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खासम-खास

विकास का मोल

Submitted by editorial on Mon, 12/03/2018 - 06:09
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
नदियों को जलमार्ग में बदलने की योजनानदियों को जलमार्ग में बदलने की योजनापिछले दिनों विकास से जुड़ी दो प्रमुख खबरें अखबारों की सुर्खियाँ बनीं। पहली खबर का सम्बन्ध हिमालयी राज्य परिषद के गठन से है। दूसरी खबर नोएडा को प्रयागराज तक जल मार्ग से जोड़ने की है। पहली खबर का सम्बन्ध हिमालयी राज्यों के समन्वित और सतत विकास के लिये काम करना है वहीं दूसरी खबर का सम्बन्ध कम किराए में नदी मार्ग द्वारा परिवहन तथा पर्यटन का विकास है।

Content

नॉर्वे से सीखिए वनों का संरक्षण

Submitted by editorial on Fri, 11/16/2018 - 16:24
Author
उमेश कुमार राय
नॉर्वेनॉर्वे (फोटो साभार - रिसर्च गेट)यूरोप में 3 लाख 85 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैला हुआ एक देश है। नाम है नॉर्वे। एक सौ साल पहले इस देश का भूगोल कुछ अलग था। यहाँ के पेड़-पौधे धीरे-धीरे खत्म हो रहे थे। लोग अपनी जरूरतों मसलन जलावन आदि के लिये वनों की बेतहाशा कटाई कर रहे थे। एक समय तो ऐसा भी आ गया था कि लग रहा था, यहाँ की जमीन पर एक भी पेड़ नहीं बचेगा। नॉर्वे अपने अस्तित्व बचाने के संकट से जूझने लगा था।

सीवेज का पानी और कोलार की प्यासी धरती

Submitted by editorial on Tue, 11/06/2018 - 15:18
Source
द हिन्दू, 13 अक्टूबर 2018
लक्ष्मीसागर झील में लगा ट्रीटमेंट प्लांटलक्ष्मीसागर झील में लगा ट्रीटमेंट प्लांट (फोटो साभार - द हिन्दू)इसी वर्ष जून में कोलार के किसानों का खुशी का ठिकाना नहीं रहा जब के. सी. वैली प्रोजेक्ट द्वारा बंगलुरु शहर के गन्दे नालों के पानी को साफ कर उसकी आपूर्ति की जाने लगी। लेकिन इस खुशी की मियाद बड़ी छोटी रही। हुआ यूँ कि एक महीने बाद ही पाइप लाइन में गड़बड़ी आ गई और उससे गन्दे पानी का रिसाव होने लगा। स्थिति और भी भयावह तब हो गई जब पाइप लाइन से निकलने वाले अपशिष्ट ने झीलों के साथ ही भूजल को भी दूषित कर दिया।

पराली और पंजाब के किसानों का दर्द

Submitted by editorial on Tue, 10/30/2018 - 11:12
Source
द हिन्दू, 27 अक्टूबर, 2018
अपने खेत में पराली जलाता हुआ किसानअपने खेत में पराली जलाता हुआ किसान (फोटो साभार - द हिन्दू)पटियाला शहर से 50 किलोमीटर दूर राष्ट्रीय राजमार्ग से सटे बीबीपुर कस्बा में कई एकड़ धान की फसल कट चुकी है। कुछ खेतों में धान के पौधे अभी भी हरे हैं वहीं, कुछ में धान की बालियाँ सुनहला रंग पकड़ चुकी हैं और कटने के लिये एकदम तैयार हैं। पटियाला से 200 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में स्थित अमृतसर, जहाँ मानसून का प्रभाव अपेक्षाकृत पहले खत्म हो जाता है वहाँ धान की फसल कट चुकी है और खेत जाड़े की फसल के लिये तैयार हैं।

प्रयास

गाँव ने रोका अपना पानी

Submitted by editorial on Mon, 12/03/2018 - 20:37
Author
मनीष वैद्य
बेहरी में कच्चे बाँध से लबालब नदीबेहरी में कच्चे बाँध से लबालब नदी'खेत का पानी खेत में' और 'गाँव का पानी गाँव में' रोकने के नारे तो बीते पच्चीस सालों से सुनाई देते रहे हैं, लेकिन इस बार बारिश के बाद एक गाँव ने अपना पानी गाँव में ही रोककर जलस्तर बढ़ा लिया है। इससे गाँव के लोगों को निस्तारी कामों के लिये पानी की आपूर्ति भी हो रही है और ट्यूबवेल, हैण्डपम्प और कुएँ-कुण्डियों में भी कम बारिश के बावजूद अब तक पानी भरा है।

नोटिस बोर्ड

आत्मबोधानंद को प्रशासन ने जबरन भेजा एम्स

Submitted by editorial on Fri, 11/30/2018 - 13:47
Author
इण्डिया वाटर पोर्टल (हिन्दी)
Source
इण्डिया वाटर पोर्टल (हिन्दी)

स्वामी आत्मबोधानंद एवं पुण्यानंद (फोटो साभार: दैनिक जागरण)स्वामी आत्मबोधानंद एवं पुण्यानंद (फोटो साभार: दैनिक जागरण) पिछले 38 दिनों से गंगा की रक्षा के लिये अनशनरत हरिद्वार स्थित मातृ सदन के गंगा भक्त ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद को जिला प्रशासन ने उनकी इच्छा के विरूद्ध जबरन ऋषिकेश एम्स में दाखिल करवा दिया है।

गंगा भक्तों के अनशन के 16 दिन हुए पूरे

Submitted by editorial on Thu, 11/08/2018 - 11:05
Author
इण्डिया वाटर पोर्टल (हिन्दी)
Source
इण्डिया वाटर पोर्टल (हिन्दी)
स्वामी आत्मबोधानंद अपने गुरू शिवानंद जी के साथस्वामी आत्मबोधानंद अपने गुरू शिवानंद जी के साथ (फोटो साभार - दैनिक जागरण)गंगा की अविरलता और निर्मलता की माँग को लेकर मातृसदन के दो संतों ब्रम्हचारी आत्मबोधानंद और स्वामी पुण्यानंद का अनशन बृहस्पतिवार को भी जारी रहा। ये दोनों 24 अक्टूबर से अनशन पर हैं।

जानिये आँकड़ों के विश्लेषण की बारीकियाँ

Submitted by editorial on Sun, 10/28/2018 - 16:33
Author
सीएसई
Source
सीएसई
जलवायु परिवर्तन और विकासात्मक संचार के लिये आँकड़ों का प्रभावी विश्लेषणजलवायु परिवर्तन और विकासात्मक संचार के लिये आँकड़ों का प्रभावी विश्लेषणजलवायु परिवर्तन के दौर में विकासात्मक संचार के लिये आँकड़ों का प्रभावी विश्लेषण अति आवश्यक हो गया है। कहा जाता है जिसे मापा जाता है उसका प्रबन्धन किया जाता है। परन्तु यह तभी सम्भव है जब मापी गई वस्तु से सम्बन्धित आँकड़े का सही विश्लेषण हो। आज हर क्षेत्र में आँकड़ों की बाढ़ है लेकिन आप इनका विश्लेषण तभी कर सकते हैं जब इसके लिये आपने समुचित प्रशिक्षण प्राप्त किया हो।

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कृष्ण गोपाल 'व्यास’
नदियों को जलमार्ग में बदलने की योजनानदियों को जलमार्ग में बदलने की योजनापिछले दिनों विकास से जुड़ी दो प्रमुख खबरें अखबारों की सुर्खियाँ बनीं। पहली खबर का सम्बन्ध हिमालयी राज्य परिषद के गठन से है। दूसरी खबर नोएडा को प्रयागराज तक जल मार्ग से जोड़ने की है। पहली खबर का सम्बन्ध हिमालयी राज्यों के समन्वित और सतत विकास के लिये काम करना है वहीं दूसरी खबर का सम्बन्ध कम किराए में नदी मार्ग द्वारा परिवहन तथा पर्यटन का विकास है।

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नॉर्वे से सीखिए वनों का संरक्षण

Submitted by editorial on Fri, 11/16/2018 - 16:24
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उमेश कुमार राय
नॉर्वेनॉर्वे (फोटो साभार - रिसर्च गेट)यूरोप में 3 लाख 85 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैला हुआ एक देश है। नाम है नॉर्वे। एक सौ साल पहले इस देश का भूगोल कुछ अलग था। यहाँ के पेड़-पौधे धीरे-धीरे खत्म हो रहे थे। लोग अपनी जरूरतों मसलन जलावन आदि के लिये वनों की बेतहाशा कटाई कर रहे थे। एक समय तो ऐसा भी आ गया था कि लग रहा था, यहाँ की जमीन पर एक भी पेड़ नहीं बचेगा। नॉर्वे अपने अस्तित्व बचाने के संकट से जूझने लगा था।

सीवेज का पानी और कोलार की प्यासी धरती

Submitted by editorial on Tue, 11/06/2018 - 15:18
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द हिन्दू, 13 अक्टूबर 2018
लक्ष्मीसागर झील में लगा ट्रीटमेंट प्लांटलक्ष्मीसागर झील में लगा ट्रीटमेंट प्लांट (फोटो साभार - द हिन्दू)इसी वर्ष जून में कोलार के किसानों का खुशी का ठिकाना नहीं रहा जब के. सी. वैली प्रोजेक्ट द्वारा बंगलुरु शहर के गन्दे नालों के पानी को साफ कर उसकी आपूर्ति की जाने लगी। लेकिन इस खुशी की मियाद बड़ी छोटी रही। हुआ यूँ कि एक महीने बाद ही पाइप लाइन में गड़बड़ी आ गई और उससे गन्दे पानी का रिसाव होने लगा। स्थिति और भी भयावह तब हो गई जब पाइप लाइन से निकलने वाले अपशिष्ट ने झीलों के साथ ही भूजल को भी दूषित कर दिया।

पराली और पंजाब के किसानों का दर्द

Submitted by editorial on Tue, 10/30/2018 - 11:12
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द हिन्दू, 27 अक्टूबर, 2018
अपने खेत में पराली जलाता हुआ किसानअपने खेत में पराली जलाता हुआ किसान (फोटो साभार - द हिन्दू)पटियाला शहर से 50 किलोमीटर दूर राष्ट्रीय राजमार्ग से सटे बीबीपुर कस्बा में कई एकड़ धान की फसल कट चुकी है। कुछ खेतों में धान के पौधे अभी भी हरे हैं वहीं, कुछ में धान की बालियाँ सुनहला रंग पकड़ चुकी हैं और कटने के लिये एकदम तैयार हैं। पटियाला से 200 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में स्थित अमृतसर, जहाँ मानसून का प्रभाव अपेक्षाकृत पहले खत्म हो जाता है वहाँ धान की फसल कट चुकी है और खेत जाड़े की फसल के लिये तैयार हैं।

प्रयास

गाँव ने रोका अपना पानी

Submitted by editorial on Mon, 12/03/2018 - 20:37
Author
मनीष वैद्य
बेहरी में कच्चे बाँध से लबालब नदीबेहरी में कच्चे बाँध से लबालब नदी'खेत का पानी खेत में' और 'गाँव का पानी गाँव में' रोकने के नारे तो बीते पच्चीस सालों से सुनाई देते रहे हैं, लेकिन इस बार बारिश के बाद एक गाँव ने अपना पानी गाँव में ही रोककर जलस्तर बढ़ा लिया है। इससे गाँव के लोगों को निस्तारी कामों के लिये पानी की आपूर्ति भी हो रही है और ट्यूबवेल, हैण्डपम्प और कुएँ-कुण्डियों में भी कम बारिश के बावजूद अब तक पानी भरा है।

नोटिस बोर्ड

आत्मबोधानंद को प्रशासन ने जबरन भेजा एम्स

Submitted by editorial on Fri, 11/30/2018 - 13:47
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इण्डिया वाटर पोर्टल (हिन्दी)
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इण्डिया वाटर पोर्टल (हिन्दी)

स्वामी आत्मबोधानंद एवं पुण्यानंद (फोटो साभार: दैनिक जागरण)स्वामी आत्मबोधानंद एवं पुण्यानंद (फोटो साभार: दैनिक जागरण) पिछले 38 दिनों से गंगा की रक्षा के लिये अनशनरत हरिद्वार स्थित मातृ सदन के गंगा भक्त ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद को जिला प्रशासन ने उनकी इच्छा के विरूद्ध जबरन ऋषिकेश एम्स में दाखिल करवा दिया है।

गंगा भक्तों के अनशन के 16 दिन हुए पूरे

Submitted by editorial on Thu, 11/08/2018 - 11:05
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स्वामी आत्मबोधानंद अपने गुरू शिवानंद जी के साथस्वामी आत्मबोधानंद अपने गुरू शिवानंद जी के साथ (फोटो साभार - दैनिक जागरण)गंगा की अविरलता और निर्मलता की माँग को लेकर मातृसदन के दो संतों ब्रम्हचारी आत्मबोधानंद और स्वामी पुण्यानंद का अनशन बृहस्पतिवार को भी जारी रहा। ये दोनों 24 अक्टूबर से अनशन पर हैं।

जानिये आँकड़ों के विश्लेषण की बारीकियाँ

Submitted by editorial on Sun, 10/28/2018 - 16:33
Author
सीएसई
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सीएसई
जलवायु परिवर्तन और विकासात्मक संचार के लिये आँकड़ों का प्रभावी विश्लेषणजलवायु परिवर्तन और विकासात्मक संचार के लिये आँकड़ों का प्रभावी विश्लेषणजलवायु परिवर्तन के दौर में विकासात्मक संचार के लिये आँकड़ों का प्रभावी विश्लेषण अति आवश्यक हो गया है। कहा जाता है जिसे मापा जाता है उसका प्रबन्धन किया जाता है। परन्तु यह तभी सम्भव है जब मापी गई वस्तु से सम्बन्धित आँकड़े का सही विश्लेषण हो। आज हर क्षेत्र में आँकड़ों की बाढ़ है लेकिन आप इनका विश्लेषण तभी कर सकते हैं जब इसके लिये आपने समुचित प्रशिक्षण प्राप्त किया हो।

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