नया ताजा

पसंदीदा आलेख

आगामी कार्यक्रम

खासम-खास

Submitted by HindiWater on Fri, 10/25/2019 - 12:55
उत्तराखण्ड राज्य जल नीति - 2019
जल अत्यन्त महत्वपूर्ण और अपर्याप्त प्राकृतिक संसाधनों में से एक है, जो जीवन, जीवकोपार्जन, कृषि, चिरस्थायी सामाजिक विकास के साथ-साथ पारिस्थितिकीय एवं पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिये अति आवश्यक है, कि नवीकरणीय उपलब्धता सीमित तथा क्षीणता/ह्रास व अपकर्ष के प्रति वेदनीय है।

Content

Submitted by HindiWater on Thu, 11/14/2019 - 16:20
Source:
जैविक खेती की राह आसान नहीं, सरकारी प्रयास बेदम
अभी हाल ही में (23 अक्टूबर को) बिहार के एक गांव ने पूर्ण रूप से जैविक खेती को अपनाने का जश्न मनाया।  जमुई ज़िले का केड़िया गांव पिछले 3-4 सालों से काफ़ी चर्चित रहा है। इसकी एकमात्र वजह यहां के किसानों द्वारा परंपरागत खेती के मॉडल को विकसित करना रहा है। क़रीब 100 परिवारों वाले इस छोटे गांव ने पिछले साल नवंबर में आधिकारिक रूप से 'जैविक गांव' का दर्जा पा लिया। यानी यहां शत प्रतिशत जैविक खेती होती है, हालांकि सच्चाई सिर्फ़ इतना नहीं है।
Submitted by HindiWater on Thu, 11/14/2019 - 12:53
Source:
योजना, नवम्बर 2019
स्वच्छता के लिए व्यवहार में स्थाई बदलाव जरूरी
चीलें मध्य एशिया (रूस, मंगोलिया, कजाकिस्तान, तजाकिस्तान, चीन) से 4500 किमी का सफर तय कर भारत में सर्दी का आनंद लेने आती हैं। लगभग 10 हजार विदेशी चील और भारतीय चील हर साल 4000 टन से अधिक कचरे को साफ करती हैं। इस तरह इनकी यात्रा पर्यावरण की मित्र साबित हो रही है। ये अहम जानकारी अलीगढ़ मुस्लिम विवि (एएमयू) के एक साल पूर्व हुए एक प्रारंभिक शोध के साथ और भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआइआइ) की ओर से जारी शोध में सामने आई है।
Submitted by HindiWater on Thu, 11/14/2019 - 11:18
Source:
योजना, नवम्बर, 2019
गाँव: स्वच्छ भारत अभियान का मूल
आजादी के वक्त से ही भारत में व्यापक स्तर पर स्वच्छता की मौजूदगी का अभाव रहा है। यहाँ तक कि जब पोषण और स्वास्थ्य से जुड़े अन्य सूचकांकों में प्रगति देखने को मिल रही थी, उस वक्त भी स्वच्छता का ग्राफ सुस्त गति से बढ़ रहा था। उस वक्त खुले में शौच के बुरे परिणामों को लेकर व्यापक स्तर पर स्वीकार्यता थीं, लेकिन कई लोगों का मानना था कि सामाजिक परम्पराओं, सामाजिक स्तर पर पदानुक्रम और लैंगिक बंदिशों जैसी ढाँचागत चीजों का असर भी स्वच्छता सम्बन्धी आदतों और स्वच्छता से जुड़े निजी निवेश पर पड़ा था।

प्रयास

Submitted by HindiWater on Wed, 10/30/2019 - 15:38
पानी का पहचाना मोल, सवा सौ साल पुराने बाँध में रोका पानी।
मध्यप्रदेश के देवास जिले में बीते सालों में भीषण जल संकट का सामना कर चुके बागली के लोगों ने अब पानी के मोल को पहचान लिया है। उन्होंने कस्बे के नजदीक बहने वाली कालीसिंध नदी का गर्मियों में गहरीकरण कर गाद हटाई और अब बारिश के बाद 113 साल पुराने बाँध में 22 गेट लगाकर पानी को सहेज लिया है।

नोटिस बोर्ड

Submitted by HindiWater on Mon, 10/14/2019 - 17:02
Source:
मातृसदन में फिर शुरू होगा गंगा की रक्षा के लिए आंदोलन।
स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद उर्फ प्रोफेसर जीडी अग्रवाल के प्रथम बलिदान दिवास को हरिद्वार के जगजीतपुर स्थित मातृ सदन में संकल्प सभा के रूप में आयोजित किया गया। सर्वप्रथम स्वामी सानंद के बलिदान को याद कर सभा में दो मिनट का मौन रखा गया।
Submitted by HindiWater on Fri, 08/30/2019 - 07:32
Source:
योजना, अगस्त 2019
बजट 2019 में ग्रामीण भारत विकास के लिए योजनाएं।
वित्त और कॉरपोरेट मामलों की मंत्री निर्माला सीतारमण ने संसद में वित्त वर्ष 2019-20 के लिए बजट पेश किया। केन्द्रीय बजट 2019-20 में ग्रामीण भारत से सम्बन्धित प्रमुख योजनाएँ इस तरह हैं -
Submitted by HindiWater on Sat, 07/13/2019 - 14:19
Source:
दैनिक भास्कर, 09 जुलाई 2019
भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून।
भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून। बारिश शुरू होते ही जल संकट दूर हो गया है, लेकिन यह राहत कुछ ही महीनों की रहेगी। यह समस्या फिर सामने आएगी, क्योंकि जितना पानी धरती में जाता है, उससे ज्यादा हम बाहर निकाल लेतेे हैं। भूजल दोहन का यह प्रतिशत 137 है। यानी, 100 लीटर पानी अंदर जाता है, तो हम 137 लीटर पानी बाहर निकालते हैं। यह प्रदेश के 56 मध्यप्रदेश के 56 फीसद से दोगुना से भी ज्यादा है।

Latest

खासम-खास

उत्तराखण्ड राज्य जल नीति - 2019

Submitted by HindiWater on Fri, 10/25/2019 - 12:55
Source
उत्तराखण्ड सरकार
जल अत्यन्त महत्वपूर्ण और अपर्याप्त प्राकृतिक संसाधनों में से एक है, जो जीवन, जीवकोपार्जन, कृषि, चिरस्थायी सामाजिक विकास के साथ-साथ पारिस्थितिकीय एवं पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिये अति आवश्यक है, कि नवीकरणीय उपलब्धता सीमित तथा क्षीणता/ह्रास व अपकर्ष के प्रति वेदनीय है।

Content

जैविक खेती की राह आसान नहीं, सरकारी प्रयास बेदम

Submitted by HindiWater on Thu, 11/14/2019 - 16:20
अभी हाल ही में (23 अक्टूबर को) बिहार के एक गांव ने पूर्ण रूप से जैविक खेती को अपनाने का जश्न मनाया।  जमुई ज़िले का केड़िया गांव पिछले 3-4 सालों से काफ़ी चर्चित रहा है। इसकी एकमात्र वजह यहां के किसानों द्वारा परंपरागत खेती के मॉडल को विकसित करना रहा है। क़रीब 100 परिवारों वाले इस छोटे गांव ने पिछले साल नवंबर में आधिकारिक रूप से 'जैविक गांव' का दर्जा पा लिया। यानी यहां शत प्रतिशत जैविक खेती होती है, हालांकि सच्चाई सिर्फ़ इतना नहीं है।

स्वच्छता के लिए व्यवहार में स्थाई बदलाव जरूरी

Submitted by HindiWater on Thu, 11/14/2019 - 12:53
Source
योजना, नवम्बर 2019
चीलें मध्य एशिया (रूस, मंगोलिया, कजाकिस्तान, तजाकिस्तान, चीन) से 4500 किमी का सफर तय कर भारत में सर्दी का आनंद लेने आती हैं। लगभग 10 हजार विदेशी चील और भारतीय चील हर साल 4000 टन से अधिक कचरे को साफ करती हैं। इस तरह इनकी यात्रा पर्यावरण की मित्र साबित हो रही है। ये अहम जानकारी अलीगढ़ मुस्लिम विवि (एएमयू) के एक साल पूर्व हुए एक प्रारंभिक शोध के साथ और भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआइआइ) की ओर से जारी शोध में सामने आई है।

गाँव: स्वच्छ भारत अभियान का मूल

Submitted by HindiWater on Thu, 11/14/2019 - 11:18
Source
योजना, नवम्बर, 2019
आजादी के वक्त से ही भारत में व्यापक स्तर पर स्वच्छता की मौजूदगी का अभाव रहा है। यहाँ तक कि जब पोषण और स्वास्थ्य से जुड़े अन्य सूचकांकों में प्रगति देखने को मिल रही थी, उस वक्त भी स्वच्छता का ग्राफ सुस्त गति से बढ़ रहा था। उस वक्त खुले में शौच के बुरे परिणामों को लेकर व्यापक स्तर पर स्वीकार्यता थीं, लेकिन कई लोगों का मानना था कि सामाजिक परम्पराओं, सामाजिक स्तर पर पदानुक्रम और लैंगिक बंदिशों जैसी ढाँचागत चीजों का असर भी स्वच्छता सम्बन्धी आदतों और स्वच्छता से जुड़े निजी निवेश पर पड़ा था।

प्रयास

पानी का पहचाना मोल, सवा सौ साल पुराने रणजीत बांध में रोका पानी

Submitted by HindiWater on Wed, 10/30/2019 - 15:38
Author
मनीष वैद्य
मध्यप्रदेश के देवास जिले में बीते सालों में भीषण जल संकट का सामना कर चुके बागली के लोगों ने अब पानी के मोल को पहचान लिया है। उन्होंने कस्बे के नजदीक बहने वाली कालीसिंध नदी का गर्मियों में गहरीकरण कर गाद हटाई और अब बारिश के बाद 113 साल पुराने बाँध में 22 गेट लगाकर पानी को सहेज लिया है।

नोटिस बोर्ड

मातृसदन में फिर शुरू होगा गंगा की रक्षा के लिए आंदोलन

Submitted by HindiWater on Mon, 10/14/2019 - 17:02
स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद उर्फ प्रोफेसर जीडी अग्रवाल के प्रथम बलिदान दिवास को हरिद्वार के जगजीतपुर स्थित मातृ सदन में संकल्प सभा के रूप में आयोजित किया गया। सर्वप्रथम स्वामी सानंद के बलिदान को याद कर सभा में दो मिनट का मौन रखा गया।

बजट 2019 में ग्रामीण भारत के विकास की योजनाएं

Submitted by HindiWater on Fri, 08/30/2019 - 07:32
Source
योजना, अगस्त 2019
वित्त और कॉरपोरेट मामलों की मंत्री निर्माला सीतारमण ने संसद में वित्त वर्ष 2019-20 के लिए बजट पेश किया। केन्द्रीय बजट 2019-20 में ग्रामीण भारत से सम्बन्धित प्रमुख योजनाएँ इस तरह हैं -

भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून

Submitted by HindiWater on Sat, 07/13/2019 - 14:19
Source
दैनिक भास्कर, 09 जुलाई 2019
भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून।भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून। बारिश शुरू होते ही जल संकट दूर हो गया है, लेकिन यह राहत कुछ ही महीनों की रहेगी। यह समस्या फिर सामने आएगी, क्योंकि जितना पानी धरती में जाता है, उससे ज्यादा हम बाहर निकाल लेतेे हैं। भूजल दोहन का यह प्रतिशत 137 है। यानी, 100 लीटर पानी अंदर जाता है, तो हम 137 लीटर पानी बाहर निकालते हैं। यह प्रदेश के 56 मध्यप्रदेश के 56 फीसद से दोगुना से भी ज्यादा है।

Upcoming Event

Popular Articles