को छूती है। यह जर्मनी में काले वन में निकलती है तथा कालासागर में गिरती है। यह 2850 किलोमीटर लंबी है।

यंगजी नदी चीन की सबसे बड़ी नदी है। इसकी लंबाई  6300 किलोमीटर है। यह तिब्बती पठार के पूर्वी भाग पर पड़ी एक ग्लेशियर से निकलती है। इसका प्राकृतिक सौंदर्य देखते ही बनता है।

भारत की नदियाँ 

भारत नदियों का देश है, जहां छोटी-बड़ी अनेक नदियां हैं। इन नदियों की महत्ता इसी से सिद्ध होती है कि देश के प्रमुख नगर इन्हीं नदियों के किनारे बसे हुए हैं। भारत की नदियों को तीन प्रमुख भागों में रखा जा सकता है-हिमालय की नदियां, प्रायद्वीपीय नदियां और तटीय नदियां।

उत्तर भारत की नदियों में सिंधु नदी का स्थान सर्वोपरि है। लद्दाख श्रेणी के उत्तरी भाग में कैलाश चोटी के दूसरी ओर पांच हजार मीटर की ऊंचाई से निकलती है यह नदी। इस नदी की कुल लंबाई 2880 किलोमीटर है। इसकी सहायक नदियां हैं सतलुज, व्यास, झेलम, चिनाव एवं रावी। सिंधु क्षेत्र की नदियां नंगा पर्वत के निकट से गहरा मोड़ बनाती हुई पाकिस्तान में प्रवेश करती हैं भारत में यह 709 किलोमीटर की लंबाई में बहती है।

सिंधु नदी जो कि विश्व की महान नदियों में से एक है, तिब्बत में मानसरोवर के निकट से निकलती है और भारत से होकर बहती है। तत्पश्चात् पाकिस्तान से होकर अंततः कराची के निकट अरबसागर में मिल जाती है।

सतलुज नदी कैलाश पर्वत के दक्षिणी ढालों पर मानसरोवर झील के निकट पांच हजार मीटर की ऊंचाई से राक्षसताल से निकलती है। कपूरथला के दक्षिणी पश्चिमी सिरे पर यह व्यास से मिल जाती है और मिथनकोट के निकट सिंधु से। भारत में यह नदी 1050 किलोमीटर की लंबाई में बहती है।

झेलम नदी कश्मीर में शेषनाग से शुरू होकर उत्तर पश्चिम दिशा में 112 किलोमीटर तक बहती हुई वूलर झील में मिल जाती है। संपूर्ण नदी की लंबाई 4 हजार किलोमीटर है। जहां तक चिनाव नदी का प्रश्न है, यह सिंधु की सहायक नदी है। भारत में यह 1180 किलोमीटर बहती है। रावी नदी की लंबाई  725 किलोमीटर है। इसी प्रकार व्यास नदी 470 किलोमीटर लंबी है। 

यमुना नदी का उद्गम ग्लेशियर में है। नदी की लंबाई 1385 किलोमीटर है। यह घुमावदार मार्ग से होकर चलती है। रामगंगा नदी गढ़वाल के पूर्वी भाग में नैनीताल के निकट से निकलती है। इसकी लंबाई 600 किलोमीटर है। घाघरा नदी मापचा चूंगों हिमनद से निकलती है। यह छापरा के निकट गंगा में मिल जाती है। काली नदी कुमाऊँ के उत्तर पूर्वी भाग में मिलान हिमनद से निकलती है।

प्रायद्वीपीय भारतीय नदियों में बंगाल की खाड़ी में गिरने वाली नदियां मुख्य हैं। इसमें पहला स्थान है महानदी का जो कि 858 किलोमीटर लंबी है। यह मध्यप्रदेश में अमरकंटक के दक्षिण में सिहावा से निकलकर पूर्व व दक्षिण पूर्व की ओर बहती है।

दक्षिणी पठार की सबसे बड़ी नदी गोदावरी है जो कि महाराष्ट्र में त्रयंबक नामक गांव से 1067 मीटर की ऊंचाई से निकलती है। इसकी संपूर्ण लंबाई 1465 किलोमीटर है। 

महाबालेश्वर के निकट पश्चिम घाट से 1337 मीटर की ऊंचाई से निकलती है कृष्णा नदी। 1400 किलोमीटर लंबी यह नदी समुद्र में जाकर गिरती है। पिनाकिनी नदी कर्नाटक में नंददुर्ग पहाड़ी से निकलकर बंगाल की खाड़ी में गिरती है। इसकी लंबाई 970 किलोमीटर है।

कावेरी नदी कुर्ग में 1341 मीटर ऊंचाई से निकलती है जो कि 805 किलोमीटर में बहती है। इसे दक्षिणी गंगा भी कहा जाता है।

तुंगभद्रा तुंगा और भद्रा नदियों के मिलने से बनी है। यह कृष्णा नदी की प्रमुख सहायक नदी है। अरब सागर में गिरने वाली भारतीय नदियों में प्रमुख नदी है नर्मदा-विंध्याचल पर्वत श्रेणियों की मैकाल पर्वतमाला से अमरकंटक से निकलकर खम्भात की खाड़ी में गिरती है। यह देश की पांचवीं बड़ी नदी है। यह देश की प्राचीनतम नदियों में से है। यह नदी 1312 किलोमीटर लंबी है।

जबलपुर के समीप यह नदी यहां मैदानी भाग में प्रवेश करती है और दक्षिण की ओर मुड़ जाती है। आगे 2-3 किलोमीटर तक संगमरमर की चट्टान को काटकर बनाई गई कंदरा है। इस कंदरा में जबलपुर जिले में धुआंधार प्रपात बनाती है। यह मध्यप्रदेश की अधिकांश नदियों के विपरीत पूरब से पश्चिम दिशा में बहती है।

पठार से निकलने वाली गंगाक्रम की नदियों में मुख्य है चम्बल नदी। यह मध्यप्रदेश में जानापाव पहाड़ी से निकलती है जो समुद्र तल से 616 मीटर ऊंची है। इसकी सहायक नदियां हैं कालीसिंध, सिवान, पार्वती और बनास। चंबल नदी की कुल लंबाई 965 किलोमीटर है।

चंबल बहुमुखी योजना के अंतर्गत गांधीसागर, राणा प्रताप सागर एवं पूर्वोत्तर में बहने वाली प्रसिद्ध नदी ब्रह्मपुत्र का दृश्य कोटा बांध बनाए गए हैं, जिससे जल विद्युत एवं सिंचाई की सुविधा उपलब्ध हुई है।

बेतवा नदी मध्यप्रदेश के भोपाल से निकलती है और अंत में हमीरपुर के निकट यमुना में मिल जाती है। इसकी कुल लंबाई 480 किलोमीटर है। सोन नदी अमरकंटक की पहाड़ियों में से निकलती है। नदी की संपूर्ण लंबाई 780 किलोमीटर है। इसी प्रकार, विंध्याचल पर्वत से निकली केन नदी भी यमुना नदी में मिल जाती है।

कालीसिंध भी मध्यप्रदेश के बागली के निकट विंध्याचल से निकलकर राजस्थान में चंबल में मिल जाती है। 

जहां तक ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र का प्रश्न है, उसमें ब्रह्मपुत्र सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। यह तिब्बत में कैलाश पर्वत की मानसरोवर झील से 80 किलोमीटर पूर्व की ओर 5150 मीटर की ऊँचाई से निकलती है। इसकी संपूर्ण  लंबाई  2900 किलोमीटर है जिसमें से भारत में यह 1346 किलोमीटर तक फैली हुई है।

हिमालय से निकलने वाली नदियां बर्फ और ग्लेशियरों के पिघलने से बनी हैं, इसलिए इनमें वर्षभर निरंतर पानी बना रहता है। मानसून माह के दौरान हिमालय क्षेत्र में बहुत अधिक वृष्टि होती है और नदियां वर्षा पर निर्भर हैं, अतः इसके आयतन में उतार-चढ़ाव होता है। इनमें से कई अस्थाई होती हैं।

राजमहल की पहाड़ियों के नीचे भागीरथी नदी जो प्राचीनकाल में मुख्य नदी हुआ करती थी, निकलती है, जबकि पद्मा पूरब की ओर बहती है तथा बांग्लादेश में प्रवेश करती है। राजस्थान में कुछ नदियां ऐसी भी हैं जो समुद्र में नहीं मिलती। वे खारे पानी की झीलों में मिल जाती हैं और रेत में समाप्त हो जाती हैं। 

जिसकी समुद्र में कोई निकासी नहीं होती। इसके अलावा, कुछ मरूस्थलीय नदियां भी होती हैं, जो कुछ दूरी तक बहती हैं और मरूस्थल में लुप्त हो जाती हैं। ऐसी नदियों में लूनी और मच्छ, स्पेन, सरस्वती, बनास और घग्गर जैसी नदियां शामिल हैं। 

तापी नदी मध्यप्रदेश के मुल्ताई के पास सतपुड़ा के दक्षिण में 762 मीटर ऊँचाई  से निकलती है और खम्भात की खाड़ी में गिरती है। यह 724 किलोमीटर लंबी है। माही नदी दक्षिण अरावली में जयसमंद झील से निकलती है। इसकी संपूर्ण लंबाई 560 किलोमीटर है। यह भी खम्भात की खाड़ी में गिरती है।

(डाॅ. विनोद गुप्ता, 43/2 सुदामा नगर, रामटेकरी, मन्दसौर (म.प्र.) 458001, मो.नं. 9826042811, ईमेलः anucomputer@rediffmail.com)

 

 

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