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खासम-खास

नदी तंत्र पर मानवीय हस्तक्षेप और जलवायु बदलाव का प्रभाव

Submitted by editorial on Sat, 03/16/2019 - 06:09
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
नदी तंत्रनदी तंत्र (फोटो साभार - विकिपीडिया)आदिकाल से नदियाँ स्वच्छ जल का अमूल्य स्रोत रही हैं। उनके जल का उपयोग पेयजल आपूर्ति, निस्तार, आजीविका तथा खेती इत्यादि के लिये किया जाता रहा है। पिछले कुछ सालों से देश की अधिकांश नदियों के गैर-मानसूनी प्रवाह में कमी हो रही है, छोटी नदियाँ तेजी से सूख रही हैं और लगभग सभी नदी-तंत्रों में प्रदूषण बढ़ रहा है। यह स्थिति हिमालयीन नदियों में कम तथा भारतीय प्रायद्वीप की नदियों में अधिक गम्भीर है। यह परिवर्तन प्राकृतिक नहीं है।

Content

नमामि गंगे के शोर के बीच नाले में तब्दील हो रही गंगा

Submitted by editorial on Sun, 02/03/2019 - 09:58
Author
उमेश कुमार राय
कानपुर में गंगा नदी में गिरता नाले का पानीकानपुर में गंगा नदी में गिरता नाले का पानी (फोटो साभार - द वायर)गंगा केवल नदी नहीं है। यह भारत की संस्कृति का अभिन्न अंग है। इसके बिना इस देश की कल्पना नहीं की जा सकती है। नदियों को धरती की धमनियाँ कहा जाता है। जैसे शरीर की धमनियों से बहता रक्त जीवन के लिये जरूरी है, उसी तरह नदियों का बहना भी दुनिया के वजूद के लिये अहम है। धमनी अगर सूख जाये, तो वो अंग काम नहीं करता है। उसी तरह अगर नदी सूख जाये, तो उसके आसपास के इलाकों की सुख-समृद्धि थम जाती है।

ताप विद्युत संयंत्र से भारत में सबसे ज्यादा CO2 उत्सर्जन

Submitted by editorial on Wed, 12/19/2018 - 15:33
Author
राकेश रंजन
कॉप 24कॉप 24शहरीकरण और औद्योगीकरण के कारण भारत में ऊर्जा की माँग में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। और इसे पूरा करने का सबसे अधिक दबाव कोयला चलित ताप विद्युत संयंत्रों पर है। यही वजह है कि ये ताप विद्युत संयंत्र देश में सबसे बड़े कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जक बन गए हैं। इस बात की चर्चा संयुक्त अरब अमीरात (United Arab Emirates) की ईस्ट एंग्लिया (East Anglia) यूनिवर्सिटी द्वारा तैयार तैयार किये गए ग्लोबल कार्बन प्रोजेक्ट (Global Carbon Project) नामक दस्तावेज में की गई है।

संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन का हासिल

Submitted by editorial on Wed, 12/19/2018 - 15:05
Author
उमेश कुमार राय
कॉप 24कॉप 24संयुक्त राष्ट्र का जलवायु सम्मेलन 14 दिसम्बर को पोलैंड के केटोवाइस में सम्पन्न होना था। यह सम्मेलन दो दिसम्बर से शुरू हुआ था। लेकिन, कुछ मुद्दों पर आम सहमति नहीं होने के कारण 14 दिसम्बर की देर रात तक सम्मेलन को जारी रखना पड़ा। बताया जाता है कि सम्मेलन में उपस्थित अतिथियों को देर रात तक सम्मलेन में शामिल होना पड़ा। कहा जा रहा है कि मौके पर उपस्थित विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों के बीच पेरिस समझौते पर कुछ हद तक सहमति बनी, लेकिन बड़े मुद्दों को लेकर असहमति थी।

प्रयास

गाँव ने रोका अपना पानी

Submitted by editorial on Mon, 12/03/2018 - 20:37
Author
मनीष वैद्य
बेहरी में कच्चे बाँध से लबालब नदीबेहरी में कच्चे बाँध से लबालब नदी'खेत का पानी खेत में' और 'गाँव का पानी गाँव में' रोकने के नारे तो बीते पच्चीस सालों से सुनाई देते रहे हैं, लेकिन इस बार बारिश के बाद एक गाँव ने अपना पानी गाँव में ही रोककर जलस्तर बढ़ा लिया है। इससे गाँव के लोगों को निस्तारी कामों के लिये पानी की आपूर्ति भी हो रही है और ट्यूबवेल, हैण्डपम्प और कुएँ-कुण्डियों में भी कम बारिश के बावजूद अब तक पानी भरा है।

नोटिस बोर्ड

जन सुनवाई में जनता से खतरा क्यों

Submitted by editorial on Fri, 03/01/2019 - 22:42
Source
माटू जन संगठन, मेन मार्केट मोरी उत्तरकाशी, उत्तराखण्ड, ग्राम छाम, पथरी भाग 4, हरिद्वार, उत्तराखण्ड
जन सुनवाई में शामिल न किये जाने से आक्रोशित लोगजन सुनवाई में शामिल न किये जाने से आक्रोशित लोग 01 मार्च, 2019। उत्तराखण्ड शासन-प्रशासन ने दिखा दिया कि बाँध कम्पनियाँ लोगों के अधिकारों और पर्यावरण से ज्यादा महत्त्वपूर्ण हैं।

यमुना घाटी में टॉन्स नदी की सहायक नदी सुपिन पर प्रस्तावित जखोल साकरी बाँध

128 दिन के लम्बे उपवास पर सरकार गम्भीर नहीं

Submitted by editorial on Thu, 02/28/2019 - 17:44
Source
फ्री गंगा, (अविरल गंगा), जेपी हेल्थ पैराडाइज,रोड नम्बर 28, मेहता चौक, रजौरी गार्डन,नई दिल्ली
सन्त आत्मबोधानंदसन्त आत्मबोधानंद 15 दिन की जाँच समिति अस्वीकार
28 फरवरी, 2019। मातृ सदन हरिद्वार में 26 वर्षीय उपवासरत आत्मबोधानंद जी का आज 128वां दिन है। देशभर में प्रदर्शनों, समर्थन में भेजे जा रहे पत्रों के बावजूद भी सरकार गम्भीर नहीं नजर आती।

जखोल साकरी बाँध: बिना जानकारी पुलिस के साये में जनसुनवाई

Submitted by editorial on Thu, 02/28/2019 - 14:43
Source
माटू जन संगठन, मेन मार्केट मोरी उत्तरकाशी, उत्तराखण्ड, ग्राम छाम, पथरी भाग 4, हरिद्वार, उत्तराखण्ड
सुपिन नदीसुपिन नदी27 फरवरी, 2019। जखोल साकरी बाँध, सुपिन नदी, जिला उत्तरकाशी, उत्तराखण्ड की 01 मार्च, 2019 को दूसरी पर्यावरणीय जनसुनवाई की घोषणा हुई है। इस बार जनसुनवाई का स्थल परियोजना स्थल क्षेत्र से 40 किलोमीटर दूर है। यह मोरी ब्लॉक में रखी गई है ताकि वह जनविरोध से बच जाए।

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नदी तंत्र पर मानवीय हस्तक्षेप और जलवायु बदलाव का प्रभाव

Submitted by editorial on Sat, 03/16/2019 - 06:09
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कृष्ण गोपाल 'व्यास’
नदी तंत्रनदी तंत्र (फोटो साभार - विकिपीडिया)आदिकाल से नदियाँ स्वच्छ जल का अमूल्य स्रोत रही हैं। उनके जल का उपयोग पेयजल आपूर्ति, निस्तार, आजीविका तथा खेती इत्यादि के लिये किया जाता रहा है। पिछले कुछ सालों से देश की अधिकांश नदियों के गैर-मानसूनी प्रवाह में कमी हो रही है, छोटी नदियाँ तेजी से सूख रही हैं और लगभग सभी नदी-तंत्रों में प्रदूषण बढ़ रहा है। यह स्थिति हिमालयीन नदियों में कम तथा भारतीय प्रायद्वीप की नदियों में अधिक गम्भीर है। यह परिवर्तन प्राकृतिक नहीं है।

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नमामि गंगे के शोर के बीच नाले में तब्दील हो रही गंगा

Submitted by editorial on Sun, 02/03/2019 - 09:58
Author
उमेश कुमार राय
कानपुर में गंगा नदी में गिरता नाले का पानीकानपुर में गंगा नदी में गिरता नाले का पानी (फोटो साभार - द वायर)गंगा केवल नदी नहीं है। यह भारत की संस्कृति का अभिन्न अंग है। इसके बिना इस देश की कल्पना नहीं की जा सकती है। नदियों को धरती की धमनियाँ कहा जाता है। जैसे शरीर की धमनियों से बहता रक्त जीवन के लिये जरूरी है, उसी तरह नदियों का बहना भी दुनिया के वजूद के लिये अहम है। धमनी अगर सूख जाये, तो वो अंग काम नहीं करता है। उसी तरह अगर नदी सूख जाये, तो उसके आसपास के इलाकों की सुख-समृद्धि थम जाती है।

ताप विद्युत संयंत्र से भारत में सबसे ज्यादा CO2 उत्सर्जन

Submitted by editorial on Wed, 12/19/2018 - 15:33
Author
राकेश रंजन
कॉप 24कॉप 24शहरीकरण और औद्योगीकरण के कारण भारत में ऊर्जा की माँग में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। और इसे पूरा करने का सबसे अधिक दबाव कोयला चलित ताप विद्युत संयंत्रों पर है। यही वजह है कि ये ताप विद्युत संयंत्र देश में सबसे बड़े कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जक बन गए हैं। इस बात की चर्चा संयुक्त अरब अमीरात (United Arab Emirates) की ईस्ट एंग्लिया (East Anglia) यूनिवर्सिटी द्वारा तैयार तैयार किये गए ग्लोबल कार्बन प्रोजेक्ट (Global Carbon Project) नामक दस्तावेज में की गई है।

संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन का हासिल

Submitted by editorial on Wed, 12/19/2018 - 15:05
Author
उमेश कुमार राय
कॉप 24कॉप 24संयुक्त राष्ट्र का जलवायु सम्मेलन 14 दिसम्बर को पोलैंड के केटोवाइस में सम्पन्न होना था। यह सम्मेलन दो दिसम्बर से शुरू हुआ था। लेकिन, कुछ मुद्दों पर आम सहमति नहीं होने के कारण 14 दिसम्बर की देर रात तक सम्मेलन को जारी रखना पड़ा। बताया जाता है कि सम्मेलन में उपस्थित अतिथियों को देर रात तक सम्मलेन में शामिल होना पड़ा। कहा जा रहा है कि मौके पर उपस्थित विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों के बीच पेरिस समझौते पर कुछ हद तक सहमति बनी, लेकिन बड़े मुद्दों को लेकर असहमति थी।

प्रयास

गाँव ने रोका अपना पानी

Submitted by editorial on Mon, 12/03/2018 - 20:37
Author
मनीष वैद्य
बेहरी में कच्चे बाँध से लबालब नदीबेहरी में कच्चे बाँध से लबालब नदी'खेत का पानी खेत में' और 'गाँव का पानी गाँव में' रोकने के नारे तो बीते पच्चीस सालों से सुनाई देते रहे हैं, लेकिन इस बार बारिश के बाद एक गाँव ने अपना पानी गाँव में ही रोककर जलस्तर बढ़ा लिया है। इससे गाँव के लोगों को निस्तारी कामों के लिये पानी की आपूर्ति भी हो रही है और ट्यूबवेल, हैण्डपम्प और कुएँ-कुण्डियों में भी कम बारिश के बावजूद अब तक पानी भरा है।

नोटिस बोर्ड

जन सुनवाई में जनता से खतरा क्यों

Submitted by editorial on Fri, 03/01/2019 - 22:42
Source
माटू जन संगठन, मेन मार्केट मोरी उत्तरकाशी, उत्तराखण्ड, ग्राम छाम, पथरी भाग 4, हरिद्वार, उत्तराखण्ड
जन सुनवाई में शामिल न किये जाने से आक्रोशित लोगजन सुनवाई में शामिल न किये जाने से आक्रोशित लोग 01 मार्च, 2019। उत्तराखण्ड शासन-प्रशासन ने दिखा दिया कि बाँध कम्पनियाँ लोगों के अधिकारों और पर्यावरण से ज्यादा महत्त्वपूर्ण हैं।

यमुना घाटी में टॉन्स नदी की सहायक नदी सुपिन पर प्रस्तावित जखोल साकरी बाँध

128 दिन के लम्बे उपवास पर सरकार गम्भीर नहीं

Submitted by editorial on Thu, 02/28/2019 - 17:44
Source
फ्री गंगा, (अविरल गंगा), जेपी हेल्थ पैराडाइज,रोड नम्बर 28, मेहता चौक, रजौरी गार्डन,नई दिल्ली
सन्त आत्मबोधानंदसन्त आत्मबोधानंद 15 दिन की जाँच समिति अस्वीकार
28 फरवरी, 2019। मातृ सदन हरिद्वार में 26 वर्षीय उपवासरत आत्मबोधानंद जी का आज 128वां दिन है। देशभर में प्रदर्शनों, समर्थन में भेजे जा रहे पत्रों के बावजूद भी सरकार गम्भीर नहीं नजर आती।

जखोल साकरी बाँध: बिना जानकारी पुलिस के साये में जनसुनवाई

Submitted by editorial on Thu, 02/28/2019 - 14:43
Source
माटू जन संगठन, मेन मार्केट मोरी उत्तरकाशी, उत्तराखण्ड, ग्राम छाम, पथरी भाग 4, हरिद्वार, उत्तराखण्ड
सुपिन नदीसुपिन नदी27 फरवरी, 2019। जखोल साकरी बाँध, सुपिन नदी, जिला उत्तरकाशी, उत्तराखण्ड की 01 मार्च, 2019 को दूसरी पर्यावरणीय जनसुनवाई की घोषणा हुई है। इस बार जनसुनवाई का स्थल परियोजना स्थल क्षेत्र से 40 किलोमीटर दूर है। यह मोरी ब्लॉक में रखी गई है ताकि वह जनविरोध से बच जाए।

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