नजफगढ़ झील: विकास की धारा ने मिलाया नालों की धार से

Submitted by UrbanWater on Mon, 04/29/2019 - 17:41

सरकार को चाहिए कि साहिबी नदी के उद्गम से लेकर यमुना तक इस पानी के बड़े स्रोत को पुनर्जीवित करने का बीड़ा ले और इस मिशन पर कार्य आरम्भ करे। इसके लिए अगर नज़फगढ़ झील में पड़ने वाली निजी जमीन के मालिकों को भारी धनराशि भी देनी पड़े तो पानी के लिए अविलंब देना चाहिए। इसके पूरे जलागम क्षेत्र में किसी प्रकार निर्माण कार्य आदि बंद किया जाना चाहिए। गंगा रिवर (rejuvenenation protection and management ) ऑर्डर 2016 के अंतर्गत साहिबी नदी को भी गंगा की ट्रिब्यूटरी माना जा सकता है तथा इसे पुनः इसका नाम बदल कर साहिबी नदी या साहिबी नाला ही रखा जाना चाहिए ताकि नाम बदलने के साथ ही इसको देखने की लोगों की दृष्टि भी बदल सके।

कभी प्रवासी पक्षियों के लिए विहार रह चुका नजफगढ़ झील आज नाला में तब्दील हो चुका हैकभी प्रवासी पक्षियों के लिए विहार रह चुका नजफगढ़ झील आज नाला में तब्दील हो चुका है

देश की राजधानी नई दिल्ली में एक समय यमुना नदी के बाद पानी का सबसे बड़ा स्रोत नजफगढ़ झील होता था। आज जल प्रदूषण के लिए प्रसिद्ध नजफगढ़ नाला, इस झील को यमुना से जोड़ने में महत्वपूर्ण माध्यम हुआ करता था। यह नाला कभी जयपुर के जीतगढ़ से निकलकर अलवर, कोटपुतली होते हुए हरियाणा के रेवाड़ी और रोहतक से होते हुए नजफगढ़ झील व वहां से दिल्ली की यमुना नदी से मिलने वाली साहिबी नदी के रूप में जानी जाती थी। वर्तमान में नजफगढ़ झील हरियाणा के खेडकी माजरा गाँव में स्थित है और इसका कुल क्षेत्रफल 120.80 हेक्टेयर है। साहिबी नदी के माध्यम से ही नजफगढ़ झील का अतिरिक्त पानी यमुना नदी में मिलता था। नजफगढ़ झील का कैचमेंट एरिया भी करीब 906 वर्ग किलोमीटर में बनता है। जिसके अंतर्गत गुरुग्राम, रोहतक तथा राज्य के दक्षिणी-पश्चिमी जिले भी आते हैं, जहां से इस झील में पानी एकत्रित होता है। बरसात में यह इलाका खूबसूरत और हरा-भरा दिखा करता था। सर्दी का मौसम आते ही इस इलाके में पानी का स्तर कम होता जाता था क्योंकि नजफगढ़ नाले के जरिए पानी यमुना की ओर निकलता जाता था। 

अंग्रेजों के लिए यह झील 'नजफगढ़ लेक-एस्केप' हुआ करता था

अंग्रेजों के समय मे 1856 में नजफगढ़ झील से यमुना तक 51 किमी का एक नाला खोदा गया। इसको साहिबी नाला कहा जाता था। इसे ही 1964 के बाद से नजफगढ़ नाला कहा जाने लगा। 1912 के आसपास जब दिल्ली के ग्रामीण इलाकों में बाढ़ आई तब अंग्रेजों ने नजफगढ़ नाले से पानी का निकास हेतु उसे गहरा किया। अंग्रेज इसे नाला नहीं बल्कि ‘नजफगढ़ लेक एस्केप’ कहते थे। कहा जाता है कि उन वर्षों को छुडा कर जिस वर्ष प्रदेश में बारिश नहीं होती थी तब भी झील से पानी का निकास होने के बावजूद दाहरी, बहलोलपुर, तथा जौनपुर गाँव के दक्षिण में झील का पानी भरा रहता था। 

नजफगढ़ झील का एक बड़ा हिस्सा वहां के किसानों के निजी जमीन में आता है

नजफगढ़ झील का फैलाव, साभार: विकिपीडिया नजफगढ़ झील का फैलाव, साभार: विकिपीडिया

नजफगढ़ झील का एक बड़ा एरिया निजी जमीन में आता है। धीरे-धीरे इस झील के छोटा होने और सिकुड़ जाने के बाद जब बारिश खत्म हो जाती और पानी वहां से निकल जाता तब लोगों ने उस पर खेती करना शुरू कर दिया। फिर जैसे-जैसे दिल्ली का अर्बन एरिया  विकसीत होता गया, खेत की जमीन भी मकानों में बदलती गई। इधर इस विकास के बयार में नई बनने वाली वाली कॉलोनी व कारखानों से निकलने वाला गन्दा पानी नजफगढ़ नाले में मिलने लगा और यह जाकर यमुना में जहर घोलने लगा। यही से नजफगढ़ झील के नाले में बदलने की कहानी शुरू हुई। यह कहने में कोई दो राय नही कि नजफगढ़ झील को नाला दिल्ली और फिर बाद में गुरुग्राम के विकास ने बनाया है।

नजफगढ़ झील का विस्तार कभी एक हजार वर्ग किलोमीटर हुआ करता था जिसका क्षेत्रफल आज के गुरुग्राम सेक्टर 107, 108 से दिल्ली के नए हवाई अड्डे के पास पप्पनकलां तक था। हरियाणा के झज्जर की सीमा से पाँच मील तक नजफगढ़ झील होती थी जो बरसात में और आठ मील की दूरी तय कर बहादुरगढ़ तक फैल जाया करती थी। इस झील में 15 से 30 फुट तक गहरा पानी हुआ करता था। वहीं आज नजफगढ़ व गुरुग्राम में भूजल काफी निचे चला गया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक़ गुरुग्राम में 1990 के बाद बड़े स्तर पर शहरीकरण के कारण न सिर्फ जल-स्रोत को प्रभावित किया बल्कि 2020 तक इस क्षेत्र में वन क्षेत्र को 20 प्रतिशत अनुमानित किया गया था लेकिन आज यह महज 6% पर सिमट गयी है।

यमुना से मिलने वाली प्राकृतिक बेसिनों में नजफगढ़ बेसिन सबसे बड़ा

नजफगढ़ नाला यमुना नदी में गिरने से पहले लगभग 57 किलोमीटर की दूरी तय करता है। जिसके बीच ढासा से लेकर ककरौला तक 28 छोटे नाले और ककरौला के बाद लगभग 74 छोटे-बड़े नाले नजफगढ़ नाले में मिलती हैं। दिल्ली में यमुना नदी से मिलने वाले तीन प्रमुख प्राकृतिक जल निकासी नाले हैं, जिनमें नजफगढ़ नाला सबसे बड़ा है। जो अब बरसाती पानी की निकासी के बजाए पूरे शहर की गंदगी बहाने का जरिया मात्र बन गया है।

वर्ष 2005 में इसे केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने भारत के सबसे अधिक प्रदूषित 12 वेटलैंड में शामिल किया। हरियाणा की पिछली कांग्रेस सरकार ने राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण में एक मुकदमे में दायर अपने हलफनामे में नजफगढ़ झील के होने को ही इंकार करते हुए यह कहा कि यह बारिश के अतिरिक्त जल के जमा होने का निचला हिस्सा मात्र है। हालाँकि इस पर न्यायाधीश ने सरकार से पूछा था कि यदि यह झील नहीं है तो फिर आप झील किसे कहेंगे।

एनजीटी के अगले आदेश तक ये फैसला बीच में ही लटका हुआ है

इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज  के एनजीटी एक्सक्यूशन एप्लीकेशन नंबर 16, 2019 के तहत दिल्ली और हरियाणा के मुख्य सचिव को निर्देश दिया था, जिसमे दोनों से एक्शन टेकेन रिपोर्ट मांगी गयी थी, जिसमे पूछा गया था नजफगढ़ झील को वेटलैंड घोषित करने सम्बन्धी प्रगति क्या है? INTACH की याचिका द्वारा पिछले साल दिल्ली तथा हरियाणा की सरकार को नजफगढ़ झील को वेटलैंड के रूप में अधिसूचित करने का निर्देश जारी किया गया था। हरियाणा सरकार की ओर से संज्ञान लेते हुए पर्यावरण, वन एवं वायु परिवर्तन मंत्रालय को एक ब्रीफ दस्तावेज़ भी भेजा गया था। लेकिन इसी दौरान वेटलैंड रूल्स (कन्जर्वेशन एंड मैनेजमेंट), 2017 के आजाने से अब राज्य को ही वेटलैंड अधिसूचित करना होगा। बहरहाल एनजीटी के अगले आदेश तक ये फैसला बीच में ही लटका हुआ है।

नजफगढ़ झील क्षेत्र को वेटलैंड घोषित करने की लड़ाई लड़ने वाले रमेश मुमुक्षु कहते हैं -

सरकार को चाहिए कि साहिबी नदी के उद्गम से लेकर यमुना तक इस पानी के बड़े स्रोत को पुनार्जिवित करने का बीड़ा ले और इस मिशन पर कार्य आरम्भ करे। इसके लिए अगर नज़फगढ़ झील में पड़ने वाली निजी जमीन के मालिकों को भारी धनराशि भी देनी पड़े तो पानी के लिए अविलंब देना चाहिए। इसके पूरे जलागम क्षेत्र में किसी प्रकार निर्माण कार्य आदि बंद किया जाना चाहिए। गंगा रिवर (rejuvenenation protection and management) ऑर्डर 2016 के अंतर्गत साहिबी नदी को भी गंगा की ट्रिब्यूटरी माना जा सकता है तथा इसे पुनः इसका नाम बदल कर  साहिबी नदी या साहिबी नाला ही रखा जाना चाहिए ताकि नाम बदलने के साथ ही इसको देखने की लोगों की दृष्टि भी बदल सके। 

कभी प्रवासी पक्षियों के लिए विहार रह चुका नजफगढ़ झील आज नाला में तब्दील हो चुका हैकभी प्रवासी पक्षियों के लिए विहार रह चुका नजफगढ़ झील आज नाला में तब्दील हो चुका है

ब्रिटिश राज में इस झील के आस पास अंग्रेज अधिकारी पक्षियों के शिकार के लिए आते थे, क्योंकि तब यह स्थान पक्षी-विहार और शिकार के लिए उपयुक्त माना जाता था। यह झील आज भी प्रवासी पक्षियों के लिए उपयुक्त स्थान है। कभी नज़फगढ़ झील में साइबेरियन क्रेन को भी देखा गया था। दिल्ली में करीब 400 पक्षियाँ पाई जाती है, जिसमे 25% विदेशी पक्षी है। अकेले नज़फगढ़ झील के क्षेत्र में ही 200 के करीब पक्षियों की प्रजाति पाई जाती है। जिनमे ब्लैक ब्रेस्टेड वीवर, लार्ज फ्लॉक ऑफ ब्लैक टेल गोडविट, ब्लैक नेक्ड स्टोर्क, पेंटेड स्ट्रोक, सारस क्रेन एवं ब्लैक फ्रैंकोलिन समेत  कई  पक्षियाँ इस क्षेत्र में पाई जाती है। अगर नज़फगढ़ झील को संरक्षित किया जाए तो पक्षी प्रेमियों के लिए  यह जगह किसी पैराडाइस से कम नही होगा।

 

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