गंगा किनारे से 200 मीटर की परिधि तक निर्माण कार्य पर न्यायालय की रोक के बावजूद होटलों का निर्माण

Submitted by UrbanWater on Sat, 05/11/2019 - 11:16
Source
राष्ट्रीय सहारा, 11 मई, 2019

गंगा किनारे से 200 मीटर की परिधि तक निर्माण कार्य पर न्यायालय के रोक के आदेश धनकुबेरों के लिए मजाक की तरह है और आये दिन ऐसे लोग न्यायालय के आदेशों को हवा में उड़ाते रहे हैं। ऐसे ही लगभग तीन हजार से ज्यादा मामले हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण के कार्यालय में फाइलों में धूल फांक रहे हैं और विभागीय अधिकारी जांच की बात कहकर अपना पल्ला झड़ते रहे हैं जैसे इन्हें इन निर्माण कार्यों की जानकारी ही न हो।

टिहरी जनपद के मुनि की रेती थाना क्षेत्र के तपोवन सराय इलाके में गंगा नदी के महज 50-150 मीटर की दूरी पर कई निर्माण कार्य हो रहे हैं। लेकिन एचआरडीए ने अपने आंखों पर पैंसे की पट्टी बांध रखी है। तपोवन सराय के बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग में पुलिस चौकी से मात्र दस कदम की दूरी पर तीन स्थानों पर अवैध खनन कर उसमें होटल बनाने की तैयारी की जा रही है। बताया जा रहा है कि यहां रात के समय यहां खनन कार्य को अंजाम दिया जा रहा है। लेकिन जिम्मेदार प्रशासन ने आंख बंद की हुई है। उक्त जगह पर पहले मिट्टी का काफी बड़ा एक टीला था, जिसे जेसीबी मशीन से एकदम समतल कर दिया गया। इसके बाद उक्त जगह पर होटल का निर्माण कार्य शुरू हो गया है। 

खास बात यह है कि शासन ने तपोवन को मास्टर प्लान में लागू किया हुआ है, जिस कारण अभी यहां मास्टर प्लान के हिसाब  से निर्माण कार्य पर रोक है। उसके बावजूद भी एचआरडीए से नक्शा तक स्वीकृत नहीं कराया जा रहा है, जिस कारण तपोवन सराय क्षेत्र में एक दर्जन से अधिक चार से पांच मंजिला होटलों का निर्माण हो चुका है। यह हाल तब है जब प्रशासन ने तपोवन क्षेत्र को ग्रीन बैल्ट व गंगा तट पर किसी भी तरह के निर्माण पर प्रतिबंध लगा रखा है। 

यही नहीं तपोवन क्षेत्र भूकंप की दृष्टि से संवेदनशील जोन में आता है, जिस कारण यहां तीन मंजिला इमारत से अधिक निर्माण की अनुमति नहीं है। लेकिन एचआरडीए की उदासीनता के चलते तपोवन क्षेत्र में अवैध निर्माण की बाढ़ आ गई है। एचआरडीए के सचिव केके मिश्रा का कहते हैं, अगर उक्त भूखंड को कुंभ मेले के दौरान पार्किग के लिए प्रयोग किया जाता था तो उसमें निर्माण नहीं हो सकता है। यह मामला मीडिया के द्वारा ही मेरे संज्ञान में आया है। शीघ्र ही इस पर कार्रवाही की जायेगी। 

कायदे कानून को ताक पर रखकर बहुमंजिला इमारतें और होटल बनाए जा रहे हैं। अवैध निर्माण रोकने वाला एचआरडीए कार्रवाही के नाम पर जांच में जुटा रहता है। जांच समय से पूरी होती ही नही और निर्माण कार्य पूरा हो जाता है। खास बात यह है कि अवैध निर्माण की पुष्टि होने पर संपत्ति को सील करने की कार्रवाही की जाती है। लेकिन यहां तो सील भवन में ही निर्माण शुरू हो जाता है।

कुंभ में पार्किग के लिए प्रयोग होता था भूखंड

तपोवन में बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर जिस तीन भूखंड में होटल बनाने का निर्माण कार्य चल रहा है। उस भूखंड को पहले कुंभ मेले के दौरान पार्किग के लिए प्रयोग किया जाता था। लेकिन कुछ लोगों की मिलीभगत से उक्त भूखंड को कृषि भूमि दिखाकर उसे खुर्दबुर्द कर दिया गया। खास बात यह है कि 2011 के मास्टर प्लान के हिसाब से उक्त भूखंड को पार्किग के लिए ही रखा गया है। 

एक भूखंड डीएम के रिश्तेदार का

तपोवन सराय में बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर जिन तीन भूखंड में होटल बनाने का निर्माण किया जा रहा है। स्थानीय सूत्रों ने इस बात की जानकारी दी है कि उसमें एक भूखंड प्रदेश के एक जिलाधिकारी के रिश्तेदार का बताया जा रहा है। जिस कारण शासन-प्रशासन कार्रवाही करने से डर रहा है। इसलिए उसकी आड़ में दो अन्य भूखंड में भी निर्माण हो रहा है। क्योंकि एचआरडीए डीएम के कारण उन पर भी कार्रवाही करने बच रहा है। ताकि उक्त भूखंड वाले किसी तरह का बवाल न करें।

 

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