पर्यावरण और फौज

Submitted by Hindi on Tue, 09/28/2010 - 09:26
Source
नवभारत टाइम्स, 27 सितंबर 2010
राजनयिकों के बयानों में दूरगामी महत्व की कोई चीज खोजना अक्सर मृग मरीचिका साबित होता है, लेकिन अमेरिका में पाकिस्तान के राजदूत हुसैन हक्कानी संयोगवश इस बार कुछ ऐसा कह गए हैं, जिसे कूटनीतिक मंचों पर कहने से लोग-बाग कतराते रहे हैं। हक्कानी ने अमेरिकी संसद को संबोधित करते हुए कहा है कि सियाचिन में सैनिकों की मौजूदगी उनके देश में आई विनाशकारी बाढ़ की सबसे बड़ी वजह है। वे वहां बाढ़ राहत राशि बढ़ाने की गुजारिश करने गए थे।

दुनिया का ऋतु चक्र बिगाड़ने में ग्लोबल वॉर्मिंग और जंगलों की कटाई की भूमिका तो है, लेकिन भारतीय उपमहाद्वीप में फौजी गतिविधियां भी इसकी एक बड़ी वजह बन रही हैं। बात सियाचिन की हो तो तिब्बत के पठार के पश्चिम और कराकोरम पर्वत श्रृंखला के दक्षिण में पड़ने वाले विशाल क्षेत्र में सबसे ज्यादा सक्रियता पाकिस्तानी फौज की ही रही है, और उसके बुलावे पर अब चीनी फौज ने भी यहां अपना डेरा जमा लिया है। सियाचिन ग्लेशियर के पूरब में भारतीय फौजों का ठिकाना है, जबकि उसके पश्चिम और दक्षिण में, यानी गिलगिट, हुंजा, बाल्टिस्तान और खुंजरेब दर्रे में चीनी और पाकिस्तानी फौजों की चौकियां खड़ी हैं। चीन का विवादग्रस्त प्रांत शिन्च्यांग इससे काफी दूर, कराकोरम पहाड़ों के उत्तर और कुनलुन पहाड़ों के पूरब में है। पाकिस्तान के कब्जे वाले जिन इलाकों में फिलहाल उसकी फौजें लगी हैं, वहां उनके होने का कोई औचित्य नहीं है। लेकिन अपना फौजी दायरा अरब सागर तक फैलाने और ईरान से गैस पाइपलाइन लाने के लिए चीन ने एक गुपचुप सौदे की शक्ल में पाकिस्तान की भारत-ग्रंथि का पूरा फायदा उठाया है।

भूगोल में कराकोरम, तिब्बत और हिंदूकुश के बीच का त्रिकोण लगभग निर्जन क्षेत्र के रूप में ही दर्ज किया जाता रहा है। प्रकृति ने भी कुछ छिटपुट अपवादों को छोड़ कर यहां पेड़ों और फसलों के लिए कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी है। ऐसे इलाके में लाखों की संख्या में फौजियों की मौजूदगी, उनके भारी वाहनों का रास्ता बनाने के लिए पहाड़ों की तोड़फोड़, नियमित फायरिंग और बेहद कमजोर पर्यावरण से छेड़छाड़ करते हुए इसे एक ट्रांजिट जोन बनाने की कोशिश कहीं न कहीं तो असर डालेगी ही। यह संयोग ही है कि इसका सबसे ज्यादा नुकसान पाकिस्तान को उठाना पड़ रहा है, क्योंकि बारिश या बर्फबारी से इस क्षेत्र में जमा होने वाला सारा पानी अंतत: वहीं जाता है।

हक्कानी ने अपने भाषण में पाकिस्तानी पर्यावरणविदों की चेतावनी का उल्लेख किया है, लेकिन अमेरिकी खाते में नंबर कम हो जाने के डर से उनका देश आज भी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर यह मानने को तैयार नहीं है कि चीन से सांठगांठ करके उसने इस इलाके को क्या से क्या बना डाला है। पाकिस्तान में आई बाढ़ एक दुर्भाग्यपूर्ण प्राकृतिक आपदा है, लेकिन इससे अगर उसे अपनी गलती का एहसास हो जाए तो भारत भी सियाचिन से अपनी फौजें हटाने के प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर सकता है।

Disqus Comment

More From Author

Related Articles (Topic wise)

Related Articles (District wise)

About the author

नया ताजा