संवैधानिक तंत्र का बदलता चेहरा और मीडिया के विषय पर सातवाँ मीडिया सम्मेलन

Submitted by Hindi on Sun, 06/02/2013 - 11:31
सुखतवा , केसला (इटारसी)
29-30 जून, 1 जुलाई 2013
साथियों
ज़िन्दाबाद !


विकास और जनसरोकार के मुद्दों पर बातचीत का सिलसिला साल-दर-साल आगे बढ़ता ही जा रहा है | हालाँकि इस बार हम अपने तय समय से थोडा देर से करने जा रहे हैं, लेकिन कई बार मार्च में संसद और राज्य विधानसभाओं के सत्र और बजट की आपाधापी में फंसने के कारण बहुत सारे साथी आ नहीं पाते थे | तो इसबार सोचा थोड़ा लेट चलें, ताकि सभी लोग एक साथ मिल सकें |

आप सब जानते ही हैं कि यह सफ़र सतपुड़ा की रानी पचमढ़ी से शुरू हुआ | बांधवगढ़, चित्रकूट, महेश्वर, छतरपुर, फिर पचमढ़ी के बाद इस बार हम केसला में यह आयोजन करने जा रहे हैं | इस बार कई दौर की बैठकों के बाद केसला संवाद के लिए जो विषय चुना गया है, वह है |

संवैधानिक तंत्र का बदलता चेहरा और मीडिया


कृपया विषय व स्थान चयन के लिए अपनी-अपनी राय दर्ज कराएँ..और आखिर में इस निवेदन के साथ कि आपकी उपस्थिति इन विषयों पर सार्थक हस्तक्षेप के साथ सम्मेलन को सफल बनाएगी|

सुखतवा के विषय में


इस बार इस कारवाँ को हम मध्यप्रदेश के एक और विशेष क्षेत्र में जाने कीयोजना बना रहे हैं | यह है होशंगाबाद जिले में इटारसी के पास का केसला |केसला के पास ही है सुखतवा | यहीं पर है तवा बाँध, जिसके रिसाव से ही तवाके आसपास की मिट्टी के खराब होने का दंश भोग रहे हैं लोग | पास ही एकगाँव है धाईं | बोरी अभ्यारण्य के विस्तार से विस्थापित हुए गाँवों कासरकारी आदर्श पुनर्वास स्थल, जो बार-बार यही सवाल छोड़ता है कि यदि यहआदर्श पुनर्वास है तो फिर ........ ? मध्यभारत में मिलिट्री के जवानो केलिए गोला-बारूद बनाने वाली आयुध निर्माणी, इटारसी का परीक्षण केंद्र हैताकू | जिसके आसपास के हर गाँव में आपको विधवाएं मिलेंगी या मिलेंगेविकलांग, ये वे लोग हैं जो कि तोप के गोलों के जले हुए खोल बीनते हुए इसदशा में पहुंचे हैं |

सेना के लिए उनकी जान और उनके कटे अंग के कोई मायने नहीं है क्यूंकि वहतो संरक्षित क्षेत्र है और यदि इन आदिवासियों को भूख सताए और वे फिर भीउस क्षेत्र में चले जाएँ तो यह सेना का दोष नहीं ...... । इसी क्षेत्रमें समाजवादी जन परिषद का राजनैतिक कार्यक्षेत्र भी हम देख पायेंगे वसंगठन की ताकत के बलबूते चुनिन्दा संघर्षों को। पास ही में है सुखतवाचिकन का एक अनूठा प्रयोग तो ऐसा है केसला और उसके पास के कुछ जमीनीमुद्दे | हमारा स्वागत करने को आतुर होंगे सतपुड़ा के घने और सचेत जंगल,विकास की चकाचौंध में लिपटे विनाश के नए मॉडल तवा बांध पर खड़े होकर हमतवा नदी का दीदार भी कर सकते हैं ।

यही है केसला (सुखतवा) ।
तो आप आ रहे हैं ना .....
स्था न : इटारसी के पास सुखतवा
तारीख : 29, 30 जून और 1 जुलाई

कैसे पहुंचे : दिल्लीा, मुंबई, यूपी, बिहार, नागपुर, रायपुर, चेन्नईई औरकोलकाता से जुड़ा है इटारसी जंक्श
जिन साथियों ने अपनी उपस्थि ति के बारे में कन्फीर्मेशन नहीं दिया हैउनसे अनुरोध है की 15 जून 2013 तक कन्फ र्मेशन देने का कष्ट करें जिससेकी व्यवस्थागत तैयारियां की जा सकें ।

धन्यवाद
प्रशांत/रोली/सचिन/सौमित्र
विकास संवाद

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