आफत में अल्मोड़ा

Submitted by Hindi on Sat, 01/01/2011 - 10:00
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दि संडे पोस्ट

अठारह अगस्त को बागेश्वर जिले के सुमगढ़ में बादल फटने से सरस्वती शिशु मंदिर में जिंदा दफन हुए १८ मासूमों को अभी लोग भूले भी नहीं थे कि एक माह बाद ही प्रकृति फिर प्रलय लेकर आई। इस बार बादल कहर बन कर अल्मोड़ा जिले पर टूटा। यहां भी १८ तारीख लोगों के लिए आफत का दिन बन गई। मूसलाधार बारिश ने जिले में भारी तबाही मचा दी। जिसमें साठ से भी अधिक लोग मौत के मुंह में समा गए जबकि सैकड़ों लोग गंभीर रूप से द्घायल हुए। जिले के अकेले बाड़ी बल्टा गांव में ही अतिवृष्टि और भू-स्खलन से एक दर्जन से अधिक लोगों की मौत हो गई।

एक सप्ताह से हो रही मूसलाधार बारिश ने १८ सितंबर को शनिवार के दिन सबसे ज्यादा तबाही मचाई। देखते ही देखते अल्मोड़ा के देवली, गैराड़ और बाडी-बल्टा गांव में दर्जनों मकान जमींदोज हो गए। इनमें रह रहे ३०से अधिक लोग भू-स्खलन की भेंट चढ़ गए। देवली गांव में बादल फटने से आए सैलाब में एक ही परिवार के तीन भाइयों पर विपदा आई। जिनमें दीवान सिंह लटवाल (४०), पत्नी माया लटवाल (३५), किरन (१४), पूजा (८), ध्नूली (६) और पुत्र पारस (५) वर्ष के शव अगले दिन १९ सितंबर को निकाले गए। जबकि उनके दूसरे भाई की पत्नी पुष्पा देवी (४०) को राहत कर्मियों ने एक बच्ची के साथ बचा लिया। लेकिन बहुत कोशिशों के बाद भी उनकी पुत्री मीनाक्षी (१८), रंजना (१६), छोटू (१२) और तनुजा (१०) को नहीं बचाया जा सका। तीसरे भाई पूरन लटवाल का पुत्र उमेद लटवाल (२५), द्घर के पास ही दीवार में दबने से मर गया। यहां इन तीनों भाइयों के साथ ही कई द्घरों पर बिजली टूटी। जिनमें कई लोगों के मकानों के साथ दर्जनों पशु भी चपेट में आ गए। बचे खुचे लोगों ने भयवश गांव छोड़ दिया है।

इसी तरह पास के ही बाडी-बल्टा गांव में भी १८ सितंबर के ही दिन १३ लोग काल के गाल में समा गए। इस गांव में सबसे ज्यादा जनहानि हुई। गांव में निवास करने वाले अधिकतर लोग मारे गए जिनमें दान सिंह की पत्नी हेमा देवी (४५) के अलावा उनकी पुत्री कुमारी अनीता (२२), रीता (१९), निर्मला (१५) आदि के शव बरामद हुए जबकि दान सिंह के दूसरे भाई मान सिंह के पुत्र चंदन सिंह (२६) की भी मौत हो गई। दोनों भाइयों के पांच सदस्य इस आपदा की भेंट चढ़ गए जबकि ९ लोगों को मलबे में से निकाल लिया गया। मान सिंह और दान सिंह के कई पड़ोसी भी मारे गए। जिनमें चंदन सिंह की पुत्री सुशीला (२६), पत्नी बसंती देवी (६०), पुत्र इन्द्र सिंह (२२) भी जमींदोज हो गए। इसके साथ ही गोविंदी देवी (२६) पत्नी आनंद सिंह, दीपु पुत्री आनंद सिंह और चार माह का पुत्र आदेश भी इस हादसे की भेंट चढ़ गए। वहीं नैनीताल से आए मनोज सिंह का १२ दिन का नवजात शिशु मलबे के ढेर में दब गया।

देवली और बाडी-बल्टा के अलावा पिलखा के चार, जोस्याणा के दो, नौला का एक, असगोली को एक, कफड़ा से एक, सदीसेण (सल्ट) से एक, तिमिल चनौला (भिकियासैंण) से एक और स्योतरा गांव से दो लोग भू-स्खलन और अतिवृष्टि की चपेट में आकर जान गंवा बैठे। काफी अरसे के बाद बरसात से अल्मोड़ा शहर में तबाही का मंजर देखा गया। यहां के बेस अस्पताल परिसर के पीछे की पहाड़ी के साथ ही पाण्डे खोला कीपहाड़ी, खोल्टा क्षेत्र, रानीधारा, गोपालधारा क्षेत्र में जबरदस्त भू-धंसाव हो गया है। जिससे कई मकानों में दरारें आ गई हैं तो सैकड़ों मकान खतरे की जद में हैं। इसके चलते कई लोग अपने द्घरों को छोड़कर सुरक्षित आसरे की तलाश में निकल गए हैं। जीआईसी (राजकीय इंटर कॉलेज) फील्ड धंसने से उसके नीचे के मकानों को खाली करवा दिया गया है। ऐतिहासिक अल्मोड़ा इंटर कॉलेज की इमारत भी पेड़ गिरने और तेज बारिश के बाद पूरी तरह से जीर्ण हो गई है। पाण्डेखोला से सटे विकास भवन का नया जजी परिसर भी इमारतों के समीप की दीवारें ढह जाने से खतरे की जद में है।

भारी बरसात ने क्षेत्र में काफी नुकसान कर दिया है। सोमेश्वर क्षेत्र से सैकड़ों एकड़ उपजाऊ भूमि के कटने और भारी मात्रा में पशुधन के नुकसान का समाचार है। जबकि कोसी नदी में उफान आने से अनेक गांवों का अस्तित्व संकट में है। रामगंगा नदी चौखुटिया और द्वाराहाट को तबाह करने पर तुली है। जिले के लगभग सभी गांवों में कम से कम चार से पांच मकान धंस गये हैं। इधर प्रशासन के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ स्थानीय लोग भी बचाव कार्य में जुटे हुए है। लेकिन वहीं आधी अधूरी तैयारियों के साथ आपदा से निपटने वाले तंत्र की भी पोल खुली है। आपदा प्रभावित क्षेत्रों में दो चार जेसीबी मशीनों, सीमित गैंग मेंटों और बहुत कम कर्मचारियों के बलबूते राहत कार्य पूरे किए जाने की हवाई द्घोषणाएं की जा रही हैं। बताया जाता है कि अगर समय रहते छात्रों, निरंकारी समाज के लोगों स्थानीय सभासदों और नेताओं ने द्घटनास्थल पर जाकर हाथ नहीं बटाया होता तो काफी जान माल की हानि होती। अब प्राकृतिक आपदा के साथ अल्मोड़ा के लोगों को खाद्यान्न संकट से भी गुजरना पड़ रहा है। यहां आटा और आलू तक लोगों को नहीं मिल पा रहा है। सड़के टूटने से रोजमर्रा के इस्तेमाल की चीजें तथा सब्जियां नहीं पहुंचने के कारण यहां आलू अस्सी रुपए किलो तथा टमाटर एक सौ बीस रुपए किलो मिल रहा है। ऐसे में गरीब आदमी के भूखे मरने जैसे हालात हो गए हैं। प्रशासन की तरफ से ऐसे लोगों को खाद्यान्न उपलब्ध कराने की कोई व्यवस्था नहीं दिखती।
 
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