पानी

Submitted by admin on Thu, 09/19/2013 - 16:12
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नवनीत हिंदी डाइजेस्ट, जून 2013
पानी कई-कई बार हमें अपनों से दूर ले गया
उसने हमारी कागज की नावें ही नहीं
सचमुच की नावें और जहाज डुबा दिये
हमारे खिलौने छीन लिये
बेशकीमती चीजें लूट लीं
और कहीं भीतर अपने तलघट में छिपा दिया
बेघरबार कर दिया हमारे बच्चों को
हमारे खेतों को तहस-नहस कर डाला
हमें भूख के हाथों बिलबिलाता हुआ छोड़ दिया
वह हमारी स्त्रियों और बच्चों को
चुरा कर ले गया
भयानक मगर पनीले सांप और खतरनाक
मछलियों को पाला उसने
और हमें डराने की हर संभव कोशिश की
लेकिन हम उससे डरे नहीं
डरते भी तो कहां जाते
वह हमारे घड़ों में था
हमारे गगरों और कसेड़ियों में
वह हमारे मोतियों पर चमक की तरह मौजूद था
वह हमारे कपड़े धोता था हमें नहलाता धुलाता था
यहां तक कि वह हमारी देह में सबसे ज्यादा
जगह घेरे हुए था
और कभी-कभी जब आंख में डबडबा आता था
तो उससे सारे गिले-शिकवे खत्म हो जाते थे।

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