मेरी गंगा मेरी सूस

Submitted by RuralWater on Wed, 10/14/2015 - 16:19
.गंगा डॉल्फिन गणना तथा मेरी गंगा मेरी सूस अभियान 2015 का समापन हुआ जिसमें 3350 किमी नदियों में 1263 डॉल्फिन की पाई गई।

1. गंगा नदी डॉल्फिन की वर्तमान जनसंख्या तथा उनका वितरण अत्यधिक गहन व पारदर्शी सतही आँकड़ों पर आधारित है।

2. उच्चतम व निम्नतम अनुमान डॉल्फिन गड़ना के लिये एक महत्त्वपूर्ण मापदंड है जो आईयूसीएन के प्रोटोकॉल पर आधारित है।

3. उत्तर प्रदेश पहला राज्य बना है जिसने एक सामान प्रणाली को अपनाते हुए दूसरी बार डॉल्फिन गणना की है।

4. श्री संजीव सरन, प्रमुख सचिव वन एवं पर्यावरण के द्वारा डॉल्फिन गणना से प्राप्त परिणामों की उद्घोषणा डॉल्फिन गणना समापन कार्यक्रम के दौरान, प्लूटो सभागार, इंदिरा प्रतिष्ठान गोमती नगर, लखनऊ में की।

5. वाराणसी के नीचे गंगा के 125 किमी भाग को भी इस सर्वे में सम्मिलित किया गया जो पिछले सर्वे (सन् 2012) में शामिल नहीं था। इस भाग में 269 डॉल्फिन रिकॉर्ड की गई।

6. वन विभाग उत्तर प्रदेश तथा विश्व प्रकृति निधि भारत के संयुक्त प्रयास को राष्ट्रीय गंगा स्वच्छ अभियान (एनएमसीजी) ने द्वारा वित्तीय सहयोग प्रदान किया।

7. इस कार्य के लिये 200 लोगों की 21 टीमें बनाई गईं जिनकी अगुआई सम्बन्धित जिलों के डीएफओ ने की।

8. मेरी गंगा मेरी सूस अभियान के दौरान नदी किनारे के 80 गाँव में लोगों को डॉल्फिन संरक्षण पर जागरूक करने के लिये 700 लोगों का इंटरव्यू लिया गया।

9. इस गणना में गंगा, रामगंगा, यमुना, चम्बल, केन, बेतवा, सोन, शारदा, गेरुआ, घाघरा, गंडक, राप्ती आदि नदियाँ सम्मिलित थीं। ये कार्य 5-8 अक्टूबर 2015 के दौरान किया गया।

गंगा नदी डॉल्फिन की गणना का आयोजन 5-8 अक्टूबर 2015 के दौरान किया गया यह गणना वन विभाग उत्तर प्रदेश व डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इण्डिया का संयुक्त प्रयास से हुआ जिसको राष्ट्रीय गंगा स्वच्छ अभियान (एनएमसीजी) ने वित्तीय सहयोग प्रदान किया है। इस चार दिवसीय डॉल्फिन सर्वेक्षण के परिणामों की उद्घोषणा प्रमुख सचिव वन एवं पर्यावरण श्री संजीव सरन के द्वारा की गई। इस सर्वे में 1263 डॉल्फिन पाई गई जबकि सन् 2012 में किये गए सर्वे में इनकी संख्या केवल 671 थी। इस सर्वे में वाराणसी के नीचे का क्षेत्र बिहार सीमा तक सम्मिलित किया गया जो पिछले सर्वे में सम्मिलित नहीं था, इस भाग में 269 डॉल्फिन पाई गई। गंगा के फतेहपुर क्षेत्र के 125 किमी में 175 डॉल्फिन पाई गई।

श्री संजीव सरन जी ने कहा की मुझे ये घोषणा करते हुए बहुत ख़ुशी हो रही है कि उत्तर प्रदेश की नदियों में 1263 डॉल्फिन है “मेरी गंगा मेरी सूस” कार्यक्रम को प्रत्येक वर्ष किया जाएगा जिससे की डॉल्फिन के रहवास तथा खतरों की निगरानी कर सकें। इस कार्यक्रम के द्वारा सामुदायिक जागरुकता करके मानव व जीवों के बीच होने वाले संघर्ष को कम किया जा सकता है तथा डॉल्फिन संरक्षण के लिये एक नेटवर्क बनाने का प्रयास करेंगे। उन्होंने सभी टीम की तथा इसमें भाग लेने वालों लोगों की प्रशंसा की।

श्री सुरेश बाबु निदेशक, नदी, नमभूमि एवं जल निति विभाग, डब्लूडब्लूएफ इण्डिया ने कहा कि यह सर्वे सहयोगी संस्थाओं के संयुक्त व अथक प्रयासों से पूरा हो सका। उन्होंने कहा कि इस गणना में डॉल्फिन की संख्या में बढ़ोत्तरी दर्ज की गई जो अलग-अलग नदियों में कम एवं अधिक पाई गई जिसके कारणों का पता लगाने कि आवश्यकता है। श्री बाबु ने आगे कहा कि इस सर्वे से प्राप्त आँकड़ों, खतरों की जानकारियों तथा लोकल लोगों से प्राप्त जानकारियों के आधार पर आने वाले कुछ महीनों में एक डॉल्फिन संरक्षण निति विकसित किये जाने का प्लान है।

इस सर्वेक्षण में दलों ने लगभग 80 गाँवों के 700 सामुदायिक सदस्यों में इस जलिए जीव के संरक्षण के लिये जागरुकता भी की।

इस सर्वेक्षण में वैज्ञानिक तरीकों पर आधारित आईयूसीएन के प्रोटोकॉल को अपनाया गया जिसके अनुसार सर्वे सुबह 7-11 तथा सायं 3-6 बजे के बीच किया गया। इसके अतिरिक्त डॉल्फिन के रहवास का आकलन तथा उसके खतरों को भी दर्ज किया गया।

अधिक जानकारी के लिये सम्पर्क करें

डा. प्रशांत वर्मा, मुख्य वन संरक्षक एको डेवलपमेंट
9936404340, 9415115708

श्री सुरेश बाबु, नदी, नमभूमि एवं जल निति विभाग, डब्लू.डब्लू.एफ. इंडिया
9818997888

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