पानी के प्रदूषण के लिये गंदे टैंक मुख्य कारण

Submitted by Hindi on Sun, 04/01/2018 - 15:52
Source
ग्राहक साथी, अक्टूबर-नवम्बर, 2016

परीक्षण निष्कर्षों से पता चलता है कि पानी की सीधी आपूर्ति रोगजनकों से मुक्त होती है
पीने का पानी या पेजयल वह पानी है जो मनुष्यों के इस्तेमाल के लिये पर्याप्त सुरक्षित होता है। पीने के पानी के साथ सबसे आम और बड़े पैमाने पर स्वास्थ्य से जुड़ा जोखिम मानव या जानवर मलमूत्र, विशेष रूप से मल के द्वारा सीधे या परोक्ष रूप से संक्रमण होना है। मल संदूषण कॉलिफॉर्म बैक्टीरिया, विशेष रूप से ई. कोलाई की उपस्थिति से निर्धारित होता है।

जलरोगजनकों से दूषित पानी को पीने या खाना बनाने के लिये प्रयोग किया जाता है तब यह हैजा, दस्त, टाइफाइड, अमोबायोसिस और पीलिया जैसे जलजनित रोग फैला सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों से पता चलता है कि भारत में हर साल दूषित पानी से 7,80,000 मौतें होती हैं।

 

संक्षेप में


हमारे परीक्षण में पाया गया कि भंडारण टैंक से लिये गया पानी रोगजनकों से दूषित था यह महत्त्वपूर्ण है कि पानी के टैंक नियमित रूप से साफ और कीटाणुरहित किए जाएँ

 

हमारी परियोजना


भारत में सुरक्षित पेयजल की प्राप्ति और वितरण एक राज्य से दूसरे में और यहाँ तक कि राज्य के भीतर भिन्न-भिन्न होता है। भारत सरकार, उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय (MoCA) द्वारा प्रायोजित इस परियोजना के लिये, हमने अहमदाबाद के विभिन्न इलाकों से पाँच स्रोतों से पानी के 47 नमूनों का परीक्षण किया।

परीक्षण के निष्कर्षों से अच्छी और बुरी दोनों खबरें पता चली। अच्छी खबर यह है कि चार सीधे स्रोतों से लिया पानी रोगजनकों से मुक्त था। बुरी खबर यह है कि पाँचवें स्रोत, पानी के टैंक से एकत्र पानी के सभी नमूने कॉलिफॉर्म बैक्टीरिया से दूषित थे।

हमने क्या किया


स्रोत और परीक्षण किए नमूनों की संख्या इस प्रकार थी:
i) अहमदाबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (एएमसी) पानी की आपूर्ति (22)
ii) नर्मदा के पानी की आपूर्ति (10)
iii) बोरवेल भूजल आपूर्ति (7)
iv) ग्राम पंचायत नगर पालिका पानी की आपूर्ति (1)
v) टैंक पानी (7)

हमने चार मापदंडों पर पीने के पानी का परीक्षण किया :

(क) दृश्य परीक्षा;
(ख) टीडीएस;
(ग) कॉलिफॉर्म और
(घ) ई.कोलाई।

ये परीक्षण भारतीय पेयजल मानक - विनिर्देश। (प्रथम संशोधन) IS 10500:1991 अनुसार किए गए। मानक के अनुसार, कॉलिफॉर्म और ई.कोलाई 100 ml में नहीं होने चाहिए। इसके अलावा, कुल विलीन ठोस (टीडीएस) जिसमें ज्यादातर अकार्बनिक लवण शामिल हैं 500 mg/L से अधिक नहीं होना चाहिए।

मुख्य निष्कर्ष


- टैंक से लिये पानी के सभी 7 नमूने कॉलीफॉर्म की भिन्न-भिन्न मात्रा से संदूषित थे और कुछ में ई. कोलाई भी था। तीन स्रोतों -नर्मदा, एएमसी और बोरवेल का पीने का पानी जब टैंकों से लिया गया तब उनमें कॉलिफॉर्म था।

अन्य 40 नमूने, कॉलिफॉर्म और ई. कोलाई से मुक्त थे, साफ थे और बिना गंध के थे।बोरवेल के सभी नमूनों और ग्राम पंचायत नगर पालिका पानी की आपूर्ति के नमूनों में टीडीएस निर्धारित सीमा से अधिक पाया गया। ये मान 700-1000 mg/L थे।

एएमसी पानी की आपूर्ति और नर्मदा के पानी की आपूर्ति वाले सभी नमूनों में टीडीएस निर्धारित सीमा के भीतर था।

टैंक साफ रखें


पानी के टैंक की दीवारों, छत और फर्श पर तलछट और काई जमा हो जाती है। समय के साथ, इस पानी में बैक्टीरिया पैदा हो जाती है और प्रजनन करते हैं और हमें बीमार करते हैं। टैंक से पानी का प्रयोग दाँतों को ब्रश करने, स्नान करने, बर्तन धोने और यहाँ तक कि खाना पकाने के लिये भी किया जाता है। अत: टैंक की नियमित सफाई नहीं करना लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करना है।

एक निवासी के रूप में, यह सुनिश्चित करें कि आपकी बिल्डिंग सोसायटी के चेयरमैन नियमित आधार पर टैंक की सफाई सेवाएं उपलब्ध कराने वाली कंपनियों को काम पर लगाएँ। आप बंगले में रहते हैं तो समय-समय पर टैंक की सफाई सुनिश्चित करें। आम तौर पर टैंक की सफाई के लिये दो तरीकों को अपनाया जाता है। मैनुअल विधि में, एक मजदूर टंकी में जाता है और रगड़ कर साफ कर देता है। यह तरीका कठिन और समय लेने वाला है।

स्वचालित विधि में सफाई के लिये वाटर जेट क्लीनर और वेक्यूम पंप का उपयोग किया जाता है। फिर पानी शुद्ध करने के लिये क्लोरिन तथा अन्य ऐन्टी बैक्टीरियल एजेंट का इस्तेमाल किया जाता है। कभी-कभी बचे हुए बैक्टीरिया को मारने के लिये पराबैंगनी विकिरण का प्रयोग किया जाता है। टैंक में बचे क्लोरीन स्तर की जाँच की जाती है और यह स्वीकार्य होने पर टैंक इस्तेमाल के लिये तैयार हो जाता है। स्वचालित सफाई के चार्ज टैंक के आकार (पानी की क्षमता) और हालत पर निर्भर करते हैं उदाहरण के लिये, एक 10,000 लीटर वाली टंकी के लिये शुल्क करीब 800-900 रुपया है।

उच्च टीडीएस स्तर का प्रभाव


उच्च टीडीएस की वजह से, पानी, कड़वा, नमकीन या धातु के स्वाद वाला हो सकता है और उसमें बदबू आ सकती है। टीडीएस बनाने वाले कुछ खनिज लवणों, विशेषकर, नाइट्रेट, सोडियम, सल्फेट, बेरियम, कैडमियम, तांबा और फ्लोराइड से स्वास्थ्य को खतरा होता है। पानी में उच्च टीडीएस से पानी के पाइप, हीटर, बॉयलर और घरेलू उपकरणों में काफी पपड़ी जमा हो जाती है।

ग्राहक साथी के निष्कर्ष


पानी की टंकी को साफ रखना बिल्डिंग सोसायटी या बंगले की पानी की सुविधा को बनाए रखने का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा है। याद रखें, टैंक के पानी का उपयोग करने से पहले उसे साफ करने की प्रक्रिया से गुजारा जाए। उच्च टीडीएस के स्तर के लिये, रिवर्स ऑस्मोसिस (आरओ) सिस्टम का उपयोग करें और एक पद्धति के रूप में वर्षाजल संचयन को अपनाएँ।

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