ग्रामीण भूजल कार्यशाला एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम

Submitted by Hindi on Sat, 12/10/2016 - 15:24
Source
विज्ञान गंगा, जनवरी-फरवरी, 2014

काशी हिंदू विश्वविद्यालय के विज्ञान संकाय के व्याख्यान संकुल सभागार में केंद्रीय भूजल बोर्ड की तरफ से गत 21-12 नवंबर को ग्रामीण भूजल संभरण विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में काशी हिंदू विश्वविद्यालय के लगभग दो सौ छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। 22 नवम्बर को दीप प्रज्वलन के बाद, उद्घाटन भाषण में मुख्य अतिथि काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कुलसचिव और भूगर्भ जल वैज्ञानिक प्रो. गिरिजा शंकर यादव ने ग्रामीण क्षेत्रों में जल से संबंधित विभिन्न पक्षों और भूजल के प्रदूषणकारी परिस्थितियों को रेखांकित किया। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में भूजल के प्रदूषणकारी तत्वों के अनिष्टकारी प्रभाव से बचाव के उपायों पर भी चर्चा की।

उद्घाटन सत्र में केंद्रीय भूजल बोर्ड के क्षेत्रीय निदेशक डा. के.बी. विश्वास ने कहा कि उत्तर प्रदेश के सतहत्तर ब्लॉकों में भूजल के अत्यधिक दोहन के कारण स्थिति भयावह हो चली है। इन क्षेत्रों में फसलों की सिंचाई और उद्योगों में भूजल की खपत में हो रही निरंतर वृद्धि के अनुपात में भूजल संभरण का न होना सबसे बड़ी समस्या है। उन्होंने वाराणसी में 50 मीटर की गहराई तक के पानी में खतरनाक संखिया (आर्सेनिक) की उपस्थिति पर चर्चा किया और कहा कि यदि इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो हालात खतरनाक हो जायेंगे। उन्होंने बताया कि वाराणसी में भूजल में संखिया के बढ़ते प्रभाव के संबंध में केंद्रीय भूजल बोर्ड की ओर से प्रदेश सरकार को आगाह किया जा चुका है।

इन क्षेत्रों में फसलों की सिंचाई और उद्योगों में भूजल की खपत में हो रही निरंतर वृद्धि के अनुपात में भूजल संभरण का न होना सबसे बड़ी समस्या है। उन्होंने वाराणसी में 50 मीटर की गहराई तक के पानी में खतरनाक संखिया (आर्सेनिक) की उपस्थिति पर चर्चा किया और कहा कि यदि इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो हालात खतरनाक हो जायेंगे। उन्होंने बताया कि वाराणसी में भूजल में संखिया के बढ़ते प्रभाव के संबंध में केंद्रीय भूजल बोर्ड की ओर से प्रदेश सरकार को आगाह किया जा चुका है।

तकनीकी सत्रों में छात्र प्रशिक्षुओं को केंद्रीय भूजल बोर्ड के वैज्ञानिकों और अधिकारियों ने ग्रामीण भूजल संबंधी सैद्धांतिक और व्यावहारिक जानकारियाँ दी और उनकी शंकाओं का भी निवारण किया।

विभिन्न तकनीकी सत्रों में डा. डी.एस. पाण्डेय ने जल में संखिया और नाइट्रेट की समस्यायें और उससे बचाव के उपाय तथा डा. राकेश सिंह ने ‘रेन वाटर हार्वेस्टिंग’ तरीकों और उससे जुड़ी समस्याओं से अवगत कराया। भू-वैज्ञानिक डा. एस.के. सिंह ने भूजल जाँच की प्रक्रिया, उसकी रिकार्डिंग और प्रबंधन तथा पानी की खोज और पर्याप्त जल प्राप्ति वाले स्थानों के तकनीकीय चिन्हांकन की जानकारी दी। बताया कि भूजल में उपस्थित प्रदूषणकारी तत्वों से किडनी तथा फ्लोराइड से दाँतो की समस्या तथा हड्डियों के रोग पैदा होते हैं।

कार्यक्रम के समापन सत्र में प्रशिक्षुओं ने अपने विचार व्यक्त किये। तत्पश्चात डा. डी.एस. पाण्डेय एवं काशी हिंदू विश्वविद्यालय के भूगर्भ-विभागाध्यक्ष प्रो. सत्येन्द्र सिंह और भूगोल विभागाध्यक्ष प्रो. राणा पी.वी. सिंह ने प्रशिक्षुओं को प्रमाण-पत्र प्रदान किया।

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