पर्यावरण संबंधी संस्थाएँ एवं संगठन

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पर्यावरण विज्ञान उच्चतर माध्यमिक पाठ्यक्रम

पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण, संरक्षण एवं सतत विकास को बढ़ावा देने के लिये पर्यावरण की प्रगति आदि के नियंत्रण के लिये हमारे देश की सरकार की भूमिका काफी आलोचनात्मक है। विभिन्न पर्यावरणीय मुद्दों पर कार्य करने के लिये संयुक्त राष्ट्र द्वारा राष्ट्रीय तथा अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर, राष्ट्रीय सरकारों तथा सिविल सोसाइटी द्वारा कई पर्यावरण संबंधी संस्थाएँ एवं संगठन स्थापित किए गए हैं। कोई भी पर्यावरणीय संगठन एक ऐसा संगठन होता है जो पर्यावरण को किसी प्रकार के दुरुपयोग तथा अवक्रमण के खिलाफ सुरक्षित करता है साथ ही ये संगठन पर्यावरण की देखभाल तथा विश्लेषण भी करते हैं एवं इन लक्ष्यों को पाने के लिये प्रकोष्ठ भी बनाते हैं। पर्यावरणीय संगठन सरकारी संगठन हो सकते हैं, गैर सरकारी संगठन हो सकते हैं या एक चैरिटी अथवा ट्रस्ट भी हो सकते हैं। पर्यावरणीय संगठन वैश्विक, राष्ट्रीय या स्थानीय हो सकते हैं। यह पाठ अग्रणीय पर्यावरणीय संगठनों के बारे में सूचना प्रदान करता है। ये संगठन सरकारी हों या सरकार के बाहर के राष्ट्रीय तथा वैश्विक स्तर पर पर्यावरण के संरक्षण तथा विकास के लिये कार्य करते हैं।

उद्देश्य
इस पाठ के अध्ययन के समापन के पश्चात आपः

i. भारत में पर्यावरणीय प्रशासन से संबंधित विभिन्न मंत्रालयों तथा संस्थाओं की सूची बना सकेंगे ;
ii. पर्यावरणीय प्रबंधन के क्षेत्र में वैश्विक संस्थाओं की जिम्मेदारी तथा उनकी भूमिका का वर्णन कर सकेंगे;
iii. पर्यावरणीय संरक्षण एवं सतत विकास में लगे महत्त्वपूर्ण राष्ट्रीय एवं अन्तरराष्ट्रीय गैर सरकारी संस्थाओं (एनजीओ) की भूमिका तथा गतिविधियों का वर्णन कर पाएँगे ;
iv. पर्यावरण के लिये संयुक्त राष्ट्र के निकायों की भूमिका का वर्णन कर सकेंगे।

25.1 भारत में पर्यावरणीय संस्थाओं की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारतीय सभ्यता के आरम्भ से ही पर्यावरण को सुरक्षित रखने की जागरूकता लोगों में मौजूद थी। वैदिक एवं वैदिककाल के बाद का इतिहास इस बात का साक्षी है लेकिन आधुनिक काल में, विशेष रूप से स्वतंत्रता के बाद से, आर्थिक प्रगति को उच्च प्राथमिकता मिलने के कारण, पर्यावरण कुछ कम महत्त्वपूर्ण स्थान पर रह गया। केवल 1972 में पर्यावरणीय योजना एवं सहयोग के लिये राष्ट्रीय कमेटी (National Committee of Environment and Forest, NCEPC) के गठन के लिये कदम उठाए गए जो धीरे-धीरे पर्यावरण का अलग विभाग बना और 1985 में यह पूर्णरूप से पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के रूप में परिवर्तित हुआ। शुरूआत में भारत के संविधान में पर्यावरण को बढ़ावा देने या उसके संरक्षण के लिये किसी प्रकार के प्रावधान नहीं थे। लेकिन 1977 में हुए 42वें संविधान संशोधन में कुछ महत्त्वपूर्ण धाराएँ जोड़ी गई जो सरकार पर एक स्वच्छ एवं सुरक्षित पर्यावरण प्रदान करने की जिम्मेदारी सौंपती है।

25.2 राष्ट्रीय पर्यावरणीय एजेंसियाँ
पर्यावरण एवं वन मंत्रालय, केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एवं वन्य जीवन के लिये भारतीय बोर्ड ही मुख्य राष्ट्रीय पर्यावरणीय एजेंसियाँ हैं।

25.2.1 पर्यावरण एवं वन मंत्रालय (Ministry of Environment and Forest)
पर्यावरण एवं वन मंत्रालय (MoEF) देश में पर्यावरण एवं वन संबंधी कार्यक्रमों के क्रियान्वयन की योजना बनाने, उसका प्रचार करने, समन्वय करने के लिये केन्द्रीय सरकार के प्रशासनिक तंत्र में एक नोडल एजेंसी है। इस मंत्रालय द्वारा किए जाने वाले कार्यों की मुख्य गतिविधियाँ भारत के वनस्पति तथा जीव जन्तुओं को संरक्षण एवं सर्वेक्षण, वनों एवं बीहड़ क्षेत्रों का सर्वेक्षण एवं संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण तथा निवारण, वनरोपण को बढ़ावा तथा भूमि अवक्रमण को कम करना सम्मिलित है। यह भारत के राष्ट्रीय उद्यानों (National Park) के प्रशासन के लिये भी जिम्मेदार है। इसके इस्तेमाल होने वाले मुख्य साधन सर्वेक्षण, पर्यावरणीय प्रभावों का मूल्यांकन, प्रदूषण नियंत्रण, पुनरुत्पादन कार्यक्रम, संगठनों का समर्थन, समाधान खोजने के लिये शोध एवं आवश्यक मानवशक्ति को कार्य करने के लिये प्रशिक्षण, पर्यावरणीय सूचना का संग्रह एवं वितरण तथा देश की जनसंख्या के सभी भागों में पर्यावरणीय जागरूकता फैलाना है। यह मंत्रालय यूनाइटेड नेशन्स पर्यावरण कार्यक्रम (United Nations Environment Programme, UNEP) के लिये भी नोडल एजेंसी है।

25.2.2 केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (Central Pollution Control Board, CPCB) एक वैधानिक संगठन है जिसका गठन सितंबर 1974 में, जल कानून (प्रदूषण का नियंत्रण एवं निवारण) के तहत हुआ था। इसके अलावा CBCB को वायु कानून (प्रदूषण नियंत्रण एवं निवारण), 1981 के तहत क्षमताएँ एवं कार्य भी सौंपे गए थे। यह 1986 के अन्तर्गत पर्यावरण (संरक्षण) कानून के प्रयोजनों के लिये पर्यावरण एवं वन मंत्रालय को तकनीकी सेवाएँ प्रदान करता है एवं इसके लिये क्षेत्र निर्माण भी करता है।

CBCB के मुख्य कार्य, जैसा कि 1974 के जल कानून (प्रदूषण नियंत्रण एवं निवारण) तथा 1981 के वायु कानून (प्रदूषण नियंत्रण तथा निवारण) में बताया गया : (i) राज्यों के विभिन्न भागों में जल धाराओं तथा कुओं की सफाई को बढ़ावा देना जिसमें जल प्रदूषण का नियंत्रण, निवारण तथा कटौती शामिल हो, (ii) देश में वायु प्रदूषण का नियंत्रण, निवारण तथा कटौती के साथ-साथ वायु की गुणवत्ता का विकास करना।

वायु गुणवत्ता का ध्यान रखना, वायु गुणवत्ता के प्रबंधन का एक महत्त्वपूर्ण भाग है। राष्ट्रीय परिवेश वायु गुणता मॉनीटरन प्रोग्राम (NAAQM) का गठन, वायु गुणवत्ता के वर्तमान स्तर का निर्धारण करने, कल कारखानों तथा अन्य स्रोतों में से वायु प्रदूषकों के उत्सर्जन का नियंत्रण एवं व्यवस्थापन करने तथा वायु गुणवत्ता को मानकों तक पहुँचाना जैसे उद्देश्यों के लिये हुआ था। यह उद्योगों को स्थापित करने तथा नगर योजनाओं के लिये आवश्यक वायु गुणवत्ता आंकड़ों के लिये पृष्ठभूमि भी प्रदान करता है।

अलवण (शुद्ध) जल एक सीमित संसाधन है जो कृषि, उद्योग, वन्य जीव-जन्तुओं एवं मात्स्यिकी के पालन तथा मानव जीवन के लिये अत्यंत आवश्यक है। भारत नदियों से परिपूर्ण देश है परन्तु यहाँ पर असंख्य झीलें, तालाब तथा कुएँ हैं, जो पेयजल के मुख्य स्रोत के रूप में इस्तेमाल होते हैं, यहाँ तक कि बिना पानी का शोधन किए भी। अधिकांश नदियों में मानसून की वर्षा का पानी एकत्र होता है, जो साल के तीन महीनों तक ही सीमित है। अतः वर्ष के बाकी महीनों में ये सूख जाती हैं और अक्सर इनमें शहरों, कस्बों तथा उद्योगों से निष्कासित गंदा पानी ही बहता है जो हमारे कम हो रहे जलस्रोतों की गुणवत्ता पर और खतरा पैदा करता है। भारत की संसद ने अपनी बुद्धिमत्ता के अनुसार जल कानून (प्रदूषण का नियंत्रण एवं निवारण) 1974 इसलिये बनाया था ताकि हमारे जल भंडारों की स्वास्थ्यवर्धक क्षमता को सुरक्षित रखा जा सके। CBCB का एक मत ये है कि जल प्रदूषण से संबंधित तकनीकी तथा सांख्यिकी आंकड़ों को संग्रह करो, उन्हें मिलाओ और फिर उनका प्रसार करो। अतः जल गुणवत्ता मॉनीटरन (Water Quality Monitoring, WQM) एवं निगरानी दोनों काफी महत्त्वपूर्ण हैं।

भारतीय मानकों की गुणवत्ता की आवश्यकताओं के साथ-साथ कुछ पर्यावरण की शर्तों को पूरा करने के लिये बनाए गए घरेलू एवं उपभोक्ता उत्पादों के लिये ‘‘पर्यावरण मित्र उत्पाद’’ के लेबल की योजना काफी प्रभावी हो रही है। इस योजना को ‘‘इकोमार्क स्कीम ऑफ इंडिया (Ecomark scheme of India)’’ कहा जाता है।

राष्ट्रीय स्तर पर केंद्रीय बोर्ड के कार्य
1. केंद्रीय सरकार को जल एवं वायु प्रदूषण के नियंत्रण एवं निवारण से जुड़े किसी भी मुद्दे पर एवं वायु की गुणवत्ता को बढ़ाने के बारे में सलाह देना।
2. जल एवं वायु प्रदूषण के नियंत्रण, निवारण तथा कटौती के लिये राष्ट्रव्यापी कार्यक्रमों की योजना एवं संचालन करना।
3. राज्य बोर्डों की गतिविधियों का समन्वयन एवं उनके आपसी मतभेदों को दूर करना।
4. राज्य बोर्डों को तकनीकी सहायता एवं दिशा-निर्देश प्रदान करना, वायु एवं जल प्रदूषण से संबंधित समस्याएँ एवं उनके नियंत्रण, निवारण तथा कटौती के लिये शोध को कार्यान्वित करना एवं उनका समर्थन करना।
5. जल एवं वायु प्रदूषण के नियंत्रण, निवारण तथा कटौती से संबंधित कार्यक्रमों से जुड़े लोगों के प्रशिक्षण की योजना एवं व्यवस्था करना।
6. जल एवं वायु प्रदूषण के नियंत्रण, निवारण तथा कटौती के प्रोग्राम के बारे में एक व्यापक जन जागरूकता लाने के लिये एक जनसंचार की व्यवस्था प्रदान करना।

पर्यावरणीय शासन एवं राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
अंब्रेला एक्ट (Umbrella Act) EPA (पर्यावरणीय संरक्षण एजेंसी, Environmental Protection Agency Act), 1986 ने पहले के सभी प्रयोजनों को और मजबूती प्रदान की। देश में औद्योगिक, वाहन संबंधित तथा ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण के लिये विशेष प्रावधान किए गए।

भारत में, राज्यों की अपनी स्वयं कोई पर्यावरण नीति नहीं हैं बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर बनाई गई नीतियों को ही अपनाते हैं बस इसमें उस राज्य की स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार थोड़े बहुत परिवर्तन कर लिये जाते हैं। केन्द्र सरकार भी, राज्य सरकारों को विभिन्न पर्यावरणीय मुद्दों पर दिशा-निर्देश देती रहती है।

25.2.3 वन्य जीवों के लिये भारतीय बोर्ड
देश में IBWL (Indian Board for Wildlife) वन्य जीव संरक्षण के क्षेत्र में, एक अहम सलाहकार संस्था है एवं इसके अध्यक्ष भारत के माननीय प्रधानमंत्री होते हैं। IBWL का पुनर्गठन 7 दिसम्बर, 2001 से प्रभावकारी हुआ। IBWL की 21वीं बैठक 21 जनवरी, 2002 को नई दिल्ली में हुई जिसमें भारत के माननीय प्रधानमंत्री ने अध्यक्षता की थी।

पाठगत प्रश्न 25.1
1. भारत की राष्ट्रीय पर्यावरणीय एजेंसियों के नाम बताओ।
2. MoEF के मुख्य कार्य क्या हैं?
3. CPCB की स्थापना कब हुई?
4. CPCB, NAAQM एवं IBWLका विस्तारित नाम लिखो।
5. IBWL की पुनर्स्थापना एवं इस संगठन का मुखिया कौन है?

25.3 अन्तरराष्ट्रीय पर्यावरणीय एजेंसियाँ
यूनाइटेड नेशन्स पर्यावरण प्रोग्राम (UNEP), वर्ल्ड स्वास्थ्य संगठन (WHO) खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO)आदि कुछ मुख्य अन्तरराष्ट्रीय एजेंसियाँ हैं।

25.3.1 संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP)
UNEP का गठन यूनाइटेड नेशन्स जनरल असेंबली द्वारा यूनाइटेड नेशन्स की स्टॉकहोम, स्वीडन में, उसी वर्ष मानव पर्यावरण के ऊपर हुई कान्फ्रेंस के परिणामस्वरूप हुआ। 1992 में रियो-डी जेनेरियो में पर्यावरण एवं विकास पर हुई संयुक्त राष्ट्र कान्फ्रेंस तथा 2002 में जोहान्सबर्ग में सतत (दीर्घोपयोगी) विकास पर हुआ, विश्व शीर्ष सम्मेलन (इसे RIO + 10 भी कहा जाता है) भी इसकी संरचना को बदल नहीं पाए। इसका मुख्यालय नैरोबी (केन्या) में है।

UNEP का मुख्य मत है वैश्विक पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए पर्यावरण नीति के विकास का संचालन करना तथा अन्तरराष्ट्रीय समुदाय एवं सरकारों का ध्यान ज्वलंत मुद्दों की तरफ आकर्षित करना जिससे उन पर कार्य हो सके। इसकी गतिविधियाँ बहुत से मुद्दों को समेटती हैं, जिसमें वायुमंडल, समुद्री एवं स्थलीय या पारितंत्र शामिल हैं।

UNEP ने अन्तरराष्ट्रीय पर्यावरणीय परंपराओं को विकसित करने में एक अहम भूमिका निभाई है। इसके अलावा UNEP ने पर्यावरणीय गैर सरकारी संगठनों (NGO) के साथ कार्य करने में, राष्ट्रीय सरकार तथा क्षेत्रीय संस्थानों के साथ नीतियों को विकसित करने तथा उन्हें क्रियान्वित करने में एवं पर्यावरणीय विज्ञान तथा सूचना को बढ़ावा देने के साथ उन्हें यह भी बताया कि वे नीतियों के अनुसार किस प्रकार कार्य करेंगे, आदि कार्यों में भी अहम भूमिका निभाई है। UNEP पर्यावरण के दीर्घोपयोगी विकास के लिये, उचित पर्यावरणीय प्रयासों द्वारा, पर्यावरण से संबंधित योजनाओं के विकास एवं क्रियान्वयन तथा आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने में भी सक्रिय रहा है।

UNEP के कार्यों का क्रियान्वयन निम्न सात विभागों द्वारा किया जाता हैः
i. जल्द चेतावनी एवं उनका आकलन (Early Warning and Assessment)
ii. पर्यावरणीय नीति क्रियान्वयन (Environmental Policy Implementation)
iii. तकनीक, उद्योग एवं अर्थशास्त्र
iv. क्षेत्रीय सहयोग
v. पर्यावरणीय कानून एवं सम्मेलन
vi. वैश्विक पर्यावरण सुविधा सहयोग (Environmental law and convention)
vii. संचार एवं जन सूचना

UNEP के कई अहम कार्यों में से ‘‘विश्व को स्वच्छ रखो’’ (Cleanup the world) अभियान के द्वारा विश्व में इस बात की जागरूकता फैलाने का प्रयास किया जाता है कि हमारी आधुनिक जीवनशैली के क्या दुष्प्रभाव हैं।

अन्तरराष्ट्रीय मार्गों का प्रदूषण, सीमा पार का वायु प्रदूषण तथा हानिकारक रसायनों का अन्तरराष्ट्रीय व्यापार जैसे मुद्दों पर दिशा-निर्देश तथा संधियों के विकास में UNEP ने काफी मदद की है।

विश्व मौसम विज्ञान संबंधी संगठन (The World Metrological Organisation) एवं UNEP ने मिलकर 1988 में जलवायु परिवर्तन पर अन्तरराष्ट्रीय पैनल, इंटर गवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (IPCC) का गठन किया था। वैश्विक पर्यावरणीय सुविधा (Global Environment facility, GEF) का क्रियान्वयन एजेंसियों में से UNEP भी एक है।

आर्थिक सहायता (Funding)
UNEP को अपने कार्यक्रमों के लिये आवश्यक आर्थिक सहायता पर्यावरण कोष से प्राप्त होती है जिसका रख-रखाव सदस्य सरकारों के स्वैच्छिक सहयोग से, सत्तर से भी अधिक ट्रस्टी कोषों के सहयोग से तथा यूनाइटेड नेशन्स के नियमित बजट में से छोटे से सहयोग से किया जाता है।

25.3.2 विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization, WHO)
संघटना एवं इतिहास

WHO के संविधान के अनुसार इसके उद्देश्य हैं ‘‘सभी लोगों को स्वास्थ्य की प्रणाली उच्चतम संभावित स्तर पर उपलब्ध हो’’ इसका मुख्य कार्य है रोगों से लड़ाई, विशेषकर संक्रामक रोगों से, एवं विश्व के लोगों में सामान्य स्वास्थ्य को बढ़ावा देना।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), संयुक्त राष्ट्र की प्रारंभिक एजेंसियों में से एक है। इसका सर्वप्रथम गठन प्रथम विश्व स्वास्थ्य दिवस (7 अप्रैल, 1948) को हुआ था। जब इसका समर्थन 26 सदस्य देशों द्वारा किया गया था। WHO में 193 सदस्य देश हैं।

WHO को सदस्य देशों से एवं दानकर्ताओं से सहयोग एवं आर्थिक सहायता मिलती है।

इसके क्षेत्रीय कार्यालय हैं:
अफ्रीका का क्षेत्रीय कार्यालय (Regional Office for Africa, AFRO)
यूरोप का क्षेत्रीय कार्यालय (Regional Office for Europe, EURO)
दक्षिण पूर्व एशिया का क्षेत्रीय कार्यालय (Regional Office for South East Asia, SEARO)
पूर्व भूमध्य सागर का क्षेत्रीय कार्यालय (Regional Office for Eastern Mediterranean)
पश्चिमी पेसिफिक का क्षेत्रीय कार्यालय (Regional Office for Western Pacific, WPRO)
अमरीका का क्षेत्रीय कार्यालय (Regional Office for the America, AMRO)

गतिविधियाँ
सार्स (SARS, Severe Acute Respiration Syndrome, सीवीयर ऐक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम), मलेरिया, स्वाइन फ्लू एवं एड्स (AIDS) जैसी संक्रामक बीमारियों को फैलने से बचाने के वैश्विक प्रयासों के समन्वयन पर ध्यान रखना एवं इन रोगों के इलाज एवं रोकथाम के लिये कार्यक्रम प्रवर्तित करना WHO की गतिविधियों में शामिल है। सुरक्षित एवं प्रभावी टीके, फार्मास्यूटिकल डॉयग्नॉस्टिक्स एवं दवाओं के विकास एवं वितरण को WHO समर्थन करता है। चेचक के लिये करीब दो दशकों तक लड़ने के बाद 1980 में WHO ने घोषणा की कि यह बीमारी पूरी तरह से मिटा दी गई है। यह इतिहास में पहली ऐसी बीमारी थी जो मानव प्रयास द्वारा पूरी तरह से मिटा दी गई थी।

WHO का लक्ष्य है अगले कुछ वर्षों में पोलियो को भी जड़ से मिटा देना। कई बीमारियों को जड़ से मिटाने के इसके काम के साथ-साथ हाल ही के कुछ वर्षों में WHO ने स्वास्थ्य से जुड़े कई मुद्दों जैसे तंबाकू के सेवन को कम कराना तथा लोगों में फल तथा सब्जियों के सेवन को बढ़ाने के अभियान की तरफ अधिक ध्यान देना शुरू किया है।

पर्यावरण और स्वास्थ्य का आपस में घनिष्ट संबंध है। 1992 का पर्यावरण एवं विकास पर की गई रियो घोषणा का नियम कहता है कि ‘‘सतत (दीर्घोपयोगी) विकास की चिंता के केंद्र में मानव जाति है। वे प्रकृति को संतुलन बनाए रखते हुए एक स्वस्थ्य तथा उत्पादकता पूर्ण जीवन के हकदार हैं।’’ पर्यावरणीय खतरे, संपूर्ण विश्व में होने वाली बीमारियों के कुल योग का करीब 25% (अनुमानित) के लिये जिम्मेदार है।

हेली (HELI)
पर्यावरण संबंधित स्वास्थ्य खतरों से निपटने के लिये WHO ने हेल्थ एनवायरनमेंट लिंक इनीशिएटिव (Health Environmental Link Initatiave, HELI) का विकास किया है। HELI, WHO एवं UNEP के द्वारा किया गया एक वैश्विक प्रयास है जो विकासशील देशों के नीतिकारों द्वारा स्वास्थ्य पर होने वाले पर्यावरणीय खतरों पर किए जाने वाले कार्यों का समर्थन करता है।

HELI सभी देशों से इस बात को बढ़ावा देने की बात करता है कि आर्थिक विकास का संबंध स्वास्थ्य एवं पर्यावरण से होता है। आमतौर पर स्वस्थ्य जीवन एवं कार्य का वातावरण तथा वायु, जल, खाद्य एवं ऊर्जा के स्रोतों का पुनरुत्पादन अथवा प्रयोजन या जलवायु नियंत्रण जैसी सभी सेवाएँ जो मानव स्वास्थ्य तथा तंदुरुस्ती के लिये हैं, का आकलन एवं समर्थन HELI द्वारा किया जाता है। HELI की गतिविधियों में राष्ट्रस्तरीय पायलट प्रोजेक्ट भी शामिल हैं।

25.3.3 संयुक्त राष्ट्र का खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO)
यह यूनाइटेड नेशन्स की एक विशिष्ट एजेंसी है जो भुखमरी को मिटाने के अन्तरराष्ट्रीय प्रयासों की अगुआई करती है। विकसित एवं विकासशील दोनों तरह के देशों की सेवा करते हुए FAO (Food and Agriculture Organization) एक निष्पक्ष फोरम के रूप में कार्य करता है जहाँ सभी देश समान रूप से मिलकर बहस की नीति तथा सहमतियों पर विचार करते हैं। FAO ज्ञान एवं सूचना का एक स्रोत भी है एवं यह विकासशील देशों तथा परिवर्तनशील देशों को कृषि को आधुनिक बनाने एवं इसकी प्रगति, मत्स्य पालन तथा वनरोपण के कार्यों, सभी के लिये खाद्य सुरक्षा एवं सुपोषण सुनिश्चित करना आदि कार्यों में मदद करता है। इसका लैटिन भाषा में आदर्श वाक्य है 'Fiat Panis' जिसका अंग्रेजी में अर्थ है 'Let there be bread' अर्थात हम हिंदी में कह सकते हैं कि ‘‘सभी को रोटी मिले’’।

FAO का मुख्यालय रोम में है एवं इसके 5 क्षेत्रीय कार्यालय हैं:
i. अफ्रीका के लिये क्षेत्रीय कार्यालय (Regional office for Africa in Accra, Ghana)
ii. लैटिन अमेरिका एंड कैरीबियन देशों का क्षेत्रीय कार्यालय, सैंटियागो, चिली (Regional office for Latin America and the Caribbean in Santiago, chili)
iii. एशिया एवं पेसेफिक के लिये क्षेत्रीय कार्यालय बैंकॉक, थाइलैंड (Regional office for Asia and the Pacific in Bangkok, Thailand)
iv. रीज़नल ऑफिस फॉर द नीयर ईस्ट इन काइरो, ईजिप्ट (Regional office for the Near East in Cairo, Egypt)
v. यूरोप के लिये क्षेत्रीय कार्यालय बुडापेस्ट, हंगरी (Regional office for Europe in Budapest, Hungary)

WHO के सदस्य राष्ट्र विश्व स्वास्थ्य सभा (World Health Assembly) के लिये प्रतिनिधि मंडल नियुक्त करते हैं। विश्व स्वास्थ्य सभा, WHO की सर्वश्रेष्ठ निर्णयकारी संस्था है। संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य देश, WHO की सदस्यता के लिये उपयुक्त हैं एवं WHO की वेबसाइट के अनुसार, अन्य देश भी सदस्य के रूप में दाखिल हो सकते हैं जब उनका आवेदन विश्व स्वास्थ्य सभा के सामान्य बहुमत से स्वीकृत हो जाए।

पाठगत प्रश्न 25.2
1. UNEP का पूरा अर्थ बताएँ। इसे किसने बनाया तथा इसका मुख्यालय कहाँ स्थित है?
2. यह किस प्रकार के कार्यक्रमों को आर्थिक सहायता देता है एवं उनका क्रियान्वयन करता है?
3. WHO का पूरा अर्थ क्या है एवं इसके मुख्य उद्देश्य क्या हैं?
4. मानव प्रयासों द्वारा जड़ से मिटाई गई इतिहास में पहली बीमारी कौन सी है?
5. HELI का पूरा अर्थ क्या है?
6. FAO का गठन किसने किया? इसके एक मुख्य कार्य का वर्णन करो।

25.4 दीर्घोपयोगी विकास आयोग (CSD)
इसकी स्थापना दिसंबर, 1992 में जनरल एसेंबली रिजॉल्यूशन A/RES/47/191 द्वारा की गई थी। इसे यूएन आर्थिक एवं सामाजिक काउंसिल के कार्यकारी आयोग (ECOSOC) के रूप में स्थापित किया गया था। इसने जून, 1992 में रियो डी जेनेरियो में हुए पृथ्वी सम्मेलन अथवा पर्यावरण तथा विकास पर यूएन की कॉन्फ्रेंस में एक ऐतिहासिक वैश्विक समझौता किया था जो एजेंडा 21 के चैप्टर 38 में दी एक संस्तुति को क्रियान्वित करता था।

मिशन
सतत विकास के लिये बना डिवीजन (Division for sustainable development, DSD) नेतृत्व प्रदान करता है एवं यह यूनाइटेड नेशन्स के सतत विकास पर बने सिस्टम के भीतर कुशलता का एक अधिकृत स्रोत है। यह दीर्घोपयोगी विकास के संयुक्त राष्ट्र आयोग (CSD) के लिये वास्तविक सचिवालय के तौर पर सतत विकास का प्रचार करता है एवं अन्तरराष्ट्रीय, क्षेत्रीय तथा राष्ट्रीय स्तर पर तकनीकी सहयोग तथा क्षमता निर्माण प्रदान करता है।

लक्ष्य
1. अन्तरराष्ट्रीय, क्षेत्रीय तथा राष्ट्रीय स्तर पर नीति निर्धारण में सतत विकास के लिये सामाजिक, आर्थिक तथा पर्यावरणीय आयामों का समाकलन;
2. सतत विकास के लिये एकीकृत एवं व्यापक रूप से भागीदारीपूर्ण प्रयास को बड़े पैमाने पर लागू करना;
3. जोहान्सबर्ग की क्रियान्वयन योजना के लक्ष्य एवं लक्ष्य क्षेत्र के क्रियान्वयन में भारी प्रगति।

यह कहता है
‘‘कॉन्फ्रेंस का प्रभावशाली अनुसरण करने को सुनिश्चित करने एवं अन्तरराष्ट्रीय सहयोग तथा युक्तिमूलक दृष्टिकोण में वृद्धि के लिये, पर्यावरण तथा विकास के मुद्दों को एकीकृत करने के लिये अंतः सरकारी निर्णय निर्धारण क्षमता तथा राष्ट्रीय, क्षेत्रीय एवं अन्तरराष्ट्रीय स्तरों पर एजेंडा 21 के क्रियान्वयन की प्रगति की जाँच करना, आदि कार्यों के लिये एक उच्च स्तरीय सतत विकास आयोग का गठन यूएन के चार्टर के अंतर्गत आर्टिकल 68 के अनुसार होना चाहिए।’’ एजेंडा 21(1) 1992 के शरद काल में हुई जनरल एसेंबली की बैठक जो CSD की स्थापना पर बहस के लिये आयोजित हुई थी, के अनुसारः

1. आर्थिक एवं सामाजिक काउंसिल (The Economic and Social Council, ECOSOC) से अनुरोध किया गया है कि यह एक उच्च स्तरीय आयोग का गठन कार्यकारी काउंसिल संस्था के रूप में करे।
2. 53 देशों के प्रतिनिधियों को काउंसिल द्वारा तीन साल तक के कार्यकाल के लिये चुना जाएगा।
3. आयोग वर्ष में एक बार दो या तीन सप्ताह के लिये बैठक करेगा। यह कार्यकारी ECOSOC आयोग है जिसका पूर्णकालिक सचिवालय न्यूयॉर्क में स्थित है।

CSD का मत (रिजॉल्यूशन 1990/207) हैः
1. एजेंडा 21 (पर्यावरण एवं विकास के मुद्दों पर काम करता है) के क्रियान्वयन एवं सरकार, NGO तथा अन्य यूएन संस्थाओं द्वारा निर्धारित पर्यावरण एवं विकास के लक्ष्यों के समाकलन से संबंधित गतिविधियों की प्रगति की निगरानी करना।
2. विकसित देशों द्वारा ओवरसीज विकास सहायता कोष (Overseas Development Aid) के लिये निर्धारित 0.7% GNP के लक्ष्य की प्रगति की निगरानी करना।
3. जैसा कि एजेंडा 21 में उल्लेखित है, तकनीकों का स्थानांतरण एवं उनकी आर्थिक मदद की पर्याप्तता का पुनरावलोकन करना।
4. एजेंडा 21 के क्रियान्वयन के संदर्भ में सुयोग्य NGOs द्वारा संबंधित सूचना को प्राप्त करके उसका विश्लेषण करना।
5. यूएन के ढाँचे के अंतर्गत आने वाले NGO, स्वतंत्र सेक्टरों एवं अन्य इकाइयों को जो यूएन प्रणाली के बाहर हैं; के साथ वार्तालाप बढ़ाना।

सामान्य सतत विकास के लिये संस्तुति प्रदान करने का अर्थ है वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं की पूर्ति इस प्रकार करना जिससे भविष्य की पीढ़ियों को अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति करने की क्षमता में किसी तरह की रुकावट या गड़बड़ी न हो।

इसे समाज द्वारा बड़े पैमाने पर लिया जाना चाहिए और प्रतिदिन प्रत्येक नागरिक के द्वारा किए जाने वाले विभिन्न पसंदीदा कार्यों के लिये यह एक दिशा-निर्देश देने वाला सिद्धान्त होना चाहिए। इसके अलावा बड़े राजनैतिक तथा आर्थिक निर्णयों में भी इसे शामिल किया जाना चाहिए। इसके लिये लोगों की सोच में, आर्थिक तथा सामाजिक संरचना में तथा उत्पादन एवं उपभोग के तरीके में व्यापक परिवर्तन किए जाने चाहिए।

25.5 यूनाइटेड नेशन्स फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज (UNFCCC)
समझौता (सम्मेलन) एवं प्रोटोकॉल

एक दशक पहले हुए संयुक्त राष्ट्र के इस जलवायु परिवर्तन सम्मेलन UNFCCC में अधिकांश देश एक अन्तरराष्ट्रीय संधि में सम्मिलित हुए- एकमत होकर सोचना व कार्य करना प्रारंभ किया कि वैश्विक ऊष्मण को कम करने के लिये क्या-क्या किया जाना चाहिए एवं तापमान बढ़ने के अपरिहार्य कारणों से किस तरह तालमेल बैठाकर चलना चाहिए। हाल ही में कई देशों ने इस संधि में कुछ अतिरिक्त को भी मान्यता प्रदान की और उसका नाम ‘क्योटो प्रोटोकॉल’ हुआ जिसमें अधिक शक्तिशाली तरीके हैं जो कानूनी रूप से बाध्य होंगे।

इस विभाग में असंख्य संसाधन शामिल हैं- शुरूआती अथवा कुशल लोगों के लिये जैसे परिचयात्मक अथवा गहन प्रकाशन, आधिकारिक UNFCCC एवं क्योटो प्रोटोकॉल पाठ्य सामग्री एवं UNFCCC लाइब्रेरी के लिये एक सर्च इंजन।

समस्या का सामना एवं उसकी खोज करना
इस सम्मेलन की एक मुख्य उपलब्धि जो कि सामान्य एवं लचीली है वह यह है कि यह पहचान करता है कि समस्या क्या है। 1994 में यह कोई छोटी बात नहीं थी जब संधि प्रभावकारी हुई और इसके पास वैज्ञानिक सबूत कम मात्रा में उपलब्ध थे। (और अभी भी ऐसे कई लोग हैं जो यह मानने से मना करते हैं कि वैश्विक ऊष्मण (ग्लोबल वार्मिंग) वास्तव में हो रहा है और जलवायु परिवर्तन एक समस्या है)। विश्व के देशों को किसी एक बात पर सहमत कराना बहुत ही कठिन कार्य है। एक समस्या जो जटिल है उसके लिये हमें मिलकर प्रयास करना होगा, इसके परिणाम भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है एवं इसके भविष्य में कई दशकों या शताब्दियों तक बड़े भयंकर परिणाम हो सकते हैं।

यह सम्मेलन एक उद्देश्य तय करता है जिससे ग्रीन हाउस गैसों के सांद्रण को स्थिर किया जा सके ‘‘एक ऐसे स्तर पर जो जलवायु प्रणाली के साथ किसी भी प्रकार के खतरनाक मानव हस्तक्षेप को रोकता है।’’ इसके अनुसार ‘‘इस प्रकार का स्तर एक निश्चित समय सीमा के भीतर प्राप्त किया जा सकता है जो पारितंत्रों को प्राकृतिक रूप से जलवायु परिवर्तन के साथ ढालने के लिये पर्याप्त हो। इससे खाद्य उत्पादन पर कोई खतरा न हो एवं इससे आर्थिक विकास के सतत एवं सुचारु रूप से चलने में मदद मिल सके।’’ सम्मेलन को औद्योगिकीकरण वाले देशों से उत्सर्जित ग्रीन हाउस गैसों की नियमित एवं सही सूची मिलती रहनी चाहिए। किसी भी समस्या को सुलझाने का पहला चरण है इसके आयामों को जानना। कुछ अपवादों को छोड़कर, ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन तालिकाबद्ध करने का ‘‘आधार वर्ष’’ 1990 को ही माना जाता है। विकासशील देशों को भी सूची बनाने के लिये प्रोत्साहित किया जा रहा है।

 

वे देश जो इस संधि को मानते हैं उन्हें ‘‘सम्मेलन की पार्टी’’ कहा जाता है और ये देश कृषि, उद्योग, ऊर्जा प्राकृतिक संसाधन एवं समुद्र तट से जुड़ी गतिविधियों में जलवायु परिवर्तन को साथ में लेकर चलने पर सहमत होते हैं। ये जलवायु परिवर्तन को धीमा करने में एक राष्ट्रीय कार्यक्रम बनाने पर भी सहमत होते हैं।


सम्मेलन इस बात की पहचान करता है कि यह एक ‘‘ढाँचागत’’ दस्तावेज है- जो समय-समय पर संशोधित किया अथवा बढ़ाया जा सकता है जिससे वैश्विक ऊष्मण और जलवायु परिवर्तन से जुड़े कार्यों एवं प्रयासों को अधिक ध्यानाकर्षित एवं प्रभावशाली बनाया जाए। इस संधि में पहली वृद्धि ‘‘क्योटो प्रोटोकॉल’’ के रूप में 1997 में स्वीकृत की गई थी।

25.5.1 क्योटो प्रोटोकॉल - इसका अर्थ क्या है
क्योटो प्रोटोकॉल (Kyoto Protocol)- एक अन्तरराष्ट्रीय तथा कानूनी रूप से बाध्य करने वाला समझौता है जिसके द्वारा विश्वभर में ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन को कम किया जा सकता है। यह 16 फरवरी 2005 से लागू हुआ था।

दायित्व एवं सुभेद्यता
1. सम्मेलन औद्योगीकरण वाले देशों पर जलवायु परिवर्तन से लड़ने के लिये काफी दबाव डालता है क्योंकि ये देश ही भूत और वर्तमान के ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन के प्रमुख स्रोत हैं। इन देशों को यह कहा गया है कि इस प्रकार के उत्सर्जनन को कम करने का वे हर संभव प्रयास करें। इन विकसित देशों को ‘एनेक्स 1’ (Annex I) देश कहा जाता है। इसका कारण है कि ये संधि के पहले एनेक्स (परिशिष्ट) में सूचीबद्ध हैं। इनका अधिकांश भाग (आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन) (Organisation for Economic Cooperation and Development, OECD) के अंतर्गत आता है।

2. ये प्रगतिशील देश एवं 12 ‘‘परिवर्तनकारी अर्थव्यवस्थाएँ’’ (केंद्रीय एवं पूर्वी यूरोप के कुछ देश, जिनमें कुछ देश पहले सोवियत यूनियन के अंतर्गत आते थे) से आशा की गई थी कि सन 2000 तक ये अपने देशों में उत्सर्जन का स्तर कम करके 1990 के स्तर तक ले आएँगे। एक समूह के रूप में ये सफल हुए।

3. औद्योगिक देश सम्मेलन के अंतर्गत विकासशील देशों में होने वाली जलवायु परिवर्तन की गतिविधियों को आर्थिक समर्थन देने पर सहमत हो गए हैं। सम्मेलन के द्वारा ऋण एवं दान की एक प्रणाली भी बनायी गयी है और इसे वैश्विक पर्यावरण सुविधा (Global Environment Facility) द्वारा प्रबंधित किया जाता है। औद्योगिक देश, कम प्रगतिशील देशों से तकनीक की सहभागिता पर भी सहमत हो गए हैं।

क्योंकि आर्थिक विकास विश्व के निर्धन देशों के लिये आवश्यक है- चूँकि इस तरह की प्रगति जलवायु परिवर्तन द्वारा पैदा की गई किसी भी प्रकार की कठिनाई के बिना, पाना संभव नहीं है, अतः सम्मेलन यह स्वीकार करता है कि आने वाले वर्षों में विकासशील देशों द्वारा उत्पन्न ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन की भागीदारी बढ़ेगी। इसलिये इन देशों को उत्सर्जन कम करने की दिशा में इस प्रकार से मदद करनी चाहिए ताकि उनकी आर्थिक प्रगति में कोई रुकावट न पहुँचे।

सम्मेलन यह स्वीकार करता है कि जलवायु परिवर्तन के प्रति विकासशील देशों का रवैया दोषपूर्ण है। अतः इसके भयंकर परिणामों को कम करने के लिये यह विशेष प्रयासों की अपील करता है।

पाठगत प्रश्न 25.3
1. CSD का पूरा नाम क्या है? इसकी स्थापना कब हुई?
2. UNFCCC का लक्ष्य क्या है?
3. क्योटो प्रोटोकॉल क्या है एवं इसे कब मान्यता मिली?

25.6 गैर सरकारी संगठन
कोई भी गैर सरकारी संगठन (NGOs) एक ऐसा संगठन है जो सरकार का हिस्सा नहीं होता है। इसे ज्यादातर आर्थिक सहायता निजी सहयोग से मिलती है जो संस्थागत सरकार अथवा राजनैतिक संरचना के बाहर कार्य करती है। इसी कारण से NGO (Non Government Organisation), सरकार से पूर्णतः स्वतंत्र होते हैं। आम तौर पर NGOs का अपना स्वयं का कार्यक्रम होता है। ऐसे कई NGOs हैं जो वन्य जीव जन्तुओं के संरक्षण, पर्यावरण की सुरक्षा, संसाधनों का संरक्षण एवं सतत विकास के कार्य के लिये प्रतिबद्ध रूप से कार्यरत हैं। पर्यावरण के क्षेत्र में कार्य करने वाले महत्त्वपूर्ण राष्ट्रीय तथा अन्तरराष्ट्रीय NGOs की गतिविधियाँ एवं क्षेत्र नीचे बताए गए हैं।

25.7 इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर
IUCN (International Union for Conservation of Nature) विश्व का सबसे पुराना एवं सबसे बड़ा वैश्विक पर्यावरण नेटवर्क है। यह एक गणतांत्रिक सदस्य सभा है जिसमें 1000 से अधिक सरकारी और गैर सरकारी सदस्य संगठन हैं, एवं करीब 11,000 स्वयंसेवी वैज्ञानिक हैं जो 160 से अधिक देशों में रहते हैं। IUCN का कार्य, विश्व में चारों तरफ फैले सैकड़ों पब्लिक, NGOs एवं प्राइवेट क्षेत्रों के पार्टनरों तथा 60 ऑफिसों के करीब सौ से अधिक पेशेवर स्टाफ की मदद से चलता है। इसका मुख्यालय जेनेवा के निकट, ग्लैंड, स्विट्जरलैंड में स्थित है।

IUCN पर्यावरण तथा विकास से जुड़ी अधिकांश चुनौतियों के लिये व्यावहारिक समाधान विकसित करने के लिये कार्य करता है। यह वैज्ञानिक शोध का समर्थन करता है, पूरे विश्व में फील्ड प्रोजेक्टों का प्रबंधन करता है तथा सरकारी, गैर सरकारी, संयुक्त राष्ट्र, विभिन्न कंपनियों एवं स्थानीय समुदायों को एक जुट करता है जिससे नीतियों एवं कानूनों का क्रियान्वयन अच्छी तरह से हो सके।

IUCN का मिशन एवं दृष्टिकोण
1. पूरे विश्व में फैले विभिन्न समाजों को प्रभावित करना, बढ़ावा देना एवं उनकी मदद करना जिससे वे प्रकृति की विभिन्नता एवं अखंडता का संरक्षण कर सकें तथा यह सुनिश्चित करे कि किसी भी प्राकृतिक संसाधन का इस्तेमाल पूर्णतः न्याय संगत हो एवं पारिस्थितिकी के अनुसार चलने वाला भी हो।

2. प्रकृति हमें जीवन की सभी मूलभूत आवश्यकताएँ जैसे जल, खाद्य, स्वच्छ हवा, ऊर्जा एवं आवास प्रदान करती है। इसलिये हमें प्रकृति का बुद्धिमानी से इस्तेमाल करना चाहिए एवं इसकी सुरक्षा करनी चाहिए। लेकिन इसके साथ-साथ लोगों के जीवन को सुधारने एवं गरीबी घटाने के लिये सामाजिक एवं आर्थिक विकास भी लगातार होते रहना चाहिए।

3. हमारे जीवन को मिलाकर, पृथ्वी पर स्थित समस्त जीवन का आधार है जैव विविधता- जिसमें विभिन्न पशु-पक्षी, एवं उनके रहने के स्थान का जटिल नेटवर्क शामिल है। जैव विविधता का संरक्षण-पौधों एवं पशुओं की प्रजातियों को लुप्त होने से रोकना एवं प्राकृतिक क्षेत्रों को नष्ट होने से बचाना ही IUCN का मुख्य कार्य है।

4. जैव विविधता से संबंधित मानव जाति के सामने आज चार चुनौतियाँ हैं: जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा, आजीविका एवं अर्थशास्त्र। IUCN इसीलिये इन चारों क्षेत्रों पर कार्य करता है जबकि इसका मुख्य कार्य जैव विविधता पर ही है।

कार्य
1. ज्ञानः IUCN संरक्षण विज्ञान का समर्थन करता है खासकर प्रजातियों, पारिस्थितिकी तंत्रों, जैव विविधता एवं मानव आजीविका पर इनका प्रभाव किस प्रकार होगा इस पर विशेष ध्यान देता है।

2. कार्यः IUCN हजारों फील्ड प्रोजेक्ट पूरे विश्व में चलाता है जिससे प्राकृतिक पर्यावरण का प्रबंधन अच्छी तरह से हो सके।

3. प्रभावः IUCN सरकारों, NGO, अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलनों, UN संगठनों, कंपनियों एवं समुदायों का समर्थन करता है जिससे वे नीतियाँ एवं कानून बनाकर उनका अच्छी तरह क्रियान्वयन कर सकें।

4. सशक्तीकरणः IUCN संगठनों को तैयार करके, उन्हें संसाधन मुहैया कराकर, लोगों को प्रशिक्षित करके तथा परिणामों की मॉनीटरिंग करके नियम, कानून तथा उनके क्रियान्वयन में मदद करता है।

25.8 वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर (WWF)
वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर (WWF) एक अन्तरराष्ट्रीय गैर सरकारी संगठन है जो पर्यावरण के संरक्षण, शोध एवं पुनःस्थापन के लिये कार्य करता है। पहले इसका नाम वर्ल्ड वाइड फंड था जो यूनाइटेड स्टेट्स एवं कनाडा में अभी भी इसका आधिकारिक नाम है। यह विश्व का सबसे बड़ा स्वतंत्र संरक्षण संगठन है जिसके संपूर्ण विश्व में करीब 5 मिलियन से अधिक समर्थक हैं जो 90 से अधिक देशों में काम कर रहे हैं, और पूरे विश्व में करीब 1300 संरक्षण एवं पर्यावरण से जुड़े प्रोजेक्टों पर काम कर रहे हैं। यह एक प्रकार का दान है जिसका 60% हिस्सा निजी, व्यक्तिगत, स्वैच्छिक दान के रूप में आता है। इस फंड की 45% आय यूनाइटेड स्टेट्स, यूनाइटेड किंगडम तथा नीदरलैंड से आती है।

WWF का लक्ष्य है ‘‘हमारे पर्यावरण को नष्ट होने से रोकना एवं इसका प्रतिकार करना।’’ वर्तमान में इसका अधिकांश कार्य तीन बायोम के संरक्षण पर केंद्रित है। इनमें विश्व की अधिकतम जैव विविधता छिपी हुई है जिसमें वन, अलवण जलीय पारिस्थितिकी तंत्र, महासागर एवं तट शामिल हैं। अन्य मुद्दों में यह विलुप्त प्राय प्रजातियों, प्रदूषण एवं जलवायु परिवर्तन पर भी ध्यान देता है।

यह संगठन 11 सिंतबर 1961 में स्विट्जरलैंड के मोर्जेस में एक धर्मार्थ ट्रस्ट के रूप में गठित हुआ था जिसका नाम वर्ल्ड वाइड फंड रखा गया था। यह जूलियन हक्सले एवं मैक्स निकोल्सन की कोशिश थी जिन्होंने 30 साल के अनुभव के साथ प्रगतिशील बौद्धिक लोगों को बड़े व्यापारिक रुचियों के साथ राजनैतिक तथा आर्थिक योजनाओं के द्वारा जोड़ने का प्रयास किया। कैने डियन फंड के लिये, कनाडा के टोरेंटो में भी इसका एक हेड ऑफिस है।

इसके स्थापना दस्तावेज में, संगठन ने अपना वास्तविक लक्ष्य इस तरह उल्लेखित किया हैः ‘‘विश्व के जीव-जन्तु, पेड़-पौधे, वन, स्थल आकृतियाँ जल, मिट्टी एवं अन्य प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भूमि के प्रबंधन, शोध एवं खोज, प्रचार, समन्वयन एवं प्रयास, अन्य इच्छुक पार्टियों के साथ सहयोग तथा अन्य उपयुक्त उपायों द्वारा किया जाएगा।’’

पिछले कुछ वर्षों में, संगठन ने पूरे विश्व में ही कार्यालय खोल लिये हैं एवं कार्य प्रारंभ कर दिया है। इसकी गतिविधियों का प्रारंभिक केंद्र था विलुप्त प्रायः प्रजातियों की सुरक्षा करना। जैसे-जैसे अधिक संसाधन उपलब्ध होते गए, इसका कार्य अन्य क्षेत्रों जैसे जैव विविधता का संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों का सतत इस्तेमाल तथा प्रदूषण एवं बर्बादी से होने वाली खपत में कमी लाना, आदि की तरफ भी बढ़ता गया।

1986 में संगठन का नाम बदलकर वर्ल्ड फंड फॉर नेचर कर दिया लेकिन उसके आरम्भिक शब्द WWF ही रखे गये जो कि इसके क्रियाकलापों को अच्छे ढंग से बता सकें। जबकि यूनाइटेड स्टेट्स एवं कनाडा में यह अपने मूल नाम से कार्य करता है।

ग्रीन पीस (Green Peace)
1986 में, कार्यकर्ताओं का एक छोटा दल जो ‘‘हरित एवं शांतिप्रिय विश्व’’ के अपने लक्ष्य द्वारा प्रेरित था, कनाडा, बैंकक्यूवर से पुरानी नाव में निकल पड़ा। इन कार्यकर्ताओं ने, जो ग्रीन पीस के संस्थापक थे, यह माना कि कुछ लोग मिलकर भी कुछ अलग कर सकते हैं।

उनका मिशन यूएस को एमचिटका, एक छोटा सा द्वीप जो अलास्का के पश्चिमी तट पर स्थित है, विश्व का सबसे अधिक भूकम्प संभावित क्षेत्र है, को नाभिकीय परीक्षणों से बचाने का बड़ा गवाह बनाना था। एमचिटका ने 3000 विलुप्तप्राय समुद्री ऑटरों एवं बेल्ड चीलों का घर, पेरीग्रीन फाल्कन एवं अन्य वन्य जीवों के कारण मना कर दिया था। फिर भी उनकी पुरानी नाव फिलिस कोरमॉक से यात्रा एमचिटका पहुँचने के पहले ही यह यात्रा लोगों के कौतूहल का कारण बन गयी थी। यूएस अभी तक बमबारी कर रहा था, लेकिन आवाज उठायी गयी थी, उसके कारणों को भी सुना गया था। एमचिटका पर उसी वर्ष नाभिकीय परीक्षण रोक दिये गये थे एवं इस द्वीप को बाद में पक्षी अभ्यारण्य घोषित कर दिया गया था।

ग्रीन पीस विश्व का सबसे बड़ा जमीनी स्तर का पर्यावरण नेटवर्क है। यह 77 राष्ट्रीय सदस्य समूहों एवं 5000 स्थानीय कार्यकर्ता समूहों को प्रत्येक महाद्वीप में एक जुट करता है। संपूर्ण विश्व में इसके 2 मिलियन से भी अधिक सदस्य हैं जिनके द्वारा ये आज के सबसे ज्वलंत पर्यावरणीय एवं सामाजिक मुद्दों पर अभियान चलाते हैं। नीदरलैंड के एम्सटर्डम में स्थित ग्रीन पीस के पास विश्व भर में करीब 2.8 मिलियन समर्थक हैं एवं 41 देशों में राष्ट्रीय तथा क्षेत्रीय कार्यालय हैं। आज ग्रीण पीस एक अन्तरराष्ट्रीय संगठन है जो वैश्विक पर्यावरणीय अभियानों को प्राथमिकता प्रदान करता है।

ग्रीन पीस की नीतियाँ एवं मान्यताएँ इस प्रकार हैं:
i. शांतिप्रिय एवं अहिंसात्मक तरीके से पर्यावरण को नष्ट होने से रोकना ;
ii. राजनैतिक एवं व्यावसायिक रुचियों से आर्थिक स्वतंत्रता हासिल करना
iii. समाज के पर्यावरणीय पसंदों के बारे में खुली एवं स्वतंत्र बहस को बढ़ावा देना व उनके लिये समाधान खोजना ;

दृष्टिकोण एवं मिशन
एक शांतिपूर्ण एवं अखंड विश्व जो ऐसे समाजों पर आधारित है जो प्रकृति के साथ संतुलन बनाए रखकर जीवन-यापन करते हैं। स्वतंत्र लोगों का एक समाज जो गर्व, संपूर्णता तथा संतोष के साथ रहते हैं जिसमें मानव समानता तथा लोगों के अधिकारों का अहसास होता है।

i. अखंड समाजों को सुरक्षित रखने के लिये मानव अधिकारों तथा लोगों के अधिकारों के प्रति सम्मान, मानव का आत्म सम्मान, पर्यावरणीय एवं सामाजिक न्याय आदि को सामूहिक तौर पर सुनिश्चित करना।

ii. पर्यावरणीय अवक्रमण तथा प्राकृतिक संसाधनों में कमी को रोकना या उसका विरोध करना, पृथ्वी की पारिस्थितिकी एवं सांस्कृतिक विविधता का पोषण करना तथा सतत आजीविका की सुरक्षा करना।

iii. स्वदेशी लोगों, स्थानीय समुदायों, महिलाओं समूहों एवं व्यक्तिगत लोगों के सशक्तीकरण को सुनिश्चित करना एवं निर्णय लेने में जनता की भागीदारी को सुनिश्चित करना।

iv. गुंजाय मान अभियानों में व्यस्त रहना, जागरूकता को बढ़ावा देना, लोगों को गतिशील बनाना एवं विविध प्रकार के अभियानों के साथ संबद्ध होना, जमीनी स्तर तक पहुँचना, राष्ट्रीय एवं वैश्विक संघर्ष में शामिल होना।

पाठगत प्रश्न 25.4
1. IUCN का पूरा नाम क्या है एवं इसका मुख्यालय कहाँ स्थित है?
2. WWF की स्थापना कब और कहाँ हुई थी?
3. वर्तमान WWF का पूरा नाम क्या है एवं इसका पहले का पूरा नाम क्या था?
4. विश्व की अधिकांश जैवविविधताएं किन पारिस्थितिकी तंत्रों में होती हैं?

25.9 टाटा ऊर्जा शोध संस्थान (TERI)
TERI (Tata Energy Research Insititute) एक जनरुचि शोध एवं समर्थक संगठन है जो पर्यावरण के लिये हितकर एवं न्यायसंगत विकासशील रणनीतियों को बढ़ावा देता है। इसकी औपचारिक स्थापना 1974 में हुई थी जिसका मुख्य उद्देश्य था गंभीर एवं कठिन समस्याओं से जूझना एवं उनका समाधान खोजना, जिनसे आने वाले वर्षों में मनुष्य का सामना होने वाला है। ये समस्याएँ पृथ्वी के सीमित ऊर्जा भंडारों में तेजी से आने वाली कमी के कारण उत्पन्न होंगी क्योंकि ये ऊर्जा भंडार अधिकांशतः अनवीकरणीय हैं। इनके इस्तेमाल के वर्तमान तरीकों में से अधिकांश प्रदूषण फैलाने वाले हैं, जो गंभीर समस्याएँ उत्पन्न करते हैं।

TERI सक्रिय रूप से ऊर्जा, पर्यावरण एवं विकास के आधुनिक तरीकों, जो अधिकांशतः दीर्घकालीन नहीं हैं, के क्षेत्र में आने वाली वैश्विक समस्याओं के लिये समाधान विकसित करने के कार्य में लगा है। यह संस्थान कई वर्षों में विकसित हुआ है, विशेषकर, जब इसने स्वयं की शोध गतिविधियाँ प्रारंभ की एवं नई दिल्ली में अपना आधार बना था जो इसका पंजीकृत मुख्यालय है। TERI के दर्शन का केंद्रीय तत्व है उद्यमिता के हुनर पर विश्वास करना जिससे समाज को लाभ मिल सके जिसमें ज्ञान रूपी संपत्ति का वितरण एवं विकास ही मुख्य जरिया हो। TERI की शाखाएँ उत्तरी अमरीका, यूरोप, जापान, मलेशिया एवं खाड़ी देशों में हैं।

TERI के पूरे विश्व के विभिन्न भागों में केवल कार्यालय ही नहीं बल्कि इसकी गतिविधियों की भी विस्तृत भौगोलिक प्रासांगिकता है। यह वार्षिक दिल्ली सतत विकास सम्मेलन का आयोजन करता है जो सतत विकास के ऊपर केंद्रित एक अहम घटना है जो मिलेनियम विकास गोल (MDG) एवं इन संवेदनशील क्षेत्रों में दुनिया भर की प्रगति के बारे में बताता है। इसके अलावा TERI ने एक विश्व सतत विकास फोरम (World Sustainable Development Forum WSDF) का भी गठन किया है, जो चुने विश्व नेताओं के समूह की छत्रछाया में संचालित होता है। WSDF प्रत्येक DSDS के अनुभव को विश्व के अन्य भागों तक पहुँचाता है तथा विश्वभर में इसके विकास पर नजर रखता है विशेषकर MDG की बैठक में।

25.10 राष्ट्रीय गैर सरकारी संगठन (NGO)
25.10.1 विज्ञान एवं पर्यावरण केन्द्र (सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट, CSE)

सेन्टर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (Centre for Science and Environment CSE) एक जन जागरूकता संबंधी खोज एवं सलाहकार संगठन है जो कि दिल्ली में स्थित है। CSE लॉवियो के लिये अनुसंधान करता है एवं विकास की आवश्यकता की सूचना देता है कि दोनों दीर्घोपयोगी एवं समान हैं। पर्यावरणीय अवक्रमण की सबसे बड़ी चुनौती एक ओर तो प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन है वहीं दूसरी ओर तेजी से बढ़ता हुआ औद्योगीकरण है, इन दोनों में संतुलन बनाये रखने का एक महत्त्वपूर्ण कार्य CSE ने ले रखा है। CSE इन समस्याओं के प्रति जागरूकता पैदा करती है एवं इसके दीर्घोपयोगी समाधान का भी सुझाव देती है।

सभी वर्गों के लोगों के बीच जिनमें विद्यार्थी भी शामिल हैं, पर्यावरणीय मुद्दों के प्रति बढ़ती हुयी रुचि के लिये काम करती है। CSE अनौपचारिक पर्यावरणीय शिक्षा का विकास कर रही है। उनके साधन जो लोगों के बीच जागरूकता पैदा करने के स्रोत प्रकाशित पत्रिकाएँ, फिल्म, प्रदर्शनियां एवं अन्य उत्पाद हैं।

उनके दो प्रमुख रोचक प्रकाशन ‘डाउन टू अर्थ’ (Down to Earth) एवं बच्चों की पत्रिका ‘गोबर टाइम्स’ (Gober Times) है।

25.10.2 कल्पवृक्ष
इसकी स्थापना 1979 में हुई थी एवं यह पर्यावरणीय जागरूकता, अभियानों, मुकदमों, शोध एवं अन्य क्षेत्रों में कार्य करता है। इसने कई पर्यावरण विकास संबंधित मुद्दों पर अच्छी पकड़ बनाई है। अधिकांश समय में यह विरोध पत्रों अथवा सड़क प्रदर्शनों जैसे उपायों द्वारा राज्यों के साथ सीधा मुकाबला नहीं करता है। इसके अधिकतर सदस्य विविध एवं गहन रूप से सीखने की प्रक्रिया में लगे रहते हैं। चिपको आंदोलन के समय हिमालयी क्षेत्र का दौरा, दिल्ली के सबसे बड़े हरित क्षेत्र (रिज एरिया) के विनाश के खिलाफ स्थानीय विद्रोह को प्रारंभ करना, वन्य जीव संरक्षण तथा पशु अधिकारों के लिये प्रकोष्ठ गठन के साथ-साथ ये ‘नेचर वॉक’ भी करते रहते हैं। इनके अलावा ये भरतपुर पक्षी रिजर्व में हुई पुलिस फायरिंग की जाँच, नर्मदा प्रोजेक्ट के प्रभावों का पहला विस्तृत अध्ययन, आदि भी इन्हीं के कार्यों में शामिल है। इस प्रकार की पृष्ठभूमि के साथ, यह आश्चर्यजनक नहीं है कि NGO ने लगातार राज्यों और उसकी नीतियों को चुनौती देने वाले आंदोलनों में भाग लिया है जबकि यह राज्यों के उन तत्वों का समर्थन भी करता है जो पर्यावरण एवं विकास के क्षेत्र में प्रगतिशील तरीके से कार्य करते हुए आगे बढ़ रहे हैं।

कल्पवृक्ष (Kalpavriksh) का यह विश्वास है कि एक देश का सही मायने में विकास तभी हो सकता है जब पारिस्थितिकी की सुरक्षा एवं सामाजिक समानता सुनिश्चित हो एवं प्रकृति एवं प्राणियों के प्रति एकरूपता तथा आदर का भाव लाया जा सके। यह एक अपदानुक्रमीय (Non hierarchical) संगठन है एवं इस समूह में सभी निर्णय उचित बहस और चर्चा के बाद ही लिये जाते हैं।

25.10.3 डेवलपमेंट ऑल्टरनेटिव्स (Development Alternatives)
यह एक अलाभकारी संगठन है जो सतत विकास के लिये शोध कार्य में व्यस्त रहता है। इसकी स्थापना 1983 में हुई थी एवं इसका पंजीकरण भारत सरकार के साथ सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत हुआ था। डेवलपमेंट अल्टरनेटिव्स का यह मानना है कि ‘विकास’ चूँकि एक गतिशील प्रक्रिया है, यह मुख्यतः सामाजिक और पर्यावरणीय मुद्दों के बीच अंतःसंबंध स्थापित करने के बारे में है। जिसमें विशेषकर प्रकृति, मशीनों, संस्थानों एवं लोगों के बीच आपसी संबंध मुख्य हैं। डेवलपमेंट अल्टरनेटिव्स समूह की गतिविधियों में मुख्य तौर पर तीन प्रमुख क्षेत्र शामिल होते हैं जो किसी भी प्रकार की सतत विकास प्रक्रिया का आधार होते हैं। ये क्षेत्र हैं: उपयुक्त तकनीकों की डिजाइन एवं बड़े पैमाने पर उनका वितरण, पर्यावरण प्रबंधन तंत्र बड़े पैमाने पर उनका वितरण, पर्यावरण प्रबंधन तंत्र एवं प्रभावशाली जन-मूलक संस्थान तथा नीतियाँ। डेवलपमेंट अल्टरनेटिव्स एवं इसके सहयोग संगठन इस दर्शन पर काम करते हैं कि सतत विकास ना केवल आर्थिक क्षेत्र को लाभ पहुँचाता है बल्कि यह पर्यावरण एवं इससे भी ऊपर लोगों को भी लाभ पहुँचाता है। डेवलपमेंट अल्टरनेटिव्स ग्रुप, इसलिये, सामाजिक समानता, पर्यावरण की गुणवत्ता तथा आर्थिक निपुणता जो सतत विकास के लिये पहले से आवश्यक बातें हैं, में आपस में अच्छा संतुलन बनाए रखने में पूरी तरह से लगा रहता है।

डेवलपमेंट अल्टरनेटिव्स ग्रुप का लक्ष्य है सतत राष्ट्रीय विकास को बढ़ावा देना।
इसके कॉर्पोरेट उद्देश्य हैं बड़े पैमाने पर सतत आजीविका को चलाने के संसाधनों की खोज करके उन्हें लोगों तक पहुँचाना और इस प्रकार गरीबी दूर करने तथा पर्यावरण को पुनर्स्थापित करने के लिये विश्वव्यापी गतिविधियों को क्रियान्वित करना है।

डेवलपमेंट अल्टरनेटिव्स की गतिविधियाँ, विकास से जुड़े मुद्दों का एक बड़ा क्षेत्र को घेरे रहती है। ये मुद्दे बड़े जटिल होते हैं जिन्हें परिष्कृत एवं अनुशासनात्मक प्रतिक्रिया की आवश्यकता होती है। इस तरह की प्रतिक्रियाओं को सफलतापूर्वक प्रदान करने में सक्षम, इस समूह ने एक सशक्त क्षमता का निर्माण किया है जिससे देश के सामने मुकाबले को तैयार प्रमुख मुद्दों को पहचाना जा सके एवं उनका समाधान ढूंढने के प्रभावशाली तरीके खोजे जा सकें। इसी वजह से इसमें अनुभवी स्टाफ सदस्य, जो विभिन्न प्रकार की योग्यता एवं पृष्ठभूमि से आए हों। लेकिन मिलजुलकर सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने का उनका एक ठोस इरादा हो, को साथ लेकर चला जाता है।

25.10.4 सुलभ इंटरनेशनल
सुलभ इंटरनेशनल (Sulabh International) एक समाज सेवी संगठन है जो मानव अधिकारों, पर्यावरण की स्वच्छता, ऊर्जा के गैर परंपरागत स्रोतों, अपशिष्ट प्रबंधन एवं शिक्षा द्वारा सामाजिक परिवर्तनों को बढ़ावा देने के लिये कार्य करता है। इसकी स्थापना डॉ. बिंदेश्वर पाठक ने 1970 में की थी।

इसने भारत में लोगों का ध्यान स्वच्छता की ओर आकर्षित करने में अहम भूमिका अदा की है। इसने लोगों को खुले में मल-मूत्र त्याग की आदत को रोकने में अहम भूमिका निभाई है एवं साथ-साथ लोगों को टॉयलेट (शौचालयों) के इस्तेमाल के लिये उत्साहित किया है तथा स्वच्छता के प्रयास करने के लिये भी तैयार किया है। 1970 में सुलभ के आने से पहले सांस्कृतिक विषयों में टॉयलेट एक वर्जित विषय था।

एक स्वस्थ एवं स्वच्छ भारत जो खुले में मल मूत्र त्याग की आदत से मुक्त है एवं इनसे पर्यावरण को होने वाले प्रदूषण से भी मुक्त है। एक समाज जो छुआछूत एवं सामाजिक भेदभाव से मुक्त है। सुलभ ने मानव मलमूत्र को मानव द्वारा हाथ से साफ करने जैसे अमानवीय कार्य को रोका है।

मिशन
भविष्य में सुलभ की दृष्टि को प्राप्त करने के लिये लोगों को शिक्षित एवं प्रेरित करना, नीतिकारों एवं पदाधिकारियों को सुग्राही बनाना, सरकार एवं लोगों के कार्यक्रमों एवं गतिविधियों को बढ़ावा देना।

जो लोग सफाई कर्मी (उनको स्केवेन्जर कहा जाता है) जो मानव मलमूत्र की सफाई करते हैं, उनके प्रति सुलभ ने लोगों का नजरिया काफी बदल दिया है। शौचालयों के बारे में लेखों तथा चर्चाओं द्वारा आदरपूर्वक बातें होने लगी हैं। स्वतंत्रता से पहले, जो लोग अस्पृश्य होते थे और मलमूत्र की सफाई के काम में लगे रहते थे, को समाज ने स्वीकार कर लिया है और अब लोग उनसे मिलने जुलने में संकोच नहीं करते हैं।

सफाई कर्मियों को मानव सम्मान दिलाने में सुलभ के प्रयासों में पाँच अलग-अलग चरण होते हैं:
i. स्वतंत्रता
ii. पुनर्स्थापना
iii. व्यावसायिक प्रशिक्षण
iv. सामाजिक उत्थान तथा
v. अगली पीढ़ी को उचित शिक्षा

सुलभ के नए आविष्कारों में सफाई मुक्त दो गड्ढों वाला पोर फ्लश शौचालय (सुलभ शौचालय) सुरक्षित एवं स्वच्छ मानव मल मूत्र निपटान तकनीक, जन सुविधाओं जहाँ पैसे देकर इस्तेमाल होता है, के निर्माण एवं रख-रखाव की नई अवधारणा, करीब 10 मिलियन लोगों द्वारा प्रतिदिन इस्तेमाल की जाने वाले सुलभ कॉम्प्लेक्स जिनमें नहाने, कपड़े धोने एवं पेशाब घरों की सुविधा होती है, मलमूत्र आधारित बायोगैस संयंत्रों से बायोगैस एवं बायो खाद का उत्पादन, संस्थानों एवं उद्योगों के लिये मध्यम क्षमता वाले गंदे पानी को संशोधित करने वाले कम खर्चीले संशोधन संयंत्र आदि शामिल हैं।

अन्य कार्यों में नई दिल्ली में अंग्रेजी माध्यम का पब्लिक स्कूल खोलना, गरीब परिवारों विशेषकर सफाई कर्मियों के लड़के, लड़कियों को विशेष केंद्रों द्वारा पूरे देश में प्रशिक्षण देना, जिससे वे रोजगार के खुले बाजार में खुद अपने लिये रोजगार खोज सकें।

2006 के लिये आई मानव विकास इंडेक्स रिपोर्ट के 124वें पेज पर सुलभ को स्थान मिला था। सुलभ, भारत में गरीबों में स्वच्छता लाने के लिये प्रतिबद्ध है। 2007 अक्टूबर में सुलभ ने एक ऐसे सस्ते शौचालय सिस्टम की डिजाइन तैयार की जो मानव अपशिष्ट को बायोगैस एवं खाद में पुनः चक्रित करता है।

पाठगत प्रश्न 25.5
1. TERI का पूरा नाम क्या है और इसका मूल प्रयोजन क्या है?
2. ‘डाउन टू अर्थ’ क्या है?
3. कल्पवृक्ष की स्थापना कब हुई और इसके द्वारा किया जाने वाला मुख्य कार्य क्या है?
4. डेवलपमेंट अल्टरनेटिव्स (Development Alternatives) के लक्ष्य क्या हैं?
5. सुलभ इंटरनेशनल की स्थापना किसने की? यह संगठन किस प्रकार के कार्य करता है?

आपने क्या सीखा
1. पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण, संरक्षण एवं सतत विकास को बढ़ावा देने के लिये पर्यावरण की प्रगति के लिये राष्ट्रीय सरकार की भूमिका काफी आलोचनात्मक है।

2. 1972 में नेशनल कमेटी इन एनवायरनमेंटल प्लानिंग एंड कोऑर्डिनेशन (NCEPC) का गठन हुआ जो धीरे-धीरे बढ़ी एवं बाद में 1985 में संपूर्ण रूप से पयार्वरण एवं वन मंत्रालय में परिवर्तित हुई।

3. CPCB (केन्द्रीय प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड) केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एक वैधानिक संगठन है जिसकी स्थापना 1974 में हुई थी। इसका मुख्य कार्य है जल एवं वायु की गुणवत्ता को नियंत्रित करना, उन्हें नियमित करना तथा उनका रखरखाव करना।

4. CPCB केंद्र सरकार को जल एवं वायु प्रदूषण के नियंत्रण एवं निवारण से जुड़े किसी भी मुद्दे पर सलाह देता है।

5. IBWL (इंडियन बोर्ड फॉर वाइल्ड लाइफ) वन्य जीवन के लिये भारतीय बोर्ड एक अहम सलाहकार समिति है जो देश में वन्य जीव संरक्षण के क्षेत्र में कार्य करती है।

6. अन्तरराष्ट्रीय पर्यावरण एजेंसियां हैं: यूनाइटेड नेशन्स एनवायरनमेंट प्रोग्राम (UNEP), FAO, WHO। इनका मुख्य कार्य है पर्यावरण नीतियों का समन्वयन करना जिससे वैश्विक पर्यावरण का अवलोकन किया जा सके तथा पर्यावरण से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय समुदाय के सामने लाया जा सके जिससे उन पर कुछ कार्य किया जा सके।

7. WHO (विश्व स्वास्थ्य संगठन) का उद्देश्य है ‘‘सभी लोगों द्वारा स्वास्थ्य का सर्वश्रेष्ठ संभावित स्तर प्राप्त करना’’। 7 अप्रैल 1948 को प्रारंभ होने के कारण 7 अप्रैल को प्रतिवर्ष वर्ल्ड हेल्थ डे के रूप में मनाया जाता है।

8. CSD (कमीशन ऑन सस्टेनेबल डेवलपमेंट) सतत विकास के लिये कमीशन, जून 1992 में रियो. डी. जेनेरियो में हुए ‘पृथ्वी सम्मेलन’ में इसके गठन को लेकर हुए एक ऐतिहासिक फैसले का नतीजा है। इसकी स्थापना दिसंबर 1992 में हुई थी।

9. CSD का मुख्य कार्य हैः सरकार, NGO एवं यूएन संस्थाओं के पर्यावरणीय तथा विकास मूलक लक्ष्यों के एकीकरण से संबंधित सभी गतिविधियों एवं प्रगति पर नजर रखना।

10. यूनाइटेड नेशन्स फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज (UNFCCC) का मुख्य उद्देश्य है यह सुनिश्चित करना कि ग्लोबल वार्मिंग (वैश्विक ऊष्मण) को कम करने के लिये क्या किया जा सकता है एवं जो भी तापमान बढ़ता है और जिसे रोका नहीं जा सकता है, उसके साथ किस प्रकार से तालमेल बैठाया जाए।

11. क्योटो प्रोटोकॉल एक अन्तरराष्ट्रीय एवं कानूनी तौर पर बाध्य करने वाला समझौता है जिससे विश्वभर में ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन को रोका जा सकता है। यह 16 फरवरी 2005 में कार्यान्वित हुआ था।

12. NGO अर्थात गैर सरकारी संगठन, सरकार से स्वतंत्र है। ऐसे कई NGO हैं जो वन्य जीवों के संरक्षण, पर्यावरण की सुरक्षा, संसाधनों का संरक्षण एवं सतत विकास के प्रति प्रतिबद्ध हैं।

13. इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (IUCN) सबसे पुराना एवं सबसे बड़ा वैश्विक पर्यावरणीय नेटवर्क है। इसका मुख्यालय स्विटजरलैंड में है।

14. वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर (WWF) एक अन्तरराष्ट्रीय NGO है जो पर्यावरण के संरक्षण, शोध एवं पुनःप्राप्तीकरण से जुड़े मुद्दों पर कार्य करता है।

15. सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE), कल्पवृक्ष, सुलभ इंटरनेशनल एवं डेवलपमेंट अल्टरनेटिव्स राष्ट्रीय NGO हैं।

पाठांत प्रश्न
1. CPCB का पूरा नाम क्या है और इसके मुख्य कार्य क्या हैं?
2- रियो + 10 (Rio+ 10) क्या है एवं यह कहाँ हुआ था?
3. भारत मे वन्य जीव संरक्षण संस्था कौन सी है और इसे क्या कहा जाता है?
4. यूनाइटेड नेशन्स की कौन सी एजेंसी, अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर पर्यावरणीय कार्यक्रमों के लिये दिशा निर्देश नीति निर्धारित करती है?
5. 1980 में WHO द्वारा कौन सी बीमारी को जड़ से खत्म कर दिया गया था?
6. निम्न का पूरा नाम और संक्षिप्त विवरण लिखोः
i. SARS (सार्स)
ii. AIDS (एड्स)
iii. WHO (डब्ल्यू एच ओ)
iv. FAO (एफ ए ओ)
v. NGO (एन जी ओ)
vi. CSE (सी एस ई)
vii. UNFCCC (यून एन एफ सी सी सी)
viii. TERI (टेरी)
ix. IUCN (आई यू सी एन)
x. WWF (डब्ल्यू डब्ल्यू एफ)
7. सुलभ इंटरनेशनल का संस्थापक कौन है? इस संगठन के तीन कार्यों का उल्लेख करो।
8. निम्न के जोड़े मिलाओ

कल्पवृक्ष

पर्यावरण पत्रिका

गोबर टाइम्स

भारतीय NGO जो पर्यावरण से जुड़ा है।

डाउन टू अर्थ

एक द्वीप

ग्रीन पीस

अन्तरराष्ट्रीय NGO जो पर्यावरण से जुड़ा है।


9. HELI का क्या अर्थ है और इसका गठन किसलिये हुआ था?
10. फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गनाइजेशन (खाद्य एवं कृषि संगठन) का मुख्य कार्य क्या है?
11. क्योटो प्रोटोकॉल के मुख्य उद्देश्य क्या हैं?
12. IUCN के मुख्य उद्देश्य एवं कार्य क्या हैं?

पाठगत प्रश्नों के उत्तर
25.1

1. i) पर्यावरण एवं वन मंत्रालय
ii) केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
iii) राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
iv) वन्य जीवों के लिये भारतीय बोर्ड

2. देश में पर्यावरणीय एवं वन कार्यक्रमों की योजना तैयार करना, उनका प्रचार करना, उनका समन्वयन, निरीक्षण तथा क्रियान्वयन करना।
3. सितम्बर 1974
4. केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, नेशनल एम्बिएंट एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग, इंडियन बोर्ड फॉर चाइल्ड लाइफ।
5. 7 दिसम्बर 2001 एवं भारत के प्रधानमंत्री

25.2
1. यूनाइटेड नेशन्स पर्यावरण प्रोग्राम। इसका गठन नैरोबी (केनिया) में यूनाइटेड नेशन्स जनरल असेंबली द्वारा हुआ था।
2. UNEP, सतत विकास को बढ़ावा देने के लिये पर्यावरण संबंधी विकास प्रोजेक्टों के क्रियान्वयन एवं आर्थिक सहायता प्रदान करने का कार्य करता है।
3. विश्व स्वास्थ्य संगठन इसका उद्देश्य है सभी लोगों द्वारा स्वास्थ्य का उच्चतम संभावित स्तर प्राप्त करना।
4. स्मॉलपॉक्स या चेचक वह पहली बीमारी थी जो 1980 में जड़ से खत्म कर दी गई थी।
4. हेल्थ एवं पर्यावरण लिंक इनिशियेटिव।
6. FAO का गठन यूनाइटेड नेशन्स द्वारा हुआ था इसका उद्देश्य है भुखमरी पर विजय पाना।

25.3
1. कमीशन फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट, इसकी स्थापना 1992 में हुई थी।
2. यह एक अन्तरराष्ट्रीय संस्था है जो यह निश्चित करती है कि वैश्विक ऊष्मण (ग्लोबल वार्मिंग) को कम करने के लिये क्या किया जाए। एवं जो तापमान में बढ़त निश्चित है उसके साथ किस प्रकार तालमेल बैठाया जाए।
3. क्योटो प्रोटोकॉल एक अन्तरराष्ट्रीय एवं कानूनी रूप से बाध्य करने वाला समझौता है जो ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन को पूरे विश्व में कम करने के लिये कार्य करता है। इसका प्रारंभ 16 फरवरी 2005 में हुआ था।

25.4
1. इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर, इसका मुख्यालय स्विट्जरलैंड के ग्लैंड में स्थित है।
2. इसका गठन वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ फंड के नाम से 11 सितंबर 1961 को स्विट्जरलैंड के ‘मोर्जेस’ में एक धर्मार्थ ट्रस्ट के रूप में हुआ था।
3. वर्तमान में पूरा नाम है वर्ल्ड वाइल्ड फंड फॉर नेचर जबकि पहले का पूरा नाम था वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ फंड। विश्व की अधिकांश जैव विविधता वनों, अलवणजलीय पारितंत्रों, महासागरों तथा तटों में होती है।

25.5
1. TERI टाटा एनर्जी रिसर्च इंस्टीट्यूट है जिसकी स्थापना 1974 में हुई थी। इस संस्था की स्थापना का मूल उद्देश्य था पृथ्वी के सीमित ऊर्जा भंडारों के तेजी से घटने की गंभीर समस्या का समाधान खोजना।
2. CSE (सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट) द्वारा प्रकाशित पाक्षिक पत्रिका।
3. 1979 में और इसके मुख्य कार्य हैं: पर्यावरणीय जागरूकता, अभियान, मुकदमेबाजी, शोध एवं पर्यावरण के मुद्दों से संबंधित अन्य क्षेत्र।
4. इसका कार्य है सतत राष्ट्रीय विकास को बढ़ावा देना।
5. डॉ. बिंदेश्वर पाठक ने 1970 में सुलभ इंटरनेशनल की स्थापना की थी। यह एक समाजसेवी संगठन है जो मानवाधिकार, पर्यावरणीय स्वच्छता, गैर परंपरागत ऊर्जा के स्रोत, कचरा प्रबंधन एवं शिक्षा द्वारा सामाजिक परिवर्तन जैसी सेवाएँ प्रदान करता है।

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