जल संरक्षण में महात्मा गाँधी राष्ट्रीय रोजगार गारन्टी परियोजना की भूमिका

Submitted by Hindi on Wed, 12/28/2011 - 09:53
Source
राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान, चतुर्थ राष्ट्रीय जल संगोष्ठी, 16-17 दिसम्बर 2011
मनरेगा के तहत निर्मित चेकडैम का दृश्यमनरेगा के तहत निर्मित चेकडैम का दृश्यप्राकृतिक जल संसाधन के स्रोत दिन-प्रतिदिन नष्ट होते चले जा रहे हैं। आज मनुष्य के सामने जल संकट एक विकराल समस्या के रूप में प्रकट हुआ है। हमारे देश में शुद्ध पेयजल की गंभीर समस्या उत्पन्न हुई है। हमारा देश नदियों का देश होने के बाद भी हमारे देश के कई भागों में आज शुद्ध पेयजल आपूर्ति नहीं हो पा रही है। यह समस्या सरकार के साथ-साथ सम्पूर्ण मानव जाति के लिए एक चुनौति साबित हो रही है। बढ़ती जनसंख्या, औद्योगीकरण, मृदा अपरदन, तेजी से हो रहे वन विनाश ने जल संकट को बढ़ावा दिया है।

वर्तमान अध्ययन शिवपुरी जिले के खनियाधाना एवं कोलारस जनपद में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत जिले में योजना प्रारम्भ वर्ष 2006 से वर्ष 2010 जल संरक्षण एवं संवर्धन के कार्यों की संख्या 974 है। जिसमें तालाब, चेक डैम, नाला बंधान, स्ट्रैच, सिंचाई कूप एवं पेयजल कूप (कपिल धारा) आदि सम्मिलित हैं। कई प्रयासों से जहां एक ओर जल संरक्षण की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है वहीं इस जल संरक्षण से 5281 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई क्षमता में वृद्धि हुई है। वहीं महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के द्वारा पेयजल की विकराल समस्या से काफी हद तक निजात मिली है।

भारत सरकार एवं राज्य सरकारों के द्वारा भी इस दिशा में कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं चलाई जा रही हैं जो जल संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं जिससे काफी हद तक कई क्षेत्रों में पेयजल की आपूर्ति की जा रही है। वहीं कृषि के क्षेत्र में भी इसके सकारात्मक परिणाम प्राप्त हो रहे हैं। अगर हम मनरेगा योजना के इस प्रयास पर पर्यावरण को केंद्र करके देखें तो यह प्रतीत होता है कि गाँव के लोगों को रोजगार के साथ-साथ ताल पोखरों के सुंदरीकरण के इस संरक्षण की दिशा में एक सार्थक प्रयास है।

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