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खासम-खास

नदी तंत्र पर मानवीय हस्तक्षेप और जलवायु बदलाव का प्रभाव

Submitted by editorial on Sat, 03/16/2019 - 06:09
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
नदी तंत्रनदी तंत्र (फोटो साभार - विकिपीडिया)आदिकाल से नदियाँ स्वच्छ जल का अमूल्य स्रोत रही हैं। उनके जल का उपयोग पेयजल आपूर्ति, निस्तार, आजीविका तथा खेती इत्यादि के लिये किया जाता रहा है। पिछले कुछ सालों से देश की अधिकांश नदियों के गैर-मानसूनी प्रवाह में कमी हो रही है, छोटी नदियाँ तेजी से सूख रही हैं और लगभग सभी नदी-तंत्रों में प्रदूषण बढ़ रहा है। यह स्थिति हिमालयीन नदियों में कम तथा भारतीय प्रायद्वीप की नदियों में अधिक गम्भीर है। यह परिवर्तन प्राकृतिक नहीं है।

Content

केन-बेतवा लिंक, मंजिल अभी दूर है

Submitted by editorial on Mon, 09/24/2018 - 17:38
Author
राकेश रंजन
केन-बेतवा नदी जोड़ परियोजनाकेन-बेतवा नदी जोड़ परियोजना (फोटो साभार - स्क्रॉल)सुखाड़ प्रभावित बुन्देलखण्ड इलाके में सिंचाई और पीने के लिये पानी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तैयार की गई केन्द्र सरकार की बहु-प्रतीक्षित केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना एक बार फिर चर्चा में है। खबर है कि इस योजना के कार्यान्वयन में आ रही मुख्य बाधा का हल ढूँढ लिया गया है। मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की सरकारें इस परियोजना को लेकर समझौते के लिये तैयार हो गई हैं और आने वाले कुछ ही दिनों में इसकी आधिकारिक घोषणा कर दी जाएगी।

कैग रिपोर्ट, राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल योजना हुई फेल

Submitted by editorial on Fri, 09/21/2018 - 17:46
Source
पीआरएस इण्डिया
राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल योजनाराष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल योजना (फोटो साभार - एमडीडब्ल्यूएस)राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल योजना (National Rural Drinking Water Programme, NRDWP) लक्ष्यों को हासिल करने में नाकाम साबित हुई है जबकि इस योजना के मद में आवंटित राशि का 90 प्रतिशत हिस्सा खर्च किया जा चुका है। योजना की शुरुआत वर्ष 2009 में हुई थी जिसका उद्देश्य था सभी ग्रामीण भारतीयों को पीने अथवा घरेलू जरूरतों के लिये सतत रूप से पानी उपलब्ध कराना।

पानी से परवरिश

Submitted by editorial on Mon, 09/17/2018 - 14:41
Author
अनिल अश्विनी शर्मा
Source
डाउन टू अर्थ, सितम्बर, 2018
बिहार में दलदली क्षेत्र से मछुआरों की आजीविका सुनिश्चित होती हैबिहार में दलदली क्षेत्र से मछुआरों की आजीविका सुनिश्चित होती है (फोटो साभार - डाउन टू अर्थ)उत्तर बिहार में पानी अथवा दलदली क्षेत्र लोगों को आर्थिक सम्बल और आजीविका उपलब्ध कराने में बड़ी भूमिका निभाता है लेकिन अब तक इसका पूरा दोहन नहीं हुआ है। हालांकि स्थानीय स्तर पर हुए प्रयास सफलता की कई कहानियाँ बयां करते हैं लेकिन सरकारी प्रयास न के बराबर ही हुए हैं।

प्रयास

गाँव ने रोका अपना पानी

Submitted by editorial on Mon, 12/03/2018 - 20:37
Author
मनीष वैद्य
बेहरी में कच्चे बाँध से लबालब नदीबेहरी में कच्चे बाँध से लबालब नदी'खेत का पानी खेत में' और 'गाँव का पानी गाँव में' रोकने के नारे तो बीते पच्चीस सालों से सुनाई देते रहे हैं, लेकिन इस बार बारिश के बाद एक गाँव ने अपना पानी गाँव में ही रोककर जलस्तर बढ़ा लिया है। इससे गाँव के लोगों को निस्तारी कामों के लिये पानी की आपूर्ति भी हो रही है और ट्यूबवेल, हैण्डपम्प और कुएँ-कुण्डियों में भी कम बारिश के बावजूद अब तक पानी भरा है।

नोटिस बोर्ड

जन सुनवाई में जनता से खतरा क्यों

Submitted by editorial on Fri, 03/01/2019 - 22:42
Source
माटू जन संगठन, मेन मार्केट मोरी उत्तरकाशी, उत्तराखण्ड, ग्राम छाम, पथरी भाग 4, हरिद्वार, उत्तराखण्ड
जन सुनवाई में शामिल न किये जाने से आक्रोशित लोगजन सुनवाई में शामिल न किये जाने से आक्रोशित लोग 01 मार्च, 2019। उत्तराखण्ड शासन-प्रशासन ने दिखा दिया कि बाँध कम्पनियाँ लोगों के अधिकारों और पर्यावरण से ज्यादा महत्त्वपूर्ण हैं।

यमुना घाटी में टॉन्स नदी की सहायक नदी सुपिन पर प्रस्तावित जखोल साकरी बाँध

128 दिन के लम्बे उपवास पर सरकार गम्भीर नहीं

Submitted by editorial on Thu, 02/28/2019 - 17:44
Source
फ्री गंगा, (अविरल गंगा), जेपी हेल्थ पैराडाइज,रोड नम्बर 28, मेहता चौक, रजौरी गार्डन,नई दिल्ली
सन्त आत्मबोधानंदसन्त आत्मबोधानंद 15 दिन की जाँच समिति अस्वीकार
28 फरवरी, 2019। मातृ सदन हरिद्वार में 26 वर्षीय उपवासरत आत्मबोधानंद जी का आज 128वां दिन है। देशभर में प्रदर्शनों, समर्थन में भेजे जा रहे पत्रों के बावजूद भी सरकार गम्भीर नहीं नजर आती।

जखोल साकरी बाँध: बिना जानकारी पुलिस के साये में जनसुनवाई

Submitted by editorial on Thu, 02/28/2019 - 14:43
Source
माटू जन संगठन, मेन मार्केट मोरी उत्तरकाशी, उत्तराखण्ड, ग्राम छाम, पथरी भाग 4, हरिद्वार, उत्तराखण्ड
सुपिन नदीसुपिन नदी27 फरवरी, 2019। जखोल साकरी बाँध, सुपिन नदी, जिला उत्तरकाशी, उत्तराखण्ड की 01 मार्च, 2019 को दूसरी पर्यावरणीय जनसुनवाई की घोषणा हुई है। इस बार जनसुनवाई का स्थल परियोजना स्थल क्षेत्र से 40 किलोमीटर दूर है। यह मोरी ब्लॉक में रखी गई है ताकि वह जनविरोध से बच जाए।

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नदी तंत्र पर मानवीय हस्तक्षेप और जलवायु बदलाव का प्रभाव

Submitted by editorial on Sat, 03/16/2019 - 06:09
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कृष्ण गोपाल 'व्यास’
नदी तंत्रनदी तंत्र (फोटो साभार - विकिपीडिया)आदिकाल से नदियाँ स्वच्छ जल का अमूल्य स्रोत रही हैं। उनके जल का उपयोग पेयजल आपूर्ति, निस्तार, आजीविका तथा खेती इत्यादि के लिये किया जाता रहा है। पिछले कुछ सालों से देश की अधिकांश नदियों के गैर-मानसूनी प्रवाह में कमी हो रही है, छोटी नदियाँ तेजी से सूख रही हैं और लगभग सभी नदी-तंत्रों में प्रदूषण बढ़ रहा है। यह स्थिति हिमालयीन नदियों में कम तथा भारतीय प्रायद्वीप की नदियों में अधिक गम्भीर है। यह परिवर्तन प्राकृतिक नहीं है।

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केन-बेतवा लिंक, मंजिल अभी दूर है

Submitted by editorial on Mon, 09/24/2018 - 17:38
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राकेश रंजन
केन-बेतवा नदी जोड़ परियोजनाकेन-बेतवा नदी जोड़ परियोजना (फोटो साभार - स्क्रॉल)सुखाड़ प्रभावित बुन्देलखण्ड इलाके में सिंचाई और पीने के लिये पानी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तैयार की गई केन्द्र सरकार की बहु-प्रतीक्षित केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना एक बार फिर चर्चा में है। खबर है कि इस योजना के कार्यान्वयन में आ रही मुख्य बाधा का हल ढूँढ लिया गया है। मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की सरकारें इस परियोजना को लेकर समझौते के लिये तैयार हो गई हैं और आने वाले कुछ ही दिनों में इसकी आधिकारिक घोषणा कर दी जाएगी।

कैग रिपोर्ट, राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल योजना हुई फेल

Submitted by editorial on Fri, 09/21/2018 - 17:46
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पीआरएस इण्डिया
राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल योजनाराष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल योजना (फोटो साभार - एमडीडब्ल्यूएस)राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल योजना (National Rural Drinking Water Programme, NRDWP) लक्ष्यों को हासिल करने में नाकाम साबित हुई है जबकि इस योजना के मद में आवंटित राशि का 90 प्रतिशत हिस्सा खर्च किया जा चुका है। योजना की शुरुआत वर्ष 2009 में हुई थी जिसका उद्देश्य था सभी ग्रामीण भारतीयों को पीने अथवा घरेलू जरूरतों के लिये सतत रूप से पानी उपलब्ध कराना।

पानी से परवरिश

Submitted by editorial on Mon, 09/17/2018 - 14:41
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अनिल अश्विनी शर्मा
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डाउन टू अर्थ, सितम्बर, 2018
बिहार में दलदली क्षेत्र से मछुआरों की आजीविका सुनिश्चित होती हैबिहार में दलदली क्षेत्र से मछुआरों की आजीविका सुनिश्चित होती है (फोटो साभार - डाउन टू अर्थ)उत्तर बिहार में पानी अथवा दलदली क्षेत्र लोगों को आर्थिक सम्बल और आजीविका उपलब्ध कराने में बड़ी भूमिका निभाता है लेकिन अब तक इसका पूरा दोहन नहीं हुआ है। हालांकि स्थानीय स्तर पर हुए प्रयास सफलता की कई कहानियाँ बयां करते हैं लेकिन सरकारी प्रयास न के बराबर ही हुए हैं।

प्रयास

गाँव ने रोका अपना पानी

Submitted by editorial on Mon, 12/03/2018 - 20:37
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मनीष वैद्य
बेहरी में कच्चे बाँध से लबालब नदीबेहरी में कच्चे बाँध से लबालब नदी'खेत का पानी खेत में' और 'गाँव का पानी गाँव में' रोकने के नारे तो बीते पच्चीस सालों से सुनाई देते रहे हैं, लेकिन इस बार बारिश के बाद एक गाँव ने अपना पानी गाँव में ही रोककर जलस्तर बढ़ा लिया है। इससे गाँव के लोगों को निस्तारी कामों के लिये पानी की आपूर्ति भी हो रही है और ट्यूबवेल, हैण्डपम्प और कुएँ-कुण्डियों में भी कम बारिश के बावजूद अब तक पानी भरा है।

नोटिस बोर्ड

जन सुनवाई में जनता से खतरा क्यों

Submitted by editorial on Fri, 03/01/2019 - 22:42
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माटू जन संगठन, मेन मार्केट मोरी उत्तरकाशी, उत्तराखण्ड, ग्राम छाम, पथरी भाग 4, हरिद्वार, उत्तराखण्ड
जन सुनवाई में शामिल न किये जाने से आक्रोशित लोगजन सुनवाई में शामिल न किये जाने से आक्रोशित लोग 01 मार्च, 2019। उत्तराखण्ड शासन-प्रशासन ने दिखा दिया कि बाँध कम्पनियाँ लोगों के अधिकारों और पर्यावरण से ज्यादा महत्त्वपूर्ण हैं।

यमुना घाटी में टॉन्स नदी की सहायक नदी सुपिन पर प्रस्तावित जखोल साकरी बाँध

128 दिन के लम्बे उपवास पर सरकार गम्भीर नहीं

Submitted by editorial on Thu, 02/28/2019 - 17:44
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फ्री गंगा, (अविरल गंगा), जेपी हेल्थ पैराडाइज,रोड नम्बर 28, मेहता चौक, रजौरी गार्डन,नई दिल्ली
सन्त आत्मबोधानंदसन्त आत्मबोधानंद 15 दिन की जाँच समिति अस्वीकार
28 फरवरी, 2019। मातृ सदन हरिद्वार में 26 वर्षीय उपवासरत आत्मबोधानंद जी का आज 128वां दिन है। देशभर में प्रदर्शनों, समर्थन में भेजे जा रहे पत्रों के बावजूद भी सरकार गम्भीर नहीं नजर आती।

जखोल साकरी बाँध: बिना जानकारी पुलिस के साये में जनसुनवाई

Submitted by editorial on Thu, 02/28/2019 - 14:43
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माटू जन संगठन, मेन मार्केट मोरी उत्तरकाशी, उत्तराखण्ड, ग्राम छाम, पथरी भाग 4, हरिद्वार, उत्तराखण्ड
सुपिन नदीसुपिन नदी27 फरवरी, 2019। जखोल साकरी बाँध, सुपिन नदी, जिला उत्तरकाशी, उत्तराखण्ड की 01 मार्च, 2019 को दूसरी पर्यावरणीय जनसुनवाई की घोषणा हुई है। इस बार जनसुनवाई का स्थल परियोजना स्थल क्षेत्र से 40 किलोमीटर दूर है। यह मोरी ब्लॉक में रखी गई है ताकि वह जनविरोध से बच जाए।

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