प्राचीनतम नदी क्षिप्रा को प्रदूषण मुक्त बनाने की रूपरेखा तैयार

Submitted by Hindi on Fri, 10/24/2014 - 12:01
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प्रजातंत्र लाइव, 06 सितंबर 2014
.मध्यप्रदेश के उज्जैन में वर्ष 2016 में होने वाले सिंहस्थ महापर्व के मद्देनजर देश की सबसे प्राचीनतम नदियों में से एक क्षिप्रा नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने के प्रयासों में तेजी लाई जाएगी। सबसे प्राचीन ग्रंथ स्कंद पुराण में रेखांकित करते हुए लिखा गया है कि (नास्ति वास मही पृष्ठे क्षिप्राया सदृश नदी) यानी कि इसके स्मरण मात्र से मनुष्य के जन्म जमांतर के पापों का नाश हो जाता है इसलिए पुराने समय से इस नदी को मोक्षदायिनी क्षिप्रा नदी के रुप में माना जाता है। भारत के प्राचीन धार्मिक नगरी इलाहाबाद, नासिक, हरिद्वार एवं उज्जैन में प्रति बारह वर्ष के अंतराल में दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजन कुंभ महापर्व आयोजित किया जाता है। लेकिन उज्जैन में इसे सिंहस्थ के नाम से जाना जाता है।

यह महापर्व यहां आगामी 2016 में सिंहस्थ महापर्व आयोजित होगा। पिछले कई वर्षों से केंद्र एवं राज्य सरकारों के अलावा स्थानीय संगठनों तथा संस्थाओं ने क्षिप्रा नदी को प्रदूषण से मुक्त करने के लिए करोड़ों रुपए की कार्ययोजना तैयार कर काफी प्रयास किए गए। आधिकारिक जानकारी के अनुसार उज्जैन संभाग के देवास जिले क्षेत्र से निकलने वाली क्षिप्रा नदी को पुनर्जीवित करने और इसकी धार्मिक, पौराणिक तथा ऐतिहासिक गरिमा को पुनर्स्थापित करने के प्रयासो के तहत गत दिनों संभागायुक्त डॉ. रवींद्र पस्तोर ने उज्जैन तथा देवास जिले के क्षिप्रा कैचमेंट एरिया से आए 300 से अधिक सरपंचो एवं सचिवो को इसके जल संरक्षण एवं ग्रामीण विकास से जुड़े अधिकारी एवं कर्मचारियों को भूजल संवर्धन, जल संचय और पर्यावरण संरक्षण का गत दिनों यहां संकल्प दिलवाया।

डॉ. पस्तोर ने बताया कि वर्तमान में क्षिप्रा की जो स्थिति है वह किसी से छिपी नहीं है और देवास क्षेत्र से निकलकर इंदौर-उज्जैन जिले से गुजर रही क्षिप्रा नदी की धारा में जनसंख्या के बढ़ते दबाव के कारण कितना प्रदूषण हो रहा है। यह सुस्पष्ट है। आज क्षिप्रा नदी अपने प्राकृतिक स्वरुप में नहीं है। कार्यशाला में नदी संरक्षण पर पॉवर पॉइंट प्रेजेटेंशन के माध्यम से संभागायुक्त ने विस्तृत कार्ययोजना के जरिए तीन सौ से अधिक सरपंच एवं सचिवों को मार्गदर्शन देते हुए बताया कि नदी का पुनर्जीवन का कार्य एक जीवन शैली है तथा जीवन जीने का तरीका तभी बदलेगा जब नदी पर आश्रित जितने भी लोग है वे ऐसी रणनीति बनाकर कार्य करें। जो दीर्घकाल तक स्थाई रहे।

संभागायुक्त ने क्षिप्रा नदी में मिलने वाली खान नदी एवं नालों की दिशा बदलने के कार्य के लिए शासन स्तर पर योजना बनाई जाने की जानकारी देते हुए बताया कि इन सब गतिविधियों के लिए एक वर्ष का लक्ष्य निर्धारित कर कार्य करने को कहा है। इससे पहले नवम्बर 2012 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नदी जोड़ो अभियान को पूरा करने के उद्देश्य से नर्मदा क्षिप्रा नदी से मिलाने के लिए 4 अरब 32 करोड़ रुपए की नर्मदा क्षिप्रा सिंहस्थ लिंक परियोजना का प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुरुआत की थी ताकि दो नदियों नर्मदा तथा क्षिप्रा का संगम होगा तथा बारहमास क्षिप्रा नदी में जल प्रवाहित होगा। इसके अलावा इस योजना से मालवा के करीब 70 शहर तथा तीन हजार गांव को सीधा लाभ मिलेगा।

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