प्लास्टिक इस्तेमाल पर जुर्माना

Submitted by editorial on Wed, 12/19/2018 - 10:43
Source
जनसत्ता, 13 दिसम्बर, 2018


प्लास्टिक पर प्रतिबन्धप्लास्टिक पर प्रतिबन्ध भागलपुर: आधी-अधूरी तैयारी के साथ शुक्रवार 14 दिसम्बर से बिहार के शहरों में प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबन्ध लग रहा है। उल्लंघन करने वालों को 35 हजार तक जुर्माना भरना पड़ सकता है। जुर्माने की तीन श्रेणियाँ तय की गई हैं। नगर निकायों को इसकी जिम्मेदारी दी गई है।

राज्य के शहरी विकास व आवास मंत्रालय ने इस बाबत पत्र के जरिए भागलपुर समेत बिहार के 38 जिलों के जिलाधीश को जरूरी दिशा निर्देश दिए हैं और इसे सख्ती से प्लास्टिक पर प्रतिबन्ध लागू करने को कहा है। यह पत्र महकमे के प्रधान सचिव चैतन्य प्रसाद के दस्तखत से जारी हुआ है। जिसमें प्लास्टिक के इस्तेमाल से स्वास्थ्य और वातावरण पर हो रहे बुरे प्रभाव के बारे में लोगों को जागरुकता पैदा करने को भी कहा गया है।

पत्र में यह भी लिखा है कि इस मामले में बिहार की कोई भी नगर निकाय बिहार नगर पालिका प्लास्टिक कचरा प्रबन्धन कानून 2018 के तहत प्लास्टिक थैलियों के इस्तेमाल करने वालों पर जुर्मना लगाने के लिये सक्षम है। मगर भागलपुुर नगर निगम की ओर से जागरुकता के वास्ते अब तक सार्थक पहल नहीं हुई हैं। मुख्य बाजार, सब्जी मंडी, अनाज मंडी, मॉल या दूसरी दुकानों में गुरुवार को भी धड़ल्ले से प्लास्टिक की थैलियों का उपयोग होता रहा। सौन्दर्य प्रसाधन की बड़ी दुकान गोविन्द चूड़ी भण्डार के मालिक सतीश बाजोरिया कहते हैं कि ग्राहक ही हम पर थैली देने का जोर डालते हैं।

उधर, तैयारियों के नाम पर खानापूरी ही हुई है। जबकि राज्य सरकार के आला अधिकारी बीते एक महीने से 14 दिसम्बर से प्लास्टिक पर प्रतिबन्ध की चेतावनी दे रहे हैं। नगर निगम ने निगरानी व जागरुकता के लिये अपने कर्मचारी ओमप्रकाश मेहता के नेतृत्व में इस बाबत एक दस्ता बनाया है। मगर इस दस्ते को यह नहीं पता कि उसे क्या करना है।

प्रधान सचिव के पत्र के मुताबिक जुर्माने को तीन श्रेणियों में बाँटा गया है। वाणिज्यिक इस्तेमाल पर पहली दफा में एक हजार पाँच सौ रुपए, दूसरी बार पकड़े जाने पर 25 हजार और तीसरी दफा या इसके हरेक बार 35 हजार रुपए का जुर्माना वसूला जाएगा। दूसरी श्रेणी में प्लास्टिक के उत्पादन, वितरण, व्यापार और भण्डारण करने वालों पर पहली दफा दो हजार, दूसरी दफा तीन हजार और उसके बाद हरेक बार पाँच हजार रुपए दंड का प्रावधान है। तीसरी श्रेणी में घरेलू उपभोक्ता हैं। इन्हें एक सौ, फिर दो सौ और इसके बाद हरेक बार पाँच सौ रुपए जुर्माना देने का नियम बना है।
 

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