बाढ़ भी बिगाड़ देती है भूजल की सेहत

Submitted by RuralWater on Tue, 11/07/2017 - 11:21
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दैनिक जागरण, 07 नवम्बर, 2017

बाढ़ से प्रदूषित भूजलबाढ़ से प्रदूषित भूजलएक नए अध्ययन में सामने आया है कि प्रदूषण की शिकार नदियों में आने वाली बाढ़ के कारण भूजल के भी प्रदूषित होने का खतरा बढ़ जाता है और यह हमारे इस्तेमाल के लिये असुरक्षित हो जाता है। दिसम्बर 2015 में जब चेन्नई बाढ़ की आपदा का सामना कर रही थी तब अन्ना विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों की एक टीम अड्यार नदी के किनारे भूजल के सैम्पल एकत्र कर रही थी ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस इलाके में जमीन के अन्दर का पानी मानव इस्तेमाल के लिये फिट है।

पाँच महीनों के दौरान लिये गए सैम्पल


शोधकर्ताओं ने दिसम्बर 2015 से अप्रैल 2016 के बीच 17 ठिकानों से भूजल के नमूने एकत्र किये। यही बाढ़ और उसके बाद का समय था। वैज्ञानिकों ने नमूनों का परीक्षण नमक, भारी धातु सान्द्रता के साथ-साथ एंटी बायोटिक तत्वों की उपलब्धता का स्तर जानने के लिये किया। अन्ना यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट आॅफ जियोलाजी के प्रोफेसर लक्ष्मणन इलांगो ने कहा, हम जानना चाहते थे कि चेन्नई शहर में जमीन के पानी की गुणवत्ता का स्तर उतना ही है या नहीं जितना कि बाढ़ या उसके बाद के समय के लिये भारतीय मानक ब्यूरो ने निर्धारित किया है।

हमने पाया कि ग्राउंड वाटर के नमूनों में हैवी मेटल और माइक्रोबियल लोड कहीं ज्यादा था। इसमें इंटरोबैक्टर, स्टेफीलोकोस, स्ट्रेप्टोकोकस, विबिरियो सरीखे माइक्रोब्स भी थे, जिनके बारे में माना जाता है कि वे पेट में खराबी, कालरा और टायफाइड जैसी बीमारियों को जन्म देते हैं। इन माइक्रोब्स का इस आधार पर भी परख गया कि तमाम बीमारियों के इलाज के लिये जो एंटीबायोटिक दिये जाते हैं उनके प्रति इनका रुख क्या है? क्या वे दवाओं के प्रति संवेदनशील हैं या फिर एक किस्म का प्रतिरोधी रूप ग्रहण कर चुके हैं।

खतरनाक बैक्टीरिया की उपस्थिति


प्रोफेसर लक्ष्मणन बताते हैं कि बैक्टीरिया ज्यादातर एंटीबायोटिक के प्रति संवेदनशील थे, लेकिन इनमें से कुछ एंटीबायोटिक प्रतिरोधी भी थे। इस शोध के नतीजे हाल में नेचर साइंटिफिक डाटा जर्नल में प्रकाशित किये गए थे। इसके साथ ही शोध में यह भी सामने आया कि तमाम स्थानों से लिये गए सैम्पलों में बैक्टीरिया को लेकर काफी समानता थी। इसका मतलब सभी स्थानों में पानी का प्रवाह एक ही घरेलू सीवेज स्रोत से हुआ होगा, जिसमें प्रदूषणकारी तत्व शामिल थे। शोधकर्ताओं ने बताया कि बाढ़ ने इस प्रदूषक जल को भूगर्भ में पहुँचा दिया और इसके चलते जमीन के अन्दर का पानी भी साफ-स्वच्छ नहीं रह गया।

सतर्क रहें लोग


लक्ष्मणन कहते हैं कि हमारे निष्कर्ष यह बताते हैं कि बाढ़ भूजल को भी नुकसान पहुँचाने का काम कर सकती है। हमारे इस शोध के आधार पर हमारी सलाह यह है कि कुओं में अच्छी तरह क्लोरीन डाली जानी चाहिए और लोगों को यह चेतावनी दी जानी चाहिए कि कम-से-कम बाढ़ के कुछ महीनों में वे भूजल का सीधे इस्तेमाल न करें।

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