पौष्टिक आहार ही बचाएगा फ्लोरोसिस से

Submitted by RuralWater on Sun, 07/03/2016 - 10:32

फ्लोरोसिस प्रभावित लोगों के लिये औषधियों के बनिस्बत आँवला, सहजन, केसिया तोरा जैसे फल-फूल और दूध के सेवन की सलाह दी गई क्योंकि फ्लोराइड कैल्शियम, विटामिन सी और मैग्निशियम सोख लेता है और ये फल-फूल इनकी आपूर्ति करते हैं। कहा जाता है कि 100 ग्राम आँवला के सेवन से 7 हजार मिलीग्राम विटामिन सी प्राप्त होता है। ऐसे ही गुणों से भरपूर दूसरे पौष्टिक आहार भी हैं।

फ्लोरोसिस की शिनाख्त देश में पहली बार 1937 में की गई थी लेकिन इसके बाद इसका शोर थम गया था। पिछले दिनों झारखण्ड में इस रोग से 36 लोगों के मारे जाने के बाद फ्लोरोसिस व्यापक तौर पर चर्चा के केन्द्र में आया।

फ्लोरोसिस एक बीमारी है जो फ्लोराइड युक्त पानी पीने से होता है। यहाँ एक अहम सवाल यह पूछा जा सकता है कि पानी में फ्लोराइड आता कहाँ से है। असल में कई सदियों तक भूगर्भ के भीतर हुई रासायनिक प्रक्रियाअों के चलते भूमि के नीचे की सतह में फ्लोराइड रसायन बना जो पानी में घुल गया। इस पानी को जिन लोगों ने पिया और पी रहे हैं वे इस रोग की चपेट में आ गए।

इनरेम फाउंडेशन की ओर से 23 और 24 जून को गुजरात के आणंद में हुए दो दिवसीय कार्यक्रम में इस महामारी पर विस्तृत चर्चा हुई और इस क्षेत्र में काम करने वाले संगठनों से इसको लेकर सीधा संवाद किया गया। संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ साझेदारी कर फ्लोराइड के संक्रमण को रोकने का संकल्प लिया गया। संगठनों की तरफ से आये प्रतिनिधियों ने आश्वस्त किया कि वे अपने क्षेत्रों में फ्लोरोसिस को लेकर व्यापक तौर पर जागरुकता अभियान चलाएँगे और इससे निपटने के लिये कई तरह के कार्यक्रम शुरू करेंगे।

इस कार्यक्रम में फ्लोराइड के संक्रमण और इससे बचने के लिये अपनाए जाने वाले उपायों पर भी चर्चा की गई। कार्यक्रम में मौजूद फाउंडेशन के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने कहा कि प्रकृति में ही फ्लोराइड से बचने का सूत्र मौजूद है, हमें बस जरूरत है उन सूत्रोंं तक पहुँचने की।

भूजल में मौजूद फ्लोराइड से बचने के लिये इस कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि किसी तरह के ट्रीटमेंट प्लांट से बेहतर होगा कि हम बारिश के पानी को सहेजकर रखें और उसे ही घरेलू स्तर पर परिशोधित पेयजल में इस्तेमाल करें।

कार्यक्रम में फ्लोरोसिस प्रभावित लोगों के लिये औषधियों के बनिस्बत आँवला, सहजन, केसिया तोरा जैसे फल-फूल और दूध के सेवन की सलाह दी गई क्योंकि फ्लोराइड कैल्शियम, विटामिन सी और मैग्निशियम सोख लेता है और ये फल-फूल इनकी आपूर्ति करते हैं। कहा जाता है कि 100 ग्राम आँवला के सेवन से 7 हजार मिलीग्राम विटामिन सी प्राप्त होता है। ऐसे ही गुणों से भरपूर दूसरे पौष्टिक आहार भी हैं।

इनरेम फाउंडेशन के सुंदरराजन कृष्णन, ज्वाइंट डायरेक्टर डॉ. राजनारायण इंदू, प्रोग्राम मैनेजर प्रीतेश पटेल ने कार्यक्रम में बताया कि किस तरह आसानी से समझा जा सकता है कि किसी को फ्लोरोसिस है कि नहीं। सुंदरराजन कृष्णन ने कहा कि फिलहाल 20 से 22 राज्य फ्लोरोसिस से पीड़ित हैं और सरकार के साथ ही स्वयंसेवी संगठनों को भी इससे निपटने के प्रयास करने होंगे। उन्होंने कहा, दाँतों में पीलापन और कुछ आसान व्यायामों को आजमाकर प्रथम दृष्टयता हम समझ सकते हैं कि किसी को फ्लोरोसिस हुअा है कि नहीं। इसके अलावा जरकोनी अलिजरीन और जिलेनॉल अॉरेंज के जरिए हम पता लगा सकते हैं कि किसी इलाके के पानी में फ्लोराइड है कि नहीं।

उन्होंने आगे कहा कि रासायनिक जाँच के लिये हमें एक मेजरिंग सिलिंडर खरीदना होगा। इस सिलिंडर में 4 मिलीलीटर पानी और इस पानी में 1 मिलीलीटर जरकोनी अलिजरीन डालना होगा। रासायनिक के मिलने के बाद पानी अगर पीला हो जाता है तो पानी में फ्लोराइड है और अगर पानी का रंग गुलाबी हो जाता है तो पानी फ्लोराइड रहित है।

वहीं, मोबाइल एप की मदद से जिलेनॉल अॉरेंज रसायन का इस्तेमाल कर पता लगा सकते हैं कि पानी में फ्लोराइड है कि नहीं।

डॉ. राजनारायण इंदू ने कहा कि हमने एक फिल्ट्रेशन सिस्टम भी विकसित किया है जिसकी मदद से पानी से फ्लोराइड को बाहर निकाला जा सकता है। इसमें एक्टिवेटेड अल्युमिनिया और एक्टिवेटेड चारकोल का इस्तेमाल किया जाता है। उन्होंने कहा कि इसमें कुल खर्च 1 हजार से 12 सौ रुपए आते हैं।

कार्यक्रम में उपस्थित विशेषज्ञों ने कहा कि फ्लोराइड और बारिश के पानी के संरक्षण के लिये सबसे अच्छा होगा कि स्कूल स्तर पर बच्चों को जागरूक किया जाये क्योंकि बच्चे ही कल का भविष्य हैं। विशेषज्ञों ने कहा कि पानी में 1 मिलीग्राम तक फ्लोराइड हो तो यह हानिकारक नहीं होता है लेकिन इससे अधिक हो तो हड्डियों में टेढ़ेपन का खतरा रहता है।

सुंदरराजन ने कहा कि बच्चों में अगर फ्लोरोसिस की शिनाख्त शुरुअाती दौर में हो जाये तो ठीक होने की सम्भावना अधिक रहती है। हालांकि बुढ़ापे में इस रोग से निजात की सम्भावना नगण्य रहती है लेकिन पौष्टिक आहार के सेवन से इसे बढ़ने से रोका जा सकता है।
 

ये हैं फ्लोरोसिस के लक्षण


1. दातों में पीलापन
2. हाथ और पैर का टेढ़ापन
3. पैर का अन्दर, बाहर अथवा सामने की ओर झुकाव
4. घुटनों के पास सूजन
5. कंधा, हाथ और पैर के जोड़ों में दर्द
6. कम उम्र में बुढ़ापे के लक्षण
7. पेट में भारीपन महसूस होना

 

 

इन पौष्टिक आहारों का करें सेवन


दूध, आँवला, गुड़, सोया, दलिया, हरी सब्जी, तिलचिक्की, सहजन, अमरूद आदि।

 

 

 

 

 

 

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