stupidsid.com : छात्रों की मदद को वेबसाइट

Submitted by admin on Wed, 07/30/2014 - 10:35
Source
दैनिक भास्कर, 30 जुलाई 2014
'स्टूपिडसिड डॉट कॉम' छात्रों के बीच खूब चर्चित वेबसाइट है। कभी-कभी तो एक दिन में 50 हजार से भी ज्यादा लोग इस वेबसाइट पर आते हैं। इंजीनियरिंग व यूनिवर्सिटियों में एडमिशन की इच्छा रखने वाले छात्रों के बीच यह वेबसाइट एक गाइड के तौर पर प्रतिष्ठित हो गई है। इंजीनियरिंग कॉलेजों के बारे में इस बेवसाइट पर भरपूर सामग्री है। विज्ञापन आय से ही लगभग 65 लाख रुपए की आय हो जाती है। छात्रों की मदद करके सफल होने के एक नायाब फॉर्मूले का उदाहरण है 'स्टूपिडसिड डॉट कॉम'

वेबसाइट 2010 में लॉन्च हुई। शुरू से ही इस पर ट्रैफिक इतना ज्यादा रहा कि चार साल में यह हर स्टूडेंट के लिए गाइड, सेक्रेटरी और हैल्पर बन गई। सामान्य दिनों में इस साइट पर हर रोज 35,000 स्टूडेंट्स किसी-किसी किस्म की मदद तलाशने के लिए पहुंचते हैं। जबकि जून से अक्टूबर के महीनों में यह तादाद हर रोज 50,000 तक पहुंच जाती है। एक वेबसाइट है, 'स्टूपिडसिड डॉट कॉम'। इसके विज्ञापन की टैगलाइन है, 'आपको अमेरिका का साउंड पसंद है- वैल, अंकल सैम को आपकी भी जरूरत है। उन्होंने हमें आपकी मदद करने को कहा है।' यह टैगलाइन आपको सिर्फ इस साइट पर ही नजर आएगी। क्योंकि इस साइट ने कभी किसी और माध्यम से इसका विज्ञापन नहीं किया। शायद उसे जरूरत भी नहीं है।

यह वेबसाइट 2010 में लॉन्च हुई। शुरू से ही इस पर ट्रैफिक इतना ज्यादा रहा कि चार साल में यह हर स्टूडेंट के लिए गाइड, सेक्रेटरी और हैल्पर बन गई। सामान्य दिनों में इस साइट पर हर रोज 35,000 स्टूडेंट्स किसी-किसी किस्म की मदद तलाशने के लिए पहुंचते हैं। जबकि जून से अक्टूबर के महीनों में यह तादाद हर रोज 50,000 तक पहुंच जाती है।

ये पांच महीने एडमिशन के होते हैं। और इंजीनियरिंग कॉलेज या यूनवर्सिटियों में एडमिशन की इच्छा रखने वाले हर स्टूडेंट को इस वक्त गाइड चाहिए होता है। इंजीनियरिंग से जुड़ी जानकारियों के मामले में इस वक्त शायद इस वेबसाइट के पास सबसे बड़ा डाटा बेस है। मुंबई यूनिवर्सिटी के तहत आने वाले सभी 65 इंजीनियरिंग कॉलेजों की इस पर जानकारी है।

दिल्ली, पुणे, हैदराबाद, चेन्नई, अहमदाबाद और बेंगलुरू के 600 इंजीनियरिंग कॉलेजों के बारे में भी इस साइट पर जानकारी है। भले ही वे चाहे प्राइवेट हों या सरकारी। सभी कॉलेजों की समीक्षा इस पर उपलब्ध है। यह बच्चों को बताती है कि किस कॉलेज का क्या रैकिंग है। वहां स्कॉलरशिप की क्या स्थिति है। जीमैट के एक्जाम में किस तरह शामिल हुआ जा सकता है।

छह लोग इस साइट पर स्थायी तौर पर काम करते हैं। इतने ही अस्थायी इंटर्न भी हैं। जबकि चार लड़के इसके मालिक हैं। सुमित जैन, कश्यप मातानी, जिनेश बगड़िया और तुमुल बुच ने इस साइट को शुरू किया। शुरुआत में आइडिया इस तरह आया कि खाली वक्त में क्या किया जाए। चारों यह मानते थे कि कुछ भी करें लेकिन वह फिजूल नहीं होना चाहिए, काम का हो।विदेशों के कॉलेज/यूनिवर्सिटियों के एप्लीकेशन और वहां जाने के वीजा फॉर्म कैसे भरना है, यह भी साइट पर बताया जाता है। यहां तक कि देश के किस कॉलेज में वाईफाई इंटरनेट कितनी स्पीड से चलता है। कैंटीन में खाना कैसा मिलता है। आधारभूत सुविधाओं की क्या स्थिति है।

फैकल्टी मेंबर कैसे और किस स्तर के हैं, ये सभी जानकारियां साइट पर लगातार अपडेट होती है। यह साइट महज कुछ सौ रुपए से शुरू की गई। कभी अपने बारे में किसी माध्यम में विज्ञापन नहीं दिया। इसके बावजूद इसकी लोकप्रियता देखिए। इस साल इसे मिलने वाले विज्ञापनों से 65 लाख रुपए तक की कमाई होने की संभावना है।

छह लोग इस साइट पर स्थायी तौर पर काम करते हैं। इतने ही अस्थायी इंटर्न भी हैं। जबकि चार लड़के इसके मालिक हैं। सुमित जैन, कश्यप मातानी, जिनेश बगड़िया और तुमुल बुच ने इस साइट को शुरू किया।

शुरुआत में आइडिया इस तरह आया कि खाली वक्त में क्या किया जाए। चारों यह मानते थे कि कुछ भी करें लेकिन वह फिजूल नहीं होना चाहिए, काम का हो। और बस बैठे-ठाले वेबसाइट शुरू करने का विचार बन गया। आज इस साइट को बड़े संस्थान भी गंभीरता से लेते हैं। इसकी वजह भी है।

इस वेबसाइट पर दी गई समीक्षा और रैकिंग से संबंधित संस्थानों की एडमिशन प्रक्रिया प्रभावित होने लगी है। संस्थानों से संबंधित जानकारी दो तरीके से जुटाई जाती है। पहला तो वहां मौजूदा 100 स्टूडेंट्स से एक फॉर्म भरवाया जाता है।

दूसरा संस्थानों में फिजिकल सर्वे भी कराया जाता है। इसके बाद उनकी समीक्षा लिखी जाती है और रैकिंग दी जाती है। खास बात ये है कि सर्वे करने वाले इस साइट के लिए मुफ्त में सेवा देते हैं।

साइट पर 100 रुपए के शुल्क पर इंजीनियरिंग के सॉल्व्ड पेपर भी उपलब्ध होते हैं। अगले दौर की योजना भी तैयार है। जल्दी ही इस पर देशभर के कॉलेजों के हिसाब से सब्जेक्ट वाइज नोट्स भी उपलब्ध होने लगेंगे। ताकि अगर कोई स्टूडेंट किसी कारण से क्लास अटेंड कर सके तो उसे कुछ पैसे देकर साइट से नोट्स हासिल हो जाएं। इस साइट के प्रति बच्चों के आकर्षण की एक और वजह है। इस पर पार्टटाइम जॉब की जानकारी हमेशा अपडेट होती है।कभी कोई संस्थान या एआईसीटीई (ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन) रैकिंग सिस्टम या समीक्षा को चुनौती भी दे देता है। ऐसे में वेबसाइट के पास हर वक्त दस्तावेजी सबूत मौजूद होते हैं। साइट पर 100 रुपए के शुल्क पर इंजीनियरिंग के सॉल्व्ड पेपर भी उपलब्ध होते हैं।

अगले दौर की योजना भी तैयार है। जल्दी ही इस पर देशभर के कॉलेजों के हिसाब से सब्जेक्ट वाइज नोट्स भी उपलब्ध होने लगेंगे। ताकि अगर कोई स्टूडेंट किसी कारण से क्लास अटेंड कर सके तो उसे कुछ पैसे देकर साइट से नोट्स हासिल हो जाएं। इस साइट के प्रति बच्चों के आकर्षण की एक और वजह है। इस पर पार्टटाइम जॉब की जानकारी हमेशा अपडेट होती है।

छोटे शहरों और मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चे भी चाहते हैं कि उन्हें पार्ट टाइम जॉब मिल जाए। ताकि वे अपनी पढ़ाई पर होने वाले खर्च के बोझ को माता-पिता के ऊपर से थोड़ा हल्का कर सकें। और यह साइट उन्हें इसका मौका देती है। कोचिंग क्लासेस और ट्यूशन सेंटर्स की जानकारी भी इस पर उपलब्ध है। इससे बच्चों को सही रास्ता चुनने में मदद मिलती है।

स्टूपिडसिड डॉट कॉम

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