डेवी यानोमामी

Submitted by Hindi on Thu, 02/03/2011 - 15:16
Source
इंडियन सोशल एक्शन फोरम (इंसाफ)

वेनेजुएला की सीमा पर उत्तरी ब्राजील के इलाकों में रहने वाले 16000 यानोमामी मूलवासियों के समुदाय के शामन डेवी कोपेनावा यानोमामी ने जून 2009 में यूरोप का दौरा कर नेताओं और प्रेस से बात की। वह यह सुनिश्चित करना चाहते थे कि दिसम्बर 2009 में होने वाले कोपेनहेगन सम्मेलन की तैयारियों में मूलवासियों की आवाजें भी शामिल हों। उनके साक्षात्कार से कुछ अंश हम नीचे दे रहे हैं:

क्या आपने ब्राजीलियन अमेजन में जलवायु परिवर्तन को महसूस किया है?
अमेजन के जंगलों में रहने वाले हम लोगों ने प्रदूषण से उठता धुंआ देखा है। अब वह हमारी जमीन की ओर आ रहा है। अब बारिश देर से होती है और सूरज भी अजीब तरीके से बर्ताव कर रहा है। दुनिया बीमार हो चुकी है। आकाश के फेफड़े जाम हो गए हैं। जिस जलवायु परिवर्तन के बारे में आप बात कर रहे हैं, वह हम सभी के लिए खतरनाक है। हम जानते हैं कि यह तो हो ही रहा है। हम शामन हैं और इसलिए सूर्य, चंद्रमा, प्रकाश-अंधकार, तथा इस ब्रह्माडं में मौजदू हर चीज की कद्र करते हैं। हमारे शामन जानते हैं कि धरती बदल रही है और यह हम सभी के लिए खतरनाक है। अगर आप लोगों को ऐसे ही मारते गए और तेल, खनिज व लकड़ी पाने के लिए प्रकृति को नष्ट करते गए, तो हमारी धरती बीमार पड़ जाएगी और हम सभी जल, मर या डूब जाएंगे।

आपको क्या लगता है कि बाहरी लोग जंगलों को इतना नुकसान क्यों पहुंचा रहे हैं?
गोरों की जड़ें शहरों में बहुत मजबूत हैं। वह बदल नहीं सकता। वह जमीन के लिए पागल हैं। वह ज्यादा से ज्यादा जमीन चाहते हैं ताकि शहर फैलता रहे। वह सिर्फ जमीन के नीचे और जमीन पर मौजूद चीजों के बारे में सोचता है, जैसे तेल, सोना, खनिज, सड़कें, कारें, रेलगाड़ियां। वह खुश रह ही नहीं सकता। यानोमामी उनसे अलग हैं। हम अपनी धरती, पानी, नदियों, पहाड़ों, चांद, तारों और सूरज की आत्मा के साथ मिलकर सोचते और बोलते हैं।

1992 में यानोमामी की भारी जीत हुई थी, जब ब्राजील की सरकार ने यानामोमी की जमीनों पर कब्जा करने वाले 20 हजार गोल्डपैनरों को खदेड़ दिया था और 9. 4 मिलियन हेक्टेयर जमीन को यानोमामी के लिए सुरक्षित घोषित कर दिया था। आज यानोमामी की क्या स्थिति है?
2002 में राष्ट्रपति लूला ने चुने जाने के बाद यानोमामी या अन्य मूलवासियों के लिए कुछ नहीं किया है। उन्होंने वादा किया था, लेकिन निभाया नहीं। मुझे लगता है कि वह हमें भूल गए हैं। हमारे पीछे 3000 गोल्डपैनर लगे हुए हैं और उन्होंने अब तक कुछ भी नहीं किया है। इन्हें निकाल फेंकने की जिम्मेदारी सरकार की है। हमारे अधिकार हैं। हम जमीन के मालिक हैं। पुलिस को खनन करने वालों को तुरंत निकाल बाहर करना चाहिए।

हम मूलवासियों के लिए, और आप लोगों के लिए भी गोरों की राजनीति बड़ी मुश्किल है। आखिर आपके लिए ही राजनीति ने क्या किया है? आप अपने राजनीतिक दलों, अधिकारियों या सीनेटरों के बारे में आखिर कितना जानते हैं? उनके बारे में तो सिर्फ वे ही जानते हैं और वे नीम-हकीम किस्म के लोग हैं। वे जमीन को कब्जाने के लिए ही राजनीति का इस्तेमाल करते हैं।

क्या आपके और भी दुश्मन हैं?
सोया किसान आ चुके हैं और उन्होंने हमारे पड़ोसियों की जमीनों पर जिंगू राष्ट्रीय उद्यान में हमला शुरू कर दिया है। वहां उन्होंने काफी तबाही मचाई है। जंगल काट डाले हैं। यही वे हर जगह कर रहे हैं, लेकिन अब तक हमारी जमीनों पर उन्होंने सोया रोपने की कोशिश नहीं की है। हम तो उन्हें रोकेंगे। फिलहाल, हमारे दुश्मनों में अब भी विशाल पशुपालन कंपनियां और सोने का खनन करने वाले लोग हैं।

आपकी कोई अन्य समस्या?
हम बड़ी खनन कंपनियों को लेकर चिंतित हैं। गवर्नर, सीनेटर और अधिकारी कांग्रेस में नया खनन कानून पास करवाना चाहते हैं और वे चाहते हैं कि लूला उस पर दस्तखत करें। वे हमारे जंगलों में 60 फीसदी जमीनों पर खनन अधिकार का दावा कर रहे हैं, इसीलिए लूला पर हमारा गुस्सा है। फिलहाल, हमारी सबसे बड़ी समस्या हमारी सेहत है और सरकार बहुत कुछ नहीं कर रही है। सरकार हमारी स्वास्थ्य सुविधा में सुधार नहीं लाना चाहती। तमाम ऐसे भ्रष्ट लोग हैं जो हमारे लिए आने वाले पैसे की चोरी कर रहे हैं। तमाम स्वास्थ्य उपकरण, दवाएं और मेडिकल टीमें शहरों में ही हैं और वे यानोमामी के पास नहीं आते।

विनाश को रोकने के लिए क्या किया जाना चाहिए?
हमें एक गठबंधन बनाना होगा, उन सभी मूलवासियों का जो खनन के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं। इसमें सिर्फ मूलवासी ही नहीं होंगे क्योंकि इससे संगठन कमजोर हो जाएगा। हमें गैर-आदिवासियों के नेताओं से भी बात करनी होगी ताकि हम खनन कंपनियों के खिलाफ लड़ाई के लिए बडी़ बैठकें कर सकें। एकता ही हमें मजबूत बनाएगी। हम लड़ेंगे, लेकिन हथियारों और पैसे के बल पर नहीं, बल्कि प्रकृति की ताकत से।

जलवायु परिवर्तन पर दुनिया के लिए आपका क्या संदेश है?
जलवायु परिवर्तन के बारे में तो वैश्विक वार्ता शुरू हाने वाली है। गैर-आदिवासियों की गलती यह है कि वे हमारी जमीन से सम्पदाएं निकालते हैं। वे ऐसा नहीं कर सकते। क्यों? क्योंकि हमारी जमीन पावन है। आप इसे नष्ट नहीं कर सकते क्योंकि हमारे यानोमामी जंगल इस दुनिया के फफेडे़ हैं। दुनिया की सरकारों के लिए जरूरी है कि वे हमें सुनें, हम मूलवासियों को जो हजारों सालों से इस धरती पर रहते आए हैं। हमें इस दुनिया की तब मदद करनी होगी जब वह दिक्कत में हो जब बारिश न हो रही हो या फिर तब जब बहुत तेज बिजली कड़के और पानी बरसे। शामन देवता जानते हैं कि इस दुनिया की मदद कैसे करनी है? उन्होंने न सिर्फ यानोमामी लोगों के लिए, बल्कि पूरी दुनिया के लिए प्रकृति को लंबे समय तक बचाया है। हर कोई चाहे वह नेता हो या फिर संयुक्त राष्ट्र, उसे सुनना पड़ेगा और धरती का सम्मान करते हुए उसके नाश को रोकना पड़ेगा।
 
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