पानी से लबालब रहने वाला उत्तर बिहार सूखे की चपेट में

Submitted by UrbanWater on Thu, 06/13/2019 - 15:26

उत्तर बिहार इस बार भीषण सूखे की चपेट में है।उत्तर बिहार इस बार भीषण सूखे की चपेट में है।

अपनी नदियों, धाराओं, तालाबों के लिए दुनिया भर में जाना जाने वाला जल संपन्न इलाका उत्तर बिहार इस बार भीषण सूखे की चपेट में है। हैंडपंप सूख गये हैं, भूमिगत जलस्तर तेजी से नीचे गिर रहा है। एशिया का मीठे पानी का सबसे बड़ा गोखुर झील काबर पूरी तरह सूख गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसकी वजह भूमिगत जल का असंतुलित दोहन और तालाब-नदियों-चौरों पर भू-माफिया द्वारा कब्जा किये जाना है। इसी पृष्ठभूमि में दरभंगा शहर में एक बिहार डायलॉग का आयोजन किया गया। 

दिनांक 9 जून, 2019 को दरभंगा विवि के संगीत-नाटक विभाग के सभागार में बिहार डायलाॅग का आयोजन हुआ। बिहार डायलॉग में बोलते हुए जल विशेषज्ञ पूर्व सचिव गजानन मिश्र ने कहा कि जल सम्पन्न और बाढ़ ग्रस्त इलाका होने के कारण अब तक हमारी और सरकार की सोच पानी भगाने की रही है, लेकिन अब पानी को सहेजने की जरूरत है। उन्होंने उत्तर बिहार के जल संकट के कारणों का उल्लेख किया और इसके समाधान बताये। उन्होंने दरभंगा के नक्शे को दिखाकर विस्तार से बताया कि इस इलाके के मौजूदा जल संकट की वजह क्या है?  पत्रकार आशीष झा ने दरभंगा के इतिहास के साथ-साथ इस भवन के इतिहास पर भी प्रकाश डाला और एक विस्तृत जानकारी दी। कार्यक्रम का संचालन कर रहे पत्रकार पुष्यमित्र ने बताया कि यह विषय ‘पग पग पोखर’ वाले दरभंगा के लिए कितनी जरूरी है क्योंकि जहां पहले इस शहर में 250 पोखर या तालाब थे। वहीं अब इनकी संख्या सिर्फ 80 रह गयी है जिसके कारण आज दरभंगा में टैंकरों से पानी को उपलब्ध कराया जा रहा है। 

नारायण चौधरी जो दरभंगा शहर में पोखर को संरक्षित करने के लिए करीब 10 साल से ज्यादा से लगातार काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब मैं राजस्थान में था तो वहां के गौरवशाली इतिहास को देख कर लगा कि हमारे पास सम्पति के नाम पर क्या है तो मेरा ध्यान दरभंगा शहर के नदियों और तालाबों पर गया। जिसमें से कई तालाब 500 से 700 वर्ष पुराने हैं लेकिन उनका रख-रखाव ठीक ढंग से नहीं हो रहा है। नदियों की प्रकृति पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि नदियों को साफ रखने में उसमें उपस्थित जीव काफी महत्वपूर्ण थे जैसे कि घोंघा, सुतवा, ये नदी के किनारों को साफ करते थे, जो आजकल कहीं भी नहीं दिखते। इतिहास के अध्येता अवनीन्द्र कुमार झा ने बताया कि क्यों समाज और सरकार इस समस्या के प्रति सचेत नहीं है? विवि सीनेट के सदस्य सन्तोष कुमार ने कहा कि इस विषय को बच्चों और युवाओं को बताने की जरूरत है।  

बिहार डायलाॅग संवाद में मुख्य वक्ता उत्तर बिहार की नदियों और जल संसाधनों के विशेषज्ञ बिहार सरकार के जल संसाधन विभाग के पूर्व सचिव श्री गजानन मिश्र थे। उनके अलावा दरभंगा में तालाबों के संरक्षण का अभियान चलाने वाले श्री नारायण जी चौधरी, क्षेत्रीय इतिहास के जानकार श्री अवनींद्र नाथ झा, विवि के सीनेट सदस्य संतोष कुमार और मनीष राज, संगीत-नाटक विभाग की अध्यक्ष डॉ. लावण्य कीर्ति सिंह आदि लोगों ने अपने विचार रखे। 

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