अंटार्कटिक महासागर

Submitted by Hindi on Tue, 10/26/2010 - 08:49
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अंटार्कटिक महासागर अंटार्कटिक महाद्वीप के चारों ओर फैला है। कतिपय भूगोलवेत्ताओं के अनुसार यह स्वतंत्र महासागर न होकर अंध (अटलांटिक) महासागर, प्रशांत महासागर तथा हिंद महासागर का दक्षिणी विस्तार मात्र है।

अंटार्कटिक महासागर की गहराई हार्न अंतरीप के पास ६०० मील है तो अफ्रीका के दक्षिण स्थित अमुलहस अंतरीप के समीप २,४०० मील।

अंटार्कटिक महासागर में अनेक प्लावी हिमशैल (आइसबर्ग) तैरते रहते हैं। कुछ हिमशैल तैरते-तैरते समीपस्थ अन्य महासागरों में भी चले जाते हैं। समुद्री खोजकर्ताओं ने इस सागर में एकाधिक ऐसे प्लावी हिमशैल भी देखे हैं जिनका क्षेत्रफल एक सौ वर्गमील से अधिक था। इनमें से कुछ हिमशैलों की मोटाई एक हजार फीट से भी अधिक थी। अंटार्कटिक महासागर के जल का, सतह पर, औसत तापमान २९.८ फारनहाइट रहता है और तल पर यह तापमान ३२ से ३५ फारनहाइट तक होता है।

दक्षिण अमरीका तक पहुँचते-पहुँचते इस सागर की मुख्य धारा दो भागों में विभक्त हो जाती है। एक धारा अमरीका महाद्वीप के पूर्वी तट के साथ-साथ उत्तर की ओर चली जाती है तो दूसरी पूरब की ओर हार्न अंतरीप से आगे बढ़ जाती है।

इस क्षेत्र में छोटे-छोटे पौधे, पक्षी तथा अन्य जीव-जंतु पाए जाते हैं। ह्वेल मछली के शिकार के लिए भी यह महासागर महत्वपूर्ण माना जाता है और यहाँ से ह्वेल का काफी व्यापार होता है। (कै. चं. श.)

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अंटार्कटिक महासागर