झींगों के साथ रेतीले झींगों के पालन की संभावना

Submitted by Hindi on Fri, 04/20/2018 - 14:44
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Source
केन्द्रीय समुद्री मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान का मद्रास शोध केन्द्र

निष्कर्ष
झींगा मछली की ग्रो आउट व्यवस्था की पूर्णता के दौरान 35 प्रति sq.m, के क्षेत्र में सफेद झींगा फेन्नरोपेनियस इंडिकस के बीज (30-40 mm TL; 0.3-0.4 g) प्राप्त हुए। शुरुआत में झींगा मछलियों की संख्या 463 और झींगों की संख्या 425 थी। झींगों को वाणिज्यिक पेलेट खाद्य पदार्थ खिलाया गया और झींगा मछलियों को ताजा क्लैम मांस खिलाया गया। फसल के दौरान, झींगों में 98% से अधिक जीवन्तता पाई गई और झींगा मछलियों में 82.9% जीवन्तता पाई गई।

इसमें से 2835 मोल्ट निकाले गए। अंतिम झींगा मछली जैव भार का फसल 37.712 kg प्रति sq.m था और कुल झींगा मछली जैव भार का फसल 3.02 kg प्रति sq.m था। झींगों का जैव भार फसल 278.6g प्रति Sqm था। उक्त गहन व्यवस्था में प्राप्त उत्पादन से यह स्पष्ट होता है कि अधिक सघनता में झींगा के साथ रेत में होने वाले झींगा मछलियों को जलजीव पालन व्यवस्थाओं में एक साथ पालना संभव है क्योंकि उनमें खाद्य पदार्थों की स्पर्धा नहीं होती और झींगा मछली, रेतीले झींगों का शिकार नहीं करते जिससे इस ग्रो आउट व्यवस्था से अत्यधिक आर्थिक लाभ प्राप्त हो सकते हैं।

परिचय
रेतीला झींगा, थेनियम ओरियेण्टालिस, विश्व रेतीला उत्पादन का 8% भाग होता है तथा निर्यात मूल्य में स्पाइनी रेतीले झींगे और टाइगर झींगों के बाद आता है। भारत में रेतीले झींगों की जल कृषि के लिये एक बहुत ही अच्छा अवसर है। इसके इल्लियों का चक्र 26-30 दिनों में पूरा हो जाता है तथा छोटे झींगे 300 दिनों में ही 150g (निर्यात के लिये न्यूनतम कानूनी साइज) की साइज पा लेते हैं। बंद पालन पद्धति में स्पाइनी रेतीले झींगों की तुलना में रेतीले झींगे इल्लियों के विकास की यह सीमित अवधि के कई लाभ हैं। आगामी वर्षों में गुजरात के काका में, तमिलनाडु के मकडकेर्रा तथा केरल के पूलिकोन्चु जैसे स्थानों के लिये टी. ओरियेण्टालिस काफी अच्छे उम्मीदवार होंगे। विभिन्न जलकृषि व्यवस्थाओं में सफेद झींगे, फेन्नरोपेनियम इंडिकस के साथ बहुपालन एवं उच्च सघनता युक्त वृद्धि करने की प्रक्रिया पर प्रयोगशाला स्तर के कार्य सफल सिद्ध हुए हैं।

रेतीले झींगों के साथ झींगों का पालन
रेतीले झींगों को वृद्धि के समय सफेद झींगों एफ इंडिकस (35.40 mm TL; 0.3-0.4 g) के बीजों को 35 प्रति sq.m के हिसाब से स्टॉक किया गया। आरंभ में स्टॉक किए गए रेतीले झींगों की संख्या 463 (192 पुरुष और 271 स्त्री) थी तथा सफेद झींगों की संख्या 425 थी। झींगों को वाणिज्यिक पेलेट आहार खिलाया गया तथा रेतीले झींगों को ताजा क्लैम मांस खिलाया गया। इसमें 158.75 क्लैम मांस और 2.54 किलो पेलेट खाद्य पदार्थों का इस्तेमाल किया गया।

फसल के समय सफेद झींगा में 98% की जीवंतता पाई गई और रेतीले झींगों में 82.9 % जीवंतता पाई गई। कुल 2835 मोल्ट प्राप्त किए गए तथा 250 दिनों के पालन में 7.7 औसत मोल्टों की संख्या प्राप्त हुई। अंत में फसल किए गए रेतीले झींगों की जैव पदार्थ संख्या 3.02 kg/sq.m थी तथा फसल किए गए कुल रेतीले जैव पदार्थ 37.712 kg था। फसल किए गए जैव पदार्थ 278.6 g/sq.m था।

फसल का एक भाग
इस गहन व्यवस्था से प्राप्त उत्पादन से यह पता चलता है, कि सफेद झींगों का एक साथ में सघन पालन करने की संभावना है, क्योंकि उनमें खाने की स्पर्धा नहीं है और रेतीले झींगे सफेद झींगों को नहीं खाते हैं। यह स्पष्ट होता है कि उस ग्रो आउट व्यवस्था से बेहतरीन आर्थिक लाभ प्राप्त करने की संभावना है। चूँकि, इस प्रजाति के विकास की गति तेज है, यह आक्रामक (शांत) या भक्षक प्रवृत्ति का नहीं है, सफेद झींगों के साथ बहुपालन के लिये अत्यंत अनुकूल है तथा रेसवे जैसे अत्यंत सघन व्यवस्थाओं में विकसित होने के लिये अत्यंत अनुकूल है।

ईमेल : jkizhakundan@rediffmail.com

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