घर की उबटन के क्या कहने?

Submitted by Hindi on Thu, 11/11/2010 - 10:05
Source
दैनिक ट्रिब्यून, जून 2010

महिलाएं सुंदर दिखाई पडऩे के लिये नये-नये सौन्दर्य प्रसाधनों और तरह-तरह के लेप व लोशनों का जी भर कर प्रयोग करती हैं जिससे त्वचा में आने वाले ढलाव को छिपा लिया जाये परन्तु प्रयोग स्थायी नहीं है। मेकअप के उतरते ही असलियत सामने आ जाती है और क्रूर उपहास-सा करती हुई प्रतीत होती है।

यदि इन सब से हटकर आदिकाल से उपयोग में लाए जा रहे, निरापद घरेलू प्रसाधनों का प्रयोग करके त्वचा को शुरू से ही संभाला जाये तो त्वचा उम्र को चुनौती देती हुई प्रतीत होगी। कम से कम दस-पंद्रह वर्ष तक तो चेहरे का आकर्षण बनाए रखा जा सकता है।

चेहरे को आकर्षक और युवा-सा बनाए रखने का घरेलू उपचार है उबटन। उबटन वह पारंपरिक लेप है जिस पर महंगे प्रसाधनों की तरह न तो कुछ खर्चा करना पड़ता है और न ही त्वचा पर इसका कोई विपरीत प्रभाव पड़ता है।दूध की मलाई, क्रीम या फिर दूध के भगौने की तली में लगी दूध की खुरचन, पांच-सात बूंदें नीबू के रस की, थोड़ी हल्दी और आटा मिलाकर गूंध लें। इसे चेहरे, गरदन और हाथों पर रगड़-रगड़ कर मैल की बत्तियां उतार दें। इस तरह रगडऩे से त्वचा के रोम छिद्र खुल जाते हैं और रक्त प्रवाह बढ़ जाता है। इस तरह मृत और निस्तेज त्वचा में जान-सी पड़ जाती है और त्वचा पर आया आकर्षण और निखार स्वयं ही दिखाई पडऩे लगता है।

सर्दियों के दिनों में खुश्क तेज और ठंडी हवाएं चलती हैं। गरमी के मौसम में लू का प्रकोप बना रहता है। ऐसे में आपकी त्वचा का रक्षा कवच बनता है उबटन। उबटन इन दोनों ही मौसमों में राहत देता है और त्वचा की खुश्की, धूप की जलन को दूर भगाता है।

उबटन का प्रयोग नीचे से ऊपर की ओर हाथ चलाने के क्रम से करना चाहिए। स्मरण रहे कि उबटन को बार-बार नया रूप देना अर्थात उसमें भिन्न-भिन्न सामग्रियों का उपयोग करना सही नहीं है। एक-सी ही सामग्री अधिक प्रभावकारी सिद्ध होती है।
 
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