हिमयुग के अंतिम वर्षों में मानवीय पलायन में शामिल थीं महिलाएँ

Submitted by Hindi on Thu, 02/15/2018 - 18:31
Printer Friendly, PDF & Email
Source
इंडिया साइंस वायर, नई दिल्ली, 15 फरवरी 2018

जब से जीवधारियों के जीनोम को पढ़ना और जीन्स को क्रमबद्ध करना सम्भव हुआ है, तब से मानव विकास क्रम के बारे में कई नए खुलासे हो रहे हैं। अब भारतीय शोधकर्ताओं द्वारा जम्मू-कश्मीर में किए गए एक ताजा अध्ययन में पता चला है कि प्लाइस्टोसीन या हिमयुग के अंतिम दौर और उसके बाद भी एक जगह से दूसरी जगह होने वाले मानवीय पलायन पूरी तरह पुरुष प्रधान नहीं थे, बल्कि इसमें महिलाएँ भी शामिल थीं।

अब तक मिले तथ्यों के आधार पर माना जाता है कि मनुष्य की वर्तमान आबादी के पूर्वजों की उत्पत्ति अफ्रीका में हुई थी, जो करीब एक लाख वर्ष पूर्व पलायन करके विश्व के विभिन्न हिस्सों में फैल गए। पलायन के प्रमुख गलियारे के रूप में भारत दुनिया के उन क्षेत्रों में शामिल रहा है, जहाँ अफ्रीका छोड़ने के बाद मनुष्यों की बसावट सबसे पहले हुई। जम्मू-कश्मीर की बेहद अहम भौगोलिक स्थिति होने कारण यह राज्य इस गलियारे का प्रमुख हिस्सा रहा है।

जम्मू-कश्मीर के विभिन्न जातीय समूहों के 83 असंबद्ध व्यक्तियों के डीएनए का अध्ययन करने के बाद कटरा स्थित श्री माता वैष्णो देवी विश्वविद्यालय के शोधकर्ता इस नतीजे पर पहुँचे हैं।

अध्ययन में शामिल शोधकर्ताओं की टीम अध्ययन में माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए को शामिल किया गया है क्योंकि यह डीएनए महिलाओं को ही पूर्वजों से विरासत में मिलता है। मानव विकास के इस क्रम में विभिन्न व्यक्तियों में अनुवांशिक बदलाव होते रहते हैं, इन बदलावों के अध्ययन से वैज्ञानिक उन व्यक्तियों में परस्पर सम्बन्ध और उनके वंशक्रम का पता लगाते हैं।

इस अध्ययन से जुड़े शोधकर्ता डॉ. स्वारकर शर्मा ने इंडिया साइंस वायर को बताया कि “इस अध्ययन में मातृवंश समूहों में काफी विविधता पायी गई है और 19 नए मातृ उप-वंश समूहों की पहचान भी की गई है। इससे स्पष्ट होता है कि माइटोकॉन्ड्रियल उत्परिवर्तनों की संख्या भारतीय आबादी में ज्ञात अनुवांशिक बदलावों तक सीमित नहीं है, कई अन्य नए बदलाव भी इसमें शामिल हैं। मातृवंश समूह में कई वंशक्रमों की मौजूदगी हजारों वर्ष पूर्व पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं के पलायन का भी संकेत करती है।”

ज्यादातर पूर्व अध्ययनों में जम्मू-कश्मीर से लिये गए माइटोकॉन्ड्रियल नमूनों का अभाव रहा है, जिस कारण यह निष्कर्ष निकाला गया कि हमारे मातृवंश समूह बेहद कम हैं। इसका तात्पर्य यह है कि हमारे जो पूर्वज इस क्षेत्र में हिमयुग के बाद पहुँचे, उनमें सिर्फ पुरुषों की प्रधानता रही होगी। लेकिन इस अध्ययन से स्पष्ट हो गया है कि हजारों वर्ष पूर्व हुए पलायन में महिलाएँ भी शामिल थीं।

अध्ययनकर्ताओं का कहना है कि “भारत की वर्तमान जनसंख्या के स्वरूप को आकार देने में करीब 8000-10000 वर्ष पूर्व हुए पुरुषों एवं महिलाओं दोनों का पलायन प्रमुख रहा है और भारत में ही जाति व्यवस्था का एक सामाजिक ढाँचे के रूप में जन्म हुआ है, न कि इसे किसी तरह के पलायन से जोड़ा जा सकता है।”

मनुष्यों की आनुवंशिकी में मातृवंश समूह उस वंश समूह को कहते हैं, जिसके बारे में किसी के माइटोकांड्रिया के गुण सूत्र पर स्थित डीएनए की जाँच से पता चलता है। अगर दो व्यक्तियों का मातृवंश समूह मिलता हो, तो इसका अर्थ है कि हजारों साल पूर्व एक ही महिला उनकी पूर्वज रही है, चाहे आधुनिक युग में वे दोनों व्यक्ति अलग-अलग जातियों से सम्बंधित क्यों न हों।

जनसंख्या के भीतर या बाहर प्रवास के कारण किसी स्थान विशेष की जनसंख्या में न केवल नई आनुवांशिक विविधताएँ पैदा हो सकती हैं, बल्कि जीन भंडार में भी परिवर्तन देखने को मिल सकते हैं। भारत की सामाजिक एवं सांस्कृतिक विविधता के साथ-साथ यहाँ के जीन भंडार एवं जनसंख्या को आकार देने में विदेशों से होने वाले पलायन और आक्रमणकारियों की भूमिका मानी गई है, पर अभी तक के अध्ययन के अनुसार यह कहा जा सकता है कि ऐसे पलायन 8000-10000 वर्ष पूर्व हुए हैं।

डॉ शर्मा के अनुसार “सिर्फ 83 नमूनों के आधार पर किया गया यह एक शुरुआती अध्ययन है, जिससे मातृवंश की उच्च विविधता के बारे में पता चलता है। नमूनों का आकार बढ़ाया जाए तो कई चौंकाने वाले रहस्यों का खुलासा हो सकता है।”

माता वैष्णो देवी विश्वविद्यालय के अलावा अध्ययनकर्ताओं की टीम में जम्मू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय और वाशिंगटन स्थित नेशनल जियो-ग्राफिक सोसायटी के दि जेनोग्राफिक प्रोजेक्ट के शोधकर्ता शामिल थे। शोधकर्ताओं में डॉ. स्वारकर शर्मा के अलावा डॉ. एकता राय, इंदु शर्मा, वरुण शर्मा, अकबर खान, डॉ. परविंदर कुमार, प्रो. आर.एन.के. बामजेई और डॉ. मिगुएल विलर शामिल थे। यह अध्ययन हाल में शोध पत्रिका साइंटिफिक रिपोर्ट्स में प्रकाशित किया गया है।

Twitter : @usm_1984


TAGS

Ancient Human Migration in Hindi, Human genetics in Hindi, Biotechnology in Hindi, Phylogenetic in Hindi, Mitochondrial genomes in Hindi


Add new comment

This question is for testing whether or not you are a human visitor and to prevent automated spam submissions.

3 + 0 =
Solve this simple math problem and enter the result. E.g. for 1+3, enter 4.

More From Author

Related Articles (Topic wise)

Related Articles (District wise)

About the author

Latest