'पाइलिन' से बचाव के लिए प्रभावकारी आपदा तैयारी

Submitted by birendrakrgupta on Sun, 07/12/2015 - 15:50
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रोजगार समाचारपत्र
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने बताया है कि उत्तर हिंद महासागर में हर वर्ष औसतन पाँच ऊष्ण कटिबंधीय तूफान आते हैं। जबकि समूचे विश्व में करीब 80 समुद्री तूफान वर्ष भर में आते हैं।12 अक्टूबर, 2013 को ओडिशा और आंध्र प्रदेश के तटवर्ती क्षेत्रों में भीषण समुद्री तूफान, पाइलिन के प्रकोप से ओडिशा, आंध्र प्रदेश और अन्य क्षेत्रों में संपत्ति, खड़ी फसलों और पशुधन को व्यापक नुकसान पहुँचा। किंतु ओडिशा और आंध्र प्रदेश के तटवर्ती क्षेत्रों में लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुँचाने के लिए चलाए गए व्यापक अभियान की बदौलत जन-हानि नियंत्रित रखने में मदद मिली। प्रधानमंत्री ने सभी प्रभावित जिलों में राज्य अधिकारियों, जिला और पुलिस प्रशासन, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, राष्ट्रीय आपदा राहत बल और भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के राहत कार्मिकों और अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा किए गए रोकथाम के उपायों की सराहना की। प्रधानमंत्री ने तूफान पाइलिन में मारे गए प्रत्येक व्यक्ति के निकट संबंधी को प्रधानमंत्री के राष्ट्रीय राहत कोष से दो लाख रुपए और गंभीर रूप से घायल प्रत्येक व्यक्ति को 50 हजार रुपए की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की।

आपदा बचाव से भारत की उच्च स्तरीय तैयारी और राज्य एवं केंद्र सरकार के अधिकारियों और एजेंसियों द्वारा किए गए उपायों की बदौलत तूफान पाइलिन से मानव हानि पर नियंत्रण रख पाना संभव हो सका। मौसम विभाग ने तूफान पाइलिन की समय पर भविष्यवाणी की थी, जिसमें कहा गया था कि तूफान 12 अक्टूबर, 2013 को आंध्र प्रदेश और ओडिशा तट को पार कर जाएगा। राज्य और केंद्र सरकार ने आपदा कार्रवाई टीमें तैनात की ताकि स्थिति से निपटा जा सके और राहत एवं बचाव कार्यों का अंजाम दिया जा सके।

12 अक्टूबर, 2013 से पहले प्रधानमंत्री ने स्वयं स्थिति की समीक्षा की और निर्देश दिया कि संबद्ध राज्य सरकारों को हर संभव सहायता प्रदान की जाए ताकि लोगों की सुरक्षा और संरक्षा सुनिश्चित की जा सके तथा राहत और बचाव अभियान चलाए जा सकें। भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों ने पाइलिन के प्रभाव से बचाव के लिए अपने-अपने क्षेत्रों में विशेष तैयारी की। भारतीय रेलवे, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचआई), विद्युत मंत्रालय स्थिति से निपटने के लिए तैयार थे और नुकसान होने की स्थिति में उनके पास आपात स्थिति में तैनात करने के लिए टीमें थीं। रक्षा संकट प्रबंधन समूह (डीसीएमजी) ने तीनों सेनाओं और तट रक्षक के संसाधन बचाव कार्यों में तैनात करने के लिए निरंतर समन्वयन किया, जिन्होंने रक्षा मंत्रालय, आंध्र प्रदेश और ओडिशा सरकारों, एनडीएमए और एनडीआरएफ के प्रतिनिधियों के साथ मिलकर काम किया।

ओडिशा में गंजम, गजपति, पुरी, जगदीशसिंहपुर, केंद्रपाड़ा, नयागढ़ और खुर्दा नाम के सात जिलों के कलेक्टरों को ओदश दिया गया था कि वे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने का काम शुरू करें ताकि 11 अक्टूबर, 2013 तक शत प्रतिशत लोगों को तूफान, बाढ़ बचाव केंद्रों और सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया जा सके। ऐसे ही आदेश भद्रक और बालेश्वर जिलों में भी जारी किए गए। भोजन, पेयजल, दवाइयाँ और अन्य जरूरी वस्तुएँ पहले से एकत्र की गयीं ताकि जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल की जा सकें। इसी प्रकार आंध्र प्रदेश में राहत और बचाव उपकरण तैनात किए गए और राज्य के उत्तरी तटवर्ती क्षेत्रों में निचले क्षेत्रों में रहने वाले करीब 65 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया।

तूफान परवर्ती उपाय


तूफान के बाद भारतीय वायु सेना ने चार एमआई-17 हेलीकाप्टरों के माध्यम से बैरकपुर से राहत और बचाव उड़ाने जारी रखीं। राज्य प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराए गए करीब 15 हजार भोजन के पैकेट इन क्षेत्रों में डाले गए। बुरी तरह जलमग्न क्षेत्रों में भारतीय नौ सेना के गोताखोर एमआई-17 वी-5 हेलीकाप्टरों की अतिरिक्त उड़ानों से पहुँचाए गए। बालेश्वर और चाँदीपुर के बुरी तरह प्रभावित क्षेत्रों में नौ सेना के गोताखोर हवाई मार्ग से भेजे गए। सेना ने ऐसे ही प्रयासों के लिए बालेश्वर के निकट एक दस्ता भी तैनात किया। सेना के अन्य इंजीनियरी कार्य बल ने गोपालपुर से अपनी कार्रवाई जारी रखी। यह बल राहत कार्यों के लिए चतरपुर में पिथुल गाँव भी पहुँचा, जो गंजम के पश्चिम में करीब 100 किलोमीटर दूर है।

भारतीय खाद्य निगम और केंद्रीय गोदाम की टीमों ने भी ओडिशा के तूफान प्रभावित जिलों का दौरा किया ताकि वहाँ स्थित एफसीआई और सीडब्ल्यूसी गोदामों में रखे अनाज के भंडारों को कथित नुकसान का जायजा लिया जा सके। खाद्य और उपभोक्ता मामले मंत्रालय द्वारा तटवर्ती क्षेत्रों में स्थित गोदामों में अनाज की उपलब्धता की समीक्षा की जा रही है और ओडिशा में टीमें भेजी गयी है ताकि वे राज्य सरकार के साथ सलाह-मशविरा करके अनाज की आवश्यकता मालूम कर सकें और पीडीएस के अंतर्गत वितरित किए जाने के लिए तत्काल अनाज उपलब्ध करा सकें।

तूफान के प्रभाव से ओडिशा और पड़ोसी राज्यों में कई स्थानों पर तेज बारिश आई। राज्य में फसलों, संपत्ति और बुनियादी सुविधाओं को व्यापक क्षति पहुँची है। प्रभावित क्षेत्रों में जलापूर्ति और बिजली आपूर्ति बहाल करने, क्षति का मूल्यांकन करने और प्रभावित क्षेत्रों में जन स्वास्थ्य और स्व्च्छता सुविधाओं को पहुँचे नुकसान का जायजा लेने के प्रयास जारी हैं।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने बताया है कि उत्तर हिंद महासागर (बंगाल की खाड़ी और अरब सागर) में हर वर्ष औसतन पाँच (वैश्विक वार्षिक औसत 5-6 प्रतिशत) ऊष्ण कटिबंधीय तूफान आते हैं। जबकि समूचे विश्व में करीब 80 समुद्री तूफान वर्ष भर में आते हैं। अरब सागर में, बंगाल की खाड़ी में इनकी आवृत्ति अधिक है, जहाँ तूफान का अनुपात 4 : 1 है। उत्तरी हिंद महासागर में ऊष्ण कटिबंधीय तूफानों की मासिक आवृत्ति द्वि-मासिक मॉडल प्रदर्शित करती है जिसमें नवम्बर और मई में ज्यादा तूफान आते हैं। मई-जून और अक्टूबर-नवम्बर के महीने भीषण तीव्रता वाले तूफानों के लिए जाने जाते हैं। मानसून के महीनों (जुलाई से सितंबर) में पैदा होने वाले ऊष्ण कठिबंधीय तूफान आम तौर पर अधिक तीव्रता के नहीं होते।

ओडिशा सुपर साइक्लोन 29 अक्टूबर 1999 के दिन आया था जो ओडिशा तट के निकट पारा द्वीप को पार कर गया था। उत्तरी हिंद महासागर क्षेत्र के इतिहास में वह सबसे भीषण तूफान था। उपग्रह चित्रों के अनुसार करीब 260 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार की तेज हवाओं ने नुकसान पहुँचाया था। आंध्र प्रदेश में राज्य के तटवर्ती क्षेत्र में आए तूफानों के इतिहास में पाइलिन 74वां तूफान था। 1891 से 2012 की अवधि में आंध्र प्रदेश में 73 तूफान आ चुके थे।

बंगाल की खाड़ी के ऊपर बनने वाले कुछ तूफान सुपर साइक्लोन की तीव्रता तक पहुँचे हैं और उन्होंने जान और माल की गंभीर क्षति पहुँचाई है। इन तूफानो की अधिकतम गति का अनुमान उपग्रह से प्राप्त चित्रों के आधार पर लगाया जाता है। बंगाल की खाड़ी में 1990 के बाद आए कुछ अधिक तीव्रता वाले तूफानों की सूची नीचे दी गयी है।

स्थान का नाम

तूफान की तारीख

अधिकतम रफ्तार से चली हवाएँ (किलोमीटर प्रतिघंटा) — उपग्रह से प्राप्त चित्रों के आधार पर आकलित

चटगाँव

13 नवंबर, 1970

224

चिराला, आंध्र प्रदेश

19 नवंबर, 1977

260

रामेश्वरम

24 नवंबर, 1978

204

श्रीहरि कोटा

14 नवंबर, 1984

213

बांग्लादेश

30 नवंबर, 1988

213

कावली, आंध्र प्रदेश

09 नवंबर, 1989

235

मछली पटनम, आंध्र प्रदेश

09 मई, 1990

235

चटगाँव

29 अप्रैल, 1991

235

टेकनेफ (म्यांमा)

02 मई, 1994

204

टेकनेफ

19 मई, 1997

235

पारा द्वीप, ओडिशा

29 अक्टूबर, 1999

260

89.8 डिग्री ई, बांग्लादेश

15 नवंबर, 2007

220

16.0 डिग्री एन, म्यांमा

02 मई, 2008

200

 



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