वन विभाग बचाएगा 34 दुर्लभ वनस्पतियाँ

Submitted by editorial on Wed, 01/02/2019 - 12:36
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Source
हिन्दुस्तान, 02 जनवरी, 2019

औषधीय पौधेऔषधीय पौधे उत्तराखण्ड में पाई जाने वाली हिमालय की 34 दुर्लभ वनस्पतियों को वन विभाग बचाएगा। इसके लिये वन विभाग ने कार्य योजना तैयार कर ली है। कार्ययोजना के तहत हर साल होने वाले पौधरोपण अभियान के दौरान 10 प्रतिशत सिर्फ इन दुर्लभ वनस्पतियों का ही रोपण किया जाएगा।

वन विभाग के अनुसन्धान वृत्त ने राज्य भर में खासकर उच्च हिमालयी क्षेत्रों में लगभग 34 ऐसी वनस्पतियाँ चिन्हित की हैं जो या तो विलुप्ति की कगार पर हैं, या खतरे में हैं अथवा काफी कम हो चुकी हैं। अनुसन्धान वृत्त की आठ शाखाओं में इनकी अलग-अलग पौध तैयार की जा रही है।

जलवायु परिवर्तन का विशेष असर

इन प्रजातियों पर जलवायु परिवर्तन का खासा असर दिख रहा है। इसी के चलते लगातार ये विलुप्ति की कगार पर पहुँच गई हैं। लगातार बढ़ रहे प्रदूषण, गर्मी, मिट्टी के कटाव, पानी की कमी सहित कई कारण इनके लिये खतरा बन गए हैं।

ये हैं प्रमुख प्रजातियाँ

शंखपुष्पी, जटामासी, पृष्पपर्णी, गिलोय, सर्पगन्धा, पुतली, अनीस, जम्बू, उतीस, भोजपत्र, फर्न, मूँछ, गेंती, तुमड़ी, वन, पलास, कुनेर, टाकिल पाम, तानसेन, अमार, गौंत, गेंठी, चमखड़कि और विजासाल आदि।

राज्य के सभी तेरह जिलों में होगा प्लांटेशन

इसके बाद 13 जिलों के 24 टेरिटोरियल डिवीजनों को इनका प्लांटेशन करना होगा। इसी साल बरसात से इनके संरक्षण की प्रक्रिया शुरू होगी। वन अनुसन्धान वृत्त के रेंजर मदन सिंह बिष्ट के अनुसार, नर्सरियों में इनकी पौध तैयार की जा रही है। जिनका बाद में अलग-अलग जगह प्लांटेशन किया जाएगा इनमें ज्यादातर औषधीय और सगन्ध पौधे हैं। इसके लिये विशेष बजट की भी व्यवस्था की जा रही है।

सर्वे के बाद ऐसी प्रजातियाँ चिन्हित की गई हैं। इनकी पौध तैयार की जा रही है, ताकि इनका ज्यादा से ज्यादा प्लांटेशन किया जा सके। खासकर इनके प्राकृतिक वास स्थलों पर प्लांटेशन की योजना है -संजीव चतुर्वेदी, वन संरक्षक, अनुसन्धान वृत्त हल्द्वानी

हिमालय में वनस्पतियों की कई ऐसी प्रजातियाँ हैं जो औषधीय गुणों से भरी हैं। कई ऐसी हैं जिनका अभी कोई इस्तेमाल नहीं है, पर सम्भव है कि भविष्य में इनका कोई बड़ा महत्व सामने आ जाए। ये खत्म होती जा रही हैं। ऐसी प्रजातियों के संरक्षण की योजना है -जयराज, पीसीसीएफ, उत्तराखण्ड

 

 

 

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