केन नदी को खनन माफिया से बचाने की कवायद शुरू

Submitted by UrbanWater on Fri, 05/31/2019 - 10:41
Source
जनसत्ता, बांदा, 27 मई 2019

नदी के किनारे पिस्तौल से लैस पुलिसकर्मी की निगाहें दूरबीन से किसी भगोड़े अपराधी को नही बल्कि नदी का प्रवाह अवरूद्ध करने वालों को तलाश रही है। इन दिनों पुलिस की अनूठी पहरेदारी, सूखे से जूझ रहे बुंदेलखंड की जीवनायिनी केन नदी के लिए हो रही है। बुंदेलखंड में सूखे से सर्वाधिक प्रभावित बांदा और आसपास के इलाकों में पानी के एकमात्र स्रोत के रूप में बची केन नदी को बालू खनन माफिया से बचाने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस के कंधों पर सख्त पहरेदारी का भार है। भीषण गर्मी में छुपकर मामूली नहर बन चुकी केन नदी में पानी की धारा को अविरल बनाए रखने के लिए स्थानीय प्रशासन ने पुलिस तैनात की है। स्थानीय पुलिस अधिकारियों की दलील है कि गर्मी से तप रहा यह इलाका, इन दिनों पेयजल की उपलब्धता के मामले में नदी पर ही आश्रित हो जाता है।

गर्मी के कारण नदी में भी इस समय मामूली जलप्रवाह रह जाता है। ऐसे में अवैध खनन कारोबारी दूरदराज के दुर्गम इलाकों में नदी की धारा को रोककर बालू का खनन करने लगते हैं। इससे शहरी क्षेत्रों में पानी की आपूर्ति के लिए नदी में बने ‘इन-टेक-वेल’ तक पानी नहीं पहुंच पाता है। बांदा के अपर पुलिस अधीक्षक एलबीके पाल ने बताया कि इस समस्या से निपटने के लिए पुलिस तैनात करनी पड़ी। पाल ने कहा कि सिर्फ खनन माफिया ही नहीं बल्कि ग्रामीण इलाकों में नदी के किनारे बने सब्जी उत्पादक किसान भी नदी का प्रवाह रोक देते हैं।
इससे समस्या और अधिक गहरा गई है। इससे निपटने के लिए दूरबीन और हथियारों से लैस पुलिसकर्मी, इन दिनों केन नदी के तट पर पहरेदारी करते देखे जा सकते हैं। नदी में पानी का प्रवाह सुनिश्चित करने में लगे दरोगा दयाशंकर पांडेय ने बताया कि नदी के बहाव क्षेत्र में दिन-रात पुलिस की गश्त हो रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में सब्जी किसानों को समझा बुझाकर पानी रोकने से मना किया जाता है, वहीं जलधारा रोककर बालू का अवैध खनन करने वालों के खिलाफ सख्ती से पेश आना पड़ता है।

अपर पुलिस अधीक्षक पाल ने कहा कि नदी में पानी का बहाव रोके जा सकने वाले इलाकों को चिन्हित कर वहां निगरानी तेज कर दी गई है। इसके लिए गठित दो पुलिस निगरानी दल, पूरे बांदा जनपद में केन नदी के तट पर प्रतिरोध वाले इलाकों में सख्त पहरा दे रहे हैं। बुंदेलखंड की प्रमुख नदियों मंदाकिनी, बेतवा और केन के संरक्षण से जुड़े पर्यावरण विशेषज्ञ गुंजन मिश्रा इसे समस्या को तात्कालिक उपाय मानते हैं।  
मिश्रा ने बताया कि नदियों की रखवाली में सुरक्षाकर्मी तैनात करने का प्रयोग उत्तराखंड दिल्ली में भी किया जा चुका है। गंगा और यमुना में सीवर तथा पूजा सामग्री सहित अन्य अपशिष्ट प्रवाहित करने से रोकने संबंधी न्यायिक आदेशों के पालन में उत्तराखंड पुलिस ने गंगा प्रहरी और इसकी तर्ज पर दिल्ली में यमुना प्रहरी तैनात करने की पहल की थी। बकौल मिश्रा, यह कवायद, समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। प्रशासन को नदी में पानी कम होने पर शहरों की प्यास बुझाने की खातिर खनन के खिलाफ महज गर्मियों में सख्ती बरतने के बजाय साल भर यह रवैया अपनाने की जरूरत है।

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