सूरज की रोशनी दूर करेगी पानी की किल्लत

Submitted by Hindi on Thu, 02/10/2011 - 15:10
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बिज़नेस भास्कर
अल्ट्रावायलेट किरणों का इस्तेमाल पानी को साफ करने के लिए वाटर-ट्रीटमेंट प्लांट्स में लंबे समय से किया जा रहा है। ऐसे में जब तक कि पानी इतना साफ न हो जाए कि वह अल्ट्रावायलेट किरणों को अवशोषित कर सके पानी को लैंप के सामने रखने से वायरस का डीएनए, बैक्टीरिया नष्ट हो जाते हैं। अगर पानी को साफ किए बिना पी लिया जाए तो पानी मे मौजूद वायरस और बैक्टीरिया के कारण बीमारियां होने की संभावना काफी अधिक रहतीं हैं।

सूर्य की रोशनी में मौजूद अल्ट्रा वायलेट किरणों का इस्तेमाल भी इस तरह से किया जा सकता है। पानी को साफ करने का है कि पानी को प्लास्टिक की बोतल में रखा कर बोतल को सूरज की रोशनी में छह घंटे तक रखा जाए। अब एक सौर ऊर्जा कंपनी काको सहित जर्मन कंपनियों के एक समूह ने पानी को साफ करने की एक बेहतर तकनीक ईजाद की है। इन कंपनियों ने एक इंडस्ट्रलियल स्केल सोलर-ड्रिवेन प्योरीफिकेशन सिस्टम डेवलप किया है जो न सिर्फ पानी में पाए जाने वाले जीवाणुओं को नष्ट करता है बल्कि रासायनिक प्रदूषण का भी सफाया करता है।

इन कंपनियों ने पानी को साफ करने वाली अपनी तरह की पहली डिवाइस का प्रदर्शन लैंपोल्डसुएन में जर्मन एयरोस्पेस सेंटर में किया है। डेवलपर्स के समूह का यह संगठन पानी को इस तरह से साफ करना चाहता है जैसे कि पानी से प्रयोगात्मक इंजन को ठंडा किया जाता है। कूलिंग वाटर राकेट फ्युल और सब्सटेंसेज से युक्त होते हैं। शोधकर्ताओं ने अल्ट्रवायलेट किरणों से पानी को साफ करने की प्रभावी तकनीक विकसित करने के लिए लाइट एक्टीवेटेड कैटैल्स्टि शामिल किया है।

शोधकर्ताओं ने अल्ट्रावायलेट किरणों से पानी को साफ करने की दो विधियां विकसित की हैं। एक अत्याधिक प्रदूषित पानी को साफ करने के लिए दूसरी कम प्रदूषित पानी को साफ करने के लिए। औद्योगिक कचरे जैसे लैपोसुएशन से युक्त पानी को साफ करने के लिए शोधकर्ताओं ने कैटेल्स्टि के रूप में आयरन सल्फेट का इस्तेमाल करने के साथ उसमें थोड़ा सा हाइड्रोजन पैराइऑक्साइड और सल्फ्युरिक एसिड मिलाया। इसके बाद पानी को 49 मीटर लंबे सोलर रिएक्टर में पारदर्शी शीशे की टच्यूब में प्रवाहित कराया गया।

अल्ट्रावायलेट किरणों द्वारा संचालित इस जलिट प्रक्रिया के दौरान आयरन हाइड्रोजन पैराआक्साइड और पानी के साथ पॉवरफुल आक्सीडाइजिंग एजेंट्स उत्पन्न करने के लिए क्रिया करता है। इस क्रिया के दौरान पानी में मौजूद गंदगी के कण नष्ट हो जाते हैं। एक बार पानी साफ हो जाता है, पानी की अम्लता कम हो जाती है जिसके कारण आइरल इनसल्युबल बन जाता है। यह आयरन आक्साइड के रूप में तब्दील जाता है जिसको पुन प्राप्त कर रिसाइकिल करके साफ पानी को नदी में प्रवाहित किया जा सकता है।

कम प्रदूषित पानी को साफ करने के लिए भी समान उपकरण का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि इस विधि में शीशे की ट्यूब पर टाइटेनियम आक्साइड का खोल चढ़ाया जाता है। टाइटेनियम डाईआक्साइड एक सेमी कंडक्टर है। इसका मतलब है कि जब इलेक्ट्रान अपने किस्टल स्ट्रक्चर से मुक्त होते हैं तो पॉजिटिच चार्ज एक होल बन जाता है क्रिस्टल के अंदर गतिशील रहता है। यह होल भी एक पॉवरफुल आक्सीडाइजर होता है।

टाइटेनियम डाईआक्साइड सिस्टम, जिसको अभी विकसित किया जा रहा है पानी को इस हद तक साफ कर सकता है जहां इसे न सिर्फ पानी में प्रवाहित किया जा सकता है बल्कि साफ किया गया पानी पीने के भी योग्य होता है। आयरन सल्फेट सिस्टम एक या दो घंटे में 4,500 लीटर अत्याधिक प्रदूषित पानी साफ करने में सक्षम है। सूरज की रोशनी तेज होने पर यह और अधिक प्रभावी नतीजे दे सकता है। काको रेवोक्स ब्रांड के तहत इस प्रोसेसे का उत्पादन करना शुरू कर दिया है और आने वाले दिनों में उम्मीद है कि यह पानी को साफ करने का सबसे लोकप्रिय तरीका बन जाएगा।

जर्मन एयरोस्पेस सेंटर का कहना है कि रेवोक्स पानी से कुछ ऐसे जटिल प्रदूषण को भी मिटाने में भी सक्षम है जिनको अभी नहीं मिटाया जा सकता। काको का कहना है कि वह फोटोवोल्टाइक सेल्स के साथ सिस्टम की आपूर्ति करेगी जिससे न सिफ इस सिस्टम को ऑपरेट करना सस्ता पड़ेगा बल्कि यह सूर्य की रोशनी से चलने वाली ग्रीन क्लीनिंग मशीन होगी।

औद्योगीकरण के दौर में औद्योगिक संयंत्रों से बड़े पैमाने पर प्रदूषित पानी निकलता है जो कि नालों के माध्यम से नदियों में बहाया जाता है। आम तौर पर इस औद्योगिक कचरे को जलशोधन संयंत्र से गुजार कर नदियों में बहाया जाता है लेकिन जलशोधन संयंत्र में गुजारे जाने के बावजूद इस पानी में ऐसे तत्व पाए जाते हैं जिसके कारण नदी का पानी भी प्रदूषित हो जाता है।

अपने ही देश में औद्योगिक शहर कानपुर में गंगा की क्या स्थिति बेहद खराब है। देश के अन्य भागों में कल कल बहने वाली गंगा नदी कानपुर में औद्योगिक कचरे के कारण एक नाले का रूप ले चुकी है। लखनऊ और दिल्ली में यमुना नदी का तो अस्तित्व ही खतरे में पड़ गया है। सूरज की रोशनी से पानी साफ करने की तकनीक को बढ़ावा दिया जाए तो इससे गंगा और यमुना जैसी नदियों के पानी को भी साफ किया जा सकता है।

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