नाले हुए पी.डब्ल्यू.डी. के हवाले

Submitted by RuralWater on Thu, 02/20/2020 - 15:00
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नैनीताल एक धरोहर

17 अगस्त, 1898 की वर्षा से नैनीताल के नालों और सड़कों को भी बहुत नुकसान पहुँचा। भारी वर्षा की वजह से ओकपार्क, लॉगडेल, फेरीहॉल, द पॉपुलर और बड़ा नाला क्षेत्र के अनेक नालों को क्षति पहुँची। ओक रोड, माल्डन कॉटेज और मार्शल कॉटेज की सड़कें बुरी तरह धंस गई। इस साल नार्थ नेस्टर्न प्रोविंसेस के लेफ्टिनेंट गवर्नर ने खुद नैनीताल के नालों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के बाद उन्होंने लॉगडेल सहित अयारपाटा क्षेत्र के तमाम नालों को पी.डब्ल्यू.डी. को सौंपने के आदेश दिए। 28 सितम्बर, 1898 को प्रोविंसेस के बिल्डिग्स एण्ड रोड ब्रांच के चीफ इंजीनियर सी.डब्ल्यू, ओल्डिंग ने नैनीताल के नालों की सुरक्षा को लेकर एक विस्तृत आख्या सरकार को सौंपी।

1 अक्टूबर, 1898 को नार्थ नेस्टर्न प्रोविंसेस एण्ड अवध के सचिव जे.ओ. मिलर ने नैनीताल के नाला सिस्टम को लेकर दूसरी अधिसूचना जारी की। इसमें नाला सिस्टम में काम करने वाली एजेंसियों की दक्षता एवं अनुभव के मानक तय किए गए। नालों को लेकर नगर पालिका के अधिकार और कर्तव्यों को परिभाषित किया गया। यह बात दोहराई गई कि नैनीताल में नालों के निर्माण से जुड़ी सभी योजनाएँ अनिवार्य रूप से प्रदेश के स्वास्थ्य बोर्ड से स्वीकडत कराई जाएगी। नैनीताल में नालों के निर्माण की बड़ी योजनाएँ स्वास्थ्य बोर्ड के आयुक्त के स्तर पर स्वीकृत करानी होगी। जबकि 10 हजार रुपए से अधिक लागत की योजनाओं पर सरकार से स्वीकृति लेनी होगी। नैनीताल में नालों के निर्माण के लिए स्वास्थ्य बोर्ड के इंजीनियरों को प्रतिनियुक्ति पर लेने की सलाह भी नगर पालिका को दी गई। सितम्बर 1898 में रोड के किनारे की नालियों और गटर को छोड़कर नैनीताल नगर के सभी नाले पी.डब्ल्यू.डी. को सौंप दिए गए।

14 अक्टूबर, 1898 को सरकार के सचिव ने अगस्त की वर्षा में क्षतिग्रस्त सभी छह नाले पी.डब्ल्यू.डी. को सौंपने के आदेश दिए। पी.डब्ल्यू.डी. के अधिशासी अभियंता से इन नालों की मरम्मत को कहा गया। बिल्डिग्स एण्ड रोड ब्रांच के चीफ इंजीनियर को नैनीताल के नालों की सुरक्षा के उपाय सुझाने के आदेश दिए गए।

सचिव ने अपने पत्र में इस बात का भी जिक्र किया कि लेफ्टिनेंट गवर्नर ने नैनीताल के नालों के विषय को गम्भीरता से संज्ञान में लिया है। लेफ्टिनेंट गवर्नर के निर्देश पर नालों के लिए 80,872 रुपए की योजना बनाई गई है। लॉगडेल और इंडक्लीफ के नाला नं. 11 व 12 की मरम्मत और पुनर्निर्माण के लिए 22,165 रुपए तथा चीना एवं स्टेडली हॉल के नाला नं. 2,5,6,7 व 8 के मरम्मत के लिए 10 हजार रुपए की जरूरत बताई गई है। सचिव के जानकारी दी कि सरकार नैनीताल में नालों के निर्माण के लिए नगर पालिका बोर्ड को स्वास्थ्य बोर्ड के इंजीनियरों की निःशुल्क सेवा उपलब्ध कराने को तैयार है।

18 अक्टूबर, 1898 को सरकार ने रानीबाग-नैनीताल घोड़ा मार्ग के लिए ग्राम बेलुवाखान में 6.969 एकड़ जमीन अधिगृहीत की। इस साल नैनीताल पाल नौका दौड़ प्रतियोगिता आयोजित हुई। 14 अक्टूबर, 1898 को नॉर्थ वेस्टर्न प्रोविंसेस एण्ड अवध के सचिव ने कहा कि नैनीताल के नालों का काम एक ही एजेंसी के हाथ में होना चाहिए। 1898 में एलवियन होटल, ग्राण्ड होटल हो गया। तल्लीताल स्थित गोरखा लाइन 1899 तक लेफ्टिनेंट जनरल कमांडिंग द बंगाल फोर्सेज के नियंत्रण में थी। 1899 में गोरखा लाइन को पुलिस लाइन के लिए दे दिया गया। इससे पहले 14 जुलाई, 1899 को बंगाल कमाण्ड के लेफ्टिनेंट जनरल ने गोरखा लाइन को पुलिस लाइन के लिए देने से मना कर दिया था।

1899 में ब्लीक हाउस के पास भू-स्खलन हुआ। इस भू-स्खलन की वजह से पुरानी कार्ट रोड अवरुद्ध हो गई। नैनीताल का मैदानी क्षेत्रों से सम्पर्क टूट गया। यह स्थिति लम्बे समय तक बनी रही। अन्ततः मनोरा की पहाड़ी से नई कार्ट रोड बनानी पड़ी। नई कार्ट रोड नैना गाँव से मनोरा होते हुए नैनीताल आती थी। नैना गाँव के पास गोरियलधार में ताँगा पड़ाव बनाया गया था। कालांतर में गोरिलयधार स्थिर ताँगा पड़ाव के के पास दूध की डेयरी खुली। उन दिनों ब्रिटिश सेना का कैम्प भी इस क्षेत्र में था। 1915 तक नैनीताल आने के लिए इसी रास्ते का उपयोग होता रहा।

अयारपाटा क्षेत्र में नालों के निर्माण कार्यों को गति देने के लिए पी.डब्ल्यू.डी. का एक नया डिवीजन बना दिया गया था। इसका नाम ही अयारपाटा डिवीजन था। पी.डब्ल्यू.डी. के अयारपाटा डिवीजन के अधिशासी अभियंता ने लॉगडेल नाले के निर्माण के लिए जनवरी 1899 में 0.051 एकड़ जमीन अधिगृहीत की। इसी दरम्यान बलियानाले के भू-स्खलन की जाँच के लिए भारत के भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण के उप अधीक्षक आर.डी.ओल्डहम की अध्यक्षता में एक और जाँच कमेटी बनी।

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