पंढरी गांव ने दी सूखे और खुले में शौच को मात

Submitted by UrbanWater on Mon, 04/29/2019 - 16:09

‘मेरा किसान आलसी हो सकता है लेकिन मेरा किसान भिखारी नहीं हो सकता, वो किसी से भीख नहीं मांगेगा’

महाराष्ट्र के ज्यादातर गांव सूखे के चपेट में रहते हैं लेकिन इसी राज्य का पंढरी गांव मानसून के बिना भी पानी से लबालब रहता है। इसकी वजह है यहां किया गया जल संधारण का अनूठा प्रयास। जिससे इस गांव में मानसून के बाद साल भर के लिये पानी पर्याप्त मात्रा में रहता है। आज ये गांव सूखे से पूरी तरह से मुक्त हो चुका है और महाराष्ट्र के अन्य गांवों के लिए एक मिसाल भी प्रस्तुत करता है। 

एक अभिनेत्री की दुनिया कैसी होती है? ग्लैमरस से भरी हुई जो हमें चकाचौंध कर देती है। उनका शहर मुंबई होता है और दुनिया उसी शहर में सिमटी रहती है। वे सिनेमा में ही लगे रहते हैं और उसी को जीते हैं। वे देश-दुनिया की समस्या से दूर होते हैं और दूर ही रहना चाहते हैं। लेकिन उसी चकाचौंध और ग्लैमर की दुनिया में कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो आस-पास की समस्या को समझते भी हैं और उसे दूर करने का प्रयास भी करते हैं। ऐसा ही सराहनीय कार्य एक्ट्रेस राजश्री देशपांडे ने किया है।

महाराष्ट्र देश का वो राज्य हैं जहां सबसे ज्यादा सूखा पड़ता है और उसी वजह से गरीब किसान कर्ज की चपेट में आते हैं। आखिर में वे किसान आत्महत्या कर लेते हैं। महाराष्ट्र के राहत और पुनर्वास विभाग के आंकड़े के अनुसार जनवरी 2015 से सितंबर 2018 तक 11,255 किसान आत्महत्या कर चुके हैं। ये आंकड़ा त्रासदी भरा तब है जब यहां पर भारी मात्रा में बारिश हो रही है। राज्य के वार्षिक सर्वेक्षण के रिपोर्ट के अनुसार, 2014-15 में बारिश का स्तर 70.2 प्रतिशत और 2015-16 में ये कम होकर 59.4 हो गया था लेकिन उसके बाद बारिश के स्तर में काफी बढ़ोतरी हुई है। 2016-17 में महाराष्ट्र  में 94.09 प्रतिशत और 2017-18 में 84.3 प्रतिशत बारिश दर्ज की गई।
 
महाराष्ट्र में जहां बारिश के बाद ज्यादातर गांव सूखे की चपेट में रहते हैं। वहीं इसी राज्य में एक गाँव ऐसा भी है जिसके पास बारिश से पहले ही खूब पानी रहता है, इस गांव का नाम है पंढरी। लेकिन यह गाँव हमेशा से ऐसा नहीं था, इस गांव की खुशहाली का रास्ता खोजा फिल्म अभिनेत्री व समाजसेवी राजश्री देशपांडे ने। राजश्री के पिता किसान थे, इसलिये वे किसान के काम के बारे में जानतीं थीं। जब उन्होंने मीडिया में किसानों के सूखे की समस्या को देखा तो उन्होंने मदद करने का सोचा। उन्होंने पहले इस मसले पर खूब रिसर्च की। रिसर्च के दौरान ही उनको पता चला कि इस पर करोड़ों रुपये की परियोजनायें चल रही हैं लेकिन इससे छोटे गांवों में कुछ ख़ास फायदा नहीं पहुँच पाता है।

तब 2015 में उन्होंने मराठावाड़ा जिले के एक छोटे-से गांव ‘पंढरी’ का दौरा किया। वे वहां के लोगों से मिलने बार-बार जाने लगीं और उनकी समस्याओं को जानने की कोशिश की। लोगों से बात करने के बाद राजश्री को समझ में आया कि सूखे की समस्या का बड़ा कारण है ‘बोरवेल’। पंढरी गांव के हर खेत में बोरवेल है जिसका नतीजा ये हुआ कि उन्होंने पूरा पानी जमीन से खींच लिया। अब जमीन में पानी नहीं होगा तो पानी आयेगा कहां से? गांव के लोगों ने बताया, यहां सभी लोगों सुझाव लेते हैं लेकिन काम कोई नहीं करता। राजश्री ने कई लोगों से बात की और इस समस्या को हल करने का सोचा। इसका पहला कदम राजश्री ने ‘जल संधारण’ के रुप में करने का सोचा। फिर राजश्री  ने इस गांव में जल संचयन करने का बीड़ा अकेले ही उठा लिया।

‘‘गांव वालों का विश्वास जीतने में मुझे महीनों लगे। मैं बस उनके साथ बैठती और उनकी बातें सुनती थी। जब आप सुनते हैं, तभी आप समझते हैं। जब आप समझते हैं तब ही आप उस समस्या का समाधान ढूंढ़ सकते हैं।’’

राजश्री देशपांडे ने गांव के लोगों को जल संचयन करने के लिये मना लिया। राजश्री ने अपने दोस्तों से मदद मांगी और पैसे जुटाये। उनके के पास इस काम के लिये डेढ़ लाख रुपये, 50 किसान आौर 25 दिन का समय था। लेकिन बारिश जल्दी बढ़ने के आसार बढ़ गये। अब इस काम को बहुत जल्दी करना था, और उनके पास 15 दिन से भी कम समय थे। राजश्री ने गांव वालों को बताया अब हमें दिन, रात काम करना है तभी ये हो पायेगा। लोगों ने राजश्री की बात मानीं और दिन-रात काम किया। कोई दिन में काम करता और कोई रात में। उन्होंने ही मिट्टी निकाली, उन्होंने ही ट्रैक्टर चलाया और वे ही मशीन चलाते। गांव के लोगों के दिन-रात मेहनत के बाद एक बड़ा-सा तालाब खोद लिया गया। उसके बाद जब बारिश हुई तो वो तालाब भर गया। बारिश का मानसून जाने के बाद जब लोगों को पानी के लिये टैंकर नहीं मंगाने पड़े, तब लोगों को समझ में आया कि उन्होंने बहुत अच्छा और बड़ा काम किया है। अगले साल जब बारिश हुई तो वह तालाब पानी से लबालब हो गया। गांव वाले बहुत खुश थे, उनके पास अब पूरे एक साल तक का पर्याप्त पानी था। महाराष्ट्र में कम बारिश होने से और जल स्तर नीचे जाने से पंढरी जैसे गांव सूखे की चपेट में आ जाते हैं। राजश्री ने पंढरी जल संरक्षण को लाकर एक आशा जगाई है कि साथ मिलकर हर समस्या का हल निकाला जा सकता है।
 
पंढरी गांव की पानी की समस्या को हल करने के बाद राजश्री ने टाॅयलेट बनाने का जिम्मा लिया। उन्होंने देखा कि गांव में सिर्फ 4-5 ही टाॅयलेट हैं और बाकी पूरा गांव खुले में शौच करने जाता है। राजश्री ने बताया कि वे चाहती तो चंदा जुटातीं और शौचालय बनकर तैयार हो जाते। लेकिन जब कोई काम खुद करते हो तो उसको अधिक महत्व देते हो। सरकार शौचालय बनाने के लिये 12,500 रुपये की मदद करती है। राजश्री ने गांव वालों से कहा, आप अपने कागज तैयार कर लीजिये और टाॅयलेट बनाइये।

गांव वालों ने सरकार से मिली आर्थिक मदद और बिना किसी अन्य फंडिंग के 200 टाॅयलेट बना लिये। राजश्री गांव में जातीं और उनसे मिलकर कागज बनाने पर बात करतीं। लोगों से पूछती कि जिनके टाॅयलेट बन गये हैं वो टाॅयलेट में जाते हैं या नहीं और बार-बार समझातीं कि शौच आदि  के लिए शौचालय का उपयोग करिये। पंढरी गांव में अच्छा काम करने के बाद सुश्री राजश्री दूसरे गांवों में भी ऐसे ही बदलाव लाना चाहती हैं। जिसके लिये उन्होंने एक एनजीओ बनाया है, जिसका नाम है ‘नभांगण फाउंडेशन’। नभांगण इस समय ‘पंढरी’ और ‘मठ जलगांव’ में काम कर रहा है और राजश्री देशपांडे फिल्मी दुनिया से समय निकालकर वहां जाती-रहती हैं। राजश्री एक मिसाल हैं, उदाहरण हैं जो समस्या पर सिर्फ बोलती नहीं, उसके हल करने का भी प्रयास करती हैं।

कौन हैं राजश्री देशपांडे ?

राजश्री देशपांडे बालीवुड व मराठी इंडस्ट्री की कई फिल्मों में काम कर चुकी हैं। उन्होंने आमिर खान अभिनीत फिल्म ‘तलाश’ से अपना डेब्यू किया था। उसके बाद उन्होंने सलमान खान के साथ ‘किक’ फिल्म में भी काम किया है। हाल ही में वे चर्चित वेब सीरीज ‘सेक्रेड गेम्स’ में नजर आईं थीं। उसके अलावा राजश्री ने नवाजुद्दीन सिद्दीकी अभिनीत ‘मंटो’ में इस्मत चुग़ताई की भूमिका निभाई थी। इस फिल्मी दुनिया से समय निकालकर वे अपने एनजीओ ‘नभांगण’ को देखती हैं और कई गांवों को बेहतर करने की कोशिश में लगी हुई हैं।

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