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खासम-खास

नदी तंत्र पर मानवीय हस्तक्षेप और जलवायु बदलाव का प्रभाव

Submitted by editorial on Sat, 03/16/2019 - 06:09
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
नदी तंत्रनदी तंत्र (फोटो साभार - विकिपीडिया)आदिकाल से नदियाँ स्वच्छ जल का अमूल्य स्रोत रही हैं। उनके जल का उपयोग पेयजल आपूर्ति, निस्तार, आजीविका तथा खेती इत्यादि के लिये किया जाता रहा है। पिछले कुछ सालों से देश की अधिकांश नदियों के गैर-मानसूनी प्रवाह में कमी हो रही है, छोटी नदियाँ तेजी से सूख रही हैं और लगभग सभी नदी-तंत्रों में प्रदूषण बढ़ रहा है। यह स्थिति हिमालयीन नदियों में कम तथा भारतीय प्रायद्वीप की नदियों में अधिक गम्भीर है। यह परिवर्तन प्राकृतिक नहीं है।

Content

पराली और पंजाब के किसानों का दर्द

Submitted by editorial on Tue, 10/30/2018 - 11:12
Source
द हिन्दू, 27 अक्टूबर, 2018
अपने खेत में पराली जलाता हुआ किसानअपने खेत में पराली जलाता हुआ किसान (फोटो साभार - द हिन्दू)पटियाला शहर से 50 किलोमीटर दूर राष्ट्रीय राजमार्ग से सटे बीबीपुर कस्बा में कई एकड़ धान की फसल कट चुकी है। कुछ खेतों में धान के पौधे अभी भी हरे हैं वहीं, कुछ में धान की बालियाँ सुनहला रंग पकड़ चुकी हैं और कटने के लिये एकदम तैयार हैं। पटियाला से 200 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में स्थित अमृतसर, जहाँ मानसून का प्रभाव अपेक्षाकृत पहले खत्म हो जाता है वहाँ धान की फसल कट चुकी है और खेत जाड़े की फसल के लिये तैयार हैं।

संत गोपाल दास भी स्वामी सानंद की राह पर, पानी भी त्यागा

Submitted by editorial on Mon, 10/15/2018 - 14:25
Author
उमेश कुमार राय
एम्स में भर्ती संत गोपालदासएम्स में भर्ती संत गोपालदास (फोटो साभार - दैनिक जागरण)गंगा की अविरलता को वापस लौटाने की माँग पर करीब चार महीने से अनशन पर बैठे प्रो. जीडी अग्रवाल यानी स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद के निधन के बाद संत गोपालदास ने भी पानी ग्रहण करना छोड़ दिया है।

स्वामी सानंद - कलयुग का भगीरथ

Submitted by editorial on Sat, 10/13/2018 - 14:02
Author
उमेश कुमार राय
गंगा के लिये पंचतत्व में विलीन स्वामी सानंदगंगा के लिये पंचतत्व में विलीन स्वामी सानंद (फोटो साभार - डॉ. अनिल गौतम)हुक्मरां तो गंगा को बचाने के अपने वादे पूरा नहीं कर पाये, लेकिन स्वामी सानंद ने अपना वादा निभाया। दशहरा से पहले ही यानी गुरुवार को उन्होंने शरीर त्याग दिया। वह 86 साल के थे और लम्बे समय से गंगा के लिये निहत्थे संघर्ष कर रहे थे। सही मायनों में कहा जाये, तो वह कलयुग के भगीरथ थे। आज गंगा जितनी भी बची हुई है, उसका श्रेय निश्चित तौर पर स्वामी सानंद को जाता है। लेकिन वह इतने से सन्तुष्ट नहीं थे।

प्रयास

गाँव ने रोका अपना पानी

Submitted by editorial on Mon, 12/03/2018 - 20:37
Author
मनीष वैद्य
बेहरी में कच्चे बाँध से लबालब नदीबेहरी में कच्चे बाँध से लबालब नदी'खेत का पानी खेत में' और 'गाँव का पानी गाँव में' रोकने के नारे तो बीते पच्चीस सालों से सुनाई देते रहे हैं, लेकिन इस बार बारिश के बाद एक गाँव ने अपना पानी गाँव में ही रोककर जलस्तर बढ़ा लिया है। इससे गाँव के लोगों को निस्तारी कामों के लिये पानी की आपूर्ति भी हो रही है और ट्यूबवेल, हैण्डपम्प और कुएँ-कुण्डियों में भी कम बारिश के बावजूद अब तक पानी भरा है।

नोटिस बोर्ड

जन सुनवाई में जनता से खतरा क्यों

Submitted by editorial on Fri, 03/01/2019 - 22:42
Source
माटू जन संगठन, मेन मार्केट मोरी उत्तरकाशी, उत्तराखण्ड, ग्राम छाम, पथरी भाग 4, हरिद्वार, उत्तराखण्ड
जन सुनवाई में शामिल न किये जाने से आक्रोशित लोगजन सुनवाई में शामिल न किये जाने से आक्रोशित लोग 01 मार्च, 2019। उत्तराखण्ड शासन-प्रशासन ने दिखा दिया कि बाँध कम्पनियाँ लोगों के अधिकारों और पर्यावरण से ज्यादा महत्त्वपूर्ण हैं।

यमुना घाटी में टॉन्स नदी की सहायक नदी सुपिन पर प्रस्तावित जखोल साकरी बाँध

128 दिन के लम्बे उपवास पर सरकार गम्भीर नहीं

Submitted by editorial on Thu, 02/28/2019 - 17:44
Source
फ्री गंगा, (अविरल गंगा), जेपी हेल्थ पैराडाइज,रोड नम्बर 28, मेहता चौक, रजौरी गार्डन,नई दिल्ली
सन्त आत्मबोधानंदसन्त आत्मबोधानंद 15 दिन की जाँच समिति अस्वीकार
28 फरवरी, 2019। मातृ सदन हरिद्वार में 26 वर्षीय उपवासरत आत्मबोधानंद जी का आज 128वां दिन है। देशभर में प्रदर्शनों, समर्थन में भेजे जा रहे पत्रों के बावजूद भी सरकार गम्भीर नहीं नजर आती।

जखोल साकरी बाँध: बिना जानकारी पुलिस के साये में जनसुनवाई

Submitted by editorial on Thu, 02/28/2019 - 14:43
Source
माटू जन संगठन, मेन मार्केट मोरी उत्तरकाशी, उत्तराखण्ड, ग्राम छाम, पथरी भाग 4, हरिद्वार, उत्तराखण्ड
सुपिन नदीसुपिन नदी27 फरवरी, 2019। जखोल साकरी बाँध, सुपिन नदी, जिला उत्तरकाशी, उत्तराखण्ड की 01 मार्च, 2019 को दूसरी पर्यावरणीय जनसुनवाई की घोषणा हुई है। इस बार जनसुनवाई का स्थल परियोजना स्थल क्षेत्र से 40 किलोमीटर दूर है। यह मोरी ब्लॉक में रखी गई है ताकि वह जनविरोध से बच जाए।

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नदी तंत्र पर मानवीय हस्तक्षेप और जलवायु बदलाव का प्रभाव

Submitted by editorial on Sat, 03/16/2019 - 06:09
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कृष्ण गोपाल 'व्यास’
नदी तंत्रनदी तंत्र (फोटो साभार - विकिपीडिया)आदिकाल से नदियाँ स्वच्छ जल का अमूल्य स्रोत रही हैं। उनके जल का उपयोग पेयजल आपूर्ति, निस्तार, आजीविका तथा खेती इत्यादि के लिये किया जाता रहा है। पिछले कुछ सालों से देश की अधिकांश नदियों के गैर-मानसूनी प्रवाह में कमी हो रही है, छोटी नदियाँ तेजी से सूख रही हैं और लगभग सभी नदी-तंत्रों में प्रदूषण बढ़ रहा है। यह स्थिति हिमालयीन नदियों में कम तथा भारतीय प्रायद्वीप की नदियों में अधिक गम्भीर है। यह परिवर्तन प्राकृतिक नहीं है।

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पराली और पंजाब के किसानों का दर्द

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द हिन्दू, 27 अक्टूबर, 2018
अपने खेत में पराली जलाता हुआ किसानअपने खेत में पराली जलाता हुआ किसान (फोटो साभार - द हिन्दू)पटियाला शहर से 50 किलोमीटर दूर राष्ट्रीय राजमार्ग से सटे बीबीपुर कस्बा में कई एकड़ धान की फसल कट चुकी है। कुछ खेतों में धान के पौधे अभी भी हरे हैं वहीं, कुछ में धान की बालियाँ सुनहला रंग पकड़ चुकी हैं और कटने के लिये एकदम तैयार हैं। पटियाला से 200 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में स्थित अमृतसर, जहाँ मानसून का प्रभाव अपेक्षाकृत पहले खत्म हो जाता है वहाँ धान की फसल कट चुकी है और खेत जाड़े की फसल के लिये तैयार हैं।

संत गोपाल दास भी स्वामी सानंद की राह पर, पानी भी त्यागा

Submitted by editorial on Mon, 10/15/2018 - 14:25
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उमेश कुमार राय
एम्स में भर्ती संत गोपालदासएम्स में भर्ती संत गोपालदास (फोटो साभार - दैनिक जागरण)गंगा की अविरलता को वापस लौटाने की माँग पर करीब चार महीने से अनशन पर बैठे प्रो. जीडी अग्रवाल यानी स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद के निधन के बाद संत गोपालदास ने भी पानी ग्रहण करना छोड़ दिया है।

स्वामी सानंद - कलयुग का भगीरथ

Submitted by editorial on Sat, 10/13/2018 - 14:02
Author
उमेश कुमार राय
गंगा के लिये पंचतत्व में विलीन स्वामी सानंदगंगा के लिये पंचतत्व में विलीन स्वामी सानंद (फोटो साभार - डॉ. अनिल गौतम)हुक्मरां तो गंगा को बचाने के अपने वादे पूरा नहीं कर पाये, लेकिन स्वामी सानंद ने अपना वादा निभाया। दशहरा से पहले ही यानी गुरुवार को उन्होंने शरीर त्याग दिया। वह 86 साल के थे और लम्बे समय से गंगा के लिये निहत्थे संघर्ष कर रहे थे। सही मायनों में कहा जाये, तो वह कलयुग के भगीरथ थे। आज गंगा जितनी भी बची हुई है, उसका श्रेय निश्चित तौर पर स्वामी सानंद को जाता है। लेकिन वह इतने से सन्तुष्ट नहीं थे।

प्रयास

गाँव ने रोका अपना पानी

Submitted by editorial on Mon, 12/03/2018 - 20:37
Author
मनीष वैद्य
बेहरी में कच्चे बाँध से लबालब नदीबेहरी में कच्चे बाँध से लबालब नदी'खेत का पानी खेत में' और 'गाँव का पानी गाँव में' रोकने के नारे तो बीते पच्चीस सालों से सुनाई देते रहे हैं, लेकिन इस बार बारिश के बाद एक गाँव ने अपना पानी गाँव में ही रोककर जलस्तर बढ़ा लिया है। इससे गाँव के लोगों को निस्तारी कामों के लिये पानी की आपूर्ति भी हो रही है और ट्यूबवेल, हैण्डपम्प और कुएँ-कुण्डियों में भी कम बारिश के बावजूद अब तक पानी भरा है।

नोटिस बोर्ड

जन सुनवाई में जनता से खतरा क्यों

Submitted by editorial on Fri, 03/01/2019 - 22:42
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माटू जन संगठन, मेन मार्केट मोरी उत्तरकाशी, उत्तराखण्ड, ग्राम छाम, पथरी भाग 4, हरिद्वार, उत्तराखण्ड
जन सुनवाई में शामिल न किये जाने से आक्रोशित लोगजन सुनवाई में शामिल न किये जाने से आक्रोशित लोग 01 मार्च, 2019। उत्तराखण्ड शासन-प्रशासन ने दिखा दिया कि बाँध कम्पनियाँ लोगों के अधिकारों और पर्यावरण से ज्यादा महत्त्वपूर्ण हैं।

यमुना घाटी में टॉन्स नदी की सहायक नदी सुपिन पर प्रस्तावित जखोल साकरी बाँध

128 दिन के लम्बे उपवास पर सरकार गम्भीर नहीं

Submitted by editorial on Thu, 02/28/2019 - 17:44
Source
फ्री गंगा, (अविरल गंगा), जेपी हेल्थ पैराडाइज,रोड नम्बर 28, मेहता चौक, रजौरी गार्डन,नई दिल्ली
सन्त आत्मबोधानंदसन्त आत्मबोधानंद 15 दिन की जाँच समिति अस्वीकार
28 फरवरी, 2019। मातृ सदन हरिद्वार में 26 वर्षीय उपवासरत आत्मबोधानंद जी का आज 128वां दिन है। देशभर में प्रदर्शनों, समर्थन में भेजे जा रहे पत्रों के बावजूद भी सरकार गम्भीर नहीं नजर आती।

जखोल साकरी बाँध: बिना जानकारी पुलिस के साये में जनसुनवाई

Submitted by editorial on Thu, 02/28/2019 - 14:43
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माटू जन संगठन, मेन मार्केट मोरी उत्तरकाशी, उत्तराखण्ड, ग्राम छाम, पथरी भाग 4, हरिद्वार, उत्तराखण्ड
सुपिन नदीसुपिन नदी27 फरवरी, 2019। जखोल साकरी बाँध, सुपिन नदी, जिला उत्तरकाशी, उत्तराखण्ड की 01 मार्च, 2019 को दूसरी पर्यावरणीय जनसुनवाई की घोषणा हुई है। इस बार जनसुनवाई का स्थल परियोजना स्थल क्षेत्र से 40 किलोमीटर दूर है। यह मोरी ब्लॉक में रखी गई है ताकि वह जनविरोध से बच जाए।

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