जन सुनवाई में जनता से खतरा क्यों

Submitted by editorial on Fri, 03/01/2019 - 22:42
Source
माटू जन संगठन, मेन मार्केट मोरी उत्तरकाशी, उत्तराखण्ड, ग्राम छाम, पथरी भाग 4, हरिद्वार, उत्तराखण्ड
जन सुनवाई में शामिल न किये जाने से आक्रोशित लोगजन सुनवाई में शामिल न किये जाने से आक्रोशित लोग 01 मार्च, 2019। उत्तराखण्ड शासन-प्रशासन ने दिखा दिया कि बाँध कम्पनियाँ लोगों के अधिकारों और पर्यावरण से ज्यादा महत्त्वपूर्ण हैं।

यमुना घाटी में टॉन्स नदी की सहायक नदी सुपिन पर प्रस्तावित जखोल साकरी बाँध परियोजना की पर्यावरणीय जन सुनवाई प्रभावित क्षेत्र से 40 किलोमीटर दूर मोरी ब्लॉक में कथित रूप से पूरी कर दी गई। 01 मार्च को जन सुनवाई का समय 11:00 बजे से शुरू हुआ किन्तु उसमें खास जखोल गाँव के लोगों को रोका गया। जखोल गाँव इस बाँध के लिये प्रस्तावित 9 किलोमीटर लम्बी सुरंग के ऊपर आता है और जहाँ सुरंग के दुष्परिणाम सम्भावित हैं।

प्रशासन ने चुनकर जखोल गाँव के अलावा अन्य प्रभावित गाँवों पाँव तल्ला, मल्ला, सुनकुंडी और धारा के सैकड़ों लोगों को भी जन सुनवाई में जाने से मोरी जखोल मोटर मार्ग पर बैरिकेड लगा कर रोक दिया। जखोल गाँव के प्रधान सूरज रावत के नेतृत्व में लोगों ने ब्लॉक के दरवाजे पर धरना किया और लगातार तीखे नारे देकर बैठे रहे। कोट गाँव के प्रधान सूरज दास, डगोली गाँव की महिला प्रधान के साथ ग्राम प्रधान हडवाड़ी के मुंशीराम ने भी धरना दिया। मोरी बाजार की तरफ माटू जनसंगठन के साथी विमल भाई, रामलाल भाई, गुलाब सिंह रावत व राजपाल रावत को पुलिस ने यह कहकर रोका कि आपको लेने एस.डी.एम पूरणसिंह राणा आएँगे। लगातार निवेदन करने पर भी जबर सिंह असवाल कानूनगो और पटवारी अनिल असवाल ने नहीं जाने दिया।दोनों ही तरफ लोगों को बाहर रोक कर अन्दर जन सुनवाई की प्रक्रिया पूरी कर ली गई।

जब सभी अधिकारी बाहर सड़क पर आए तो लोगों ने उनको वहाँ रोकने की कोशिश की। जिला अधिकारी आशीष चौहान जी सहित सभी अधिकारी तेज रफ्तार गाड़ियों से 01 किलोमीटर दूरी पी.डब्लू.डी के गेस्ट हाउस पहुँचे, जहाँ लोग भी दौड़ते हुए पहुँचे और सड़क पर चक्का जाम किया।

बाद में जिला अधिकारी ने गेस्ट हाउस से बाहर आकर मामला सुलझाने की कोशिश की। विमल भाई ने लोगों की ओर से उनसे एक ही प्रश्न पूछा कि लोगों को अन्दर आने से क्यों रोका गया? यह हमारे संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है। यह जन सुनवाई पूरी तरह प्रायोजित कार्यक्रम की तरह पूरी की गई है।

गुलाब सिंह रावत ने कहा कि हम अपनी मांग जो पहले हमने कही थी उसी को दोहराना चाहते थे। जब तक हमें पर्यावरण प्रभाव आकलन रिपोर्ट, पर्यावरण प्रबन्ध योजना व सामाजिक समाघात योजना हिन्दी में नहीं मिल जाते हम बाँध पर अपनी बात कैसे रखेंगे? सुनकुंडी गाँव के जयवीर ने कहा कि मुझे सुबह पुलिस ने पहले ही उठा दिया था। हम 2011 से इस बाँध का विरोध कर रहे हैं हमारी बात तक नहीं सुनी गई।

रामलाल जी ने कहा लोगों को डराने के लिये जखोल के 21 लोगों पर झूठे मुकद्मे कायम किये गए हैं।

साथी प्रदीप ने आरोप लगाए की जन सुनवाई में किन्ही आँगनबाड़ी की व आशा कार्यकर्ताओं को तथा अन्य सरकारी कर्मचारियों को बिठाया गया।

लोगों को जनसुनवाई में शामिल नहीं होने दिया गयालोगों को जनसुनवाई में शामिल नहीं होने दिया गयाधारा गाँव के प्रह्लाद सिंह पवार बहुत मुश्किल से जन सुनवाई में जाकर अपनी बात कह पाए। उनका कहना है कि जब पर्यटन के लिये और लोगों के स्थाई रोजगार के लिये आवश्यक हर की दून मोटर मार्ग को गोविंद वन्य जीव बिहार के कारण स्वीकृति नहीं दी जा रही है तो बाँध की 9 किलोमीटर लम्बी सुरंग के लिये कैसे स्वीकृति की बात है? जब भूकम्प नीचे से आता है तो सुरंगों के लिये भारी मात्रा में विस्फोटक इस्तेमाल करने से ऊपर क्या स्थिति होगी?

राजपाल रावत ने कहा कि सुरंग परियोजनाओं के असरों को पूरी तरह नकार कर जखोल गाँव को प्रभावित तक की श्रेणी में नहीं रखा जा रहा?

शासन प्रशासन और बाँध कम्पनी ने 12 जून की जन सुनवाई स्थगित होने को अपनी प्रतिष्ठा का प्रश्न बनाया। इसीलिये आज हर हालत में जन सुनवाई की प्रक्रिया पूरी करने के लिये भारी संख्या में लाठी और बन्दूक के साथ पुलिस बल के साए में जन सुनवाई की प्रक्रिया पूरी की गई। जनता से दूर यह जन सुनवाई पूरी तरह से असंवैधानिक और शासन-प्रशासन की चालाकी का नमूना है।

हम इसको पूरी तरह नकारते हैं। प्रशासन ने इस बात को मद्देनजर नहीं रखा कि आज के अधिकारी हमेशा रहने वाले नहीं है, किन्तु गाँव, नदी और पर्यावरण स्थाई है। इस बिना जानकारी दिए आयोजित जन सुनवाई के असर को लोक और पर्यावरण हमेशा झेलेंगे।

हम यह कहना चाहेंगे कि हमारे लिये यह प्रतिष्ठा का प्रश्न नहीं वरन लोगों के अधिकारों और पर्यावरण की सुरक्षा का है। आन्दोलन अपने तमाम संवैधानिक अधिकारों का उपयोग जन और पर्यावरण हक के लिये करेगा।

यह प्रेस विज्ञप्ति रामबीर राणा, भगवान सिंह रावत के द्वारा जारी की गई।
सम्पर्क: 9718479517, 9458952843

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