हिमाचल प्रदेश में मछली की बहुफसली खेती - खेती के तरीकों का पैकेज

Submitted by Hindi on Sat, 12/11/2010 - 12:07
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इंडिया डेवलपमेंट गेटवे
कांगड़ा जिले में पालमपुर घाटी की तरह कृषि-जलवायु वातावरण के लिए एक मछली की खेती के लिए पॉलीकल्चर मॉडल विकसित किया गया है। इस मॉडल में, विदेशी क्रॉप की 3 प्रजातियां (ग्रास क्रॉप, सिल्वर क्रॉप, मिरर क्रॉप) की किसानों को सिफारिश की गई है, जो गहन छानबीन के बाद उनके विकास के प्रदर्शन अनुकूलन और अन्य पारिस्थितिकीय- जैविक मापदंडों पर आधारित है।

मछली की पैदावार के लिए पानी की बारहमासी उपलब्धता आवश्यक है। इस नज़रिए से पहाड़ी क्षेत्र में मछली की पैदावार जलग्रहण क्षेत्रों में, नदियों की धाराओं और नदियों के किनारों या ऐसी किसी भी जगह पर की जा सकती है जहां पानी की आपूर्ति या तो सिंचाई चैनल या सिंचाई पम्पिंग योजना द्वारा सुनिश्चित हो।

स्थल का चयन


मछली की बढ़त के लिए एक ऐसे स्थल का चयन किया जाना चाहिए जहां पानी झरने, नदी, नहर की तरह एक नियमित स्रोत के माध्यम से उपलब्ध हो या इस उद्देश्य के लिए स्थिर जल वाली भूमि भी विकसित की जा सकती है। मिट्टी पूरी तरह रेतीली नहीं होनी चाहिए, लेकिन वह रेत और मिट्टी का मिश्रण होना चाहिए ताकि उसमें पानी को रोकने की क्षमता हो। क्षारीय मिट्टी मछली के अच्छे विकास के लिए हमेशा बेहतर होती है। तालाब के निर्माण से पहले, मिट्टी के भौतिक-रासायनिक गुणों का परीक्षण किया जाना चाहिए।

तालाबों का निर्माण


तालाब का आकार और बनावट भूमि की उपलब्धाता व उत्पादन के प्रकार पर निर्भर करते हैं। एक आर्थिक रूप से व्यावहारिक परियोजना के लिए तालाब का न्यूनतम आकार 300 वर्ग मीटर गहरा और 1।5 मीटर से कम नहीं होना चाहिए। एक ठेठ तालाब के पानी की प्रविष्टि तार जाल के साथ अवांछित जंतुओं की प्रविष्टि रोकने के लिए होनी चाहिए और अतिरिक्त पानी के अतिप्रवाह के निकास से इकट्ठा पैदावार को रोकने के लिए भी तार जाल लगाना चाहिए। पैदावार को इकट्ठा करने तथा तालाब को समय-समय पर सुखाने के लिए तालाब के तल में एक ड्रेन पाइप होनी चाहिए। तालाब की दीवार या मेंढ़ अच्छी तरह दबाकर मज़बूत, ढलानदार और घास या जड़ी बूटियों के साथ होना चाहिए ताकि उन्हें कटाव से बचाया जा सके। जलग्रहण क्षेत्र को भी एक मिट्टी का बांध बनाकर तालाब में परिवर्तित किया जा सकता है।

तालाब में फसल डालने की तैयारी


(i) चूना डालना
हानिकारक कीड़े, सूक्ष्म जीवों के उन्मूलन, मिट्टी को क्षारीय बनाने और बढती मछलियों को कैल्शियम प्रदान करने के लिए तालाब में चूना डालना ज़रूरी है। यदि मिट्टी अम्लीय नहीं हो तो चूना प्रति 25 ग्राम प्रति वर्ग मीटर की दर से प्रयोग किया जा सकता है और यदि मिट्टी अम्लीय है तो चूने के मात्रा 50% से बढा दें। पूरे टैंक में चूना फैलाने के बाद उसे 4 दिनों से एक सप्ताह के लिए सूखा छोड देना चाहिए।

(ii) खाद:
खाद प्लेंक्टन बायोमास की वृद्धि के उद्देश्य से डाली जाती है, जो मछली के प्राकृतिक भोजन का कार्य करती है। खाद की दर मिट्टी की उर्वरता स्थिति पर निर्भर करती है। मध्य पहाड़ी क्षेत्र में गोबर जैसी जैविक खाद का 20 टन/हेक्टेीयर अर्थात 2 किलो प्रति वर्ग मीटर क्षेत्र प्रयोग किया जाता है। प्रारंभिक खाद के रूप में कुल आवश्यकता का 50% और इसके बाद बाकी 50% समान मासिक किश्तों में प्रयोग किया जाना चाहिए है। खाद भरने के बाद टैंक में पानी डालकर उसे 12-15 दिनों के लिए छोड़ दें।

(iii) जलीय खरपतवार और पुराने तत्वों पर नियंत्रण
काई के गुच्छों में अचानक वृद्धि अधिक खाद या जैविक प्रदूषकों की वजह से होता है। ये गुच्छे कार्बन डाइऑक्साइड का काफी मात्रा में उत्सर्जन करते हैं, जो मृत्यु का कारण बन सकती है। अगर पानी की सतह पर लाल मैल दिखाई देता है, तो यह काई के गुच्छे शुरु होने का संकेत है। खाद और कृत्रिम भोजन तुरंत रोका जाना चाहिए और तालाब में ताजा पानी दें। अगर काई के गुच्छे बहुतायत में हैं तो तालाब के सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में चुनिन्दा रूप से 3% कॉपर सल्फेट या 1 ग्राम/मीटर पानी के क्षेत्र की दर से सुपरफॉस्फेट डालें। अच्छी पाली जाने वाली मछलियों को स्थान और भोजन की प्रतिस्पर्धा से बचाने के लिए हिंसक और पुरानी मछलियों का उन्मूलन आवश्यक है। इन मछलियों का जाल में फंसाकर या पानी ड्रेन कर या तालाब को विषाक्त बनाकर नाश किया जा सकता है। आम तौर पर इस उद्देश्य के लिए इस्तेमाल विष है महुआ ऑयलकेक (200 पीपीएम), 1% टी सीडकेक या तारपीन का तेल 250 लिटर/ हेक्टेयर की दर से। अन्य रसायन जैसे एल्ड्रिन (0।2 पीपीएम) और ऎंड्रिन (0।01 पीपीएम) भी इस्तेमाल किए जा सकते हैं लेकिन इनसे परहेज किया जाना चाहिए। इन रसायनों के उपयोग के मामले में, मछली के बीज (फ्राय/फिंगरलिंग्स) का स्टॉकिंग के उन्मूलन कम से कम 10 से 25 दिनों के लिए टाला जा सकता है ताकि रसायनों/अवशेषों को समाप्त किया जा सके।

स्टॉकिंग


अधिकतम मत्स्य उत्पादन में संगत रूप से, तेजी से बढ़ने वाली प्रजातियों के विवेकपूर्ण चयन बहुत महत्व है। तीन प्रजातियों यथा मिरर कार्प, ग्रास कार्प और सिल्वर कार्प का संयोजन प्रजाति चयन की आवश्यकताओं को पूरा करता है और यह मॉडल राज्य के उप शीतोष्ण क्षेत्र के लिए आदर्श सिद्ध हुआ है। इनमें से, मिरर कार्प एक तल फीडर है, ग्रास कार्प एक वृहद- वनस्पति फीडर है और सिल्वर कार्प है सतह फीडर है।

प्रजातियों का अनुपात


प्रजातियों के अनुपात का चयन आमतौर पर स्थानीय परिस्थितियों, बीज की उपलब्धता, तालाब में पोषक तत्वों की स्थिति आदि पर निर्भर करता है। जोन द्वितीय के लिए सिफारिशी मॉडल में प्रजातियों का अनुपात - 2 मिरर कार्प: 2 ग्रास कार्प: 1 सिल्वर कार्प है।

स्टॉकिंग का विवरण


स्टॉकिंग की दर आमतौर पर तालाब की प्रजनन क्षमता और जैव उत्पादकता बढाने के लिए खाद देने, कृत्रिम भोजन, विकास की निगरानी और मछली के अच्छे स्वास्थ्य को बनाए रखने पर निर्भर करती है। कृत्रिम भोजन के साथ इस क्षेत्र के लिए स्टॉकिंग की सिफारिशी दर 15000 फिंगरलिंग्स प्रति हेक्टेयर है। बेहतर अस्तित्व और उच्च उत्पादन के लिए तालाबों को 40-60 मिमी आकार के फिंगरलिंग्स से स्टॉक करना अच्छा है। तालाब को खाद देने के 15 दिनों के बाद सुबह-सुबह या शाम को स्टॉक करना अच्छा है। स्टॉकिंग के लिए बादल भरे दिन या दिन के गर्म समय से परहेज करना चाहिए।

पूरक भोजन


The level of natural food organisms in the fish culture ponds canखाद देने के बाद भी मछली पालन के तालाबों में प्राकृतिक भोजन के जीवों का स्तर अपेक्षित मात्रा में नहीं रखा जा सकता है। इसलिए, मछली विकास की उच्च दर के लिए प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और वसा से भरपूर पूरक आहार आवश्यक है। कृत्रिम आहार के लिए आम तौर पर मूंगफली के तेल और गेहूं के चोकर का 1:1 अनुपात में केक इस्तेमाल किया जाता है। जहां तक हो सके, फ़ीड पपड़ियों या कटोरियों के आकार में कुल बायोमास के २% की दर से देना चाहिए और उन्हें हाथ से तालाबों में विभिन्न स्थानों पर डालना चाहिए ताकि सभी मछलियों को समान विकास के लिए फ़ीड समान मात्रा में मिले।

ग्रास कार्प को कटी हुई रसीला घास या त्यागी गयी पत्तियों के साथ खिलाना चाहिए। मछली पालन के लिए रसोई का अपशिष्ट भी अनुपूरक फ़ीड के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।

एक व्यावहारिक फ़ीड सूत्र जो मछली फार्म, सीएसके हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय में व्यवहार में है, नीचे दिया गया है:

10 किलो फ़ीड की तैयारी के लिए:

सामग्री

(%)

मात्रा

मछली का खाना

10

1.0 किलो

गेहूं की भूसी

50

5.0 किलो

मूंगफली का केक

38

3.8 किलो

डीसीपी

2

0.2 किलो

सप्लेविट-एम

0.5

0.05 किलो



प्रति इकाई क्षेत्र में बेहतर पैदावार के लिए 2-3% की दर से पूरक भोजन ज़रूरी है चूंकि इस क्षेत्र में पानी के प्राकृतिक उत्पादकता बहुत कम है।

विकास की निगरानी


पोषक तत्वों के अलावा अन्य अ-जैव कारक जैसे तापमान, लवणता और रोशनी का काल मछली की वृद्धि प्रभावित करते हैं। स्टोकिंग के 2 महीने के बाद, स्टॉक का 20% निकालना चाहिए ताकि प्रति माह वृद्धि का मूल्यांकन करने के साथ ही दैनिक आपूर्ति के लिए फ़ीड की सही मात्रा की गणना की जा सके। बाद में, इस अभ्यास को हर महीने तब तक दोहराया जाना चाहिए जब तक की मछली कृत्रिम फ़ीड रोक नहीं दे। मछली अनुसंधान फार्म एचपीकेवी, पालमपुर में उत्पन्न अनुसंधान डेटा के आधार पर यह देखा गया है कि मौजूदा जलवायु परिस्थितियों के अंतर्गत मछलियाँ उत्पादक 8 महीनों के दौरान (यानी मार्च के मध्य से नवंबर के मध्य तक) वृद्धि हासिल करती हैं। सर्दियों के चार महीनों (नवंबर के मध्य से मार्च के मध्य) के दौरान कोई विकास नहीं होता है। इस तरह अनुपूरक फ़ीड है आठ उत्पादक महीनों के दौरान दी जानी चाहिए। उपर्युक्त मॉडल के उच्च उत्पादन क्षमता के रूप में परिणाम 5 टन प्रति हेक्टेयर प्रति वर्ष के रूप में पाए गए हैं।

पैदावार निकालना


पैदावार सुविधाजनक रूप से ड्रैग नेटिंग या कास्ट नेटिंग (छोटे तालाबों के लिए उपयोगी) या तालाब का पानी खाली करके निकाली जा सकती है। पैदावार निकालने के एक दिन पहले पूरक फीडिंग बन्द कर दी जाती है। बाजार की मांग के अनुसार मछलियां सुबह ठंडे वातावरण में निकाली जाती हैं। इस क्षेत्र के लिए, मछली निकालने का सबसे अच्छा समय दिसंबर और जनवरी है जो मछली पालन के लिए गैर उत्पादन महीने हैं। स्टॉकिंग का बेहतर समय मार्च का मध्य या अप्रैल का पहला सप्ताह है। इस तरह सर्दियों के चार गैर-उत्पादक महीनों का उपयोग नवीकरण, गाद निकालने और तालाबों की तैयारी के लिए किया जा सकता है।

मछली पालन के लिए कैलेंडर


जनवरी:
(i) टैंकों का निर्माण

(ii) तालाबों/ टैंकों का नवीकर ण जिसमें पुराने टैंकों की गाद निकालना और मरम्मत शामिल है।

फ़रवरी: तालाबों की तैयारी

(i) चूना डालना: सामान्य दर पानी के क्षेत्र के अनुसार 250 किलोग्राम/ हेक्टेयर या 25 ग्राम /वर्ग मीटर।

(ii) खाद डालना: चूना डालने के एक सप्ताह के बाद 20 टन प्रति हेक्टेयर की दर से खाद डालना चाहिए। आरम्भ में कुल मात्रा का आधा और बाद में आधा बराबर मासिक किस्तों में। उदाहरण के लिए 1 हेक्टेयर क्षेत्र (10000 वर्ग मीटर) के लिए खाद की कुल आवश्यकता 2000 किलो है यानी 1000 किलो शुरुआत में डालना चाहिए और बाकी बाद में मार्च से अक्तूबर तक 145 किलो प्रति माह की दर से।

(iii) खाद डालने के बाद तालब को पानी से भर दें और 12-15 दिनों के लिए छोड़ दें।

(iv) पुराने तालाबों के मामले में अवांछित मछली, पुराना मछली और हानिकारक कीटों को या तो स्वयं निकालकर या पानी को विषाक्तता बनाकर नष्ट करना चाहिए।

मार्च से नवंबर:

तालाबों में स्टॉकिंग करना


(I) स्टॉकिंग खाद डालने के 15 दिनों के बाद की जानी चाहिए जब पानी का रंग हरा हो, जो कि पानी में प्राकृतिक भोजन की उपस्थिति का संकेत है। स्टॉकिंग के लिए बादल वाले दिन या दिन का गर्म समय टाल देना चाहिए।

(Ii) स्टॉक की जाने वाली प्रजातियां हैं कॉमन कार्प, ग्रास कार्प और सिल्वर कार्प।

(Iii) प्रजातियों का अनुपात - कॉमन कार्प 3: ग्रास कार्प 2 : सिल्वर कार्प 1।

(Iv) स्टॉकिंग की दर – 15000 फिंगरलिंग्स/हेक्टेयर। उदाहरण के लिए 0.1 हेक्टेयर टैंक को 1500 फिंगरलिंग्स से 750 कॉमन कार्प : 500 ग्रास कार्प : 250 सिल्वर कार्प के अनुपात में स्टॉक किया जाना चाहिए।

(V) स्टॉकिंग 15 मार्च तक कर देनी चाहिए।

फीडिंग:


पहले महीने के दौरान अर्थात 15 अप्रैल तक, मछली के कुल बीज स्टॉक बायोमास के 3% की दर से, स्टॉकिंग के दो दिन बाद फीडिंग शुरु की जानी चाहिए। बाद में फीडिंग की दर 2% तक कम की जानी चाहिए। ग्रास कार्प को खिलाने के लिए कटी हुई रसीली घास की आपूर्ति भी की जानी चाहिए। फीडिंग रोज़ाना तीन बार की जानी चाहिए।

दिसम्बर:

पैदावार निकालना


टेबल मछली की पैदावार निकालने का काम मांग के अनुसार 15 नवम्बर से शुरु किया जा सकता है। एक समय में पूरी पैदावार निकालने की कोई जरूरत नहीं है, अच्छी कीमत पाने के लिए इसे सर्दी के तीन महीनों तक मांग के अनुसार बढाया जा सकता है।

Comments

Submitted by manoj kumar ch… (not verified) on Fri, 03/20/2015 - 19:16

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सर हमें मछली की पैदवार की जानकारी चाहिए। सर मैं बहुत दिनों से इस व्यापार को करना चाहता हूं, मगर मेरे पास जानकारी न होने के कारण मैं इस व्यापार को करने में असमर्थ साबित हो रहा हूं। सर आपसे अनुरोध है कि आप हमें इस व्यापार की जानकारी देने की कृपा करें mob.8808403998

Submitted by Sandeep verma (not verified) on Sun, 04/02/2017 - 12:54

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I want to know about fish farming time feeding seed suplayer and all nessasari information about fish farming

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