विरासत

Submitted by Hindi on Sat, 06/25/2011 - 09:35
ये माना कि घर में रोटी नहीं थी
पहाड़ ये जमी तोड़ी फोड़ी नहीं थी।

विद-बिद चला, जमी बिकती नहीं थी
महफूज जंगल, गाड़ा भीड़ा छी
धारे थे नौले थे, बहती नदी थी
हरयाली खेतों से, गौ का चमन छी।
ये माना कि........................।

स्कूल में मास्टर, हांग में हलिया
ठांगर में लकदक, लगुली चढी थी
हिसालु-किलमोड़ी, स्योंते गुदा कैं
नानतिन सयाणा, प्यारल ठुंगछी।
ये माना कि........................।

गोबर सने हाथ, नामकन बाछी का
नानतिनका घर में , रौनक बड़ी थी
भैसी ब्याही थी, थोरी आपण छी
मैंसनकसाकस, नाम धरी छी।
ये माना कि .......................।

झगड़े थे-लफड़े थे, हांग-फांग, जंगल के
झित घड़ी रीस, रिसाई भली थी
लैंपों के रोशन से, दिल जो सजे थे
ओढोंका गोंपन, बामण बसी छी।
ये माना कि............................।

सौर ज्यूका इज्जत, ब्वारी ढयौंके छी
खौकी हली, दर्जी, नायी, ल्वारा छी
कोट ना कचरी, सिस्टम बड़ी छी
अन्याव देखुणी, चैकी भैरू छी।
ये माना कि.............................।

हाथ खुटी जोड़ीबे, कुर्सीम बैठणक
विश्वास तोड़ी, घर कुड़ी बेचणक
नियत नि छी, खात बैंक भरीबे
दिली भाजणक, घर ताव ठोकणक।
ये माना कि...............................।

कौन बैठा है, दूदक पहरू
बिरालु हाथमा, चाबी-कुछी दीरै
खून का थ्यौपा, गिजी लागीरै
विचारी बाकरी, हलकन भैरै।
ये माना कि ......................।

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