जैविक खेती पर जोर के साथ जैविक मटन की अनूठी पहल

Submitted by Hindi on Mon, 04/09/2018 - 12:32
Source
अमर उजाला, 09 अप्रैल, 2018

 

उत्तराखण्ड के पर्वतीय जनपदों में रसायन वाले उर्वरकों का इस्तेमाल नहीं के बराबर होता है, इसका मतलब है कि इन जनपदों की भेड़-बकरियाँ जैविक चारे का सेवन करती हैं। ऐसे में उनके शरीर में हानिकारक रसायनों की मात्रा कम होती है। ऐसी भेड़-बकरियों के मांस की ही मार्केटिंग जैविक मांस के रूप में करने की योजना बनाई गई है। इसके उत्पादन के लिये पशुपालन विभाग पशुपालकों की सोसाइटी बनायेगा।

देहरादून! रासायनिक उर्वरकों व कीटनाशकों के अन्धाधुन्ध इस्तेमाल से प्रदूषित होते खाद्य पदार्थों से लोगों को निजात दिलाने के लिये इन दिनों जैविक कृषि पर जोर बढ़ा है। इसी कड़ी में उत्तराखण्ड के पशुपालन विभाग ने सूबे में एक अनूठी पहल की है। विभाग मांस के शौकीनों को स्वस्थ मांस मुहैया कराने के लिये ‘जैविक मांस’ की आपूर्ति करेगी। सुनने में यह थोड़ा अटपटा जरूर लग रहा है कि मांस भला जैविक कैसे हो सकता है, लेकिन यह हकीकत है।

जैविक कृषि उत्पादों के उत्पादन के क्षेत्र में दबदबा कायम करने के बाद अब उत्तराखण्ड के पर्वतीय जनपदों में जैविक मांस का उत्पादन भी होगा। पशुपालन विभाग ने जैविक मांस के उत्पादन से लेकर इसकी आपूर्ति तक का खाका तैयार कर लिया है। जैविक मांस की आपूर्ति सेना और अन्य संस्थाओं के साथ-साथ पाँच सितारा होटलों में की जायेगी। जाहिर सी बात है कि इसकी अच्छी कीमत भी मिलेगी।

 

 

 

क्या है जैविक मांस


सबके मन में यह सवाल उठना लाजिमी है कि जैविक मांस का उत्पादन आखिर होगा कैसे? दरअसल, उत्तराखण्ड के पर्वतीय जनपदों में रसायन वाले उर्वरकों का इस्तेमाल नहीं के बराबर होता है, इसका मतलब है कि इन जनपदों की भेड़-बकरियाँ जैविक चारे का सेवन करती हैं। ऐसे में उनके शरीर में हानिकारक रसायनों की मात्रा कम होती है। ऐसी भेड़-बकरियों के मांस की ही मार्केटिंग जैविक मांस के रूप में करने की योजना बनाई गई है। इसके उत्पादन के लिये पशुपालन विभाग पशुपालकों की सोसाइटी बनायेगा। जैविक मांस का उत्पादन करने के लिये पशुपालन विभाग अलग से स्लॉटर हाउस का भी निर्माण करायेगा। स्लॉटर हाउस में साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखा जायेगा।

 

 

 

प्रदेश में भेड़-बकरियों की अनुमानित संख्या

बकरी

1.36 करोड़

भेड़

3.65 लाख

मांस उत्पादन

28.40 हजार टन प्रतिवर्ष

 

मार्केटिंग पर होगा जोर


पशुपालन विभाग ने जैविक मांस के उत्पादन के साथ उसकी मार्केटिंग की भी योजना बनाई है। विभाग की सेना और कई संस्थाओं के साथ-साथ पाँच सितारा होटलों से बात चल रही है। विभाग को उम्मीद है कि पाँच सितारा होटलों में जैविक मांस की आपूर्ति से अच्छी कीमत मिल सकती है। विभाग को कई पाँच सितारा होटलों से अच्छी प्रतिक्रिया मिली है।

 

सुधरेगी पशुपालकों की हालत


सूबे की पशुपालन राज्य मंत्री रेखा आर्या ने बताया कि नई सोच के तहत प्रदेश में जैविक मांस के उत्पादन की योजना बनाई गई है। इस योजना से पशुपालकों और महिलाओं की आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा। उत्तराखण्ड के पर्वतीय जनपदों में बहुत सी महिलाएँ भेड़-बकरी पालन से जुड़ी हैं।

मिलेगी अच्छी कीमत


जैविक मांस के उत्पादन और मार्केटिंग से प्रदेश के पशुपालकों का जीवन स्तर सुधारने की योजना बनाई गई है। वर्तमान में मार्केटिंग के अभाव में पशुपालकों को भेड़-बकरियों की उचित कीमत नहीं मिल पाती है। जैविक मांस की अच्छी कीमत मिलने की स्थिति में पशुपालकों की आमदनी भी बढ़ेगी। इस योजना के माध्यम से पर्वतीय जनपदों के पशुपालकों की आमदनी दोगुनी करने की भी योजना बनाई गई है।

 

 

 

 

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