कैसे बचेगा पानी

Submitted by Hindi on Wed, 03/30/2011 - 14:19
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विकास संवाद द्वारा प्रकाशित 'पानी' किताब
जल संकट से निपटने के लिए जागरुकता के लिए जागरुकता के साथ वैज्ञानिक तरीकों को भी अपनाए जाने की जरूरत है। सबसे कारगर तरीका है बारिश का पानी बचाना। हम छत का पानी बचा कर भू जलस्तर बढ़ा सकते हैं। इजरायल, सिंगापुर, चीन, आस्ट्रेलिया जैसे कई देशों में रेनवाटर हार्वेस्टिंग पर काफी काम किया जा रहा है। यहाँ बेहतर परिणाम मिले हैं। सिंगापुर में तो यह पानी का प्रमुख स्रोत बन गया है, जबकि चेन्नई में तेजी से गिरते भूगर्भीय जल स्तर को इसके जरिए थामने में मदद मिली है।

हमारे यहाँ भी इस तकनीक को बढ़ावा देने के लिए प्रयास जारी है लेकिन जागरुकता की कमी दिखाई देती है।

इस तकनीक के जरिए छत के पानी को हैंडपंप, बोरवेल या कुएं के माध्यम से भूगर्भ में डाला जा सकता है। रेनवाटर हार्वेस्टिंग में सबसे आसान दो तरीके हैं। पहला, बारिश के पानी को छत पर एकत्रित कर गड्ढे या खाई के जरिए सीधे जमीन के भीतर उतरना। दूसरा, छत के पानी को किसी टैंक या सम्पवेल में एकत्र करके सीधा उपयोग करना। एक हजार वर्ग फीट की छत वाले छोटे मकानों के लिए यह तरीका बहुत ही उपयुक्त है।

एक वर्षकाल में इस छोटी-सी छत से लगभग एक लाख लीटर पानी जमीन के भीतर पहुँचाया जा सकत है। इसके लिए सबसे पहले जमीन में 3 से 5 फीट चौड़ा और 6 से 10 फीट गहरा गड्ढा खोदना होगा। खुदाई के बाद इसमें सबसे नीचे मोटे पत्थर (कंकड़), बीच में मध्यम आकार के पत्थर (रोड़ी) और सबसे ऊपर बारीक रेत या बजरी डाल दी जाती है।

यह सिस्टम फिल्टर का काम करता है। छत से पानी एक पाइप के जरिए गड्ढे में उतार दिया जाता है। गड्ढें से पानी धीरे-धीरे छनकर जमीन के भीतर चला जाता है। इसी तरह फिल्टर के जरिए पानी को सम्प या टैंक में भी एकत्र किया जा सकता है।

छत का पानी बचाने के पांच तरीकेः-


1. सीधे जमीन के अंदरः इसमें बरसाती पानी को एक गड्ढे के जरिए सीधे धरती के भूगर्भीय जल भंडार में उतार दिया जाता है।
2. खाई बनाकर रिचार्जिंगः बड़े संस्थानों के परिसर की बाउंड्री वाल के पास बड़ी नालियां बनाकर पानी को जमीन के भीतर उतारा जाता है।
3. कुओं में पानी उतारनाः छत के बरसाती पानी को पाइप के जरिए घर के या पास स्थित कुएं में उतारा जाता है। इस तरीके से न केवल कुआं रिचार्ज होता है, बल्कि कुएं से पानी जमीन के भीतर भी चला जाता है।
4. ट्यूबवेल में पानी उतारनाः एक पाइप के जरिए छत पर जमा बरसाती पानी को सीधे ट्यूबवेल में उतारा जा सकता है। इसमें छत से ट्यूबवेल को जोड़ने वाले पाइप के बीच फिल्टर लगाना जरूरी है।
5. टैंक में जमा करनाः भू-जल स्तर बढ़ाने के अलावा से बरसाती पानी को सीधे किसी टैंक में भी जमा किया जा सकता है।

क्या हैं फायदे
1. एक हजार वर्ग फीट की छत से एक बरसाती मौसम में लगभग एक लाख लीटर पानी जमीन के भीतर उतारा जा सकता है।
2. रेनवॉटर हार्वेस्टिंग में 6.95 पीएच वेल्यू का पानी मिलता है। यह पानी की गुणवत्ता के मामले में आदर्श माना जाता है।
3. जमीन के नीचे पानी कम होने से उसमें फ्लोराइड की मात्रा बढ़ती जा रही है। रेनवाटर हार्वेस्टिंग के जरिए इस समस्या पर नियंत्रण पाया जा सकता है।
4. रेनवाटर हार्वेस्टिंग इतनी आसान तकनीक है कि इसमें केवल पीवीसी पाइप और फिल्टर की जरूरत पड़ती है।

छत से सीधा पानी लेना खतरनाक


प्रचार-प्रसार से इतनी जागरुकता तो आई है कि लोग अब वर्षा जल को बचाने की बात करने लगे हैं लेकिन यह संग्रहण भी नीम हकीम खतरा-ए-जान की तरह ही है। असल में ‘रूफ वॉटर’ के संचयन के भी अपने तरीके हैं। बारिश के पानी को बिना फिल्टर लगाए सीधे जमीन में पहुँचा देना जमीन के पानी को दूषित कर देना होगा।

यह अज्ञानता आगे चलकर बीमारियों का मुख्य कारण बनेगी। कई लोग अपने घरों की छतों पर जमा हेने वाले पानी को सीधे पाइप के जरिए अपने बोरवेल में डालकर उसे रिचार्ज करने लगे हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि अगर ऐसा ही चलता रहा तो एक दशक बाद बोरिंग से आने वाला पानी पीने लायक नहीं रह जाएगा।

रुफ वॉटर हार्वेस्टिंग में छतों का पानी इकट्ठा करते समय सर्तकता बरतनी चाहिए। बारिश के पहले छत गंदी रहती हैं। कुत्ते-बिल्लियों की पहुँच भी वहाँ आसान होती है। ऐसे में उनके पेशाब या अन्य गंदगी का वर्षाजल में मिलना संभव है। हमें यह समझना चाहिए कि बोरवेल सिर्फ एक गड्ढा भर नहीं है बल्कि उसके तल में एक पूरी नदी बहती है जो एक बार प्रदूषित हो गई तो फिर उसे स्वच्छ करना लगभग असंभव होगा। कई उद्योग भी बिना पर्याप्त जानकारी के ‘रेन वॉटर हार्वेस्टिंग’ कर रहे हैं। यह घातक है क्योंकि इससे रसायनों के भू-जल में पहुँचने की आशंका है।

यह न भूलें


जमीन के अंदर एक्वाफर लेयर होती है। यहाँ पानी नदी की तरह बहता है। इसे साफ बनाए रखना चाहिए क्योंकि अगर यह पानी दूषित हुआ तो हम मुसीबत में पड़ जाएँगे। इसे स्वच्छ रखने के लिए जरूरी है कि पानी प्रकृति प्रदत्त प्रक्रिया के तहत ही जमीन के भीतर जाए। जमीन एक तरह का फिल्टर है। बारिश का पानी जब रिस कर अंदर जाता है तो प्रदूषणकारी तत्व बाहर रह जाते हैं। इसी तरह बोरवेल को रिचार्ज करते समय फिल्टर लगाना जरूरी है। इसके लिए बोरवेल के आस-पास 14-15 फुट गहरे बनाने चाहिए, इसके बाद काली मिट्टी की परत खत्म हो जाती है। इन गड्ढों में पत्थर, बोल्डर, रेत आदि डालकर भरना चाहिए और पानी का बहाव इन्हीं की ओर करना चाहिए। अगर इस तरह से पानी नीचे जाएगा तो वह स्वच्छ हो जाएगा।

रखें ये सावधानी


• बरसात के दौरान छत को अच्छी तरह से साफ रखें। छत पर जंग लगी लोहे की वस्तुएँ नहीं रखें।
• वाटर हार्वेस्टिंग के लिए खोदा गया गड्ढा शौचालय या स्नानागार के पास नहीं हो, अन्यथा सीवेज का गंदा पानी भी उसमें मिल सकता है।
• फिल्टर की रेत को समय-समय पर साफ करें और बदलते रहें।

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