जल संकटः गुजरात उद्योगों को उपयोग किया हुआ पानी दिया जाएगा

Submitted by UrbanWater on Tue, 05/21/2019 - 12:14
Source
द हिन्दू, अहमदाबाद, 21 मई 2019

गुजरात में पानी की कमी हर साल की कहानी है।गुजरात में पानी की कमी हर साल की कहानी है।

गुजरात में पानी की कमी का होना हर साल की कहानी है। ताजे पानी के साफ स्रोतों और बढ़ती मांग ने यहां जीना दूभर कर दिया है। हर साल गुजरात को पानी की कमी का सामना करना पड़ता है। खासकर सौराष्ट और उत्तरी गुजरात के दूर-दराज इलाकों में पानी की समस्या ज्यादा है। दोनों ही राज्य इस समय सूखे की चपेट में हैं।

इस साल 750 से अधिक गांवों में स्थानीय स्रोतों की कमी की वजह से टैंकरों के माध्यम से पानी की आपूर्ति की जा रही है क्योंकि पिछले मानसून में कम बारिश के कारण अधिकांश बांध और जलाशय सूख गए हैं।

विस्तृत योजना

अब राज्य सरकार एक नई और विस्तृत योजना को लेकर आई है। जिसमें केवल पीने और सिंचाई के लिए ताजे पानी की आपूर्ति की जाएगी। इससे पानी की कमी को दूर किया जाएगा। उद्योगों के लिए जो पानी की अधिक मांग कर रहे हैं। उनकी कमी को उपयोग किए गए अपशिष्ट जल माध्यम से पूरा किया जाएगा, जिसकी आपूर्ति राज्य सरकार करेगी।

गुजरात के मुख्य सचिव जे. एन. सिंह ने बताया, ‘अगले 3-4 वर्षों में, उद्योगों की 80 प्रतिशत से अधिक पानी की जरूरत को ट्रीटेड वेस्ट वॉटर की आपूर्ति के माध्यम से पूरा किया जाएगा, जिसे सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट्स द्वारा आपूर्ति की जाएगी। वो आगे बताते हैं, उद्योगों को केवल उपयोग किया हुआ पानी दिया जाएगा। पीने और सिंचाई के लिए संरक्षित ताजा भूजल दिया जाएगा। 

राज्य की जल आपूर्ति पर प्रधान सचिव जे. पी. गुप्ता ने कहा, अभी तक हमारी कुल सीवेज जल उत्पादन 4,000 मिलियन लीटर प्रतिदिन (एमएलडी) है। जबकि हमारी ट्रीटमेंट क्षमता 3,500 मिलियन लीटर प्रतिदिन (एमएलडी) है। अगले 2-3 वर्षों में, नए एसटीपी स्थापित करने और मौजूदा लोगों के विस्तार के साथ 1,500 मिलियन लीटर प्रतिदिन (एमएलडी) की नई क्षमता को जोड़ा जाएगा।

 प्रधान सचिव जे. पी. गुप्ता के अनुसार, राज्य में ताजे पानी के सीमित स्रोत हैं, जबकि मांग बढ़ती रही है। अधिकारियों को इस समस्या को सुलझाने के लिए नये और कई तरीके सुझाने पड़ रहे हैं। जे. पी. गुप्ता आगे कहते हैं, अपशिष्ट जल जो सीवेज में उत्पन्न होता है। उस अपशिष्ट पानी से औद्योगिक उपभोग की आपूर्ति करके, हम शहरों और कस्बों में प्रदूषण के मुद्दे को भी हल करेंगे। हमारे पास एसटीपी में पानी के ट्रीटमेंट की क्षमता है और इस ट्रीटमेंट वाले जल की कोई मांग भी नहीं है। यह पानी में घुल जाता है और जल को जल निकाय या खेतों में छोड़ दिया जाता है। अब हम उद्योगों के लिए उपचारित जल का उपयोग करना अनिवार्य कर देंगे।

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