यमुना को देख छलके आंसू

Submitted by Hindi on Thu, 04/28/2011 - 08:56
Source
दैनिक भास्कर, 28 अप्रैल 2011

खिजराबाद (यमुनानगर)। यमनोत्री से वृंदावन तक सीधे यमुना का पानी मांग रहा यमुना बचाओ आंदोलन का दल बुधवार को यमुनानगर में हथिनीकुंड बैराज तक पहुंच गया। इलाहाबाद से तीन मार्च को चले दल के लोग जब यहां पहुंचे तो यमुना नदी की हालत देखकर उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। यमुना बचाओ आंदोलन के सदस्यों ने बताया कि जो पानी हमें वृंदावन में मिल रहा है, वह यमुना का नहीं है। उसे तो हथिनीकुंड में कैद कर लिया। हमें तो दिल्ली के सीवर का पानी दिया जा रहा है। और, हम हैं कि इसे ही यमुना जल समझ कर पूजा रहे हैं। अब यह अन्याय नहीं सहेंगे। यमुना का पानी लेकर रहेंगे।

 

 

रेगिस्तान में बदल रही नदी


दल के नेतृत्व कर रहे मान मंदिर सेवा संस्थान के जयकृष्ण दास और भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष भानू प्रताप सिंह ने बताया कि यमुना के साथ अन्याय अब बर्दाश्त नहीं करेंगे। शिष्टमंडल में आए रवि मोंगा ने कहा कि पहाड़ से मैदान में आते ही नदी की यह हालत है। नारायण दास व राजेंद्र प्रसाद शास्त्री ने कहा कि यमुना नदी का पानी सरकारों ने अपने आप ही बांट लिया है। जबकि यमुना नदी तो पूरे भारत की है। इस पर सभी का हक है। नदी से लोगों की धार्मिक आस्था जुड़ी है। होना तो यह चाहिए कि नदी को बचाने की कोशिश होनी चाहिए। इसके उलट इस वजह से यमुना नदी सूख कर रेगिस्तान हो गई है। जहां पत्थर व रेत के सिवाय कुछ भी नजर नहीं आ रहा है।

 

 

 

 

हथनीकुंड से नहीं छोड़ा जा रहा पर्याप्त पानी


यमुना की अविरल जलधारा को लगातार जारी रखने के लिए अनशन करने वाले साधु-संत व किसान सरकार के आश्वासन के बाद अब खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। इनका आरोप है कि हथिनीकुंड से यमुना में पर्याप्त पानी नहीं छोड़ा जाता है, जिसकी वजह से यमुना मृतप्राय है। ज्ञात हो कि यमुना में पानी के बहाव को जारी रखने के लिए पिछले सप्ताह एक कमेटी का गठन किया गया था। कमेटी में केन्द्र सरकार और हरियाणा सरकार के अलावा अनशन पर बैठे संतों और किसानों के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया गया है। इस समिति के सदस्यों ने बुधवार को हथिनीकुंड का दौरा किया। दौरे के बाद प्रतिनिधियों में गहरा रोष है। उनका कहना है कि हरियाणा का सिंचाई विभाग दावा तो करता है कि हथिनीकुंड से यमुना में 160 क्यूसेक पानी छोड़ा जाता है, लेकिन वास्तविक स्थिति इसके विपरीत है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यमुना में रोजाना पानी नहीं छोड़ा जाता है। वैसे, हथिनीकुंड में पानी की मात्रा पर्याप्त है और यदि इस पानी को छोड़ा जाए तो यमुना के प्रदूषण में काफी हद तक कमी आ जाएगी।

यमुना बचाओ पदयात्रा समिति के प्रवक्ता नितेश का कहना है कि सरकार हमें अंधेरे में रख रही है। उन्होंने कहा बुधवार को सुबह में नदी सूखी हुई थी, लेकिन प्रतिनिधियों के आने से पहले नदी में पानी छोड़ा गया। यमुना बचाओ पदयात्रा समिति और भारतीय किसान यूनियन के सदस्य गुरुवार को वजीराबाद बैराज का दौरा करेंगे और पानी की गुणवत्ता तथा पानी की मात्रा का जायजा लेंगे। इसके अलावा, इस मामले में जंतर-मंतर पर दोबारा एक बड़ी रैली का आयोजन किया जाएगा।

 

 

 

 

आंदोलन


यह यात्रा तीन मार्च को इलाहाबाद से चली है। 14 अप्रैल को दिल्ली पहुंची। यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी, मंत्री जयराम रमेश से मिले। वहां उन्हें आश्वासन दिया गया कि यमुना नदी में यमनोत्री का पानी वृंदावन तक दिया जाएगा।

 

 

 

 

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