तेरा पानी, मेरा पानी!

Submitted by Hindi on Wed, 11/10/2010 - 10:07
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Source
दैनिक ट्रिब्यून, मार्च 2010

सागर में गागर

खबर है कि भविष्य में पानी पेट्रोल के भाव बिकेगा। आज भी पानी की बोतल दस से बीस रुपए लिटर के बीच बिक ही रही है। बस अड्डों और स्टेशनों पर एकाध नल को छोड़कर बाकी खराब रहते हैं या खराब कर दिए जाते हैं। इधर गाड़ी या बस आती है, उधर प्यासों का लम्बी क्यू लग जाता है। लम्बा क्यू और गाड़ी छूटने के भय से लोगों को मजबूरन बच्चों की प्यास बुझाने के लिए हॉकर से पानी की बोतल खरीदनी ही पड़ती है।

फिल्म ‘जागते रहो’ और ‘गाइड’ देखकर पता चलता है कि मनुष्य की प्यास बड़ी गहरी है। आत्मा की प्यास परमात्मा को पाने की इच्छुक होती है। चाहत की प्यास विपरीत लिंगी से संसर्ग के बिना अधूरी है। आदमी आत्मा और वासना की प्यास पर तो कुछ हद तक काबू पा सकता है, गले के सूखने पर उसका वश नहीं चलता। केवल पानी ही उसका गला तर कर सकता है। ठंडा पेय बेचने वाले लाख विज्ञापन करें, बिन पानी के प्यास नहीं बुझती।आज़ादी से पहले स्टेशनों पर हिन्दू पानी और मुस्लिम पानी को पिलाने वाले आम मिल जाते थे। आजादी के बाद दबंग और दलित पानी का सिलसिला जारी है। गांवों में आज भी सवर्णों और दलितों के न्यारे-न्यारे जल-स्रोत होते हैं। पानी की हिन्दुस्तानी और पाकिस्तानी किस्में भी निकल आयी हैं। पाकिस्तानी पेपर ‘दी नेशन ‘ की माने तो अगला युद्ध कश्मीर को लेकर छिड़े ने छिड़े, पानी को लेकर छिड़ सकता है।

मैं नस्त्रादमस और कीरो से भी ज्यादा सटीक भविष्यवक्ता हूं। एडगर कैसी से ज्यादा दूर की देख सकता हूं। मेरी एक भविष्यवाणी की बानगी देखिए। इन गर्मियों में अक्खा इंडिया में पानी को लेकर हाहाकार मचने वाला है। जगह-जगह मटकाफोड़ आन्दोलन होंगे। स्थानीय प्रशासन और सरकारों को पानी पी-पीकर कोसा जाएगा। उनके मुर्दाबाद के नारे आम होंगे। कई स्थानों पर पानी की एक बाल्टी के लिए पड़ोसी एक-दूसरे के खून की नदियां बहा देंगे। बिजली-पानी को लेकर सियासत गर्मायी रहेगी। इस दौरान सरकारी टूटियों के चोरी होने या पाइप लाइनों के फटने से लाखों लिटर पेयजल नालियों में व्यर्थ बह जाएगा। जून के उत्तरार्ध में रेडियो पर ‘अल्लाह मेघ दे पानी दे’ किस्म के नगमें नित्य बजाए जाएंगे। लोग दिन में कई-कई बार नीले आकाश को आसभरी निगाहों से निहारा करेंगे।

कुछ लोगों को यह शिकायत है कि प्रशासन गांवों में तो क्या महानगरों में भी स्वच्छ जल सप्लाई करने में असफल रहा है। अखबार वाले बंदे का जायका अलग से खराब कर देते हैं। बंदा जिस पानी को हफ्ते से पीकर सेहत बना रहा होता है, उसके बारे में खबर लगती है कि वाटर टैंक से हफ्तेभर से मरी पड़ी भैंस की सड़ी-गली लाश निकाली गयी। समझदार लोग इस तरह के ‘जल ही जीवन है’ के झांसे में नहीं आते। सप्लाई की टोंटी पर स्वयं का पर्सनल प्योरीफायर लगवाते हैं। यह भद्रजन विभिन्न कंपनियों के ‘वाटर प्योरीफायर’ लगाकर स्वयं को पीलिया और डॉयरिया से बचा रहे हैं। नासमझ कमेटी का दूषित जल पीकर डाक्टरों के चक्कर लगा रहे हैं।बीस साल पहले मैंने मकान बनाने हेतु एक प्लाट का सौदा तय किया था। रजिस्ट्री होने तक रोज रात को ख्वाब देखता था कि मेरे अंगने में तेल का कुआं निकल आया है। मैं शेख की पौशाक पहने तब की बॉलीबुडी अभिनेत्रियों और आज की राजनेत्रियों के संग डिस्को डांडिया खेल रहा हूं। अगले सीन में मैं लेटा हुआ हूं और वो मेरे मुंह में अंगूर ठूंस रही हैं। बैक ग्राउंड में कोई अरबी धुन बज रही है। प्लाट पर मालिकाना हक होते ही मैंने जमीन की जांच करवायी। जमीन थोथी निकली। सपनें तिरोहित हो गए।

ईश्वर जो करता है, अच्छा ही करता है। आने वाले दिनों में पानी की तिजारत में बड़ी बरकत होने वाली है। मल्टी-नेशनल लीज पर नदियों/नहरों को कब्जा लेंगी। धन्ना सेठों का तालाबों और झरनों पर मालिकाना हक हो जाएगा। मुफ्त में पानी पिलाने वाले छबील दासों को कौन पूछेगा? ऐसे में सोचता हूं अपने अंगने में एक कुआं खुदवा ही डालूं। उम्दा गृहस्थ वही माना जाता है जो अगली सात पीढिय़ों के लिए माल छोड़ जाए। मेरे पड़पोते-पड़पोतियां पानी बेचकर डबल रोटियां खा ही लेंगे। महल बना ही लेंगे।

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