नैनीताल (Nainital lake in Hindi)

Submitted by Hindi on Thu, 01/06/2011 - 13:37
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उत्तराखंड की सर्वोत्तम झील नैनीताल झील है। यह 1,500 मीटर लम्बी, 510 मीटर चौड़ी तथा 30 मीटर गहरी है। यह झील अपने नैसर्गिक सौंदर्य के लिए लाखों पर्यटकों को बार-बार आने के लिए आमन्त्रित करती है। सात पहाड़ियों से घिरी इस झील के संदर्भ में पौराणिक गाथा है। कि इस झील का निर्माण पुलस्य और पुलह ऋषियों द्वारा किया गया था। नैनीताल अथवा नयनताल के बारे में कहा जाता है कि दक्ष प्रजापति द्वारा आयोजित यज्ञ में जब अपने पति शिव का अपमान न सह पाने के कारण सती ने अग्निदाह कर लिया तो क्रोधित शिव ने सती के शव को कंधे पर उठा कर तांडव नृत्य किया। सती के शरीर के 51 टुकड़े जहां-जहां गिरे वहां-वहां एक-एक शक्तिपीठ स्थापित हुआ। इस स्थान पर सती की बायीं आंख गिरी, वहीं नयनताल या नैनीताल स्थित है। नैनीताल सात पहाड़ियों से घिरा है- आयर पात, देव पात, हाड़ीवादी, चीना पीक, आलम, लरिया कांटा और शेर का डांडा। चीना पीक से पूरा नैनीताल दिखाई देता है। यह 8,568 फुट ऊंची है।

सर्वप्रथम इस स्थान के सौंदर्य से सन् 1841 की 18 नवम्बर को शाहजहांपुर के श्री पी. बैरन अभिभूत हुए थे, जो कुमाऊ मंडल में घूमते हुए एकाएक यहां आ पहुंचे थे। उन्होंने वहां पर ‘पिलग्रिम काटेज’ नामक घर बनवाया और इस स्थल की ओर संसार के पर्यटन प्रेमियों का ध्यान आकर्षित किया।

भौगोलिक परिवर्तनों ने नैनीताल के सौंदर्य में द्विगुणित अभिवृद्धि की है। समय-समय पर होने वाले भूस्खलनों में 1866 से 1869 के बीच होने वाले भू-स्खलन नैनीताल के लिए उपयोगी सिद्ध हुए। 16 सितम्बर 1880 में हुआ भू-स्खलन तो नैनीताल के लिए वरदान सिद्ध हुआ, यहां एक विशाल मैदान बन गया जिस पर नैनीताल शहर विकसित हुआ। नैनी झील के निकट नैनादेवी का पावन मंदिर है। एक बार के भू-स्खलन में यह नष्ट हो गया था और इसका पुनर्निर्माण किया गया। मल्ली ताल और तल्ली ताला दोनों छोरों की दूरी पार करने के लिए नौकाओं द्वारा आना-जाना तो सम्भव हो ही जाता है साथ ही नैनी में विहार करने का रोमांचक अनुभव भी प्राप्त होता है। नैनी झील में पालदार नावें बहुत ही आकर्षक लगती है। नैनीताल की यात्रा का प्रमुख आकर्षण नैनी झील ही है।

Hindi Title

नैनीताल


गुगल मैप (Google Map)
जिला शाहजहाँपुर में चीनी का व्यापार करता था। इसी पी. बैरन नाम के अंग्रेज को पर्वतीय अंचल में घूमने का अत्यन्त शौक था। केदारनाथ और बद्रीनाथ की यात्रा करने के बाद यह उत्साही युवक अंग्रेज कुमाऊँ की मखमली धरती की ओर बढ़ता चला गया। एक बार खैरना नाम के स्थान पर यह अंग्रेज युवक अपने मित्र कैप्टन टेलर के साथ ठहरा हुआ था। प्राकृतिक दृश्यों को देखने का इन्हें बहुत शौक था। उन्होंने एक स्थानीय व्यक्ति से जब 'शेर का डाण्डा' इलाके की जानकारी प्राप्त की तो उन्हें बताया गया कि सामने जो पर्वत है
विकिपीडिया से (Meaning from Wikipedia)

नैनीताल झील


नैनीताल झील एक प्राकृतिक झील है। यह झील भारत के उत्तराखंड राज्य के नैनीताल शहर में स्थित है। अपने प्राकृतिक सौन्दर्य के लिए जह विश्व प्रसिद्ध है। समुद्रतल से इसकी ऊंचाई 1,937 मीटर है। सम्पूर्ण झील 1,410 मीटर लम्बी, 445 मीटर चौड़ी, 26 मीटर गहरी है।

इस सुंदर झील में नौकायन का आनंद लेने के लिए लाखों देशी-विदेशी पर्यटक यहां आते हैं। झील के पानी में आसपास के पहाड़ों का प्रतिबिंब दिखाई पड़ता है। रात के समय जब चारों ओर बल्बों की रोशनी होती है तब तो इसकी सुंदरता और भी बढ़ जाती है। झील के उत्‍तरी किनारे को मल्‍लीताल और दक्षिणी किनारे को तल्‍लीताल करते हैं। यहां एक पुल है जहां गांधीजी की प्रतिमा और पोस्‍ट ऑफिस है। यह विश्‍व का एकमात्र पुल है जहां पोस्‍ट ऑफिस है। इसी पुल पर बस स्टेशन, टैक्सी स्टैंड और रेलवे आरक्षण काउंटर भी है। झील के दोनों किनारों पर बहुत सी दुकानें और विक्रय केंद्र हैं जहां बहुत भीड़भाड़ रहती है। नदी के उत्तरी छोर पर नैना देवी मंदिर है।

अन्य स्रोतों से

नैनीताल झील का मनोरम दृश्य





'मेरी दुनिया' ब्लाग से


नैनीताल झील


भारतीय राज्य उत्तराखंड का एक जिला है। मूलतया यह शहर अन्ग्रेजों के जमाने मे पर्वतीय स्थान के रूप में प्रसिद्ध हुआ। यहां नैना देवी का एक प्रसिद्ध मन्दिर है। नगर के बीचोंबीच एक झील भी है जिस की आकृति देवी की आंख यानि “नैन” जैसी है। इसी झील (ताल) के कारण इस स्थान का नाम नैनीताल पडा। नैनीताल आज भारत के प्रसिद्ध हिल स्टेशन में एक है। यहाँ हर साल गर्मियों में पर्यटक प्रकृति का आनंद उठाने आते हैं।

नैनीताल के ताल के दोनों ओर सड़के हैं। ताल का मल्ला भाग मल्लीताल और नीचला भाग तल्लीताल कहलाता है। मल्लीताल में फ्लैट का खुला मैदान है। मल्लीताल के फ्लैट पर शाम होते ही मैदानी क्षेत्रों से आए हुए सैलानी एकत्र हो जाते हैं। यहाँ नित नये खेल - तमाशे होते रहते हैं। संध्या के समय जब सारी नैनीताल नगरी बिजली के प्रकाश में जगमगाने लगती है तो नैनीताल के ताल को देखने में ऐसा लगता है कि मानो सारी नगरी इसी ताल में डूब सी गयी है। संध्या समय तल्लीताल से मल्लीताल को आने वाले सैलानियों का तांता सा लग जाता है। इसी तरह मल्लीताल से तल्लीताल (माल रोड) जाने वाले प्रकृति प्रेमियों का काफिला देखने योग्य होता है।

नैनीताल, पर्यटकों, सैलानियों पदारोहियों और पर्वतारोहियों का चहेता नगर है जिसे देखने प्रतिवर्ष हजारों लोग यहाँ आते हैं। कुछ ऐसे भी यात्री होते हैं जो केवल नैनीताल का 'नैनी देवी' के दर्शन करने और उस देवी का आशीर्वाद प्राप्त करने की अभिलाषा से आते हैं। यह देवी कोई और न होकर स्वयं 'शिव पत्नी' नंदा (पार्वती) हैं। यह तालाब उन्हीं की स्मृति का द्योतक है।

नैनीताल के कुछ चित्र


१। नैनीताल का मनोरम द्रश्य -चिडिया घर से लिया गया चित्र)


२. पंडित गोविन्द बल्लभ पन्त जी की मूर्ति मल्लीताल, माल रोड, नैनीताल।


3. नैनीताल की शांत और सुंदर झील सबके मन को आंदोलित करती है।
यह बोट क्लब का सीन है जो माल रोड के पास है ।

4. यह चित्र मैंने मल्लीताल अपने होटल अंकुर प्लाजा से लिए है।जहाँ से भी देखो शांत ही नजर आती है।

मुझे पन्त जी एक कविता याद आती है।
लो चित्र शलभ सी पंख खोल
उड़ने को है कुसुमित घटी '

नैनीताल की खोज


सन् १८३९ ई. में एक अंग्रेज व्यापारी पी. बैरन था। वह रोजा
संदर्भ
उसको ही 'शेर का डाण्डा' कहते हैं और वहीं पर्वत के पीछे एक सुन्दर ताल भी है। बैरन ने उस व्यक्ति से ताल तक पहुँचने का रास्ता पूछा
बाहरी कड़ियाँ
परन्तु घनघोर जंगल होने के कारण और जंगली पशुओं के डर से वह व्यक्ति तैयार न हुआ। परन्तु

Comments

Submitted by Anonymous (not verified) on Sun, 07/13/2014 - 06:14

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Bakwas site

Submitted by Anonymous (not verified) on Sun, 09/07/2014 - 12:06

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i love this hill station

Submitted by Sandeep kashyap (not verified) on Sun, 04/08/2018 - 18:43

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Beautiful nainital

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