गंगाकोशः आधुनिक तकनीक द्वारा गंगा नदी से सम्बंधित सूचनाओं का प्रचार एवं प्रसार

Submitted by HindiWater on Fri, 01/17/2020 - 12:47
Source
राष्ट्रीय जलविज्ञान संस्थान, रुड़की और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, दिल्ली

सारांश

गंगा नदी, भारतवर्ष की एक प्रमुख एवं पवित्रतम नदी है। गंगा नदी एवं उसकी सहायक नदियों से सम्बंधित उपयोगी जानकारियाँ उदाहरणतः बेसिन का जलविज्ञान, जल उपलब्धता, जल उपयोग, पर्यावरणीय प्रवाह, जल गुणवत्ता, जलीय और स्थलीय वनस्पतियों, जीवों, प्राकृतिक संसाधनों, पारिस्थितिक विशेषताओं आदि विषयों के साथ-साथ बेसिन के अंतर्गत भूमि उपयोग, भू-आच्छादन, वन्य जीवन, जनसांख्यिकी और सामाजिक-आर्थिक स्थिति आदि की विशिष्ट सूचनाएं पुस्तकों, लेखों, वेबसाइटों, वीडियो आदि के रूप में उपलब्ध हैं परन्तु इन जानकारियों के किसी एक विशिष्ट स्वरुप में उपलब्ध न होने के कारण विभिन्न अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों में प्रयोग हेतु उनको प्राप्त करने में विभिन्न समस्याओं का सामना करना पड़ता है, अतः यह आवश्यक है कि उपलब्ध सूचनाओं का संकलन एक स्थान पर करके उसे जनमानस के उपयोग हेतु सरल स्वरुप में प्रस्तुत किया जाए।

विगत वर्षों से, देश में विभिन्न विषयों के प्रचार एवं प्रसार हेतु कई वेब आधारित सूचना तंत्र विकसित किए जा रहे हैं। ये सूचना तंत्र उपलब्ध सूचना प्रणाली को जनमानस तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका प्रदान करते हैं परिणामस्वरुप जनमानस द्वारा ये वेब आधारित सूचना तंत्र स्वीकारणीय सिद्ध हुए हैं। इसी क्रम में गंगा बेसिन में उपलब्ध बहुआयामी सूचनाओं को जनमानस को उपलब्ध कराने हेतु राष्ट्रीय जलविज्ञान संस्थान, रुड़की द्वारा गंगाकोश नामक एक वेब-आधारित सूचना तंत्र विकसित किया गया है, जिसके द्वारा गंगा नदी से सम्बंधित विभिन्न प्रकार की उपलब्ध सूचनाओं को जनमानस तक पहुंचाने का एक प्रयास किया गया है। यह विश्वास है कि यह सूचना तंत्र, इस क्षेत्र में कार्यरत अभियंताओं, वैज्ञानिकों, स्वयंसेवी संगठनों आदि के लिए उपयोगी सिद्ध होगा।

Abstract

The Ganga is the most sacred as well as one of the most exploited rivers of India. There is a plethora of information available on the river Ganga in the form of books, logs, articles, websites, videos etc. The information includes a vast array of topics including hydrology, tributaries, water uses, and environmental features such as river water quality, aquatic and terrestrial flora/fauna, natural resources, ecological characteristics, sensitive environmental components and more. With such a vast geographical extent with varied climate, land use land cover, wildlife, demography and socio-economic situation in the entire Ganga Basin, tapping information for resource planning, R&D activities is a herculen task as most of the information about this famous river is in a scattered form and reproduced from unverified sources.

Over the years, portals have become popular in the information system community. A number of web portals on various themes are being developed in the country. Recognizing the multi-dimensional information in the Ganga basin, ‘Gangakosh’ is a step in this direction to develop a web-based information portal where variety of information on Ganga basin are being uploaded and maintained at National Institute of Hydrology, Roorkee. It is believed that Gangakosh web portal will be beneficial for Engineers, Scientists and NGO’s working in water sector.

Key words: Ganga, Portal, Web

1.0 प्रस्तावना

गंगा नदी, जो भारत के लगभग एक तिहाई भौगोलिक क्षेत्र को सिंचित करती है, देश की एक प्रमुख एवं पवित्रतम नदी है। गंगा नदी को जनमानस द्वारा गंगा माता या गंगा जी जैसे सम्मानीय नामों से जाना जाता है। गंगा नदी के अन्य पर्याय विष्णुपदी, देवनदी, सुरसरी, त्रिपथगा, जहानवी, भागीरथी, इत्यादि हैं। गंगा नदी की प्रमुख सहायक नदियों में यमुना, रामगंगा, सोन, घाघरा, गोमती, टोंस, कोसी, गंडक, महानंदा इत्यादि प्रमुख हैं।

गंगा नदी का आवाह क्षेत्र भारत, नेपाल, तिब्बत, एवं बांग्लादेश में स्थित है। इसका उष्म समुद्र तल से 7,010 मीटर की ऊंचाई पर स्थित गंगोत्री हिमनद के निकट उत्तरी अक्षांश 22030’ से 31030’ तथा पूर्वी देशांतर 73030’ से 89000’ पर गौमुख नामक स्थल पर से होता है । यहाँ पर गंगा नदी को भागीरथी के नाम से जाना जाता है। देवप्रयाग में भागीरथी में अलकनंदा नदी के मिलने के पश्चात यह नदी गंगा नदी के नाम से जानी जाती है। गंगा नदी का कुल क्षेत्रफल 1,086,000 वर्ग किलोमीटर है तथा वार्षिक निस्सरण 16,650 घनमीटर/सेकंड तथा सतही जल संभाव्य 525 बिलियन घन मीटर है। गंगा नदी पर निर्मित जल संसाधन परियोजनाओं में गंगा नहर तंत्र, यमुना नहर तंत्र, टिहरी बांध, लखवार बांध, तपोवन विष्णुगाढ़ परियोजना, रामगंगा बहूद्देशीय परियोजना, रिहंद बांध, जमरानी बहूद्देशीय परियोजना, राजघाट परियोजना, हलाली बांध, गांधीसागर बांध, राणा प्रताप सागर बांध, चंबल घाटी परिय¨जना, ओबरा बांध, रामसागर बांध, माताटीला बांध, पार्बती बांध इत्यादि प्रमुख हैं।

गंगा नदी बेसिन का वृहित भौगोलिक क्षेत्रफल, परिवर्तनीय जलवायु, जल विज्ञान, जल उपलब्धता, जल उपयोग, पर्यावरणीय प्रवाह, जल गुणवत्ता, जलीय और स्थलीय वनस्पतियों, जीवों, प्राकृतिक संसाधनों, पारिस्थितिक विशेषताओं, संवेदनशील पर्यावरणीय घटकों पर की जाने वाले अनुसंधानीय गतिविधियाँ गंगा बेसिन के विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका प्रदान करती हैं। गंगा बेसिन के उपयुक्त प्रबंधन के लिए क्षेत्र में होने वाले विभिन्न अनुसंधान एवं विकास कार्यों की नवीनतम जानकारियों की उपलब्धता आवश्यक है। राज्य एवं केंद्र सरकार के अंतर्गत आने वाले विभिन्न संस्थानों एवं विभिन्न गैर-शासकीय संस्थाओं के द्वारा गंगा नदी बेसिन से सम्बंधित वृहित जानकारियों का एकत्रीकरण एवं संकलन किया जा रहा है। गंगा नदी बेसिन से सम्बंधित भूमि उपयोग, भू-आच्छादन, वन्य जीवन, जनसांख्यिकी और सामाजिक-आर्थिक स्थिति से सम्बंधित विभिन्न सूचनाएं भिन्न-भिन्न पुस्तकों, लेखों, वेबसाइटों, वीडियो आदि स्वरूपों में उपलब्ध है। तथापि गंगा बेसिन से सम्बंधित इस वृहित जानकारी की उपलब्धता का संकलन किसी एक विशिष्ट स्वरुप में न होने के कारण विभिन्न अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों में प्रयोग की आवश्यकता हेतु आवश्यक सूचनाएं उपलब्ध होने के पश्चात भी उनको प्राप्त करने में विभिन्न समस्याओं का सामना करना पड़ता है, अतः यह आवश्यक है कि उपलब्ध सूचनाओं का संकलन एक स्थान पर करके उसे जनमानस के उपयोग हेतु सरल स्वरुप में प्रस्तुत किया जाए।

विगत वर्षों से, देश में विभिन्न विषयों के प्रचार एवं प्रसार हेतु कई वेब आधारित सूचना तंत्र विकसित किए जा रहे हैं। ये सूचना तंत्र उपलब्ध सूचना प्रणाली को जनमानस तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका प्रदान करते हैं, परिणामस्वरुप जनमानस द्वारा ये वेब आधारित सूचना तंत्र स्वीकारणीय सिद्ध हुए हैं । इसी क्रम में गंगा बेसिन में उपलब्ध बहुआयामी सूचनाओं को जनमानस को उपलब्ध कराने हेतु राष्ट्रीय जलविज्ञान संस्थान, रुड़की द्वारा गंगाकोश नामक एक वेब-आधारित सूचना तंत्र विकसित किया गया है, जो इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस वेब-आधारित सूचना तंत्र की सहायता से गंगा नदी से सम्बंधित विभिन्न प्रकार की उपलब्ध सूचनाओं को जनमानस तक पहुंचाने का एक प्रयास किया गया है। यह विश्वास है कि राष्ट्रीय जलविज्ञान संस्थान, रुड़की द्वारा निर्मित यह वेब-आधारित सूचना तंत्र, इस क्षेत्र में कार्यरत अभियंताओं, वैज्ञानिकों, स्वयंसेवी संगठनों आदि के लिए उपयोगी सिद्ध होगा।

2.0 वेब-आधारित सूचना तंत्र-उपलब्ध सूचनाओं के प्रचार एवं प्रसार की आधुनिक तकनीक

वेब-आधारित सूचना तंत्र को एक वेब अनुप्रयोग के रूप में परिभाषित किया जा सकता है, जिसका उद्देश्य विभिन्न स्रोतों से उपलब्ध महत्वपूर्ण सूचनाओं को अनुसंधानकर्ताओं को उपलब्ध कराने तक एकीकृत रूप से प्रस्तुत करने हेतु उपयुक्त मार्ग प्रदान करना है। वेब-आधारित सूचना तंत्र विभिन्न विषयों एवं अनुप्रयोगों को उपलब्ध कराने हेतु केंद्रीकृत सेवा प्रदान करते हैं। वेब-आधारित सूचना तंत्र के विकास के परिणामस्वरूप उपलब्ध सूचनाओं के सहभाजन में नवीन संभावनाएं विकसित हुई है। वेब-आधारित सूचना तंत्र के उपयोग द्वारा उपलब्ध सूचनाओं के प्रसार से होने वाले मुख्य लाभ निम्नवत है।

  • सूचनाओं के प्रचार एवं प्रसार हेतु स्वतंत्र तंत्र
  • उपयोग हेतु संस्थापित किये जाने की आवश्यकता नहीं
  • न्यूनतम अनुरक्षण की आवश्यकता
  • विश्व के किसी भी भाग से किसी भी समय शीघ्र उपलब्धता
  • वृहित सूचनाओं की संरचनात्मक रूप में उपलब्धता

विगत वर्षों से, देश में विभिन्न विषयों के प्रचार एवं प्रसार हेतु निर्मित सूचना तंत्र जनमानस में अत्यधिक लोकप्रिय हुए हैं।

3.0 गंगाकोश सूचना तंत्र का अभिकल्पन एवं विकास

गंगकोश सूचना तंत्र प्रणाली का उद्देश्य उपलब्ध सूचनाओं को सूचना भंडार प्रणाली के रूप में प्रस्तुत करना है। तंत्र की संरचना और इसके विकल्पों को चित्र-1 में दर्शाया गया है। गंगाकोश सूचना तंत्र को विकसित करने के लिए वल्र्ड वाइड वेब (WWW) तकनीक का उपयोग किया गया है। वल्र्ड वाइड वेब (WWW) तकनीक हाइपरमीडिया सूचना प्रणाली पर आधारित है। इसमें अरेखीय, लचीले रूप से सम्बद्ध HTML (हाइपर टेक्स्ट मीडिया लैंग्वेज) प्रलेख होते हैं, जिसमें विभिन्न प्रकार के WWW पिंडों को अंतःस्थापित किया जा सकता है। वल्र्ड वाइड वेब इंटरेक्टिव घटकों के साथ-साथ मल्टी-मीडिया ऑब्जेक्ट्स जैसे वीडियो और ऑडियो को एकीकृत करने की अनुमति देता है। इस प्रकार वल्र्ड वाइड वेब (WWW) तकनीक, सूचना प्रस्तुति, प्रलेखन और विनिमय एवं साझाकरण के लिए नई संभावनाएं और सुविधाएँ प्रदान करता है।

गंगाकोश सूचना तंत्र को HTML और जावा भाषा में विकसित किया गया है, जो हाइपरटेक्स्ट सूचनाओं को प्रस्तुत करने की एक उपयुक्त तकनीक है। इसकी सहायता से हाइपरटेक्स्ट अनुप्रयोगों को सरलता के साथ ब्राउज़ किया जाना संभव है। इस लिंक के चयन से ब्राउज़र संबंधित दस्तावेज़ को सम्बंधित कंप्यूटर सिस्टम पर प्रदर्शित करता है, भले ही वह दस्तावेज़ हजारों मील दूर किसी अन्य कंप्यूटर सिस्टम पर उपलब्ध हो।

गंगाकोश सूचना तंत्र के अंतर्गत वेब-आधारित सूचना तंत्र का उपयोग विभिन्न स्रोतों से उपलब्ध संबंधित जानकारी को एकत्रित करके उन्हें एक ही प्रणाली में एक साथ विलय करने के लिए किया गया है। यह सूचना तंत्र एक व्यापक, विश्वसनीय, उपयोगकर्ता के अनुकूल और सरलता से सुलभ सूचना प्रणाली है। सूचना में स्थानिक सूचनाओं के साथ-साथ बांध स्थलों, प्रमुख नदी उप घाटियों, प्रमुख सहायक नदियों आदि से सम्बंधित विशिष्ट आंकड़े सम्मिलित हैं। सूचना तंत्र में उपयोग किया गया मॉड्यूलर तंत्र समय≤ पर उपलब्ध नवीनतम सूचनाओं को सरलता से सूचना तंत्र में सम्बद्ध करने की अनुमति देता है।

गंगाकोश सूचना तंत्र के अंतर्गत, गंगा बेसिन से संबंधित सूचनाओं के सारांश को तालिकाओं और आंकड़ों के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इन सूचनाओं में गंगा बेसिन/उप-बेसिन स्तर के विषयगत नक्शे और संबंधित जानकारियां जैसे स्थलाकृति, नदी उप बेसिन, जलवायु, जल संसाधन उपयोग, सम्मिलित हैं। गंगाकोश सूचना तंत्र के अंतर्गत उपलब्ध सूचनाओं को जल के क्षेत्र में अनुसंधान, शिक्षा, अर्थव्यवस्था और राजनीति आदि मांगों की पूर्ति हेतु उपयोग किया जा सकता है। गंगाकोष को साइट ‘‘प्वाइंट एंड क्लिक’’ नेविगेशन का उपयोग करके विकसित किया गया है। यह तंत्र विभिन्न स्रोतों से उपलब्ध बेसिन/उप-बेसिन स्तर पर A4 पैमाने पर विषयगत मानचित्रों के साथ-साथ अन्य सूचनाओं को सारणियों एवं चित्रों के रूप में उपयोगकर्ता तक पहुंचाने की अनुमति देता है। उपयोगकर्ता किसी भी वेब आधारित ब्राउजर की सहायता से इस सॉफ्टवेयर का उपयोग कर सकते हैं। मुख्य और ड्रॉप डाउन मेनू उपयोगकर्ता को तन्त्र के सरल उपयोग में सहायता प्रदान करता है।

4.0 विशिष्टताएं

• विभिन्न स्रोतों से विविध जानकारी का एकीकरण।

• आवश्यकताओं में परिवर्तन को समायोजित करने के लिए समय के साथ विस्तार के लिए सरलतम संरचना।

• विषयगत मानचित्र एवं से संबंधित जानकारी की वेब के माध्यम उपयोगकर्ता हेतू सरल और अनुकूल प्रस्तुति।

• मानचित्रण तकनीक के प्रयोग द्वारा गंगा बेसिन से संबंधित जानकारी का मानचित्रों, तालिकाओं, ग्राफिक्स के माध्यम से प्रस्तुतीकरण।

• सॉफ्टवेयर, आंकड़ों में बिना अतिरिक्त व्यय किये आवश्यकताओं के अनुसार परिवर्तन किये जाने की सरल उपलब्धता।

• नवीनतम सूचनाओं की उपलब्धता हेतु निरंतर नवीनीकरण।

5.0 विषयगत सामग्री

गंगाकोश सूचना तंत्र से सम्बद्ध विषय सामग्री को सारणी-1 एवं सारणी-2 में प्रदर्शित किया गया है।

6.0 परिणाम

• सिस्टम के बीटा संस्करण को संस्थान की वेबसाइट (www.nihroorkee-gov-in) पर प्रदर्शित किया जा रहा है ।

• पोर्टल के कुछ स्क्रीन शॉट्स नीचे दर्शाए गए हैं।

7.0 निष्कर्ष

गंगा बेसिन के विभिन्न पहलुओं से संबंधित बहुमूल्य जानकारी प्रदान करने के उद्देश्य से गंगाकोष का विकास किया जा रहा है। इस पोर्टल द्वारा गंगा से संबंधित सूचनाओं को विश्व के किसी भी भाग से शीघ्रतापूर्वक प्राप्त किया जा सकेगा। यह गंगा से संबंधित जानकारी को अधिक संरचनात्मक रूप में उपलब्ध कराएगा। आशा है कि यह प्रणाली गंगा के अनुसंधान, संरक्षण और प्रबंधन के क्षेत्र में काम करने वाले उपयोगकर्ताओं के लिए सहायक होगी।

पोर्टल का ऑफलाइन संस्करण सीडी पर भी उपलब्ध होगा। राष्ट्रीय/राज्य स्तर पर इस प्रकार की प्रणाली काफी सहायक सिद्ध होगी। गंगाकोश के प्रयासों का अंतिम लाभ वैज्ञानिक जानकारी के आधार पर और नए विचारों/नवाचारों के प्रसार द्वारा सार्वजनिक राय बनाने के माध्यम से गंगा नदी पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण में सभी हितधारकों के सार्थक जुड़ाव में निहित होगा।

References

• Bower, M. and Robinson, M.,(1997), “Web Programming Languages Sourcebook”, John Wiley & Sons, Inc.

• Dyson, P. (1996), An Introduction to World Wide Web, Mastering Internet Information Server, Peter Dyson, BPB Publications, New Delhi.

• Educational portals: A way to get an integrated, user –centric university information system by Marko Bajec (University of Ljubljana, Slovenia).

• Ganga River Basin Environment Management Plan: Interim Report, Consortium of 7 Indian Institute of Technologys, Aug 2013,

• Web Portals: The new gateways to internet information and services by Arthur Tatnall (Victoria University, Australia).

•http://wrmin.nic.in/writereaddata/GRBEMPInterimReport.pdf accessed on 20.03.2016

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