सौभाग्य हर घर बिजली का लक्ष्य

Submitted by editorial on Fri, 09/07/2018 - 15:21
Source
कुरुक्षेत्र, अगस्त, 2018

ग्रामीण विद्युतीकरणग्रामीण विद्युतीकरण सरकारी सूत्रों के अनुसार 28 अप्रैल, 2017 को हर गाँव बिजली से जुड़ा घोषित कर दिया गया। गौरतलब है कि किसी गाँव को बिजली से जुड़ा घोषित करने के लिये वहाँ के लगभग 10 प्रतिशत घर, स्कूल, पंचायत, स्वास्थ्य केंद्र, डिस्पेंसरी और सामुदायिक भवनों तक बिजली की सप्लाई पहुँचना जरूरी है।

देश के कुल 5,77,464 गाँवों में अब बिजली पहुँचा दी गई है। इस क्रम का अन्तिम गाँव है मणिपुर राज्य के सेनापति जिले का लेइसांग गाँव। जिसे 28 अप्रैल, 2017 को राष्ट्रीय बिजली ग्रिड से जोड़ दिया गया। इस गाँव में कुल 19 परिवारों के 65 लोग रहते हैं जिनमें से 31 पुरुष और 34 महिलाएँ हैं। इसका श्रेय दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना (Deen Dayal Upadhyaya Gram Jyoti Yojana - DDUGJY) को जाता है।

एनडीए सरकार की 75,883 करोड़ रुपए की यह योजना वर्ष 2015 में शुरू की गई थी, तब देश के कुल 18,452 गाँव बिजली से वंचित थे। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 15 अगस्त, 2015 को लालकिले की प्राचीर से यह घोषणा की थी कि अगले 1000 दिन में देश के हरेक गाँव को बिजली से जोड़ दिया जाएगा। लेकिन, 1236 गाँव ऐसे भी हैं जहाँ कोई रहता नहीं है और 35 गाँवों को ‘चारागाह रिजर्व’ के रूप में घोषित किया गया है।

दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना को लागू करने का जिम्मा सरकार की ओर से संचालित ग्रामीण विद्युतीकरण निगम (आरईसी) को मिला था। बिजलीकरण में नोडल एजेंसी के रूप में कार्यरत आईईसी ने रिकॉर्ड समय के अन्दर अपने लक्ष्य को हासिल किया।

हर गाँव को बिजली पहुँचाने के बाद सरकार का अगला लक्ष्य देश के हर घर, चाहे वह शहर में हो या गाँव में, को बिजली पहुँचाना है। इस लक्ष्य पूर्ति के लिये सरकार ने 25 सितम्बर, 2017 को पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जन्म दिवस के दिन सौभाग्य (प्रधानमंत्री बिजली सहज हर घर योजना) योजना की शुरूआत की। योजना के अनुसार 31 मार्च, 2019 तक हर घर को बिजली पहुँचाकर उसे रोशन किया जाएगा। इस योजना पर कुल 16 हजार 320 करोड़ रुपए खर्च होंगे। फिलहाल सरकार ने इसके लिये 12 हजार 320 करोड़ रुपए का बजटीय आवंटन किया है।

सौभाग्य (Saubhagya)

इस योजना के लिये केन्द्र सरकार से 60 प्रतिशत अनुदान मिलेगा। जबकि राज्यों को 10 प्रतिशत लगाना होगा और शेष 30 प्रतिशत राशि को बतौर ऋण बैंकों से लेना होगा। विशेष राज्यों के लिये केन्द्र सरकार 85 प्रतिशत अनुदान देगी, बाकी का 5 प्रतिशत राज्य को लगाना होगा और बैंकों से सिर्फ 10 प्रतिशत ऋण लेना पड़ेगा। सौभाग्य योजना केन्द्र और राज्यों के सहयोग से क्रियान्वित होगी। इस योजना में 20 राज्यों पर जोर दिया गया है उनमें बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, ओडिशा, झारखण्ड, जम्मू एवं कश्मीर, पूर्वोत्तर राज्य और राजस्थान शामिल हैं।

इस योजना के अन्तर्गत चार करोड़ निर्धन परिवारों, जिनके पास अभी बिजली नहीं है, को बिजली के कनेक्शन दिए जाएँगे। बिजली कनेक्शन के लिये वर्ष 2011 की सामाजिक, आर्थिक और जातीय जनगणना को आधार माना जाएगा। जो लोग इस जनगणना में शामिल नहीं हैं यानी जो गरीबी रेखा से ऊपर हैं, उन्हें 500 रुपए में कनेक्शन दिया जाएगा और इसे 10 किश्तों में वसूला जाएगा। ‘सौभाग्य’ योजना का लाभ गाँव के लोगों के साथ-साथ शहरी लोगों को भी मिलेगा। उन्हें घर पर ही बिजली कनेक्शन मुहैया किया जाएगा। दरअसल, बिजली वितरण कम्पनियों (डिस्कॉम्स) द्वारा गाँवों में शिविर आयोजित किए जाएँगे। इसके जरिए लोग अॉन-द-स्पॉट बिजली कनेक्शन लेने के लिये आवेदन कर सकेंगे। इसके अलावा लोग अॉनलाइन और मोबाइल एप के जरिए भी बिजली कनेक्शन लेने के लिये आवेदन कर सकेंगे।

इस योजना के अन्तर्गत हर घर को निकटतम बिजली के खम्भे (इलेक्ट्रिक पोल) से बिजली कनेक्शन दिया जाएगा। खर्च हुई बिजली रीडिंग के लिये एक पॉवर मीटर तथा एकल लाइट प्वाइंट के लिये वायरिंग की जाएगी। साथ में एक एलईडी बल्ब दिया जाएगा तथा मोबाइल फोन चार्ज करने की व्यवस्था भी होगी। दूरस्थ स्थित गाँव, जहाँ परम्परागत ग्रिड द्वारा बिजली नहीं पहुँचाई जा सकती, को बैटरी बैंक के साथ 200-300 वॉट शीर्ष के सोलर पैक उपलब्ध कराए जाएँगे। साथ में 5 एलईडी लाईट, एक डी.सी फैन तथा एक डी.सी पॉवर प्लग भी मुहैया किया जाएगा। पाँच वर्ष तक रख-रखाव और मरम्मत की व्यवस्था भी होगी।

हालांकि देश के हर घर तक बिजली पहुँचाने के लक्ष्य को 31 मार्च, 2019 रखा गया है लेकिन व्यावहारिक रूप से यह कितना सम्भव होगा, यह तो समय ही बताएगा इस योजना के कार्यान्वयन के मार्ग में बहुत-सी अड़चनें हैं। केवल तारों को पहुँचा देने से ही विद्युतीकरण का लक्ष्य पूरा नहीं हो जाता। आधारभूत संरचना इस प्रकार होनी चाहिए कि हर घर तक बिजली पहुँचे।

इसके लिये लाइन डेफिशिट को कम करना तथा पॉवर कट के रिस्क को कम करना भी जरूरी है। जहाँ तक पॉवर मीटरों की बात है, ये प्रीपेड मीटर होंगे। इन मीटरों की मदद से समय पर बिजली का भुगतान हो सकेगा, साथ ही इन मीटरों की रीडिंग और बिलिंग जैसे कार्यों के लिये मानवशक्ति यानी मैन पॉवर की आवश्यकता भी नहीं पड़ेगी। लेकिन वर्तमान में सरकार द्वारा जिस दर से घरों को बिजली पहुँचाई जा रही है, उसे देखते हुए लगता है कि हर घर तक बिजली पहुँचाने का लक्ष्य 31 मार्च, 2019 से काफी आगे निकलेगा। नीचे सारणी में कुछ राज्यों के नाम दिए गए हैं जिनमें निर्धारित लक्ष्यों में से कुछ लक्ष्यों को हासिल कर लिया है, ये आँकड़े 22 मई, 2018 तक के हैं।
 

 

राज्य का नाम

लक्षित घरों की संख्या

कितने घरों में लक्ष्य हासिल हुआ

उत्तर प्रदेश

1,57,16,347

16,00,003

बिहार

40,75,330

8,60,855

ओडिशा

35,33,344

2,00,932

झारखण्ड

32,21,861

2,53,493

असम

26,27,074

2,44,798

मध्य प्रदेश

23,05,138

14,03,004

 

इन राज्यों में सबसे अच्छी स्थिति मध्य प्रदेश की लगती है। बाकी राज्य अपने निर्धारित लक्ष्य से काफी पीछे हैं। गौरतलब है कि ‘सौभाग्य’ योजना के लक्ष्य को हासिल करने के लिये प्रशिक्षित व्यक्तियों की भी आवश्यकता है। हालांकि पहले इनकी कमी हो रही थी, लेकिन अब कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय इस कमी को दूर करने के लिये प्रशिक्षित व्यक्तियों को चयनित राज्यों को मुहैया कराने के लिये पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। बेशक लक्ष्य 31 मार्च, 2019 तक पूरा होता है या नहीं, यह एक अलग मुद्दा है, लेकिन हर घर तक बिजली पहुँचाने का लक्ष्य रखने वाली सौभाग्य योजना निस्संदेह एक अच्छी योजना है और सरकार द्वारा लिया गया एक सकारात्मक कदम है जिसकी सराहना की जानी चाहिए।

कैसे पूरा होगा सौभाग्य योजना का लक्ष्य

आज हमारे देश में बिजली की कमी नहीं है। यह अलग बात है कि कई कारणों से अनेक गाँवों तक अब तक बिजली नहीं पहुँचाई जा सकी थी। हमारे देश में बिजली का उत्पादन मुख्य रूप से कोयले पर ही निर्भर रहा है हालांकि इसमें गैस, नाभिकीय ऊर्जा तथा नवीकरणीय स्रोतों से प्राप्त बिजली का भी योगदान है। गौरतलब है कि सन 2022 तक नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को 175 गीगावॉट रखा गया है। इसमें से सौर ऊर्जा का योगदान 100 गीगावॉट, पवन ऊर्जा का 60 गीगावॉट, बायोमास 10 गीगावॉट तथा लघु पनबिजली का योगदान 15 गीगावॉट है। जनवरी 2018 में 175 गीगावॉट के लक्ष्य को बढ़ाकर 227 गीगावॉट कर दिया गया है। सौर ऊर्जा युक्तियों पर छूट यानी सब्सिडी दिए जाने के कारण देश में सौर ऊर्जा पर आने वाली लागत कम होती जा रही है। वैसे भी भारत ग्रीन-हाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करने के लिये प्रतिबद्ध है। अतः देश में ग्रीन यानी हरित ऊर्जा स्रोतों के विकास को बढ़ावा दिया जा रहा है। पेट्रोल और डीजल से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिये सन 2030 तक भारत विद्युत वाहनों को लाने की योजना बना रहा है। साथ-ही-साथ कोयले पर निर्भरता कम करने के लिये 14 गीगावॉट विद्युत शक्ति के कोयले पर निर्भर ताप बिजलीघरों के निर्माण पर भी रोक लगा दी गई है।


गाँव में बिजलीगाँव में बिजलीबिजली के मामले में चोरी के अलावा संमरण एवं वितरण स्थिति (Distribution and Transmission loss) की समस्या भी जुड़ी है। खासकर ग्रामीण इलाकों में विद्युतीकरण की प्रक्रिया में अधिक संमरण लागत (Transmission cost) भी आती है। लेकिन दूरस्थ गाँवों तक परम्परागत यानी नेशनल ग्रिड द्वारा बिजली पहुँचाना सम्भव नहीं। इसमें नवीकरणीय ऊर्जाओं, जैसे कि सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जैवभार (बायोमास) ऊर्जा तथा बायोगैस ऊर्जा से ही काम लिया जाता है। हाल के वर्षों में मिनी सोलर ग्रिड, हाइब्रिड सोलर-विंड तथा हाइब्रिड सोलर-बायोगैस की संकल्पनाएँ भी उभर कर आई हैं। इससे विद्युतीकरण की प्रक्रिया आसान हुई है। आइए, इनके योगदान पर अब विशद रूप से चर्चा करते हैं।

सौर ऊर्जा, हाइब्रिड सोलर-विंड तथा मिनी सौर ग्रिड

हमारे देश में सौर ऊर्जा प्रचुरता से उपलब्ध है। सौर ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में फोटोवोल्टीय प्रणाली द्वारा बदला जा सकता है। इस प्रणाली में सौर पैनल होते हैं जो कई फोटोवोल्टीय सेलों (जिन्हें सामान्य भाषा में सौर सेल कहते हैं) से मिलकर बनते हैं। कई सौर पैनलों से मिलकर एक सौर एरे (Solar Array) बनता है। सौर ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में कंसन्ट्रेटेड सोलर पॉवर (Concentrated Solar Power - CSP) में लेंसों या दर्पणों एवं ट्रेकिंग प्रणालियों द्वारा भी बदला जा सकता है। इस प्रकार सूर्य के प्रकाश को एक संकीर्ण किरण पुंज के रूप में लाया जा सकता है।

गौरतलब है कि देश में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिये यूँ तो अनेक प्रयास हुए लेकिन एक मुख्य प्रयास 11 जनवरी, 2010 को जवाहर लाल नेहरू राष्ट्रीय सौर अभियान के साथ प्रारम्भ हुआ। इस अभियान का लक्ष्य सन 2022 तक 20,000 मेगावॉट ग्रिड सौर पॉवर तथा 2,000 मेगावॉट अॉफ ग्रिड सौर पॉवर का उत्पादन था। राष्ट्रीय सौर अभियान का लक्ष्य भारत को सौर ऊर्जा के क्षेत्र में वैश्विक और अग्रणी देश के रूप में स्थापित करना था। सरकार ने राष्ट्रीय सौर अभियान के लक्ष्य को संशोधित कर वर्ष 2022 तक 20,000 मेगावॉट की बजाय 1,00,000 मेगावॉट यानी 100 टेरावॉट का लक्ष्य तय किया।

सौर ऊर्जा स्थापित क्षमता (Installed Capacity) जनवरी 2018 में 20 टेरावॉट हो गई थी यानी राष्ट्रीय सौर अभियान के पूर्व लक्ष्य (20 टेरावॉट) को चार वर्ष पूर्व ही हासिल कर लिया गया है। यह इस ओर संकेत करता है कि किस तेजी से देश में सौर ऊर्जा का विकास हो रहा है। देश में सौर ऊर्जा की स्थापित क्षमता 31 मई, 2018 तक 21651.48 मेगावॉट थी। सौर पैनलों द्वारा उत्पन्न बिजली सुदूर दुर्गम ग्रामीण क्षेत्रों, जहाँ परम्परागत ग्रिड द्वारा बिजली पहुँचाना सम्भव नहीं है, में पहुँचाई जा सकती है। सौर पैनलों से उत्पन्न विद्युत से पम्पों को चलाया जा सकता है। इन्हें सौर पम्प की संज्ञा दी जाती है। खेतों की सिंचाई के अलावा इन सौर पम्पों का उपयोग मत्स्य पालन, वानिकी, पेयजल की आपूर्ति तथा नमक बनाने में भी किया जा सकता है।

सौर ऊर्जा के अलावा विद्युतीकरण में पवन ऊर्जा की भी महत्त्वपूर्ण भूमिका है। देश में पवन ऊर्जा की स्थापित क्षमता 31 मई, 2018 तक 34,046 मेगावॉट थी। पवन ऊर्जा से प्राप्त विद्युत को नेशनल ग्रिड के साथ जोड़ा जाता है। देश की कुल विद्युत क्षमता का लगभग 10 प्रतिशत हमें पवन ऊर्जा से ही प्राप्त होता है। मई 2018 में नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) ने नई विंडसोलर नीति की घोषणा की है। इस नीति के अन्तर्गत विंड फार्मों तथा सौर पैनलों को एक ही भूस्थल पर स्थापित किया जाएगा। सौर ऊर्जा एवं यहाँ ऊर्जा से उत्पन्न विद्युत से हाइब्रिड सौर-पवन प्रणाली का विकास सबके लिये विद्युत के लक्ष्य को प्राप्त करने में महती भूमिका निभाएगा।

भौगोलिक परिस्थितियों के कारण कई स्थानों जैसे मुख्यधारा से कटे दूरस्थ ग्राम तक विद्युत ग्रिड को पहुँचाना सम्भव नहीं। ऐसे अगम्य एवं दुर्गम क्षेत्रों के लिये मिनी ग्रिड की संकल्पना सामने आई है। 50 वॉट और 100 वॉट विद्युत क्षमता के इन ग्रिडों से सौर ऊर्जा या बायोगैस जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के उपयोग द्वारा बिजली पैदा की जा सकती है। देश के कुछ राज्यों, जैसे उत्तर प्रदेश के गाँवों के लिये मिनी सौर ग्रिड से बिजली मुहैया की जा रही है। इसके लिये बाकायदा माँग आकलन तथा डाटा संग्रह किया जाता है। माँग आकलन परिवार सिंचाई लोड और वाणिज्यिक, उत्पादक लोड आदि को ध्यान में रखकर किया जाता है। इस प्रकार देश के समग्र विद्युतीकरण में मिनी ग्रिड की भी अपनी भूमिका है।

अन्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का समग्र विद्युतीकरण में योगदान

सौर एवं पवन ऊर्जा के अलावा जैव भार यानी बायोमास ऊर्जा तथा लघु पनबिजली (Mini Hydro) ऊर्जा का भी देश के समग्र विद्युतीकरण में योगदान है। फसलों के अपशिष्ट, सूखी पत्तियों, डंठलों, गन्ने की खोई, चावल और गेहूँ की भूसी आदि बायोमास को गैसीफायर्स द्वारा गैसीकरण (Gasification) की प्रक्रिया द्वारा ऊर्जा में बदला जाता है। इस ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलने की टेक्नोलॉजी उपलब्ध है देश में बायोमास से उत्पन्न विद्युत यानी बायोमास पॉवर की स्थापित क्षमता 31 मई, 2018 तक 8839.10 मेगावॉट थी।

लघु पनबिजली यानी स्मॉल हाइड्रो पावर को भी नवीकरणीय ऊर्जा में शामिल किया जाता है हालांकि वृहद पनबिजली नवीकरणीय ऊर्जा में शामिल नहीं है। हमारे देश में लघु पनबिजली की स्थापित क्षमता 31 मई, 2018 तक 4485.81 मेगावॉट थी।

बायोमास के अलावा मुख्यतया गोबर से चलने वाले बायो गैस संयंत्रों से वैकल्पिक ऊर्जा प्राप्त की जा सकती है। बायो गैस संयंत्रों से धुआँ रहित ईंधन की आवश्यकता की पूर्ति भी होती है जो ग्रामीण महिलाओं की खासकर आँखें और फेफड़ों के स्वास्थ्य के लिये बहुत जरूरी है।

बायो गैस को विद्युत ऊर्जा में भी बदला जा सकता है जिसके लिये आवश्यक प्रौद्योगिकी देश में उपलब्ध है। सैद्धान्तिक रूप से, बायो गैस को ईंधन (फ्यूल) सेल की मदद से सीधे ही बिजली में बदला जा सकता है। लेकिन, इसमें एकदम से स्वच्छ गैस एवं महंगे ईंधन सेल की जरूरत पड़ती है। फिलहाल यह प्रौद्योगिकी व्यावहारिक नहीं है और इस पर अभी अनुसन्धान चल रहा है।

बायोगैस को बिजली में बदलने की व्यावहारिक प्रौद्योगिकी में इसे दहन (Combustion) इंजन मे ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है जो इसे यांत्रिक ऊर्जा में बदल देता है। इंजन द्वारा उत्पन्न इस यांत्रिक ऊर्जा का उपयोग एक विद्युत जेनरेटर को चलाने के लिये किया जाता है और इस प्रकार बायोगैस को विद्युत ऊर्जा में प्रदर्शित किया जाता है।

आजकल हाइब्रिड सोलर-बायोमास तथा हाइब्रिड सोलर-बायो गैस प्रणालियों पर अनेक अनुसन्धान चल रहे हैं। वैज्ञानिकों को आशा है कि निकट भविष्य में इन प्रणालियों की मदद से अधिक परिणाम एवं और अधिक दक्षता से बिजली प्राप्त की जा सकेगी। निस्संदेह सबके लिये बिजली से जुड़ी सौभाग्य योजना के लिये यह एक सुखद बात है।

वर्तमान परिदृश्य

आइए, देश के विद्युतीकरण परिदृश्य पर एक नजर डालते हैं। जैसाकि हम जानते हैं, हमारे देश में विद्युत उत्पादन मुख्य रूप से कोयला-आधारित है। कोयले के अलावा वृहद पनबिजली नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों, गैस, डीजल तथा नाभिकीय ऊर्जा से भी विद्युत उत्पादन होता है। नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों जैसे कि सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, बायोमास तथा लघु पनबिजली का समग्र विद्युत उत्पादन में योगदान क्रमशः 6.3 प्रतिशत, 9.9 प्रतिशत, 2.6 प्रतिशत तथा 1.3 प्रतिशत है। कुल मिलाकर, नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का समग्र विद्युतीकरण में योगदान 20.1 प्रतिशत है। वृहद पनबिजली का योगदान 13.2 प्रतिशत है। कोयले का योगदान सबसे अधिक 57.23 प्रतिशत जबकि गैस, डीजल एवं नाभिकीय ऊर्जा योगदान क्रमशः 7.2 प्रतिशत, 0.24 प्रतिशत तथा 1.97 प्रतिशत हैं। 31 मई, 2018 तक हमारे देश में उत्पन्न कुल बिजली 3,43,899 मेगावॉट थी। (स्रोत: केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण)।

उपरोक्त विवरण एवं आँकड़ों से स्पष्ट है कि 31 मार्च, 2019 तक हर घर तक बिजली पहुँचाने का सरकार का सौभाग्य योजना लक्ष्य फिलहाल अति महत्त्वाकांक्षी लगता है। देश के हर घर के विद्युतीकरण में अतिरिक्त समय भी लग सकता है। लेकिन मोटे तौर पर स्थिति आशा जनक है। आशा है, सबके लिये बिजली योजना पूर्ण होने पर वैश्विक रूप से देश की अलग ही छवि उभर कर आएगी।

इस सम्पूर्ण विवरण के बाद पाठकों के मस्तिष्क में एक बात जरूर उठ रही होगी कि सरकार विद्युतीकरण की स्थिति की मॉनीटरिंग कैसे कर रही है तथा आम जनता को इसकी जानकारी कैसे उपलब्ध होगी। इसके लिये अक्टूबर 2015, में सरकार द्वारा एक मोबाइल एप तथा एक वेब-डाटाबोर्ड, जिसका नाम गर्व (garv) है, की स्थापना की गई है। साथ-ही-साथ सरकार द्वारा 309 ग्राम विद्युत अभियंताओं को विद्युतीकरण प्रक्रिया की मॉनीटरिंग का जिम्मा सौंपा गया है जो अद्यतन डाटा को गर्व एप पर अपलोड करेंगे।

हालांकि इस प्रक्रिया में पारदर्शिता का सरकार ने दावा किया है, लेकिन कई डाटा में विसंगतियाँ पाई जा रही हैं। लेकिन इतने वृहद स्तर के इस कार्य में ऐसा होना एकदम स्वाभाविक है।

इसमें कोई दो राय नहीं कि सौभाग्य योजना देश के नागरिकों के लिये विद्युतीकृत होने के सौभाग्य को लेकर आएगी। भारत जैसे विकासशील देशों के आगे का रास्ता ऐसी ही योजनाओं द्वारा प्रशस्त होता है। अतः सरकार के ऐसे विकासशील कार्यों की सराहना अवश्य होनी चाहिए।

स्रोत

1. रीन्यूबल एनर्जी इन इंडिया - विकीपीडिया
2.सौर ऊर्जा - स्वच्छ और सुरक्षित ऊर्जा की ओर कदम, डॉ. सुबोध महंती, आविष्कार, पृष्ठ 5-13, मार्च, 2017
3. सौर ऊर्जा से विद्युत ऊर्जा, आभास मुखर्जी, आविष्कार, पृष्ठ 24-34 मार्च, 2017
4. भारत मे नवीकरणीय स्रोतों में उन्नति मध्यम से चरघातांकी वृद्धि तक, पंकज सक्सेना और राहुल रावत, अक्षय ऊर्जा, पृष्ठ 19-17, अगस्त-अक्टूबर, 2017
5. भारत में पवन शक्ति का विकास-एक अवलोकन, जे.के. जेठानी, अक्षय ऊर्जा, पृष्ठ 20-25 अगस्त-अक्टूबर, 2017
6. उत्तर प्रदेश के गाँवों मे मिनी ग्रिडों के लिये माँग आकलन, ओंकारनाथ, अक्षय ऊर्जा, पृष्ठ 23-26 फरवरी-अप्रैल, 2018
7. इंडियन इम्प्रूविंग एनर्जी ट्रांजिशन, मैथ्यूज राजू, योजना (अंग्रेजी), जुलाई, 2018

(लेखक वरिष्ठ विज्ञान लेखक हैं और दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रोफेसर रहे हैं।)

ई-मेल: pkm_du@rediffmail.com

 

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