काली गंगा पर एक गीत

Submitted by admin on Tue, 02/08/2011 - 13:04

पिथौरागढ़ की काली नदी पर बना गोपाल बाबू गोस्वामी का एक बहुत ही पुराना गाना है काली गंगा को कालो पाणी प्रस्तुत है वही गाना। यह गाना हमारे पास दो रूपों में है। दोनों रूपों में गीत के बोल समान हैं लेकिन गीत की गति अलग अलग है। आपके सामने दोनों रूप प्रस्तुत हैं।

भावार्थ : इस चांदनी रात में काली गंगा का पानी उतरता-उतराता कैसा काला काला, मटमैला सा लग रहा है। तेरी नाक में यह फुल्ली (Nosering) कितनी सुन्दर लग रही है, मेरा मन कर रहा है कि मैं इस चांदनी रात में पंछी बन कर उड़ जाऊं। एक मछ्ली ने रेतीली मिट्टी में देखो कैसे छलांग लगायी है, तुम्हारे बिना मेरा मन कितना उदास हो गया है। आकाश में देखो चाँदनी कैसे मन्द मन्द मुस्कुरा रही है लेकिन मेरा विरही मन तुझसे मिलने की आस में और उदास हो गया है। इस चांदनी रात में काली गंगा का पानी उतरता-उतराता कैसा काला काला, मटमैला लग रहा है।

गीत के बोल देवनागिरी में
काली गंगा को कालो पाणी, काली गंगा को कालो पाणी
कैलो कैलो, छैलो छैलो, कैलो कैलो, छैलो छैलो
यो जुन्याली रात मे, हाय जुन्याली रात में, यो जुन्याली रात मे, हाय जुन्याली रात में
काली गंगा को कालो पाणी, काली गंगा को कालो पाणी
कैलो कैलो, छैलो छैलो, कैलो कैलो, छैलो छैलो

 

नाख में कि फूलि सुआ, नाख में कि फूली, नाख में कि फूलि सुआ, नाख में कि फूली
पंछी बनूं उड़योनो रात यो जुन्याली,पंछे बनूं उड़योनो रात यो जुन्याली
काली गंगा को कालो पाणी,यो काली गंगा को कालो पाणी
कैलो कैलो, छैलो छैलो, कैलो कैलो, छैलो छैलो
यो जुन्याली रात मे, यो जुन्याली रात में , हाय जुन्याली रात मे, यो जुन्याली रात में
काली गंगा को कालो पाणी, ओ काली गंगा को कालो पाणी
कैलो कैलो, छैलो छैलो, कैलो कैलो, छैलो छैलो

माछी ले फटक मारी बलुवा माटी मा, माछी ले फटक मारी बलुवा माटी मा !
तुम बिना निश्वासी गयूं हौसिया घाटयूं (घांटी) मा, तुम बिना निश्वासी गयूं हौसिया घाटयूं (घांटी) मा !!
काली गंगा को कालो पाणी,यो काली गंगा को कालो पाणी
कैलो कैलो, छैलो छैलो, कैलो कैलो, छैलो छैलो
यो जुन्याली रात मे, हाय जुन्याली रात में , यो जुन्याली रात मे, यो जुन्याली रात में
काली गंगा को कालो पाणी,यो काली गंगा को कालो पाणी
कैलो कैलो, छैलो छैलो, कैलो कैलो, छैलो छैलो

मुलमुल हसी रे सुवा आगासै (आकासै) की जून,मुलमुल हसी रे सुवा आगासै (आकासै) की जून ।
आस में निश्वासी गो छो यो विरही मना, आस में निश्वासी गो छो यो विरही मना
काली गंगा को कालो पाणी,यो काली गंगा को कालो पाणी
कैलो कैलो, छैलो छैलो, कैलो कैलो, छैलो छैलो
हाय जुन्याली रात मे, यो जुन्याली रात में , हाय जुन्याली रात मे, यो जुन्याली रात में
काली गंगा को कालो पाणी,यो काली गंगा को कालो पाणी
कैलो कैलो, छैलो छैलो, कैलो कैलो, छैलो छैलो

 


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