नैनखेड़ी गांवः तालाब जिंदा होते ही लौट आई खुशहाली

Submitted by HindiWater on Sat, 05/23/2020 - 13:51

नैनखेड़ी गांव का तालाब।

पानी मानव और प्रकृति की समृद्धि का आधार है, लेकिन आधुनिक युग के शुरु होते ही हमने पानी की महत्ता को नजरअंदाज करना शुरु कर दिया था, जिस कारण तालाब, झील, नदियां आदि सूखने से देश में भीषण जल संकट खड़ा हो गया है। एक तरह से पानीदार देश के रूप में भारत अपनी समृद्धि खोता जा रहा है, लेकिन खो रही समृद्धि को बचाने का कई लोग भरसक प्रयास कर रहे हैं, जिनमें ताजा उदाहरण सहारनपुर के नैनखेड़ी गांव का है, जहां तालाब को न केवल जिंदा किया गया, बल्कि ये गांव टूरिस्ट स्पाॅट बन गया है। जिससे गांव की खुशहाली लौट आई है।

उत्तर प्रदेश के जिला सहारनपुर के विकासखंड गंगोह के गांव नैनखेड़ी की आबादी करीब 1350 है। 99 प्रतिशत लोग साक्षर हैं, लेकिन गांव में इतनी साक्षरता होने के बाद भी यहां तालाब गंदगी से पटा पड़ा था। पानी से दुर्गंध आती थी। अस्वच्छता के कारण बीमारियों का खतरा मंडरा रहा था। गांव का गिरता जलस्तर परेशानी बना हुआ था। सुरेंद्र सिंह पंवार ने ग्राम प्रधान बनने के बाद तालाब की सूरत बदलते हुए गांव की समृद्धि को वापस लाने का निर्णय लिया। नोएडा के पर्यावरणविद रामवीर तंवर की मदद से तालाब को साफ करने का प्लान तैयार किया। तालाब की सफाई कर तालाब के किनारों पर झूले और पौधे लगाए गए। प्रधान सुरेंद्र सिंह के बेटे इंजीनियर गजेंद्र सिंह पंवार ने तालाब में बोटिंग की व्यवस्था की। सड़कों की सफाई करवाई गई। लोगों की एकजूटता और कार्य से तालाब की सूरत धीरे धीरे बदलने लगी। एक प्रकार से तालाब अब छोटी झील का रूप ले चुका है। 

नैनखेड़ी गांव में तालाब के समीप योग करते लोग।

गांव में तालाब के आसपास के खेतों में खेती की तकनीक को भी बदला गया और अब लोग यहां जैविक खेती करते हैं। जैसे जैसे तालाब की पारिस्थितिकी में सुधार हुआ, इस इलाके को पर्यटन क्षेत्र के रूप में विकसित किया जाने लगा। तालाब के पास घर को गेस्ट हाऊस का रूप दिया गया। तालाब के किनारे बैठने के लिए बैंच लगाई गईं। रोज सुबह योगा अभ्यास किया जाता है। पर्यटकों को भोजन पत्ते के पत्तलों में दिया जाता है। पानी आदि मिट्टी के बर्तनों में दिया जाता है। मिट्टी के बर्तन बनाने के लिए चाक रखी गई है। बर्तन बनाने का प्रशिक्षण भी गांव में ही दिया जाता है। पर्यटन क्षेत्र के रूप में विकसित होने से लोगों के लिए आजीविका के अवसर भी पैदा हुए हैं। इन सभी कार्यों को करने के लिए ई-गवर्नेस, जल संरक्षण नैनखेड़ा झील, नैनखेड़ी बोटिंग क्लब, इको पर्यटन नैनखेड़ी गेस्ट हाउस, जैविक खेती, नैनखेड़ी, ऑर्गेनिक क्लस्टर, माॅडल शिक्षा इंग्लिश प्राथमिक विद्यालय, नैनखेड़ी स्वच्छता समिति, महिला समिति, लक्ष्मी महिला समूह, नैनखेड़ी योग समिति को शामिल किया है। गांववासियों के इन प्रयासों का ही नतीजा है, कि जहां देश भर में जल स्तर गिर रहा है, नैनखेड़ी गांव में जलस्तर में वृद्धि हो रही है। गांव वालों ने अपनी स्वेच्छा से प्लास्टिक का उपयोग बंद कर दिया है।

गांव में हो रहे जल संरक्षण सहित तमाम प्रयासों की चर्चा विश्व भर में हो रही है। विदेशी भी यहां हो रहे कार्य को जानने और घूमने के लिए भी यहां आने लगे हैं, तो वहीं भारत के विभिन्न हिस्सों से भी लोग आते हैं। 2019 में यहां इटली से एक शोधार्थी झरेन तिवारीनी भी आई थी। वे नैनखेड़ी गांव में जल संरक्षण को लेकर किए जा रहे कार्यों से काफी प्रभावित थीं। गजेंद्र पंवार की पत्नी अन्नू पंवार ने भी गांव को समृद्ध बनाने में अपना अहम योगदान दिया। उन्होंने एक एप बनाई है। एप पर गांव की सड़कों, इतिहास, सरकारी स्कूल, पेंशन, दर्शनीय स्थलों सहित गांव में विभिन्न सरकारी स्कलों की जानकारी है। इसके अलावा एप पर गरीब परिवार के बेटियों की शादी की सूचना भी डाली जाती है। जिससे हर कोई अपने अपने स्तर पर आर्थिक मदद करता है। ग्राम प्रधान सुरेंद्र पंवार ने बताया कि स्मार्ट गांव को अब पूरी तरह से पर्यटन स्थल बनाने की कोशिश की जा रही है। 


हिमांशु भट्ट (8057170025)

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