मनरेगा का हिसाब-किताब

Submitted by Hindi on Mon, 12/20/2010 - 09:57
Source
चौथी दुनिया ब्यूरो, 17 दिसंबर 2010


नरेगा अब मनरेगा ज़रूर हो गई, लेकिन भ्रष्टाचार अभी भी ख़त्म नहीं हुआ। इस योजना के तहत देश के करोड़ों लोगों को रोज़गार दिया जा रहा है। गांव के ग़रीबों-मजदूरों के लिए यह योजना एक तरह संजीवनी का काम कर रही है। सरकार हर साल लगभग 40 हज़ार करोड़ रुपये ख़र्च कर रही है, लेकिन देश के कमोबेश सभी हिस्सों से यह ख़बर आती रहती है कि कहीं फर्जी मस्टररोल बना दिया गया तो कहीं मृत आदमी के नाम पर सरपंच-ठेकेदारों ने पैसा उठा लिया। साल में 100 दिनों की जगह कभी-कभी स़िर्फ 70-80 दिन ही काम दिया जाता है। काम के बदले पूरा पैसा भी नहीं दिया जाता। ज़ाहिर है, यह पैसा उन ग़रीबों के हिस्से का होता है, जिनके लिए यह योजना बनाई गई है। मनरेगा में भ्रष्टाचार का सोशल ऑडिट कराने की योजना का भी पंचायतों एवं ठेकेदारों द्वारा ज़बरदस्त विरोध किया जाता है। कभी-कभी तो मामला मारपीट तक पहुंच जाता है, हत्या तक हो जाती है। अब सवाल यह है कि इस भ्रष्टाचार का मुक़ाबला कैसे किया जाए? इसका जवाब बहुत आसान है। इस समस्या से लड़ने का हथियार भी बहुत कारगर है, सूचना का अधिकार। आपको बस अपने इस अधिकार का इस्तेमाल करना है। इस बार का आवेदन मनरेगा से संबंधित है। यह आवेदन इस योजना में हो रही धांधली को सामने लाने और जॉब कार्ड बनवाने में मददगार साबित हो सकता है।

हम पाठकों से अपेक्षा करते हैं कि वे गांव-देहात में रहने वाले लोगों को भी इस कॉलम के बारे में बताएंगे और दिए गए आवेदन के प्रारूप को ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुंचाएंगे। सरकारी योजनाओं में व्याप्त भ्रष्टाचार से लड़ने की चौथी दुनिया की मुहिम में आपका साथ भी मायने रखता है। यहां हम मनरेगा योजना से जुड़े कुछ सवाल आवेदन के रूप में प्रकाशित कर रहे हैं।

आप इस आवेदन के माध्यम से मनरेगा के तहत बने जॉब कार्ड, मस्टररोल, भुगतान, काम एवं ठेकेदार के बारे में सूचनाएं मांग सकते हैं। चौथी दुनिया आपको इस कॉलम के माध्यम से वह ताक़त दे रहा है, जिससे आप पूछ सकेंगे सही सवाल। एक सही सवाल आपकी ज़िंदगी बदल सकता है। हम आपको हर अंक में बता रहे हैं कि कैसे सूचना अधिकार क़ानून का इस्तेमाल करके आप दिखा सकते हैं घूस को घूंसा। किसी भी तरह की दिक्कत या परेशानी होने पर हम आपके साथ हैं।

 

 

 

आवेदन का प्रारूप


(मनरेगा के तहत जॉब कार्ड, रोजगार एवं बेरोजगारी भत्ता का विवरण)

सेवा में, लोक सूचना अधिकारी (विभाग का नाम)
(विभाग का पता)
विषय: सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत आवेदन

महोदय,
………ब्लॉक के ग्राम……के संबंध में निम्नलिखित सूचनाएं उपलब्ध कराएं:

1. उपरोक्त गांव से एनआरईजीए के तहत जॉब कार्ड बनाने के लिए अब तक कितने आवेदन प्राप्त हुए? इसकी सूची निम्नलिखित विवरणों के साथ उपलब्ध कराएं:

क. आवेदक का नाम व पता।
ख. आवेदन संख्या।
ग. आवेदन की तारीख।
घ. आवेदन पर की गई कार्यवाही का संक्षिप्त विवरण (जॉब कार्ड बना/जॉब कार्ड नहीं बना/विचाराधीन)।
ड. यदि जॉब कार्ड नहीं बना तो उसका कारण बताएं।
च. यदि बना तो किस तारीख को।
2. जिन लोगों को जॉब कार्ड दिया गया है, उनमें से कितने लोगों ने काम के लिए आवेदन किया? उसकी सूची निम्नलिखित सूचनाओं के साथ उपलब्ध कराएं:

क. आवेदक का नाम व पता।
ख. आवेदन करने की तारीख।
ग. दिए गए कार्य का नाम।
घ. कार्य दिए जाने की तारीख।
ड. कार्य के लिए भुगतान की गई राशि व भुगतान की तारीख।
च. रिकॉर्ड रजिस्टर के उस भाग की प्रमाणित प्रति, जहां उनके भुगतान से संबंधित विवरण दर्ज हैं।
छ. यदि काम नहीं दिया गया है तो क्यों?
ज. क्या उन्हें बेरोजगारी भत्ता दिया जा रहा है?

3. उपरोक्त गांव से एनआरईजीए के तहत रोजगार के लिए आवेदन करने वाले जिन आवेदकों को बेरोजगारी भत्ता दिया गया या दिया जा रहा है, उनकी सूची निम्नलिखित सूचनाओं के साथ उपलब्ध कराएं:

क. आवेदक का नाम व पता।
ख. आवेदन करने की तारीख।
ग. बेरोजगारी भत्ता दिए जाने की तारीख।
ड. बतौर बेरोजगारी भत्ता भुगतान की गई राशि व भुगतान की तारीख।
च. रिकॉर्ड रजिस्टर के उस भाग की प्रमाणित प्रति, जहां उनके भुगतान से संबंधित विवरण दर्ज हैं।
मैं आवेदन शुल्क के रूप में……रुपये अलग से जमा कर रहा/रही हूं।

या

मैं बीपीएल कार्डधारक हूं, इसलिए सभी देय शुल्कों से मुक्त हूं। मेरा बीपीएल कार्ड नंबर………है।

यदि मांगी गई सूचना आपके विभाग/कार्यालय से संबंधित न हो तो सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 6 (3) का संज्ञान लेते हुए मेरा आवेदन संबंधित लोक सूचना अधिकारी को पांच दिनों की समयावधि के अंतर्गत हस्तांतरित करें। साथ ही अधिनियम के प्रावधानों के तहत सूचना उपलब्ध कराते समय प्रथम अपील अधिकारी का नाम और पता अवश्य बताएं।

भवदीय

नाम………………
पता………………
फोन नंबर…………

संलग्नक (यदि कुछ हो तो)………

 

 

 

 

 

 

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